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छत्तीसगढ़

धमतरी : सपनों को उड़ान देने जरूरत होती है साहस और संकल्प की

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“स्कूटी दीदी” एनु की उड़ान

धमतरी । सपनों को उड़ान देने के लिए पंख नहीं, साहस और संकल्प की जरूरत होती है। इसी बात को सत्य साबित किया है छत्तीगसढ के धमतरी की एक साधारण लेकिन जुझारू युवती एनु ने, जो आज “स्कूटी दीदी” के नाम से जानी जाती हैं। संसाधनों की कमी, सामाजिक दबाव और सीमित अवसरों के बावजूद एनु ने न केवल आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को भी सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई।

          एनु का जन्म एक सामान्य ग्रामीण परिवार में हुआ, जहाँ आर्थिक स्थिति सशक्त नहीं थी। परिवार में आय के सीमित स्रोत थे, और लड़कियों की शिक्षा को लेकर अब भी संकोच और संकीर्ण सोच (prevalent ) थी। परन्तु एनु की सोच इससे बिल्कुल अलग थी। वे हमेशा कुछ नया करने और अपने पैरों पर खड़े होने की इच्छा रखती थीं। कठिनाइयों और प्रतिकूलताओं के बीच भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और अर्थशास्त्र में परास्नातक(Post Graduation inEconomics) की उपाधि हासिल की। यह उपलब्धि ही अपने आप में उनके संघर्ष और लगन का प्रतीक थी।

         एनु का लक्ष्य केवल डिग्री लेनी ही मंज़िल नहीं थी। एनु जानती थीं कि केवल शिक्षा से रोजगार नहीं मिलेगा, जब तक उनके पास कोई कौशल न हो। इसी सोच के साथ उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान से जुड़कर सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण लिया। इस प्रशिक्षण ने उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में पहला मजबूत कदम उठाने का अवसर दिया। लेकिन उनका सपना सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं था।

         एनु का अगला कदम था -मोबिलिटी यानी गतिशीलता की। वे चाहती थीं कि खुद स्कूटी चला सकें, ताकि गांव-गांव जाकर महिलाओं से मिलें, प्रशिक्षण दें और उनके जीवन को बदलने में योगदान दे सकें, लेकिन एक ग्रामीण युवती के लिए दोपहिया वाहन चलाना समाज के लिए असामान्य बात थी। इसके लिए उन्हें न केवल आत्मसंदेह से लड़ना पड़ा, बल्कि समाज की रूढ़िवादी सोच से भी लडना पडा। यही पर ‘प्रथम संस्था’ (PRATHAM Foundation) ने उन्हें स्कूटी चलाने का प्रशिक्षण दिया। पहले-पहले जब उन्होंने स्कूटी की चाबी हाथ में ली, तो लोगों ने ताने दिए – “लड़की होकर गाड़ी चलाएगी?”, “क्या ज़रूरत है इधर-उधर घूमने की?”, लेकिन एनु अडिग रहीं। उन्होंने अपने आत्मविश्वास के साथ इन बातों को अनसुना कर, प्रैक्टिस जारी रखी और जल्द ही स्कूटी चलाने में दक्ष हो गईं।

          धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास और कौशल दोनों बढ़ने लगे। अब वे गांवों में स्वतंत्र रूप से घूमने लगीं, महिलाओं से जुड़ीं, उन्हें मोटिवेट करने लगीं और अपनी यात्रा की कहानी सुनाकर उनमें भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देने लगीं। यही वह मोड़ था जब उन्होंने तय किया कि अब वह खुद एक ड्राइविंग स्कूल शुरू करेंगी, ताकि अन्य महिलाओं को भी गाड़ी चलाना सिखा सकें। यह पहल ग्रामीण परिवेश में महिलाओं की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था।

         सन 2023 में एनु अपने सीमित संसाधनों के साथ “महिला दोपहिया प्रशिक्षण केंद्र” की शुरुआत की। शुरू में केवल 2-3 महिलाओं ने प्रशिक्षण लिया, लेकिन जल्द ही यह संख्या बढ़ती चली गई। आज उनकी पहचान पूरे ब्लॉक और जिले में “स्कूटी दीदी” के रूप में हो गई है। उन्होंने अब तक 30 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को दोपहिया वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया है, जिनमें से कई महिलाएं अब स्वयं स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र या बैंक जैसी जगहों पर काम करने के लिए आत्मनिर्भर रूप से आने-जाने लगी हैं।

          एनु की यह पहल न केवल महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास और स्वतंत्रता लाई है, बल्कि सामाजिक सोच को भी बदला है। अब गांवों में लोग अपनी बेटियों और बहुओं को एनु के पास भेजते हैं, यह सीखने कि कैसे वे भी “अपने सपनों की सवारी” कर सकती हैं। उनकी इस उपलब्धि के लिए विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों ने उन्हें सम्मानित भी किया है। हाल ही में उन्हें जिला प्रशासन द्वारा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया गया। एनु का सपना है कि वे आने वाले वर्षों में 1000 महिलाओं को ड्राइविंग सिखाएं और इसके लिए वे जल्द ही चारपहिया ड्राइविंग स्कूल भी शुरू करने की योजना बना रही हैं।

