नई दिल्ली, एजेंसी। देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश जारी है। राजस्थान के जयपुर में रविवार सुबह 6 से 9 बजे तक लगातार बारिश हुई, जिससे निचले इलाकों में सड़कों पर 3-4 फीट तक पानी भर गया। घरों में भी पानी घुस गया। वहीं, चूरू में भी कॉलोनियां डूब गईं।
मध्य प्रदेश के डिंडौरी में शनिवार रात 9 बजे से रविवार सुबह 6 बजे तक 6 इंच बारिश हुई। पानी नर्मदा नदी पर बने पुल के ऊपर से बह रहा है।
दिल्ली में पिछले 8 दिनों के दौरान महीने भर की बारिश हो गई। दिल्ली में अगस्त के शुरुआती 8 दिनों में 230.1 मिमी बारिश हो चुकी है, जो महीने की सामान्य औसत बारिश 226.8 मिमी से ज्यादा है।
अगस्त में 2024 के बाद यह सबसे ज्यादा बारिश है। शनिवार को कालिंदी कुंज बॉर्डर, ITO, प्रेस एन्क्लेव मार्ग सहित कई सड़कों पर ट्रैफिक जाम रहा।
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देशभर से मौसम की तस्वीरें
MP के डिंडौरी में रविवार को नर्मदा नदी पर बने पुल के ऊपर पानी आ गया।
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में बारिश के बाद कच्चा रास्ता पानी में डूब गया। बच्चे सिर पर स्कूल बैग रखकर पानी के बीच से रास्ता पार करते हुए स्कूल पहुंचे।
यूपी के गाजियाबाद के लोनी इलाके में सड़कों पर पानी भर गया। बच्चे मस्ती करते नजर आए।
राजस्थान के कई जिलों में बीते कई दिनों से लगातार बारिश हो रही है। चूरू शहर की कॉलोनियों में पानी भर गया है।
नई दिल्ली, एजेंसी। देश के पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार अपने इस्तीफे पर बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘जेन-जी हमारे ही बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें भटकाने की कोशिश की। मैंने पीएम मोदी से बातचीत करने के बाद ही पद छोड़ा।’
उन्होंने कहा, ‘जेन-जी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। देश के युवाओं के संकल्प और आकांक्षाओं के सामने शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारियां बहुत छोटी हैं। इसलिए मेरे लिए पद जरूरी नहीं था।’
प्रधान ने ये बात शनिवार को भुवनेश्वर की GM यूनिवर्सिटी में कही। यहां उन्होंने छात्रों और शिक्षकों को संबोधित किया।
इस कार्यक्रम के दौरान बीजू जनता दल के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। NEET पेपर लीक पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के 35 दिन बाद प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।
प्रधान ने नारेबाजी पर कहा- मैं किसान का बेटा हूं; स्पीच की 6 बातें
प्रधान ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘ मैं BJD कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन और उनकी नारेबाजी से परेशान नहीं हूं। मैं किसान का बेटा हूं। आप मुझे वापस जाने के लिए कहेंगे, तब भी मैं वापस आऊंगा।’
‘मैंने ओडिशा के 4.5 करोड़ लोगों का सिर कभी शर्म से नहीं झुकने दिया। जब तक मैं जिंदा हूं, तब तक मुझ पर जताए गए भरोसे को नहीं तोड़ूंगा और ऐसा कोई काम नहीं करूंगा, जिससे ओडिशा के गौरव और स्वाभिमान को ठेस पहुंचे।’
‘जेन जी की जिद के कारण मुझे परेशानी नहीं हुई। नई पीढ़ी का विरोध करने के बजाय उसे समझना जरूरी है।’
‘भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। पिछले 10 साल में 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं। उनके सपने हैं। वे भारत को विश्व गुरु बनाएंगे।’
‘इतिहास में युवाओं ने ही बदलाव का नेतृत्व किया और बलिदान दिया है। वे अपने समय के जेन जी थे।’
‘मैंने प्रधानमंत्री से मुलाकात की और प्रदर्शनकारियों की मांगें मानने के लिए उनकी मंजूरी मांगी। पीएम सहमत हुए और बाद में युवाओं से बातचीत भी की। फिर मैंने इस्तीफा दिया।’
