विदेश
कनाडा में नफरत फैलाने वालों पर कसेगा शिकंजा, खालिस्तानी चरमपंथ के महिमामंडन पर लगेगी रोक
ओटावा, एजेंसी। कनाडा सरकार ने चरमपंथी विचारधाराओं और नफरत फैलाने वाले अभियानों के खिलाफ अपनी नीति को और कड़ा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस पहल को कई इंडो-कैनेडियन समुदायों ने लंबे समय से लंबित कार्रवाई बताते हुए स्वागत किया है। प्रस्तावित कानून के तहत ऐसे संगठनों से जुड़े प्रतीकों के सार्वजनिक प्रदर्शन को अपराध की श्रेणी में लाने की बात कही गई है, जिन्हें आतंकवादी गतिविधियों से जोड़ा गया है। इसके अलावा धार्मिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक संस्थानों को निशाना बनाने वाली डराने-धमकाने की गतिविधियों पर भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

कनाडा की संसद के निचले सदन में पेश किए गए इस विधेयक का उद्देश्य उन गतिविधियों पर रोक लगाना है जो लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं का दुरुपयोग कर समाज में भय, विभाजन और कट्टरपंथी सोच को बढ़ावा देती हैं। समर्थकों का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ हिंसा, घृणा या आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों और संगठनों का महिमामंडन नहीं हो सकता। कई वर्षों से इंडो-कैनेडियन समुदाय के सदस्य इस बात को लेकर चिंता जताते रहे हैं कि कुछ सार्वजनिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनों में ऐसे प्रतीकों तथा नारों का इस्तेमाल किया जाता है जो हिंसक गतिविधियों या चरमपंथी विचारधाराओं से जुड़े माने जाते हैं। उनका कहना है कि इससे समाज में तनाव और असुरक्षा की भावना पैदा होती है।
प्रस्तावित प्रावधानों के तहत कानून प्रवर्तन एजेंसियों को ऐसे मामलों में अधिक अधिकार मिल सकते हैं, जहां चरमपंथी प्रचार को सामाजिक या राजनीतिक सक्रियता के नाम पर बढ़ावा दिया जाता है। सरकार का तर्क है कि लोकतांत्रिक अधिकारों और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कानून अंतिम रूप से पारित हो जाता है तो यह कनाडा में चरमपंथी नेटवर्क, नफरत फैलाने वाले अभियानों और सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। कनाडा सरकार का संदेश स्पष्ट माना जा रहा है कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की जाएगी, लेकिन उनका इस्तेमाल हिंसा, डर और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के लिए नहीं होने दिया जाएगा।
विदेश
इजरायल का सनसनीखेज दावा: ईरान ने बनाया ट्रंप की हत्या का प्लान, खुफिया रिपोर्ट से मचा हड़कंप
वाशिंगठन, एजेंसी। पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। इजरायल की एक खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश रच रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह खुफिया जानकारी हाल ही में अमेरिका के साथ साझा की गई है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही ईरान ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब कुछ सप्ताह पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष रोकने के लिए युद्धविराम लागू हुआ था। अब इस नए दावे के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में फिर से तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल ने अमेरिका को सौंपी अपनी खुफिया रिपोर्ट में दावा किया है कि ईरान ट्रंप को निशाना बनाने की योजना पर काम कर रहा है। यदि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां इस रिपोर्ट को विश्वसनीय मानती हैं, तो वॉशिंगटन का तेहरान के प्रति रुख और कड़ा हो सकता है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने इस रिपोर्ट पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत टिप्पणी नहीं की है। जनवरी 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत के बाद से अमेरिका और ईरान के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरानी नेताओं ने कई बार सुलेमानी की मौत का बदला लेने की बात कही थी। इसी वजह से अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां पहले भी ईरान समर्थित तत्वों से संभावित खतरों को लेकर सतर्क रहती आई हैं।
डोनाल्ड ट्रंप पहले भी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि उन्हें लगता है कि ईरान उन्हें निशाना बनाना चाहता है। उन्होंने दावा किया था कि उनका नाम ईरान की “हिट लिस्ट” में शामिल है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई करता है तो अमेरिका उसका कड़ा जवाब देगा।हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियां फिर तेज हुई हैं। मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाओं के बीच क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन जैसे देशों में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिए गए हैं। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय होने के कारण वहां विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

