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छत्तीसगढ़

जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव का रंगारंग समापन : अतिथियों ने जाज्वल्या 2026 स्मारिका का किया विमोचन

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आधुनिक तकनीक और लोक संस्कृति के संगम से विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समा : दिलीप षड़ंगी सहित कई कलाकारों ने घंटों तक दर्शकों का किया मनोरंजन
कौशल विकास तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरू खुशवंत साहेब के मुख्य आतिथ्य में तीन दिवसीय जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव एवं एग्रीटेक कृषि मेला का हुआ समापन
एग्रीटेक कृषि मेला 2026 से आत्मनिर्भरता और तकनीकी समृद्धि की नई राह खुलेगी – गुरु खुशवंत साहेब
जांजगीर-चांपा।
जिले में जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव एवं एग्रीटेक कृषि मेला 2026 का आयोजन 11 से 13 फरवरी तक जिले के हाईस्कूल मैदान जांजगीर एवं कृषि विज्ञान केन्द्र जर्वे, जांजगीर में आयोजित किया गया। शुक्रवार को शासकीय हाईस्कूल मैदान में कौशल विकास तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरू खुशवंत साहेब के मुख्य आतिथ्य में तीन दिवसीय जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव एवं एग्रीटेक कृषि मेला का समापन किया गया। इस अवसर पर जाज्वल्या 2026 स्मारिका का विमोचन किया गया। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देने वाले स्कूली छात्र-छात्राओं व स्थानीय कलाकारों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पंथी नृत्य एवं मल्लखंभ का भी आयोजन किया गया है।

इस अवसर पर जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप, पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, अध्यक्ष खनिज विकास निगम सौरभ सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष इंजी. सत्यलता आनंद मिरी, नगर पालिका जांजगीर अध्यक्ष श्रीमती रेखा देवा गढ़ेवाल, पूर्व सांसद श्रीमती कमला देवी पाटले, पूर्व सांसद गुहाराम अजगल्ले, पूर्व विधायक चुन्नीलाल साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष गगन जयपुरिया, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती उमा राजेंद्र राठौर, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती प्रियंका सिंह, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती संतोषी, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती प्रीति अजय दिव्य, जिला पंचायत सदस्य राजकुमार साहू, जिला पंचायत सदस्य लोकेश राठौर जिला पंचायत सदस्य श्रीमती मोहन कुमारी, नगर पालिका उपाध्यक्ष मोहन यादव, जनपद पंचायत अध्यक्ष नवागढ़ श्रीमती कांता कश्यप, गुलाब चंदेल, अमर सुल्तानिया, इंजी रवि पाण्डेय, आनंद मिरी , श्रीमती नंदनी राजवाड़े, पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह, देवेश सिंह, हितेश यादव, जिला पंचायत सदस्य, नगर पालिका पार्षद, जनप्रतिनिधि सहित कलेक्टर जन्मेजय महोबे, पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय, जिला पंचायत सीईओ गोकुल रावटे, अपर कलेक्टर ज्ञानेन्द्र सिंह ठाकुर सहित समारोह में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, किसान एवं आमजन उपस्थित रहे।

जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव एवं एग्रीटेक कृषि मेला 2026 के अवसर पर समापन समारोह को संबोधित करते कौशल विकास तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरू खुशवंत साहेब ने कहा कि एग्रीटेक कृषि मेला 2026 में आकर उन्हें गर्व की अनुभूति हो रही है। उन्होंने कहा कि जांजगीर-चांपा कृषि की समृद्ध धरती है, जहां संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह मेला आत्मीयता और नवाचार का केंद्र बना है, जहां कृषि तकनीक, ड्रोन तकनीक और आधुनिक उपकरणों के माध्यम से भविष्य की नई पहचान तैयार हो रही है। उन्होंने कहा कि यहां से प्राप्त जानकारी और नई तकनीकों के उपयोग से किसानों की आय में निश्चित रूप से वृद्धि होगी तथा युवाओं को एग्री-उद्यमी बनने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जांजगीर-चांपा के कृषक कृषि एवं तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़कर आत्मनिर्भर बनेंगे।