मोदी सरकार में अब तक 4 शिक्षा मंत्री, जोशी को अतिरिक्त प्रभार
2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अब तक केंद्र में 4 पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री रहे हैं। इनमें स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल और धर्मेंद्र प्रधान शामिल हैं। प्रह्लाद जोशी को प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
कभी पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर उतरे थे धर्मेंद्र
1997 में पेपर लीक प्रदर्शन में धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल हुए थे। उनको बुरी तरह पीटा गया था। चेहरे पर चोटें भी आईं थीं। -फोटो क्रेडिट:TNIE
29 साल पहले पेपर लीक मुद्दे पर धर्मेन्द्र प्रधान ने भी विरोध प्रदर्शन किया था। प्रधान के सहयोगी रहे प्रशांत राउत ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 1997 में ओडिशा में एक पेपर लीक हुआ था, तब प्रधान ने प्रदर्शन किया था। इसमें करीब 1,500 छात्र शामिल हुए।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया था। धर्मेंद्र प्रधान को बुरी तरह पीटा गया था। उनके शरीर में कई जगह चोटें आईं और फ्रैक्चर भी हुआ था।
रांची, एजेंसी। झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा में धांधली को लेकर छात्रों का आंदोलन आज 16वें दिन भी जारी है। सरकार और छात्रों के बीच तीसरे दौर की बातचीत चल रही है। बैठक के दौरान अनशन पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका सिंह पांडेय, चमरा लिंडा और संजय सिंह यादव ने वीडियो कॉल के जरिए बात की।
मंत्रियों ने देवेंद्र से कहा कि उनकी मांगें पूरी कर दी जाएंगी और वे भूख हड़ताल खत्म कर दें। वहीं, देवेंद्र ने सभी मंत्रियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि जब तक मांगें लिखित रूप में पूरी नहीं होतीं, तब तक भूख हड़ताल जारी रहेगी।
इधर, आदिवासी दिवस कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि जिस मुद्दे को लेकर हमारे नौजवान अपने अधिकार के लिए आंदोलन कर रहे हैं, वे हमारी सरकार की गतिविधियों की वजह से ही हिम्मत जुटा पाए हैं।
उन्होंने कहा, “छात्र आंदोलन करें और अपने हक-अधिकार मांगें, क्योंकि हमने चोरी पकड़ ली है। नौजवानों को न्याय भी मिलेगा और जिन्होंने गड़बड़ी की है, उन्हें कठोर से कठोर दंड भी दिया जाएगा।”
छात्रों के आंदोलन से जुड़ी फोटोज
रांची में छात्रों के आंदोलन का आज 16वां दिन है। जयपाल सिंह स्टेडियम में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं।
शहीद निर्मल महतो की शहादत दिवस पर शाम में छात्रों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टटेडियम से अलबर्ट एक्का चौक तक फ्लैश लाइट मार्च निकाला।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने शनिवार को छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से बातचीत की।
14वींJPSC रद्द करने की मांग को लेकर 6 छात्र भूख हड़ताल पर हैं।
रांची प्रशासन ने धरनास्थल पर कैमरे लगा दिए हैं।
दो ग्रुप से सरकार कर रही बातचीत
लोकसभा का चुनाव लड़ चुके देवेंद्रनाथ महतो और छात्र गुट, दोनों ग्रुप से सरकार बातचीत हो रही है। 6 लोगों की टीम सरकार से बात कर रही है।अब तक हुई शुक्रवार और शनिवार की दो राउंड की बातचीत बेनतीजा रही थी।
2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत रविवार सुबह 3 बजे बिगड़ गई। डॉक्टरों की देखरेख में इलाज चल रहा है। JLKM विधायक जयराम महतो छात्रों के समर्थन में आज रविवार को एक दिन का उपवास कर रहे हैं।
विधायक बोले- सरकार जानती है, दोषी कौन हैं
