सांसद ज्योत्सना महंत की अध्यक्षता में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक
शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के दिए निर्देश
कोरबा। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक लोकसभा सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत की अध्यक्षता में कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक में सांसद श्रीमती महंत ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य एवं जल जीवन मिशन के कार्य प्राथमिकता से पूर्ण करें। जिला प्रशासन द्वारा शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करते हुए योजनाओं से हितग्राहियों को लाभान्वित किया जाए।
सांसद श्रीमती महंत ने हाथी प्रभावित क्षेत्रो में आमजनों की सुरक्षा हेतु आवश्यक स्थानों में सोलर हाई मास्ट लाइट लगाने की दिशा में सकारात्मक प्रयास करने के निर्देश दिए। मेडिकल कॉलेज सह जिला अस्पताल में स्वास्थ्य उपचार हेतु आने वाले मरीजों को पर्याप्त सुविधा व्यवस्था उपलब्ध कराने हेतु निर्देशित किया। उन्होंने सभी स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों व स्टॉफ की नियुक्ति, आवश्यक उपकरण व दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कही। साथ ही दूरस्थ इलाकों में पोस्टमार्टम (शव परीक्षण) केंद्र, मर्च्युरी, एंबुलेंस का पहुँच बढ़ाने के निर्देश दिए। जिससे ग्रामीण लोगों को आपातकाल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सकें। उन्होंने ग्रामीण वनांचल क्षेत्रों के स्कूलों में आवश्यकतानुसार शिक्षकों की व्यवस्था एवं यथास्थानों में किचन शेड व स्टोर रूम की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत हितग्राहियों को नियमित रूप से प्रदान करने के निर्देश दिए। लोगों के बेहतर स्वास्थ्य हेतु हर घर पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल जीवन मिशन के अधूरे कार्यो को प्राथमिकता से पूर्ण करने हेतु निर्देशित किया। सांसद श्रीमती महंत ने पूर्व बैठक में दिए गए निर्देशों के पालन प्रतिवेदन की समीक्षा की। उन्होंने जिले में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने की दिशा में आवगमन के लिए बेहतर सड़क, आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वच्छता और बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत कार्यों की समीक्षा की। प्रधानमंत्री आवास योजना में जरूरतमंद हितग्राहियों को लाभान्वित करने की दिशा में सभी को समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए। सांसद ने मनरेगा के कार्यों की समीक्षा करते हुए दिए गए लक्ष्य के अनुरूप मनरेगा के कार्यो को समय पर पूर्ण करने एवं समय पर मजदूरी भुगतान के संबंध में निर्देश दिए। साथ ही अधिक से अधिक महिला समूह का कौशल उन्नयन कर स्वरोजगार से जोड़ने की बात कही। हितग्राहियों को पीडीएस दुकानो से समय पर खाद्यान्न वितरण सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। बैठक में सांसद श्रीमती महंत ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, ई-श्रम, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और कृषि सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना, राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम, एकीकृत बाल विकास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, भू-अभिलेख आधुनिकीकरण, दीनदयाल उपाध्याय विद्युतीकरण योजना, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, स्कूल शिक्षा विभाग, जिला व्यापार एवं उद्योग, सांख्यिकी विभाग, नगर पालिक निगम, डीएमएफ अंतर्गत स्वीकृत कार्यों, डिजीटल इण्डिया, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन करने एवं आमजनों को प्राथमिकता से लाभान्वित करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ पवन सिंह कवंर ने जिले के विकास कार्यों में विभागीय अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की सहभागिता को महत्वपूर्ण बताते हुए आपसी समन्वय से कार्य करने एवं स्वीकृत कार्यां को समयावधि में पूर्ण कराने की बात कही। इस दौरान कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बैठक में दिए गए निर्देशों के पालन का आश्वासन देते हुए जिले में शासन की योजनाओं का क्रियान्वयन तथा डीएमएफ के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्वीकृति के लिए शेष जर्जर स्कूल, आंगनबाड़ी के लिए नए भवन निर्माण की स्वीकृति दी जाएगी, स्कूलों में आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कक्षा, प्रयोगशाला, पेयजलापूर्ति हेतु पानी टंकी इत्यादि सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। शैक्षणिक संस्थाओं में सबेरे पौष्टिक नास्ता प्रदान किया जा रहा है। 