विदेश
अराघची से मुलाकात दौरान भावुक हुए पुतिन, ईरान की ‘हिम्मत’ को किया सलाम,कहा- ईरानी जनता बहुत “बहादुर”
मॉस्को, एजेंसी। रूस की राजधानी मॉस्को में एक अहम कूटनीतिक हलचल देखने को मिली, जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) से मुलाकात के लिए पहुंचे। इस दौरान पुतिन ने ईरानी जनता की “बहादुरी” की खुलकर तारीफ की और कहा कि वे अपनी संप्रभुता के लिए मजबूती से लड़ रहे हैं। अराघची ने कहा कि उनका यह दौरा रूस के साथ “करीबी समन्वय” बढ़ाने और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की स्थिति पर चर्चा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि रूस और ईरान मिलकर इस संकट का समाधान निकालने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। 8 अप्रैल को एक अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) हुआ था, लेकिन अब यह समझौता कई कारणों से कमजोर पड़ता दिख रहा है। सबसे बड़ा विवाद Strait of Hormuz को लेकर है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर सख्त नाकेबंदी कर रखी है, जिससे तनाव और बढ़ गया है। इसी वजह से ईरान ने साफ कहा है कि जब तक यह नाकेबंदी नहीं हटेगी, वह आगे की बातचीत में हिस्सा नहीं लेगा।इस बीच पाकिस्तान और ओमान पर्दे के पीछे अहम भूमिका निभा रहे हैं।

दोनों देश अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत करवाने की कोशिश कर रहे हैं। इस्लामाबाद में हुई हालिया बातचीत को “सकारात्मक” बताया गया है, और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द कोई बड़ा समझौता सामने आ सकता है। हालांकि, हालात अभी भी बेहद नाजुक हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर दबाव बनाए रखा है और कहा है कि प्रस्ताव “पर्याप्त नहीं” है। वहीं, इजराइल और लेबनान के बीच जारी संघर्ष भी इस पूरी स्थिति को और जटिल बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में रूस की भूमिका निर्णायक हो सकती है, चाहे वह शांति समझौता हो या फिर संघर्ष का नया चरण। फिलहाल, दुनिया की नजरें मॉस्को में चल रही इस कूटनीति पर टिकी हैं, जहां से या तो शांति की राह निकलेगी या फिर टकराव और बढ़ सकता है।
विदेश
VOPM रिपोर्ट में Shocking खुलासाः पाकिस्तान पंजाब में 1 लाख से ज्यादा महिलाएं लापता, हर केस के पीछे खौफनाक सच
इस्लामाबाद,एजेंसी। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है, जिसने महिलाओं की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। Voice of Pakistan Minority (VOPM) के अनुसार, साल 2021 से 2025 के बीच 1,05,571 महिलाओं के लापता होने के मामले दर्ज किए गए। इनमें से 70,773 मामले अपहरण से जुड़े बताए गए हैं। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि करीब 80,767 मामलों को बाद में बंद (कैंसल) कर दिया गया। लेकिन अधिकार संगठन का कहना है कि केस बंद होने का मतलब यह नहीं कि परिवारों को सच्चाई या न्याय मिल गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 77% मामलों (लगभग 80,000 महिलाएं) अदालत में पेश होकर यह कहती हैं कि उन्होंने अपनी मर्जी से घर छोड़ा, अक्सर शादी के लिए। कानूनी तौर पर इसे “सहमति” मान लिया जाता है, लेकिन VOPM ने इस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ये बयान अक्सर सामाजिक दबाव, डर, पारिवारिक मजबूरी और सीमित विकल्पों के कारण दिए जाते हैं। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि यह वास्तव में स्वतंत्र निर्णय है। रिपोर्ट के अनुसार 3,258 महिलाएं अब भी लापता हैं और 3,864 मामले जांच के अधीन हैं। 1,432 मामलों में आरोपी पहचाने गए, लेकिन केस लंबित हैं। 1,820 मामले कानूनी देरी के कारण अटके हुए हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इतने बड़े आंकड़ों के बीच सिर्फ 612 महिलाओं को ही बरामद कर अदालत में पेश किया गया, जो बेहद कम संख्या है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि हर केस एक परिवार की पीड़ा और इंतजार की कहानी है। हजारों परिवार आज भी अपनी बेटियों और बहनों के लौटने की उम्मीद में दरवाजे ताक रहे हैं। VOPM ने चेतावनी दी है कि इतने बड़े आंकड़ों का “सामान्य” हो जाना समाज के लिए खतरनाक संकेत है। यह मुद्दा सिर्फ कानून या प्रशासन का नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, अधिकार और सम्मान से जुड़ा है।
विदेश
डे केयर सेंटर की हैवानियत: नंगा कर हाथ-पैर बांध नशा देकर रखे नन्हे मुन्ने, 53 बिलखते मासूमों की हालत देख दहली दुनिया
जकार्ता, एजेंसी। एक प्राइवेट डेकेयर सेंटर से बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां छोटे-छोटे बच्चों के साथ कथित तौर पर गंभीर दुर्व्यवहार और लापरवाही की घटनाएं सामने आई हैं, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। इंडोनेशिया के योग्याकार्ता (Yogyakarta) शहर का यह मामला तब उजागर हुआ जब “Little Aresha” नाम के डेकेयर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो में कई मासूम बच्चों को रोते हुए, हाथ-पैर बांधकर और बिना उचित देखभाल के फर्श पर लेटे हुए देखा गया। कुछ बच्चे तो घंटों तक उसी हालत में पड़े रहे, जिससे उनकी स्थिति बेहद चिंताजनक लग रही थी।