एक दिन के अनशन पर बैठे विधायक जयराम महतो ने कहा, ‘विधानसभा सदस्य होने के नाते मुझे लगता है कि मेरी भागीदारी और ये भूख हड़ताल कम से कम 1% अतिरिक्त दबाव तो बना ही सकती है। इस मामले की CBI जांच होनी चाहिए।’
आगे कहा, ‘मुझे लगता है कि सरकार को अच्छी तरह पता है कि दोषी कौन हैं। ये कोई छोटा-मोटा मामला नहीं है। लाखों रुपए में सीटें बेची जा रही हैं। ये असंभव है कि कोई मामूली अधिकारी या सामान्य व्यक्ति अकेले इतनी बड़ी रकम पचा सके। इसमें शक्तिशाली लोग शामिल हैं और इस बात का डर बना हुआ है कि पर्दे के पीछे से वे बेनकाब न हो जाएं।’
अनशनकारियों का वजन घटा हैः डॉक्टर
डॉक्टर एपी सिन्हा के नेतृत्व में रांची सदर अस्पताल की मेडिकल टीम ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे जेपीएससी-जेएसएससी (JPSC-JSSC) अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य की जांच की।
डॉ. एपी सिन्हा ने बताया कि छात्रों को अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी गई, लेकिन उन्होंने अभी अस्पताल जाने से इनकार कर दिया है। इसके चलते हमने मौके पर ही जरूरी ट्रीटमेंट किया है।
सुप्रीम कोर्ट में PIL दर्ज
JPSC-JSSC परीक्षा में गड़बड़ी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। वकील सत्यम सिंह के मुताबिक, यह याचिका राजनीतिक नेता हरिशरण देवगन ने दायर की है। उन्होंने अपनी याचिका में चार मांगें पूरी करने की अपील की है।
वहीं, सरकार ने छात्रों को सुझाव देने के लिए Email ID- Jpsc.jssc.feedback@gmail.com और फीडबैक नंबर जारी किया है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि हम छात्रों के विभिन्न समूहों, स्टेकहोल्डर से मिलेंगे। तमाम सुझावों के बाद फैसला लिया जाएगा।
नई दिल्ली, एजेंसी। अगले साल 7 राज्यों- उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर और गोवा में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावों में जेन-जी यानी 18 से 29 साल के मतदाता अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं। पहली, जुलाई में दिल्ली में हुआ जेन-जी आंदोलन, जिसने युवाओं के राजनीतिक रुझान को लेकर नई बहस छेड़ी। दूसरी, बिहार के बांकीपुर और मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव के चौंकाने वाले नतीजे, जिनसे युवाओं की चुनावी भूमिका पर चर्चा तेज हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, चुनावी समीकरण में महिला, पिछड़ा, किसान और दलित जैसे वर्गों के साथ अब जेन-जी भी एक अहम वोटर ग्रुप बनता जा रहा है। इन 7 चुनावी राज्यों में करीब 22% मतदाता 18 से 29 साल की उम्र के हैं। ऐसे में युवा वोट किसी भी पार्टी के चुनावी समीकरण को बदल सकता है।
7 राज्यों के पिछले चुनाव में 257 सीटों पर 5% वोट मार्जिन रहा
चुनाव वाले 7 राज्यों में अगर पिछले विधानसभा चुनाव के आंकड़े देखें तो कुल 940 सीटों में 257 सीटें (27%) ऐसी थीं, जहां जीत का अंतर 5% या उससे कम था।
उत्तर प्रदेश की 403 में से 131 सीटें ऐसी थीं, जहां जीत का मार्जिन 5% से कम था। गुजरात की 182 में से 27, पंजाब की 117 में से 24, उत्तराखंड की 70 में से 15 और हिमाचल की 68 में से 14 सीटों पर भी वोट मार्जिन 5% से कम था।
इस आधार पर कह सकते हैं कि अगर 22% जेन-जी वोटर्स में से 5% भी एकजुट होकर किसी पार्टी के पाले में चले गए तो इन राज्यों में सियासी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
यही वजह है कि राजनीतिक दल अब अपनी पूरी रणनीति जेन-जी वोटर्स के इर्द-गिर्द बुनने में लग गए हैं। भाजपा, कांग्रेस और सपा ने इसकी मुहिम शुरू कर दी है।
जाति-धर्म के समीकरण बिगाड़ सकते हैं युवाओं का नया वर्ग