गुरू खुशवंत साहेब ने कहा कि समाज का कोई भी वर्ग मुख्यधारा से पीछे न रहे, यह हमारा संकल्प है। कौशल विकास और आर्थिक अवसरों के माध्यम से सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में बैठे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि लोक कला और संस्कृति हमारी पहचान है। हमें आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए अपनी समृद्ध परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लेना चाहिए। जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव एवं एग्रीटेक कृषि मेला 2026 का सफल आयोजन प्रदेश की प्रगति का प्रतीक है।

उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में किसानों को समृद्ध और उन्नत बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। धान के समर्थन मूल्य से लेकर नई कृषि नीतियों तक, सरकार किसानों के हित में कार्य कर रही है। साथ ही छत्तीसगढ़ी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी निरंतर प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अत्यंत आवश्यक हो गया है। युवाओं को एआई और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से हुनरमंद बनाना समय की मांग है। उन्होंने जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव एवं एग्रीटेक कृषि मेला 2026 के सफल आयोजन के लिए सभी आयोजकों एवं प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प दोहराया।

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कोरबा

05 जून पर्यावरण दिवस: छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेण्डरी स्कूल छत्तीसगढ़ पर्यावरण रत्न सम्मान से होगी सम्मानित

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बिलासपुर/पाली। पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति बिलासपुर, छत्तीसगढ़ी राजभाषा परिषद, वन विभाग एवं छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में 05 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस पर सरस्वती शिशु मंदिर सभागार तिलक भवन बिलासपुर में पर्यावरण सुरक्षा एवं संवर्धन विषय पर प्रतियोगिताएं, कार्यशाला, काव्य गोष्ठी, नृत्य, गीत-संगीत, फैंसी ड्रेस, बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता सहित पर्यावरण क्षेत्र में अह्म भूमिका निभाने वाली प्रतिभाओं एवं संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के मुख्य आतिथ्य में यह समारोह सम्पन्न होगा, जिसकी अध्यक्षता विनय पाठक करेंगे।इनके अलावा कई शिक्षाविद, पर्यावरणविद कार्यक्रम का गौरव बढ़ाएंगे। आईएफएस एस एस डी बड़गैया, समाजसेवी शैलेन्द्र सिंह कछवाहा, वरिष्ठ साहित्यकार विष्णु कुमार तिवारी, आईएफएस नीरज जी, डॉ. अभिलाषा बेहार, आईएसएस रमेशचंद्र श्रीवास्तव, समाजसेवी राजीव नयन शर्मा, क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण अधिकारी श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव, पर्यावरणविद हेमंत कुमार गौर सहित अन्य विभूतियां उपस्थित रहेंगी।

इस सम्मान समारोह में पाली स्थित छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेण्डरी स्कूल को भी छत्तीसगढ़ पर्यावरण रत्न सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। विद्यालय के डायरेक्टर डॉ. गजेन्द्र तिवारी ने बताया कि विद्यालय परिसर को स्वच्छ, सुंदर एवं हरितिमा बनाने के साथ-साथ जल संरक्षण और वर्षा जलसंचयन, प्लास्टिक मुक्त अभियान एवं बच्चों द्वारा पर्यावरण जागरूकता रैलियों के माध्यम से समाज को पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश देना एवं पौध रोपण जैसे विविध कार्यक्रम के लिए छत्तीसगढ़ पर्यावरण रत्न सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।
डॉ. गजेन्द्र तिवारी ने बताया कि यह विद्यालय के लिए गौरव की बात है और एक बड़ी उपलब्धि भी।

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कोरबा

निधन के बाद धर्मपत्नी बनी प्रेरणा:निशुल्क बालिका शिक्षा को लेकर आदिवासी क्षेत्रों में निदेशक डॉ. गजेंद्र तिवारी से खास बातचीत

