विदेश
पाकिस्तान-बांग्लादेश पर मेहरबान ट्रम्प, टैरिफ 20% से ज्यादा नहीं:भारत-ब्राजील पर 50% टैरिफ की मार, चीन की GDP 1% गिरने का खतरा
वॉशिंगटन डी सी,एजेंसी। दुनियाभर के देशों को टैरिफ से डरा रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत के दो पड़ोसी देशों पर खासे मेहरबान हैं। ट्रम्प ने पाकिस्तान पर 19% तो बांग्लादेश पर 20% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है।
इसके उलट भारत पर दो बार में 25-25% टैरिफ लगाने का आदेश दिया है। साथ ही सेकेंडरी सैंक्शन्स की धमकी भी दी है।
भारत की तरह ही ब्राजील पर ट्रम्प ने 50% टैरिफ लगा दिया है। वहीं, चीन पर फिलहाल 30% टैरिफ लगाया जा रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर टैरिफ दर बढ़ती है, तो चीन की GDP लगभग 1% तक घट सकती है।
स्टोरी में जानिए कैसे ट्रम्प के टैरिफ से फायदे में हैं पाकिस्तान और बांग्लादेश, और क्यों नुकसान में है चीन…

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प 2 अप्रैल 2025 को व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में 69 देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान करते हुए।
देश जिन्हें टैरिफ से सबसे ज्यादा फायदा
1. पाकिस्तान: साउथ एशियाई देशों के मुकाबले सबसे कम टैरिफ
ट्रम्प ने पाकिस्तान पर 19% टैरिफ लगाया है। साउथ एशिया के किसी भी देश पर यह सबसे कम अमेरिकी टैरिफ है। इससे पहले ट्रम्प ने अप्रैल में पाकिस्तान पर 29% टैरिफ लगाने की बात कही थी।
नए आदेश में ट्रम्प ने पाकिस्तान को 10% की रियायत दी है। ट्रम्प ने पाकिस्तान के साथ ऑयल डील भी की है। इसके तहत अमेरिका, पाकिस्तान में तेल की खोज, प्रोसेसिंग और स्टोरेज बनाने में मदद करेगा।
पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र उसका कपड़ा उद्योग (80%) है। अमेरिका उसका सबसे बड़ा खरीदार है। कम टैरिफ से इसकी अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी बढ़ सकती है।
अमेरिका की पाकिस्तान के साथ डील, भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव ला सकती है। इससे पाकिस्तान, अमेरिका के साथ मिलकर अपनी क्षेत्रीय स्थिति मजबूत करने की कोशिश करेगा।
अमेरिका की मदद से पाकिस्तान को वर्ल्ड बैंक और IMF से वित्तीय सहायता भी मिल सकती है।

2. बांग्लादेश: 4 महीने में 17% टैरिफ कम करवाया
अमेरिका ने बांग्लादेश पर 20% टैरिफ लगाया है। इससे पहले अप्रैल में बांग्लादेश पर 37% टैरिफ लगाया गया था। बांग्लादेश 4 महीने में अमेरिका से 17% टैरिफ कम कराने में कामयाब रहा।
बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक है। भारत पर ज्यादा टैरिफ से इसका कपड़ा निर्यात बढ़ सकता है। 2024 में इसका निर्यात 8 अरब डॉलर (70 हजार करोड़ रुपए) था, जो 2026 तक 10 अरब डॉलर (88 हजार करोड़ रुपए) हो सकता है।
कम टैरिफ से बांग्लादेश अमेरिकी बाजार में अपनी 9% हिस्सेदारी बनाए रख सकता है। FBCCI के मुताबिक इससे देश की GDP में 2026 तक 0.2% तक बढ़ोतरी हो सकती है।
3. वियतनाम: टेक्सटाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बढ़त
अमेरिका ने वियतनाम पर 20% टैरिफ लगाया है, लेकिन यह भारत (50% टैरिफ) और चीन (30%) की तुलना में कम है। इससे वियतनाम के सामानों को अमेरिकी बाजारों में आसानी से पहुंच मिलेगी।
वियतनाम को सेमीकंडक्टर सेक्टर में पहले ही बड़ी कंपनियों की ‘चाइना-प्लस-वन’ पॉलिसी (चीन के अलावा एक और साझेदार) का लाभ मिल रहा है।
एपल और सैमसंग जैसी कंपनियां चीन से अपनी सप्लाई चेन को वियतनाम ट्रांसफर कर रही हैं। दूसरे देशों की तुलना में कम टैरिफ होने से वियतनाम का अमेरिका को निर्यात बढ़ सकता है।
