बिज़नस
अमेरिका में 70% किसानों पर बढ़ा कर्ज का बोझ; नहीं खरीद पा रहे खाद, बोले- ‘करो या मरो’ की स्थिति
वाशिंगठन, एजेंसी। अमेरिका में इस समय खेती गंभीर संकट से गुजर रही है। एक हालिया सर्वे के अनुसार, लगभग 70 प्रतिशत किसान इस साल अपनी जरूरत के हिसाब से उर्वरक (fertilizer) खरीदने में सक्षम नहीं हैं। यह स्थिति खासकर दक्षिणी राज्यों में और भी खराब है, जहां करीब 78 प्रतिशत किसान खाद नहीं खरीद पा रहे। वे इसकी भरपाई के लिए अपनी फ़सल को घटाने की योजना बना रहे हैं। इस संकट के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है लगातार बढ़ती लागत और पिछले कई वर्षों से हो रहा नुकसान। किसानों को फसल उगाने में जितना खर्च आ रहा है, उतना उन्हें बाजार में दाम नहीं मिल रहा।

उदाहरण के तौर पर, मक्का (corn) उगाने की लागत ज्यादा है, लेकिन बिकने की कीमत उससे कम है। इसी तरह सोयाबीन में भी घाटा हो रहा है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और सप्लाई चेन में रुकावट के कारण खाद की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। कुछ किसानों ने बताया कि अचानक कीमतें इतनी बढ़ गईं कि उनके खर्च में हजारों डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ गया। कई जगह तो सप्लायर कीमत बताने से भी मना कर रहे हैं, क्योंकि बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।इस हालात में किसान तीन तरह के फैसले ले रहे हैं ।कुछ लोग खाद की मात्रा कम कर रहे हैं, कुछ फसल बदल रहे हैं (जैसे मक्का की जगह सोयाबीन), और कुछ मजबूरी में नुकसान झेलने के लिए तैयार हैं। लेकिन इन सभी विकल्पों में जोखिम है, क्योंकि कम खाद डालने से उत्पादन घट सकता है।
एक और बड़ी चिंता यह है कि अगर अभी खाद नहीं मिली, तो फसल बोने का सही समय निकल सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर सप्लाई तुरंत भी शुरू हो जाए, तब भी खाद खेतों तक पहुंचने में करीब एक महीना लग सकता है, जिससे कई किसान इस सीजन में पिछड़ सकते हैं। अमेरिका में किसानों पर कर्ज का बोझ भी तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि कुल कृषि कर्ज रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। इसके साथ ही दिवालिया होने वाले किसानों की संख्या भी बढ़ रही है, जो इस संकट की गंभीरता को दिखाता है।
देश
Petrol-Diesel की कीमतों को लेकर सरकार ने दी राहत भरी खबर, अभी नहीं बढ़ेंगे दाम
नई दिल्ली,एजेंसी। पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर चल रही अटकलों के बीच सरकार ने फिलहाल राहत भरी खबर दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया है कि अभी ईंधन की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है और सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने पर ध्यान दे रही है।

कीमतों पर फिलहाल नहीं बढ़ोतरी
सरकार के मुताबिक मौजूदा परिस्थितियों में आम जनता पर बोझ न बढ़े, यह प्राथमिकता है। हालांकि, वैश्विक हालात को देखते हुए भविष्य में बदलाव से इनकार भी नहीं किया गया है।
होरमुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही घटी
युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई है। युद्ध से पहले जहां इस रूट पर करीब 138 जहाज रोजाना चलते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर सिर्फ 67 रह गई है। यह गिरावट समुद्री ट्रैफिक में बड़ी कमी को दिखाती है और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर इसका असर पड़ सकता है।
भारतीय जहाजों ने बनाई दूरी
अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा कारणों से हाल के दिनों में इस रूट से कोई भी भारतीय ध्वज वाला कंटेनर जहाज नहीं गुजरा है। इससे साफ है कि कंपनियां जोखिम से बचने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाश रही हैं।
विदेशी जहाजों का डेटा सीमित
सरकार के अनुसार विदेशी जहाजों की आवाजाही से जुड़ा डेटा व्यावसायिक होता है, इसलिए इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
भारतीय नाविक सुरक्षित
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि मौजूदा तनाव के बावजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और किसी दुर्घटना की सूचना नहीं है।
देश
एसईजेड इकाइयों से घरेलू क्षेत्र में आए माल का निर्यात होने पर मिलेगा शुल्क रिफंड
नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) में स्थित इकाइयों से घरेलू क्षेत्र में शुल्क अदा कर भेजे गए माल को बाद में निर्यात किए जाने की स्थिति में ‘आयातित माल’ माना जाएगा और उस पर भी शुल्क वापसी (ड्यूटी ड्रॉबैक) का लाभ मिलेगा। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने सीमा शुल्क अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि एसईजेड इकाइयों से घरेलू शुल्क क्षेत्रों (डीटीए) में शुल्क अदा कर भेजे गए माल को यदि बाद में निर्यात किया जाता है, तो उसे सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 74 के तहत आयातित माल माना जाएगा।