         एनु का जीवन इस बात का प्रमाण है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। उनकी कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है, जो समाज की जंजीरों को तोड़कर आगे बढ़ना चाहती है। स्कूटी दीदी एनु ने दिखा दिया कि सच्ची ताकत बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि भीतर के आत्मबल और दृढ़ निश्चय में होती है।

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छत्तीसगढ़

रायगढ़ में 35 हाथियों के महादल :7 बेबी एलीफेंट भी शामिल, छाल रेंज में बढ़ा मूवमेंट, गांवों में अलर्ट जारी

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रायगढ़, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में जिले में कुल 123 हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इसी बीच छाल रेंज में 35 हाथियों का बड़ा दल देखा गया है, जिसका वीडियो भी सामने आया है। हाथियों का यह दल जंगल और गांव के आसपास विचरण करता नजर आया।

सोमवार शाम छाल वन परिक्षेत्र के बोजिया परिसर स्थित पेलमबांध के पास इस दल को देखा गया। इसमें 3 नर, 25 मादा और 7 शावक शामिल हैं। ग्रामीणों ने भी इस दल को देखा और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किया, जो अब वायरल हो रहा है।

हाथी को जंगल जाने की आवाज लगाने पर हाथी जंगल की ओर चले गए।

हाथी को जंगल जाने की आवाज लगाने पर हाथी जंगल की ओर चले गए।

जिले में 123 हाथियों की मौजूदगी।

जिले में 123 हाथियों की मौजूदगी।

हाथी मित्र दल अलर्ट, गांवों में मुनादी

हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए हाथी मित्र दल लगातार निगरानी कर रहा है। बोजिया से औरानारा मार्ग सहित गड़ाईनबहरी और सिंघीझाप क्षेत्र में लोगों को सतर्क रहने के लिए मुनादी कराई गई है। बताया जा रहा है कि यह दल घरघोड़ा क्षेत्र से छाल रेंज में पहुंचा है।

आवाज देने पर जंगल की ओर लौटे हाथी

छाल रेंज से एक वीडियो में देखा गया कि, सड़क पर आए हाथियों को हाथी मित्र दल के सदस्य ने आवाज देकर जंगल की ओर लौटा दिया। इससे पहले भी इसी तरह की घटना सामने आ चुकी है, जब हाथियों को सुरक्षित जंगल की ओर भेजा गया था।

जिले में 123 हाथियों की मौजूदगी

वन विभाग के अनुसार धरमजयगढ़ वन मंडल में 120 और रायगढ़ रेंज में 3 हाथी हैं। छाल रेंज में सबसे अधिक 59 हाथी, धरमजयगढ़ रेंज में 48 और लैलूंगा रेंज में 13 हाथियों की मौजूदगी है। कुल मिलाकर इनमें 36 नर, 62 मादा और 26 शावक शामिल हैं।

ड्रोन से निगरानी, विभाग सतर्क

वन विभाग द्वारा हाथियों की निगरानी ड्रोन और जमीनी टीम के माध्यम से की जा रही है। छाल रेंज अधिकारी राजेश चौहान ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार नजर रखी जा रही है और ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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छत्तीसगढ़

रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाणपत्र मामले में हाईकोर्ट सख्त:90 दिनों में फैसला देने के निर्देश, याचिकाकर्ता बोला- प्रशासन जानबूझकर सुनवाई टाल रहा था

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सरगुजा, एजेंसी। सरगुजा के सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाणपत्र से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फौरन सुनवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने रायगढ़ कलेक्टर और जिला स्तरीय सत्यापन समिति को 90 दिनों के भीतर इस मामले में फैसला लेने को कहा है।

याचिकाकर्ता बिहारी लाल तिर्की का आरोप है कि जिला प्रशासन जानबूझकर इस मामले की सुनवाई टाल रहा था, जिसके चलते उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। उन्होंने साल 2023 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

उन्होंने विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाणपत्र पर आपत्ति दर्ज कराई थी, जो 19 सितंबर 2023 को रायगढ़ से जारी हुआ था। इस मामले में उन्होंने जिला स्तरीय छानबीन समिति के सामने भी शिकायत पेश की थी।

लेकिन विधानसभा चुनाव के कारण मामले में आगे कार्रवाई नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने न्याय के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, जिस पर अब कोर्ट ने सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया है।

सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो की तस्वीर।

सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो की तस्वीर।

2 साल से अधिक समय से लंबित जांच

बिहारी लाल तिर्की की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पहले ही रायगढ़ की जिला स्तरीय छानबीन समिति को जाति प्रमाणपत्र की जांच के निर्देश दिए थे। हालांकि दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी समिति की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया।