ट्रंप ने हाल ही में आरोप लगाया था कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों के जरिए तनाव बढ़ा रहा है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर दुनिया भर की ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल ईरान ने इजरायल की खुफिया रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। वहीं, अमेरिकी अधिकारियों ने भी सार्वजनिक रूप से इस दावे की पुष्टि नहीं की है।
देश
तीन देशों के दौरे के अंतिम पड़ाव में PM मोदी पहुंचे न्यूजीलैंड, हुआ भव्य स्वागत, लक्सन से होगी अहम वार्ता
ऑकलैंड, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को तीन देशों की अपनी यात्रा के अंतिम पड़ाव पर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड पहुंचे। इस दौरान उनका औपचारिक स्वागत किया गया। दो दिवसीय यात्रा में प्रधानमंत्री मोदी अपने समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन के साथ शिखर वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, शिक्षा, कृषि, तकनीक, रक्षा सहयोग और मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

भारत से रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि मार्च 2025 में लक्सन की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के रिश्तों में जो सकारात्मक गति आई है, यह यात्रा उसे और मजबूत बनाएगी। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का उनका दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और ‘महासागर विजन’ को और मजबूती देगा।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया में प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ शिखर वार्ता की थी। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, विशेषकर समुद्री सुरक्षा, को मजबूत करने पर सहमति जताई। साथ ही ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की वाणिज्यिक आपूर्ति के लिए असैन्य परमाणु ऊर्जा समझौते को भी अंतिम रूप दिया गया। वहीं, इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों समेत विभिन्न क्षेत्रों में 14 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।

देश
भारत को यूरेनियम सप्लाई करेगा ऑस्ट्रेलिया:परमाणु ऊर्जा और हथियारों के लिए जरूरी, मोदी ऑस्ट्रेलियन पीएम से बोले-हम आपसे सीख रहे
मेलबर्न, एजेंसी। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच गुरुवार को यूरेनियम डील पर मुहर लग गई है। मेलबर्न में पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज ने मीटिंग के बाद जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, स्पेस और महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) समेत कई क्षेत्र में समझौतों की घोषणा की।

मोदी ने कहा- भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर भी विकसित करेंगे। कोकोस (कीलिंग) द्वीप पर स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल बनाया जाएगा, जिससे भारत के गगनयान मिशन को मदद मिलेगी।
मोदी ने 16 साल के बच्चों को सोशल मीडिया बैन करने के मामले में ऑस्ट्रेलिया की तारीफ की। इसके बाद मेलबोर्न में 30 हजार भारतीयों को संबोधित किया।
मोदी बोले- दोनों देशों का रिश्ता क्रिकेट जैसा

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वार्ता के बाद दोनों पीएम मोदी और पीएम अल्बनीज ने संयुक्त बयान जारी किया।
- रिश्तों को क्रिकेट से जोड़ा
- पीएम मोदी ने कहा- दोनों देशों का रिश्ता क्रिकेट जैसा है। हमारी मुलाकातें क्रिकेट की तरह होती हैं। एजेंडे में वनडे जैसा फोकस है, फैसले टी-20 की तरह तेजी से होते हैं और हमारी साझेदारी टेस्ट मैच की तरह लंबी और मजबूत है।
- पीएम अल्बनीज ने कहा- आज हमने 2015 के भारत-ऑस्ट्रेलिया परमाणु सहयोग समझौते के तहत भारत को यूरेनियम निर्यात की व्यवस्था पर साइन किए हैं। हम दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।

- दोनों देशों ने ऑस्ट्रेलिया-भारत साइबर, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन (PACTS) पार्टनरशिप शुरू करने पर सहमति जताई है। इसके तहत दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल रेजिलिएंस जैसे क्षेत्रों में एकसाथ रिसर्च करेंगे।

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