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कोरबा/पाली। कोरबा जिले में कुछ व्यक्तित्व ऐसे हैं, जो असंभव को भी संभव करने की जिद्द रखते हैं और क्षमता से अधिक कर दिखाते हैं। ऐसे लोग समाज का आईना होते हैं और समाज को नई दिशा देने के लिए प्रेरित ही नहीं करते, खुद प्रेरणा बन जाते हैं। कोरबा जिले के पाली ब्लाक मुख्यालय में स्थित छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेण्डरी स्कूल के निदेशक डॉ. गजेन्द्र तिवारी एक विद्वत व्यक्तित्व हैं और अपना पूरा जीवन शिक्षा को समर्पित कर रहे हैं और कम फीस में क्षेत्र के बच्चों को उत्कृष्ठ शिक्षा छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेण्डरी स्कूल के माध्यम से दे रहे हैं।
डॉ. गजेन्द्र तिवारी अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कल्पना तिवारी और पुत्र सौर्य सहित भरापूरा परिवार के साथ सादगी से जीवन यापन करते हुए शिक्षा और समाजसेवा को अपना ध्येय बनाकर अपने जीवन को सार्थक बनाने में लगे हुए थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर होता है और एक सामान्य जीवन असामान्य हो जाता है। डॉ. गजेन्द्र तिवारी के खुशहाल जीवन में एक ऐसा आघात लगा, कि वे टूट से गए। 21 अप्रैल 2021 को डॉ. गजेन्द्र तिवारी के लिए काला दिन साबित हुआ। 21 अप्रैल 2021 से पूर्व मार्निंगवाक के लिए अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कल्पना के साथ निकले थे, कि सड़क किनारे चल रहीं श्रीमती कल्पना तिवारी को एक वाहन ने ठोकर मारकर आगे बढ़ गया। श्रीमती तिवारी का ईलाज हुआ और वह स्वस्थ भी हो गई, लेकिन 21 अप्रैल को घर में काम करते-करते सीने में दर्द हुआ और कुछ ही मिनटों में हृदयाघात से उनका निधन हो गया।
श्रीमती कल्पना तिवारी के बिना डॉ. गजेन्द्र तिवारी अधूरे से हो गए, लेकिन हिम्मत नहीं हारा और अपनी धर्मपत्नी की प्रेरणा को ही सम्बल बना लिया। स्व. श्रीमती कल्पना तिवारी की पे्ररणा से वे अपने विद्यालय में नि:शुल्क कन्या शिक्षा योजना की शुरूआत की और आज 05 साल से संसाधन के अभाव में भी बालिका नि:शुल्क शिक्षा को आगे बढ़ा रहे हैं। डॉ. गजेन्द्र तिवारी की इस पहल से पाली ब्लाक की निर्धन बालिकाएं बेहतर शिक्षा ग्रहण कर आगे अपने जीवन को स्वर्णीम बनाने में लगी हुई हैं। नि:शुल्क बालिका शिक्षा योजना अनवरत रखने वाले डॉ. गजेन्द्र तिवारी से खास बातचीत के कुछ अंश-

