छत्तीसगढ़
‘माननीयों’ की हरेली…खुमरी पहने CM साय की पत्नी संग एंट्री:डिप्टी सीएम का राउत नाचा, भूपेश बघेल ने चलाया लट्टू, गेड़ी चढ़े कलेक्टर
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में रविवार को हरेली तिहार धूमधाम से मनाया गया। मुख्यमंत्री निवास के साथ ही पूर्व CM भूपेश बघेल के निवास पर भी विशेष आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री खुमरी पहने नजर आए तो उनकी पत्नी कौशल्या साय भी पारंपरिक वेशभूषा में थीं।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने सिविल लाइंस निवास में गेड़ी चढ़ने के साथ ही लट्टू चलाते दिखे। उनके अलावा रायपुर कलेक्टर, डिप्टी सीएम साव भी गेड़ी चढ़े। वहीं मुख्यमंत्री निवास में रमन सिंह भी हरेली की पूजा में शामिल रहे।
पहले तस्वीरों में देखिए मुख्यमंत्री निवास का आयोजन

खुमरी पहने पारंपरिक अंदाज में पत्नी के साथ हुई सीएम विष्णुदेव साय की एंट्री

शिवलिंग का अभिषेक करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

भगवान शिव की पूजा के दौरान CM साय उनकी पत्नी और डॉ रमन सिंह।

गौ-सेवा करते दिखे डिप्टी सीएम विजय शर्मा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने निवास कार्यालय में परंपरागत रूप से छत्तीसगढ़ का पहला त्योहार हरेली परिवार और आम लोगों के साथ मनाया। CM साय और उनकी पत्नी ने सबसे पहले विधिवत रूप से तुलसी माता, नांगर, कृषि उपकरणों, गेड़ी की पूजा की। अच्छी फसल, किसानों और प्रदेशवासियों की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी ग्रामीण परिवेश में ढालते हुए, पारंपरिक सजावट और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के अनुरूप सजाया गया। इस मौके पर छत्तीसगढ़ी संगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक गड़वा बाजा, राउत नाचा और गेड़ी नृत्य का भी विशेष आयोजन हुआ। सीएम हाउस में परंपरागत कृषि उपकरणों के स्टॉल भी लगाए गए।
अब पूर्व सीएम भूपेश बघेल की हरेली की तस्वीरें

भूपेश बघेल भी गेड़ी चड़कर पारंपरिक संगीत में थिरकते दिखे

भूपेश बघेल ने चलते लट्टू को हाथ में उठाया
छत्तीसगढ़
23 जून को होगी साय कैबिनेट बैठक:वित्त-स्वास्थ्य, कृषि और बुनियादी ढांचे के बिंदुओं पर होगी चर्चा, कई बड़े फैसलों पर लग सकती है मुहर
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ सरकार की अगली कैबिनेट बैठक 23 जून को आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में होने वाली यह अहम बैठक नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में सुबह 11:30 बजे शुरू होगी।