अमेरिका के कम टैरिफ का फायदा वियतनाम की टेक्सटाइल इंडस्ट्री खासकर सस्ते कपड़ों और रेडीमेड गारमेंट्स को होगा। 2013-2023 के बीच वियतनाम का कपड़ा निर्यात 82% बढ़कर लगभग 3 लाख करोड़ रुपए हो गया।
4. मेक्सिको: कई सामानों पर 0% टैरिफ
मेक्सिको पर अमेरिका ने 25% टैरिफ लगा रखा है। हालांकि मेक्सिको USMCA (United States-Mexico-Canada Agreement) के तहत व्यापार करता है। जिसके तहत कुछ छूट का लाभ उठा सकता है। USMCA के नियमों का पालन करने वालों सामानों पर अमेरिका ने मेक्सिको को 0% टैरिफ की छूट दी है।
मेक्सिको अमेरिका के साथ ट्रेड करने में पहले स्थान पर है। 2024 में अमेरिका के साथ व्यापार में मेक्सिको की भागीदारी 16% थी। ये अब और बढ़ सकती है।
मेक्सिको, अमेरिका को कारें, ट्रक और ऑटोमोबाइल पार्ट्स जैसे इंजन, ट्रांसमिशन का निर्यात करता है। मेक्सिको के ऑटोमोबाइल पार्ट्स के कुल निर्यात का लगभग 90% हिस्सा अमेरिका जाता है।
मेक्सिको, अमेरिका को कृषि उत्पाद (टमाटर, एवोकाडो, बेरीज नींबू, सब्जियां) निर्यात करता है। मेक्सिको अमेरिका का सबसे बड़ा एवोकाडो सप्लायर है। USMCA के तहत इन पर 0% टैरिफ लगता है, जिससे इस सेक्टर को फायदा होगा।
अमेरिका कुल स्टील निर्यात का 15-20% हिस्सा मेक्सिको से लेता है। ये कनाडा और ब्राजील के बाद तीसरे नंबर पर है। ब्राजील पर 50% टैरिफ होने के कारण अमेरिका मेक्सिको से स्टील निर्यात बढ़ा सकता है।
देश जिन्हें टैरिफ से सबसे ज्यादा नुकसान…
1. भारत- 25 से 30 लाख नौकरियां खतरे में
अमेरिका ने भारत पर 6 अगस्त को 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगा दिया। इससे भारत का कुल टैरिफ 25% से बढ़कर 50% हो गया है। ये एक्स्ट्रा टैरिफ 27 अगस्त से शुरू होगा। ट्रम्प ने टैरिफ बढ़ाने का कारण रूस से तेल खरीद को बताया।
अमेरिका ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अमेरिका को लगभग 7.35 लाख करोड़ रुपए का सामान निर्यात किया। 50% टैरिफ से भारत के प्रोडक्ट अमेरिकी बाजार में महंगे होंगे, जिससे मांग में कमी आएगी।
अमेरिका 15% टेक्सटाइल भारत से आयात करता है। टैरिफ बढ़ने से इसमें गिरावट आ सकती है, जिसका असर भारत में टेक्सटाइल प्रोडक्शन पर पड़ सकता है।
हाई टैरिफ का असर रोजगार पर भी पड़ेगा। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, MSME (छोटे और मध्यम उद्योग) क्षेत्र में 25-30 लाख नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
भारत ने 2024 में 11 बिलियन डॉलर (₹91 हजार करोड़) का रत्न और ज्वेलरी निर्यात किए। टैरिफ से कीमतें बढ़ने पर मांग कम हो सकती है। इसका असर भारत के ज्वेलरी बाजार सूरत के डायमंड और पॉलिशिंग हब पर पड़ेगा।
2. ब्राजील: GDP में 2.7% तक की गिरावट का अनुमान
अमेरिका ने भारत की तरह ब्राजील पर भी 50% टैरिफ लगा रखा है। इसके पीछे ट्रम्प ने पूर्व राष्ट्रपति जायरे बोल्सोनारो पर मुकदमा चलाए जाने को वजह बताया है। राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने इसके खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) में शिकायत भी की है।
ब्राजील, अमेरिका को स्टील बेचने में तीसरे नंबर पर है। ब्राजील ने 2024 में अमेरिका को 10 बिलियन डॉलर (₹87 हजार करोड़) का स्टील और एल्यूमीनियम निर्यात किया था। टैरिफ लगने से इसे सबसे ज्यादा नुकसान होगा।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुताबिक, ब्राजील की GDP में 2.7% तक की गिरावट और 1 लाख से ज्यादा नौकरियां छिन सकती हैं।
बढ़ें टैरिफ का असर कॉफी उत्पादन पर भी पड़ेगा। 2024 में ब्राजील ने अमेरिका को 4.4 बिलियन डॉलर (₹38 हजार करोड़) की 4.40 लाख करोड़ किलो कॉफी निर्यात की।
3. चीन की GDP 1% तक गिरने का खतरा