प्रश्न 1. आदिवासी क्षेत्रों में निशुल्क बालिका शिक्षा शुरू करने का विचार आपको कैसे आया?
उत्तर: आदिवासी क्षेत्रों में भ्रमण के दौरान मैंने देखा कि अनेक प्रतिभाशाली बालिकाएँ आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित रह जाती हैं। यह स्थिति मेरे लिए चिंताजनक थी। तभी यह संकल्प लिया कि बेटियों को शिक्षा से जोड़ने के लिए निशुल्क बालिका शिक्षा अभियान चलाया जाए।
प्रश्न 2. इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: हमारा उद्देश्य है कि कोई भी बालिका केवल आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे। हम उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य के अवसर प्रदान करना चाहते हैं।
प्रश्न 3. आदिवासी क्षेत्रों में बालिका शिक्षा की सबसे बड़ी चुनौतियाँ क्या हैं?
उत्तर: आर्थिक कमजोरी, जागरूकता की कमी, विद्यालयों की दूरी, सामाजिक रूढ़ियाँ तथा प्रारंभिक अवस्था में पढ़ाई छोड़ देना प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
प्रश्न 4. आपके विद्यालय में कितनी बालिकाओं को निशुल्क शिक्षा का लाभ दिया जा रहा है?
उत्तर: हमारे विद्यालय में प्रतिवर्ष चयनित बालिकाओं को निशुल्क शिक्षा की सुविधा प्रदान की जाती है। हम इस संख्या को निरंतर बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि अधिक से अधिक बेटियाँ लाभान्वित हो सकें।
प्रश्न 5. क्या इस योजना में केवल शुल्क माफी है या अन्य सुविधाएँ भी प्रदान की जाती हैं?
उत्तर: शुल्क माफी के साथ-साथ शैक्षणिक मार्गदर्शन, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सहभागिता और व्यक्तित्व विकास के अवसर भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
प्रश्न 6. ग्रामीण और आदिवासी परिवारों की इस पहल के प्रति क्या प्रतिक्रिया रही है?
उत्तर: परिवारों ने इस पहल का स्वागत किया है। अब अभिभावक अपनी बेटियों को विद्यालय भेजने के प्रति अधिक उत्साहित और जागरूक दिखाई देते हैं।
प्रश्न 7. बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने में समाज की क्या भूमिका होनी चाहिए?
उत्तर: समाज को बेटा-बेटी में भेदभाव समाप्त कर शिक्षा को समान अवसर के रूप में स्वीकार करना चाहिए। सामाजिक सहयोग से ही शिक्षा का वास्तविक विस्तार संभव है।
प्रश्न 8. क्या आर्थिक अभाव के कारण पढ़ाई छोड़ने वाली बालिकाओं की संख्या में कमी आई है?
उत्तर: हाँ, हमारी पहल के बाद कई बालिकाएँ पुनः शिक्षा से जुड़ी हैं और विद्यालय छोड़ने की प्रवृत्ति में सकारात्मक कमी देखने को मिली है।
प्रश्न 9. आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए भविष्य में आपकी क्या योजनाएँ हैं?
उत्तर: हम छात्रवृत्ति, कैरियर मार्गदर्शन, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
प्रश्न 10. सरकार और निजी शिक्षण संस्थानों को इस दिशा में क्या कदम उठाने चाहिए?
उत्तर: अधिक छात्रवृत्तियाँ, बेहतर शैक्षणिक सुविधाएँ, जागरूकता अभियान तथा बालिका शिक्षा के लिए विशेष सहयोगात्मक योजनाएँ संचालित की जानी चाहिए।
प्रश्न 11. कोई ऐसी सफलता की कहानी बताइए जिसने आपको प्रेरित किया हो।
उत्तर: कई बालिकाएँ जो कभी आर्थिक कठिनाइयों के कारण पढ़ाई छोड़ने की स्थिति में थीं, आज उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। उनकी सफलता हमारी सबसे बड़ी प्रेरणा है।
प्रश्न 12. शिक्षा प्राप्त करने के बाद बालिकाओं के जीवन में क्या परिवर्तन देखने को मिले हैं?
उत्तर: उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है, निर्णय लेने की क्षमता विकसित हुई है और वे अपने परिवार तथा समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
प्रश्न 13. आप बालिका शिक्षा को समाज के विकास से किस प्रकार जोड़ते हैं?
उत्तर: एक शिक्षित बालिका केवल स्वयं शिक्षित नहीं होती, बल्कि वह पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ियों को शिक्षित और जागरूक बनाती है।
प्रश्न 14. जो अभिभावक आज भी बेटियों की शिक्षा को महत्व नहीं देते, उन्हें आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
उत्तर: बेटी को शिक्षा देना सबसे बड़ा निवेश है। शिक्षित बेटी परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास की मजबूत आधारशिला बनती है।
प्रश्न 15. आपकी दृष्टि में शिक्षित बालिका आदिवासी समाज के भविष्य को कैसे बदल सकती है?
उत्तर: शिक्षित बालिका सामाजिक जागरूकता, आर्थिक आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता के माध्यम से पूरे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।
प्रश्न 16. आगामी पाँच वर्षों में बालिका शिक्षा को लेकर आपका सपना क्या है?
उत्तर: मेरा सपना है कि हमारे क्षेत्र की कोई भी बालिका शिक्षा से वंचित न रहे और प्रत्येक बेटी को अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिले।
प्रश्न 17. देश के अन्य विद्यालयों और संस्थानों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
उत्तर: शिक्षा को सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में देखें। यदि प्रत्येक संस्था कुछ बालिकाओं की शिक्षा का दायित्व ले, तो बड़ा परिवर्तन संभव है।
प्रश्न 18. शिक्षा के क्षेत्र में आपका अगला बड़ा लक्ष्य क्या है?
उत्तर: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल सशक्तिकरण, बालिका शिक्षा का विस्तार तथा आदिवासी अंचलों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना मेरा प्रमुख लक्ष्य है।
निदेशक का संदेश – डॉ. गजेंद्र तिवारी
“जब एक बेटी शिक्षित होती है, तब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरा परिवार, समाज और राष्ट्र प्रगति की ओर अग्रसर होता है। हमारी कोशिश है कि शिक्षा का प्रकाश अंतिम पंक्ति में खड़ी बालिका तक पहुँचे।”