बैठक को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं और अलग-अलग विभागों के प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। बैठक में राज्य सरकार के कई विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों और नीतिगत मामलों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
माना जा रहा है कि इस दौरान प्रदेश के विकास, प्रशासनिक सुधार और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मंत्रिपरिषद की मुहर लग सकती है। बैठक में वित्त, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और बुनियादी ढांचे जैसे अहम क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर विशेष चर्चा होने की संभावना है। साथ ही सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी और नए प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा।
महत्वपूर्ण माना जा रहा बैठक
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कई नई योजनाओं की घोषणा या पहले से चल रही योजनाओं में संशोधन से जुड़े निर्णय लिए जा सकते हैं।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक सरकार की आगामी रणनीति और प्राथमिकताओं की दिशा भी तय कर सकती है।
छत्तीसगढ़
स्मार्ट मीटर हटाने घर-घर जाकर समर्थन पत्र भरवाएगी कांग्रेस:बैज बोले- 5 बार बढ़ाई गई बिजली दरें, भाजपा बोली- जनता कांग्रेस को नकार चुकी
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में बढ़ते बिजली बिल, स्मार्ट मीटर और बिजली दरों में लगातार हो रही वृद्धि को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। पार्टी ने तय किया है कि जुलाई में कार्यकर्ता घर-घर जाकर स्मार्ट मीटर हटाने के समर्थन में लोगों से समर्थन पत्र भरवाएंगे।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया है कि सरकार आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है, जबकि उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाली नीतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। कांग्रेस ने इन सभी मुद्दों को लेकर आंदोलन का निर्णय लिया है।
ऐसे में आगामी मानसून सत्र में कांग्रेस इस मुद्दे को सदन में मजबूती से उठाएगी और सरकार से जवाब मांगेगी। वहीं, इस मामले में भाजपा का कहना है कि जनता कांग्रेस की आवाज सुनना पसंद नहीं करती है, इसलिए कांग्रेस शांत रहे।
बैज बोले- बिजली बिल बना सबसे बड़ी समस्या
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि प्रदेश में बिजली बिल उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी समस्या बन गया है। लोग बिल सुधार के लिए लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिल पा रहा है।
अगर सरकार ने जल्द ही इस दिशा में आवश्यक कदम नहीं उठाए तो जनता की यह नाराजगी एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकती है।
मानसून सत्र में विधानसभा में घेरेंगे
पार्टी ने घोषणा की है कि आगामी मानसून सत्र में यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया जाएगा। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार से इस पर जवाब मांगेंगे। कांग्रेस का कहना है कि पेट्रोल, डीजल और खाद की कीमतों के साथ-साथ बिजली दरों में वृद्धि भी एक बड़ा मुद्दा बनेगा।
भाजपा सरकार ने पांच बार बिजली बढ़ाई
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद अब तक पांचवीं बार बिजली दरों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम जनता और किसान प्रभावित हो रहे हैं। वहीं स्मार्ट मीटर को लेकर भी बिल बढ़ने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे यह मुद्दा अब प्रदेश की राजनीति में बड़ा सियासी सवाल बन गया है।
छत्तीसगढ़
बिना CGMC मंजूरी छत्तीसगढ़ में काम कर सकेंगे बाहरी डॉक्टर:जूडा बोला- फर्जीवाड़ा बढ़ेगा, लोकल्स की नौकरी खतरे में, स्वास्थ्य मंत्री बोले- व्यवस्था सुधरेगी
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल काउंसिल की ओर से जारी नोटिफिकेशन के बाद प्रदेश में विवाद छिड़ गया है। दोनों नोटिफिकेशन 15 दिन के भीतर जारी किए हैं। पहला नोटिफिकेशन 27 मई को छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल ने जारी किया।
पहले नोटिफिकेशन में कहा गया कि दूसरे राज्यों में पंजीकृत एलोपैथिक चिकित्सकों (MBBS, MD, MS, DNB, DM, MCH) को छत्तीसगढ़ में चिकित्सकीय व्यवसाय (प्रैक्टिस) करने की अनुमति दी जा सकेगी। लेकिन काउंसिल की शर्त होगी कि दूसरे राज्य का कोई डॉक्टर अपना रजिस्ट्रेशन और जरूरी दस्तावेज जमा करेगा।

जांच के बाद उसे छत्तीसगढ़ में प्रैक्टिस करने की अनुमति दी जा सकेगी। इसके बाद 11 जून को छत्तीसगढ़ सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने नोटिफिकेशन जारी किया। जो काउंसिल के आदेश को सुपरसीड करता दिखाई देता है।
ये नोटिफिकेशन कहता है कि दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी बिना अतिरिक्त अनुमति के छत्तीसगढ़ में काम कर सकते हैं। काउंसिल के आदेश का विरोध जूनियर डॉक्टर्स और छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन कर रहे थे।
जूडा और फेडरेशन का कहना है कि, ये दोनों ही नोटिफिकेशन लोकल डॉक्टर्स के भविष्य पर संकट है। इसके साथ की फर्जी डॉक्टरों की संख्या भी बढ़ेगी, जो सीधे मरीजों के भविष्य में संकट है। हालांकि सरकार का तर्क है कि स्वास्थ्य सुविधाओं को ठीक करने अभी ये व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने ये स्पष्ट किया है कि इससे लोकल डॉक्टर्स के भविष्य पर कोई संकट नहीं आएगा। पढ़िए रिपोर्ट…
पहले जारी दो नोटिफिकेशन को डिटेल में समझिए
1. 27 मई 2026 का छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल (CGMC) का आदेश
इस आदेश में कहा गया है कि
- दूसरे राज्यों के MBBS, MD, MS, DNB, DM, MCh डॉक्टरों को राहत दी गई।
- लेकिन शर्त जोड़ी गई अपना रजिस्ट्रेशन और जरूरी दस्तावेज जमा करेगा यानी सेल्फ अटेस्टेशन के बाद ही छत्तीसगढ़ में प्रैक्टिस की अनुमति प्राप्त कर सकते हैं।
- काउंसिल पूरे दस्तावेजों की जांच के बाद अंतिम अनुमति देगा।

ये 27 मई का आदेश है।
2. 11 जून 2026 का स्वास्थ्य विभाग का आदेश
यह आदेश पहले वाले से कहीं ज्यादा व्यापक है।
- यदि कोई व्यक्ति किसी भी राज्य की मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड डॉक्टर है।
- किसी राज्य के नर्सिंग काउंसिल में रजिस्टर्ड है या पैरामेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड है, या नेशनल मेडिकल (NMR) में दर्ज है।
तो वह छत्तीसगढ़ में काम कर सकता है। इस आदेश की सबसे महत्वपूर्ण लाइन है कि प्रैक्टिस के लिए छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल से अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।