निर्देश में कहा गया है कि अब तक कुछ क्षेत्रीय कार्यालयों में अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे थे। कुछ जगहों पर एसईजेड से डीटीए में भेजे गए माल को आयात नहीं माना जा रहा था, जिसके कारण ड्यूटी ड्रॉबैक के दावों को अस्वीकार किया जा रहा था। इसी असमानता को दूर करने के लिए यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है। सीबीआईसी ने कहा, “जहां एसईजेड इकाई से डीटीए में माल लागू शुल्कों के भुगतान के बाद भेजा गया हो और बाद में उसका पुनः निर्यात किया जाए, उसे शुल्क रिफंड के लिहाज से आयातित माल माना जाएगा।” इस कदम को शोध संस्थान ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (जीटीआरआई) ने ‘स्वागत योग्य और न्यायसंगत’ बताते हुए कहा है कि यह निर्देश विभिन्न सीमा शुल्क कार्यालयों में चल रही अलग-अलग प्रक्रियाओं को समाप्त करेगा और अनावश्यक विवादों को कम करेगा।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, “इससे निर्यातकों को राहत मिलेगी क्योंकि पहले से शुल्क चुका चुके माल पर दोबारा निर्यात के समय फंसी राशि वापस मिल सकेगी। इससे नकदी प्रवाह बेहतर होगा और व्यापारिक अनिश्चितता कम होगी।” भारतीय निर्यातकों के निकाय ‘फियो’ ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह लंबे समय से लंबित अस्पष्टता को दूर करता है और खासकर एमएसएमई निर्यातकों के लिए राहत लेकर आएगा। फियो ने कहा कि इस प्रावधान के समान और सुचारु क्रियान्वयन से निर्यात प्रक्रिया अधिक सरल और सुविधाजनक बनेगी तथा व्यापारियों को अधिक निश्चितता मिलेगी।
देश
शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी डगमगाए, जानें गिरावट के मुख्य कारण
मुंबई, एजेंसी। 28 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार में दिनभर जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई, फिर रिकवरी आई लेकिन आखिर में एक बार फिर दबाव बढ़ गया।
BSE Sensex ने 77,094 के आसपास शुरुआत की और दिन में 76,973 तक गिरा। बाद में इसमें रिकवरी आई और यह 77,493 तक पहुंचा लेकिन अंत में फिर दबकर 76,876 के स्तर पर बंद हुआ।
सेंसेक्स 416.72 अंक गिरकर 76,886.91 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 97 अंक की गिरावट रही, ये 23,995 के स्तर पर आ गया।

बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
ब्रेंट क्रूड $109 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जिससे भारत की आयात लागत और महंगाई का डर बढ़ा।
प्रॉफिट बुकिंग
लगातार बढ़त के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे फाइनेंशियल, IT और रियल्टी सेक्टर में दबाव आया।
बैंकिंग और RBI नियमों का असर
आरबीआई के नए नियमों के बाद बैंकिंग शेयरों में लगभग 2% तक गिरावट आई।
FII की बिकवाली
विदेशी निवेशकों ने करीब ₹1,151 करोड़ के शेयर बेचे, जिससे बाजार में दबाव बढ़ा।
वैश्विक बाजार कमजोर
एशियाई बाजारों में गिरावट रही, जबकि अमेरिकी बाजार रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुए—जिससे मिश्रित संकेत मिले।
एक्सपायरी डे का असर
Nifty एक्सपायरी के कारण इंट्राडे वोलैटिलिटी काफी बढ़ गई।
रुपए पर दबाव
डॉलर के मुकाबले रुपया 94.39 के स्तर तक कमजोर हुआ, जिससे बाजार सेंटिमेंट और खराब हुआ।
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