This is the video of the Horrific daycare abuse in Yogyakarta: 53 toddlers tied up, drugged & neglected. 13 suspects arrested.
https://t.co/B7yu9eWsxe https://t.co/tgxNq2qZOz
— Dapsy𓃵 (@symplyDAPO) April 27, 2026
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने तुरंत छापा मारा और जांच शुरू की। अब तक इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें डेकेयर का मैनेजमेंट और स्टाफ शामिल है। करीब 30 लोगों से पूछताछ की गई है और आगे भी गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। जांच में सामने आया कि इस डेकेयर में कुल 103 बच्चे नामांकित थे, जिनमें से कम से कम 53 बच्चों के साथ दुर्व्यवहार या गंभीर लापरवाही हुई हो सकती है। अधिकांश बच्चे 2 साल से भी कम उम्र के थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, बच्चों को सोते समय भी बांधकर रखा जाता था।
Muslim Daycare is absolutely DISGUSTING this is child abuse … children blindfolded hands tied up and stripped down . https://t.co/SwhyQbAK80
— Lisa Lisa (@LHiggins714) April 27, 2026
अधिकारियों ने सभी प्रभावित बच्चों की मेडिकल जांच शुरू कर दी है और उनके परिवारों से बातचीत की जा रही है। साथ ही बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलिंग भी दी जा रही है, ताकि इस ट्रॉमा से बाहर निकाला जा सके। इस घटना के बाद पूरे इंडोनेशिया में डेकेयर सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञ और अभिभावक मांग कर रहे हैं कि डेकेयर सेंटरों की नियमित जांच हो, स्टाफ की सख्त स्क्रीनिंग हो और CCTV और मॉनिटरिंग सिस्टम अनिवार्य किया जाए ।
बिज़नस
अमेरिका में 70% किसानों पर बढ़ा कर्ज का बोझ; नहीं खरीद पा रहे खाद, बोले- ‘करो या मरो’ की स्थिति
वाशिंगठन, एजेंसी। अमेरिका में इस समय खेती गंभीर संकट से गुजर रही है। एक हालिया सर्वे के अनुसार, लगभग 70 प्रतिशत किसान इस साल अपनी जरूरत के हिसाब से उर्वरक (fertilizer) खरीदने में सक्षम नहीं हैं। यह स्थिति खासकर दक्षिणी राज्यों में और भी खराब है, जहां करीब 78 प्रतिशत किसान खाद नहीं खरीद पा रहे। वे इसकी भरपाई के लिए अपनी फ़सल को घटाने की योजना बना रहे हैं। इस संकट के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है लगातार बढ़ती लागत और पिछले कई वर्षों से हो रहा नुकसान। किसानों को फसल उगाने में जितना खर्च आ रहा है, उतना उन्हें बाजार में दाम नहीं मिल रहा।

उदाहरण के तौर पर, मक्का (corn) उगाने की लागत ज्यादा है, लेकिन बिकने की कीमत उससे कम है। इसी तरह सोयाबीन में भी घाटा हो रहा है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और सप्लाई चेन में रुकावट के कारण खाद की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। कुछ किसानों ने बताया कि अचानक कीमतें इतनी बढ़ गईं कि उनके खर्च में हजारों डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ गया। कई जगह तो सप्लायर कीमत बताने से भी मना कर रहे हैं, क्योंकि बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।इस हालात में किसान तीन तरह के फैसले ले रहे हैं ।कुछ लोग खाद की मात्रा कम कर रहे हैं, कुछ फसल बदल रहे हैं (जैसे मक्का की जगह सोयाबीन), और कुछ मजबूरी में नुकसान झेलने के लिए तैयार हैं। लेकिन इन सभी विकल्पों में जोखिम है, क्योंकि कम खाद डालने से उत्पादन घट सकता है।
एक और बड़ी चिंता यह है कि अगर अभी खाद नहीं मिली, तो फसल बोने का सही समय निकल सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर सप्लाई तुरंत भी शुरू हो जाए, तब भी खाद खेतों तक पहुंचने में करीब एक महीना लग सकता है, जिससे कई किसान इस सीजन में पिछड़ सकते हैं। अमेरिका में किसानों पर कर्ज का बोझ भी तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि कुल कृषि कर्ज रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। इसके साथ ही दिवालिया होने वाले किसानों की संख्या भी बढ़ रही है, जो इस संकट की गंभीरता को दिखाता है।
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