ये 11 जून का आदेश है।
दोनों नोटिफिकेशन का व्यावहारिक असर उदाहरण से समझिए
केस 1 – एक MBBS डॉक्टर मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड है।
- पहले: उसे छत्तीसगढ़ में अलग प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता था।
- अब: वह सीधे छत्तीसगढ़ में नौकरी या प्रैक्टिस कर सकता है।
केस 2 – एक नर्स महाराष्ट्र नर्सिंग काउंसिल में रजिस्टर्ड है।
- पहले: स्थानीय पंजीयन को लेकर सवाल उठ सकते थे।
- अब: वह सीधे छत्तीसगढ़ के अस्पताल में काम कर सकती है।
लोकल डॉक्टर बोले- ये राज्य के स्वास्थ्य और डॉक्टरों पर खतरा
पहले नोटिफिकेशन पर CGDF और JDA का कहना है कि उनका विरोध केवल दूसरे राज्यों के डॉक्टरों के आने का नहीं, बल्कि रोजगार, भर्ती और स्थानीय डॉक्टरों के हितों से भी जुड़ा हुआ है।
छत्तीसगढ़ में पहले से 16 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। हर साल 2455 एमबीबीएस और 435 एमडी/एमएस सीटों से नए डॉक्टर तैयार हो रहे हैं। सरकार ने 5 नए मेडिकल कॉलेज खोलने का भी फैसला किया है।
इसके बावजूद सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं और नियमित भर्ती नहीं हो रही है। ऐसे में बाहर के राज्यों के डॉक्टरों को बिना अतिरिक्त स्थानीय अनुमति के प्रैक्टिस की छूट देना स्थानीय डॉक्टरों के हितों के खिलाफ माना जा रहा है।
सरकार बोली- ये अस्थायी व्यवस्था, सत्यापन अनिवार्य, रजिस्ट्रेशन नहीं
पूरे मामले में हमने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से सरकार का पक्ष जाना। मंत्री जायसवाल ने कहा कि, ये अस्थायी व्यवस्था है। हमारे राज्य में डॉक्टरों की कमी है। जब तक कमी पूरी नहीं हो जाती, ये अस्थायी व्यवस्था रहेगी।
यह व्यवस्था डॉक्टरों की कमी वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने के लिए लाई गई है। इससे अस्पतालों को विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध कराने में आसानी होगी। वहीं दोनों नोटिफिकेशन पर उन्होंने तर्क दिया कि पुरानी व्यवस्था में काउंसिल का अप्रूवल अनिवार्य होता था।
डॉक्टरों के विरोध के कारण ये भी
1. राज्य मेडिकल काउंसिल की भूमिका कमजोर होने का डर
अब तक छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के पास यह जानकारी रहती थी कि राज्य में कौन-कौन डॉक्टर प्रैक्टिस कर रहे हैं। यदि दूसरे राज्यों के डॉक्टरों को सीधे काम करने की अनुमति मिल जाती है, तो स्थानीय डॉक्टरों का कहना है कि राज्य की निगरानी व्यवस्था कमजोर हो सकती है।
2. जवाबदेही का सवाल
यदि किसी दूसरे राज्य में पंजीकृत डॉक्टर के खिलाफ शिकायत आती है, तो कार्रवाई कौन करेगा? छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल या उस राज्य की मेडिकल काउंसिल जहां उसका पंजीकरण है? इस पर स्पष्ट व्यवस्था की मांग की जा रही है।
3. रोजगार और प्रतिस्पर्धा
कुछ डॉक्टरों को आशंका है कि बड़े निजी अस्पताल दूसरे राज्यों से डॉक्टर बुलाकर नियुक्तियां करेंगे, जिससे स्थानीय डॉक्टरों के लिए अवसर कम हो सकते हैं या फीस और वेतन पर दबाव बढ़ सकता है।
4. नर्सिंग होम एक्ट के तहत अधिसूचना
मेडिकल प्रैक्टिस और डॉक्टरों के पंजीकरण से जुड़े विषय आमतौर पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) और संबंधित परिषदों के दायरे में आते हैं। ऐसे में राज्य सरकार ने नर्सिंग होम एक्ट के तहत यह आदेश जारी किया है, जिसकी कानूनी व्याख्या पर भी चर्चा हो रही है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भी विरोध में उतरा
इस अधिसूचना का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) रायपुर ने भी कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉक्टर कुलदीप सोलंकी का कहना है कि यदि बिना वैध रजिस्ट्रेशन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए डॉक्टर, नर्स या अन्य हेल्थ प्रोफेशनल्स को प्रैक्टिस की अनुमति दी जाती है, तो इससे मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा होगा।
IMA रायपुर ने कहा कि संबंधित अधिसूचना में कई गंभीर खामियां हैं। संगठन के अनुसार इस तरह की व्यवस्था से प्रदेश में फर्जी चिकित्सकों और अप्रमाणित स्वास्थ्यकर्मियों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, जिससे धोखाधड़ी होने की आशंका है।
IMA ने ये भी कहा है कि अधिसूचना जारी करने का अधिकार संबंधित परिषद या नियामक संस्था का होना चाहिए, न कि केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक स्तर पर। IMA के अनुसार छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के कई पद लंबे समय से रिक्त हैं, जिससे पंजीयन और सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
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