देश की सियासत में लंबे समय से चले आ रहे जाति और धर्म आधारित चुनावी समीकरणों को युवा वोटर चुनौती दे सकते हैं। इसकी वजह युवाओं का एक नया और मुखर वर्ग बनकर उभरना है।
अगले चुनावों में अभी 6-7 महीने का वक्त है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि तब तक यह युवा सेंटिमेंट कितना मजबूत रहता है। अगर यह बरकरार रहा या और बढ़ा, तो राजनीतिक दलों को आने वाले हफ्तों में अपनी रणनीति में पांच बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।
राजनीतिक पार्टियां पांच बदलाव करने पर मजबूर
1. युवाओं पर फोकस्ड राजनीति शुरू होगी: एक्सपर्ट के मुताबिक पहले घोषणापत्र में युवाओं के सिर्फ मुद्दे होते थे, पर अब रोजगार व स्किल डेवलपमेंट जैसे विषय सीधे भाषणों में होंगे। दलों को सिर्फ बेरोजगारों को भत्ता देने के बजाय यह समझाना होगा कि वे रोजगार और कौशल विकास कैसे बढ़ाएंगे। जो दल रोजगार, शिक्षा, डिजिटल इकोसिस्टम और स्किल डेवलपमेंट के मुद्दे उठाएगा, युवा उसी के साथ जाएंगे।
2. जाति-धर्म समीकरण: अगर यही माहौल रहा, तो जेन-जी के मुद्दों के कारण जातिगत और धार्मिक समीकरण काफी हद तक बिखर जाएंगे। युवा भी अब तक जाति-धर्म के आधार पर बंटे हुए थे। अब बदलाव दिख रहा है। चुनाव में जाति फैक्टर थोड़ा-बहुत तो रहेगा ही, लेकिन उम्मीदवारों के चयन और प्रतिनिधित्व में उसका असर साफ दिखेगा। पार्टियां सेल्फ-मेड युवाओं को अधिक टिकट देंगी, जिससे जेन-जी को चुनावी मैदान में बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सके।
3. महिलाओं जैसा बदलाव: जैसे महिलाओं ने जातिगत समीकरण तोड़कर एनडीए को वोट दिए, युवा भी किसी एक तरफ जा सकते हैं।
4. मुफ्त योजनाओं से दूरी: युवाओं को मुफ्त की रेवड़ी या लुभावनी योजनाएं नहीं चाहिए, बल्कि वह दलों से ठोस समाधान चाहता है।
5. व्यावहारिक वादे: राजनीतिक पार्टियां आगामी चुनावों में ऐसे व्यावहारिक वादे करेंगी, जिन्हें धरातल पर उतारा जा सके।
भाजपा: पीएम मोदी समेत सभी नेता इंस्टाग्राम पर आने लगे
पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एनडीए सांसदों की ‘मंगल मिलन’ बैठक पूरी तरह युवाओं पर केंद्रित थी, जिसमें रोजगार को लेकर प्रेजेंटेशन दिया गया। पार्टी के मोर्चों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जेन-जी से जुड़े मुद्दों को संवेदनशीलता के साथ सुनें, उनका समाधान करें और इस पीढ़ी के साथ लगातार संपर्क बढ़ाएं।
आरएसएस: भागवत का जेन-जी प्रोग्राम
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को जेन-जी व जेन-अल्फा के साथ प्रोग्राम किया। संघ ने एप के जरिए हर महीने 10 हजार नए युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों, किशोर गण और तरुण गण शाखाओं के माध्यम से जेन-जी की सहभागिता पर विशेष ध्यान दे रहा है।
एबीवीपी: 80 लाख सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा
80 लाख सदस्य बनाने के लिए स्कूल-कॉलेज से निकलकर आगे कोचिंग सेंटर्स और क्लबों तक पहुंच रहा है। करियर गाइडेंस केंद्र खोलेगा।
कांग्रेस: आंदोलनकारियों को वकील दिलवाएंगे
प्रियंका गांधी वाड्रा की निगरानी में कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवानी दिल्ली के आंदोलनकारी युवाओं के संपर्क में हैं। 150 वकीलों का नेटवर्क बनाया गया है। छोटे वीडियो, पीपीटी, पॉडकास्ट और ‘छात्रों की गूंज’ जैसे संवाद कार्यक्रम होंगे। एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस ने भी कई कार्यक्रम शुरू किए।
सपा: डिंपल यादव को जिम्मा सौंपा गया
सांसद डिंपल यादव जिम्मेदारी संभालेंगी। लगातार संवाद, कैंपस में कार्यक्रम। युवजन सभा और समाजवादी छात्र सभा के जरिए अभियान चलाएंगी।