अमेरिका ने मई में चीन पर 145% टैरिफ लगा दिया था। इसके बाद चीन ने अमेरिका पर 125% जवाबी टैरिफ लगाया। बातचीत के बाद दोनों ने एक दूसरे पर टैरिफ कम किया। अभी अमेरिका ने चीन पर 30% और चीन ने अमेरिका पर 10% टैरिफ लगाया है।
अमेरिका ने चीन को ट्रेड डील के लिए अलग से 12 अगस्त तक की मोहलत दी है। चीन पर अमेरिका के हाई टैरिफ का सीधा असर उसके निर्यात और इंडस्ट्री पर पड़ेगा।
चीन अमेरिका को लगभग 500 अरब डॉलर (43 लाख करोड़ रुपए) से अधिक का सामान निर्यात करता है। Apple जैसे ब्रांड चीन में बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन करते हैं। उन्हें मंहगाई का सामना करना पड़ेगा।
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के व्यापक टैरिफ उपायों के बावजूद चीन का आर्थिक प्रभाव सीमित रहा है। यदि टैरिफ दर बढ़ती है, तो इससे चीन की GDP 1% तक घट सकती है।
देश
अमेरिकी रियल एस्टेट कंपनी Opendoor का भारत से एग्जिट, 250 कर्मचारियों होंगे प्रभावित
मुंबई, एजेंसी। अमेरिका की डिजिटल रियल एस्टेट कंपनी ओपनडोर (Opendoor) भारत में अपना कामकाज बंद करने का ऐलान किया है। कंपनी के इस फैसले से भारतीय दफ्तरों में काम करने वाला करीब 250 कर्मचारियों की नौकरी चली जाएगी। कंपनी के सीईओ काज नेजैटियन ने अपने सोशल मीडिया पर और कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कंपनी अपनी बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन स्ट्रेटेजी के तहत ऑपरेशनल रोल्स को अमेरिका में अपने ग्राहकों के करीब ले जा रही है।

कर्मचारियों को भेजे गए ईमेल में कंपनी ने कहा, ”कंपनी बीते कुछ महीनों से अपने ऑपरेशनल रोल्स को वापस अमेरिका में शिफ्ट कर रही थी। इस नए कदम से ये प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और ओपनडोर का भारत में कामकाज बंद हो जाएगा।” नेजैटियन ने कर्मचारियों को भेजे गए इस ईमेल को भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है।
AI और तकनीकी बदलाव बने वजह
कंपनी का कहना है कि ओपनडोर के अधिकांश ग्राहक अमेरिका में हैं इसलिए ग्राहक सहायता और परिचालन गतिविधियों को वहीं से संचालित करना अधिक प्रभावी रहेगा। कंपनी ने पहले कई मैनुअल वर्कफ्लो को मैनेज करने के लिए भारत में एक बड़ी टीम बनाई थी लेकिन टेक्नोलॉजी में सुधार और AI-इनेबल्ड टीमें आने से इन कामों को विदेश में रखने की जरूरत कम हो गई है।
सीईओ ने भारत में कर्मचारियों के योगदान की तारीफ की
काज नेजैटियन ने अपने नोट में लिखा, ”आज हमने भारत में अपने सहयोगियों को अलविदा कहना शुरू कर दिया, क्योंकि हम भारत में अपना कामकाज बंद कर रहे हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये फैसला भारत में काम करने वाली टीम के परफॉर्मेंस से जुड़ा नहीं था। उन्होंने भारत में कर्मचारियों के योगदान की तारीफ की और उन्हें टैलेंटेड प्रोफेशनल बताया, जो दूसरी कंपनियों के लिए भी बहुत काम के साबित होंगे।
देश
अमेरिका में मोदी की धूम: PM मोदी के रिकॉर्ड कार्यकाल की अमेरिकी नेताओं ने की जमकर तारीफ
वॉशिंगटन, एजेंसी। भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बनने के मील के पत्थर को हासिल करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी सांसदों, बिजनेस लीडर्स और भारतीय समुदाय के प्रमुख सदस्यों ने तारीफ़ की है। उन्होंने भारत की वैश्विक स्थिति को बदलने और अमेरिका के साथ संबंधों को मजबूत करने का श्रेय मोदी के नेतृत्व को दिया।
अमेरिकी सीनेटर जॉन कॉर्निन ने बधाई देने की शुरुआत की और मोदी को पद पर 4,399 दिन पूरे करने पर बधाई दी।