इस पर बिहारी लाल तिर्की ने एक बार फिर हाईकोर्ट की शरण ली, जहां उनकी याचिका पर दोबारा सुनवाई की गई। न्यायाधीश नरेश कुमार चंद्रवंशी की अदालत ने निर्देश दिया कि मामले की जल्द से जल्द सुनवाई की जाए और 90 दिनों के भीतर अंतिम फैसला दिया जाए।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि जिला प्रशासन की ओर से जानबूझकर इस मामले को लंबित रखा जा रहा था, जिसके चलते उन्हें दोबारा कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

बगैर सेटलमेंट बना जाति प्रमाणपत्र

याचिकाकर्ता बिहारीलाल तिर्की ने विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाण पत्र को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह प्रमाण पत्र बिना सेटलमेंट के तैयार किया गया है, जबकि जाति प्रमाण पत्र सरलीकरण के नियमों के तहत बनाए जाते हैं, लेकिन विधायक के मामले में इन सभी नियमों की अनदेखी की गई है।

बिहारीलाल तिर्की के अनुसार रामकुमार टोप्पो के पिता गणेश राम साल 1980 में झारखंड से यहां आकर बसे थे और उनके नाम पर छत्तीसगढ़ में कोई जमीन दर्ज नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरलीकरण के नियमों का पालन नहीं किया गया है और जिला प्रशासन इस गड़बड़ी को छिपाने के लिए जानबूझकर जांच में विलंब कर रहा है।

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छत्तीसगढ़

डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के ड्रेसर का 5000 रिश्वत लेते वीडियो वायरल: सस्पेंड

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जशपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिला अस्पताल के ड्रेसर किशोर कुमार चौहान के रिश्वत लेने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें वो 5 हजार रुपए लेकर गिनते नजर आ रहा है। 2 हजार और देने की बात कह रहा है। वीडियो सामने आने के बाद ड्रेसर को सस्पेंड कर दिया गया है।

सरकारी कर्मचारी ने इलाज के बाद पैसा रिम्बर्समेंट के लिए आवेदन दिया था। जिसे पास करने के एवज में रिश्वत मांगी गई। वीडियो में दोनों 45 हजार रुपए इलाज में खर्च और IVF के बारे में बातचीत करते नजर आ रहे हैं।

ड्रेसर यह भी कह रहा कि, जिसके साइन से पैसा निकल रहा है, उसको पैसा नहीं देना चाह रहे हो तुम। हम चाहते तो बिल को रायपुर भेज देते। लेकिन रायपुर से पास नहीं होता, क्योंकि IVF का पैसा नहीं मिलता है। हालांकि, पैसे देने वाला शख्स सामने नहीं आया है, न ही कोई शिकायत दर्ज कराई है।

ड्रेसर किशोर कुमार चौहान के रिश्वत लेने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा।

ड्रेसर किशोर कुमार चौहान के रिश्वत लेने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा।

पैसे लेने के बाद ड्रेसर ने सामने खड़े व्यक्ति को दस्तावेज दिया।

पैसे लेने के बाद ड्रेसर ने सामने खड़े व्यक्ति को दस्तावेज दिया।

क्या है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार, 9 अप्रैल को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था। इसमें ड्रेसर किशोर कुमार चौहान को मेडिकल रिम्बर्समेंट (चिकित्सा प्रतिपूर्ति) पास कराने के बदले पैसे लेते हुए देखा गया। वीडियो वायरल होने के बाद मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया, जिसके बाद जांच कर कार्रवाई की गई।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने इस मामले को अनुचित आचरण माना है। अधिकारियों के मुताबिक, ऐसी हरकत छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का उल्लंघन है। सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम-9 के तहत ड्रेसर को सस्पेंड किया गया है।

सस्पेंशन के दौरान किशोर कुमार चौहान का मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पत्थलगांव निर्धारित किया गया है। नियमानुसार, उन्हें इस अवधि में जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। इस कार्रवाई के बाद जिला चिकित्सालय सहित स्वास्थ्य विभाग में चर्चा है।

इसी व्यक्ति ने काम के एवज में रिश्वत दी है।

इसी व्यक्ति ने काम के एवज में रिश्वत दी है।

CMHO बोले- विभागीय जांच भी कराई जाएगी

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. जात्रा ने कहा कि, सोशल मीडिया में वायरल वीडियो के आधार पर पहली नजर में मामला गंभीर पाया गया। शासकीय सेवक की तरफ से इस प्रकार की अवैध वसूली न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि विभाग की छवि को भी धूमिल करता है।

इसलिए तत्काल प्रभाव से उन्हें सस्पेंड किया गया है। आगे विभागीय जांच भी कराई जाएगी और दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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