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कोरबा

डीजल चोरी गिरोह का भंडाफोड़ : मास्टरमाइंड नवीन कश्यप सहित 3 अभियुक्त गिरफ्तार

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आरोपी नवीन कश्यप पर 10,000 रुपये का था इनाम

कोरबा। जिला कोरबा पुलिस ने गेवरा एवं कुसमुंडा खदानों से डीजल चोरी करने वाले सक्रिय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए इसके मास्टरमाइंड नवीन कश्यप सहित 3 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। उल्लेखनीय है कि आरोपी नवीन कश्यप पिछले डेढ़ वर्षों से जिला छोड़कर बाहर फरार था, और उस पर दस हज़ार रुपये का इनाम घोषित था।

कोरबा पुलिस इस डीजल चोर गिरोह के विरुद्ध लगातार कठोर कार्रवाई कर रही है। अब तक कुल 12 अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनमें से 3 को इस कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया है, जबकि 9 अभियुक्त पूर्व में गिरफ्तार किए गए थे। इससे पहले पुलिस द्वारा 2500 लीटर डीजल जब्त किया जा चुका है। वर्तमान कार्रवाई में घटना में प्रयुक्त 2 स्कार्पियो वाहन भी जब्त किए गए हैं।

प्रकरण में अपराध क्रमांक 437/24 के तहत धारा 111, 303(2) बीएनएस एवं 3, 7 ईसी एक्ट तथा अपराध क्रमांक 114/26 के तहत धारा 111, 329(2), 303(2), 338, 336(3), 340, 3(5) बीएनएस पूर्व मे पंजीबद्ध थे ।

गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण

प्रथम अभियुक्त नवीन कश्यप, पिता स्वर्गीय राम दयाल कश्यप, आयु 34 वर्ष, निवासी बलगी शांतिनगर, बाँकी मोंगरा, जिला कोरबा है।

द्वितीय अभियुक्त परमेश्वर सारथी, पिता जोहन लाल सारथी, आयु 28 वर्ष, निवासी बलगी शांतिनगर, बाँकी मोंगरा, जिला कोरबा है।

तृतीय अभियुक्त सब्बीर मेमन, पिता अयूब मेमन, आयु 35 वर्ष, निवासी गेवरा बस्ती, गाँधी चौक, कुसमुंडा, जिला कोरबा है।

जब्त वाहनों के पंजीयन क्रमांक

प्रथम स्कार्पियो का पंजीयन क्रमांक CG 28 P 6555 तथा द्वितीय स्कार्पियो का पंजीयन क्रमांक CG 12 BU 6064 है।

घटना का क्रमिक विवरण

दिनांक 01 जून 2026 की रात्रि को थाना दीपका पुलिस गश्त पर थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि गेवरा खदान से डीजल चोरी करने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड आरोपी नवीन कश्यप जांजगीर में छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को पकड़ लिया गया। घटना में प्रयुक्त दोनों स्कार्पियो को भी जब्त किया गया।

इसके पश्चात थाना दीपका में अपराध क्रमांक 437/2024 एवं 114/2026 के तहत आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

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