कॉर्निन ने कहा, “प्रधानमंत्री @narendramodi को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बनने पर बधाई – तीन लोकतांत्रिक जनादेशों के ज़रिए 1.4 अरब लोगों का भरोसा जीतकर 4,399 दिनों का नेतृत्व किया।” उन्होंने आगे कहा, “25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने से लेकर भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाने तक, PM मोदी का कार्यकाल बदलाव लाने वाला रहा है। अमेरिका-भारत साझेदारी पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत हुई है।”
इंडियन अमेरिकन CEO काउंसिल के सह-संस्थापक और टेक्सास इकोनॉमिक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के चेयरमैन अरुण अग्रवाल ने कहा कि यह मील का पत्थर पिछले बारह वर्षों में भारत में आए बदलाव पर विचार करने का मौका देता है। अग्रवाल ने इस मौके पर लिखे एक लेख में कहा, “2026 का भारत 2014 का भारत नहीं है।” उन्होंने कहा कि “इस बात से इनकार करना मुश्किल है कि आज भारत एक दशक पहले की तुलना में वैश्विक मंच पर ज़्यादा मज़बूती से खड़ा है, ज़्यादा मुखर है और ज़्यादा ध्यान आकर्षित करता है।” भारत को अब केवल संभावनाओं वाले देश के रूप में नहीं, बल्कि तेज़ी से उन संभावनाओं को हकीकत में बदलने वाले देश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, “कई दशकों तक, भारत को अक्सर भारी क्षमता वाले देश के रूप में वर्णित किया जाता था। आज, इसे तेज़ी से उस क्षमता को साकार करने वाले देश के रूप में देखा जा रहा है।”
उन्होंने कहा कि पिछले बारह वर्षों को संभवतः उस दौर के रूप में याद किया जाएगा जिसने “भारत के उत्थान को गति दी और भारत क्या हासिल कर सकता है, इस बारे में वैश्विक धारणा को बदल दिया।” पालो ऑल्टो नेटवर्क्स के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी निकेश अरोड़ा ने भी मोदी को इस उपलब्धि पर बधाई दी। अरोड़ा ने लिखा, “प्रधानमंत्री @narendramodi को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बनने पर बधाई – तीन लोकतांत्रिक जनादेशों के ज़रिए 1.4 अरब लोगों का भरोसा जीतकर 4,399 दिनों का नेतृत्व किया।” उन्होंने कहा, “25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने से लेकर भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने तक, पीएम मोदी का कार्यकाल बदलाव लाने वाला रहा है। हम अमेरिका-भारत की लगातार जारी रहने वाली साझेदारी की उम्मीद करते हैं।”
अमेरिकी गायिका और भारत की समर्थक मैरी मिलबेन ने इस मौके को “एक महान देश की यात्रा में एक ऐतिहासिक, लोकतांत्रिक मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा, “आज, मैं अपने दोस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाने पर दिल से बधाई देती हूं।” “आपकी मज़बूत लीडरशिप, 140 करोड़ भारतीयों की तरक्की, एकता और उम्मीदों के प्रति आपकी अटूट प्रतिबद्धता, और साथ ही एक मज़बूत भारत के लिए आपकी पक्की सोच ने बदलाव के एक दौर को आकार देने में मदद की है।” मिलबेन ने नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच रिश्तों को आगे बढ़ाने में मोदी की भूमिका की भी तारीफ़ की।
उन्होंने कहा, “मैं अमेरिका-भारत संबंधों को आगे बढ़ाने में आपकी लीडरशिप का सम्मान करती हूं। आपने कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों के कार्यकाल देखे हैं-कुछ के साथ आपके बहुत अच्छे संबंध रहे और दूसरों के प्रति आपने बहुत शालीनता दिखाई-फिर भी आप स्पष्ट कूटनीति अपनाने में कभी नहीं डगमगाए, जिससे भारतीय लोगों के हितों और हमारे दोनों देशों की भलाई को बढ़ावा मिला।”
इस उपलब्धि को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताते हुए उन्होंने आगे कहा, “अब, भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता के तौर पर, आपने पीढ़ियों को बड़े सपने देखने, कड़ी मेहनत करने और मातृभूमि की शान बढ़ाने में योगदान देने के लिए प्रेरित किया है।”
देश
मॉरीशस की मोदी के 12 साल के रिकॉर्ड पर की बड़ी टिप्पणीः ‘सलाम…आप ग्लोबल साउथ की सबसे बुलंद आवाज’
नई दिल्ली, एजेंसी। भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के लगातार 12 वर्ष पूरे कर देश के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर दुनिया भर से बधाइयों का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में मॉरीशस के विदेश मंत्री Dhananjay Ramful ने उनकी इस उपलब्धि को भारतीय जनता के अटूट विश्वास का प्रतीक बताया है।

‘भारत को बदलने वाले नेता हैं मोदी’
एएनआई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में रामफुल ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि मोदी को यह सम्मान इसलिए मिला है क्योंकि भारत की जनता ने लगातार उन पर भरोसा जताया है। रामफुल के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी केवल भारत के नेता नहीं बल्कि एक वैश्विक नेता हैं, जिन्होंने देश के विकास और परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मॉरीशस के विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में ऐसे कार्यक्रम शुरू किए, जिनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नीतियों में समावेशी विकास की स्पष्ट झलक दिखाई देती है और यही उनकी लोकप्रियता का बड़ा कारण है।
‘ग्लोबल साउथ की आवाज बने मोदी’
रामफुल ने प्रधानमंत्री मोदी को वैश्विक दक्षिण (Global South) का मजबूत प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा विकासशील देशों की चिंताओं और समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठाया। उन्होंने विशेष रूप से भारत की G20 अध्यक्षता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विकासशील देशों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। रामफुल ने कहा कि मॉरीशस को G20 की बैठकों में आमंत्रित करना और African Union को G20 का स्थायी सदस्य बनाने में भारत की भूमिका इस बात का प्रमाण है कि मोदी केवल वादे नहीं करते, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारते भी हैं।
भारत-मॉरीशस संबंधों को नई मजबूती
विदेश मंत्री ने भारत और Mauritius के बीच मजबूत होते संबंधों का श्रेय भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को दिया। उन्होंने 2015 में मॉरीशस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए SAGAR (Security and Growth for All in the Region) मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल ने हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग को नई दिशा दी। रामफुल ने कहा कि भारत मॉरीशस का एक भरोसेमंद विकास साझेदार रहा है। हाल ही में मॉरीशस के प्रधानमंत्री Navin Ramgoolam की भारत यात्रा के दौरान नई वित्तीय सहायता की घोषणा की गई। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की मदद से मॉरीशस में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी हुई हैं, जिनमें मेट्रो एक्सप्रेस और आधुनिक ईएनटी अस्पताल जैसी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ती भारत की ताकत
प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षीय कार्यकाल को भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, आर्थिक विकास और कूटनीतिक प्रभाव के दौर के रूप में देखा जा रहा है। मॉरीशस के विदेश मंत्री की यह टिप्पणी भी इसी बात को रेखांकित करती है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला देश बन चुका है।
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