200 मेधावी छात्रों की रायपुर में नीट, जेईई की तैयारी हेतु निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था की गई है। खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने हेतु उन्हें खेल सामग्री एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराया जाएगा। जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार हेतु विभिन्न निर्माण कार्य प्रगतिरत एवं प्रस्तावित है साथ ही संस्थान में मरीजों के बेहतर उपचार हेतु विशेषज्ञ चिकित्सको एवं अनेक आधुनिक चिकित्सकीय उपकरण उपलब्ध कराया गया है। इसी प्रकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में टीबी मरीजों को हेल्थ वेलनेस सेंटर के माध्यम से गांवों में शिविर लगाकर स्क्रीनिंग कर प्राथमिकता से स्वास्थ्य लाभ पहुँचाया जाएगा, साथ ही बीपी, सुगर के मरीजों को लाभान्वित किया जाएगा। बीसी सखी के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिग सुविधा बढ़ाई जाएगी। कौशल विकास के तहत युवाओं को रोजगार उन्मुखी एवं औद्योगिक संस्थानों के आवश्यकता अनुसार प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। आगामी समय में इंडोर स्टेडियम में आवासीय स्पोर्ट्स एकेडमी विकसित कर खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाएगा। बैठक में पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी, वनमण्डलाधिकारी कोरबा श्रीमती प्रेमलता यादव, जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग, विभिन्न जनपदों एवं नगरीय निकायों के अध्यक्ष, विधायक प्रतिनिधि सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
कोरबा। पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक के कर्री मार्ग पर बैरा उदरदा पर्यटन स्थल तक आवाजाही का मार्ग गेवरा-पेंड्रा रोड रेल लाइन बिछाने से बाधित हो गया है। ग्रामीणों ने अब इस मुद्दे को लेकर सड़क चक्काजाम आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने 10 दिनों का अल्टीमेटम देकर वैकल्पिक मार्ग बनाने की मांग की है।
सोमवार को ग्रामीणों ने कांग्रेस नेता युसूफ खान के नेतृत्व में कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा है कि पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक का बैरा उदरदा पर्यटन स्थल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यह 70 किलोमीटर के आसपास के लोगों का एकमात्र प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी है। पर्यटन स्थल पर घने जंगल और विशाल जलराशि पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं। लेकिन यहां तक पहुंचने का मार्ग गेवरा-पेंड्रा रोड रेल कॉरिडोर की लाइन बिछाने से बाधित हो गया है। 5 साल से काम जारी है। कई दशकों से आवाजाही के मार्ग के बंद होने से ग्रामीणों को परेशानी होगी। इस मार्ग पर अंडरपास, ओवरब्रिज या फिर वैकल्पिक मार्ग का निर्माण कराकर ग्रामीणों को राहत दी जाए। अन्यथा चक्काजाम आंदोलन के लिए विवश होंगे। ज्ञापन में इस मांग के समर्थन में ग्राम पंचायत अड़सरा, बैरा, लैंगी, कुम्हारसानी, पसान, पुटीपखना समेत आसपास की ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने भी हस्ताक्षर किए हैं।
कोरबा। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन का आजीवन संगठन सेवा सम्मान समारोह जमनीपाली के परमेश्वरी होटल में हुआ। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी से सेवानिवृत्त संगठन के वरिष्ठ सदस्यों को शॉल, श्रीफल, सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया। 28 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आजीवन संगठन सेवा सम्मान दिया गया।
जनता यूनियन के प्रांताध्यक्ष अनिल द्विवेदी ने कहा कर्मचारी की सेवानिवृत्ति केवल शासकीय सेवा से है, संगठन से नहीं। प्रांताध्यक्ष द्विवेदी ने कहा कि वरिष्ठ साथियों का लगाव, अनुभव व चिंतन बना रहता है। उनके मार्गदर्शन से वर्तमान पीढ़ी को नई दिशा मिलती है। विशिष्ट अतिथि प्रदीप पाठक ने कहा कि संगठन की मजबूती समर्पित कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ साथियों के सम्मान से है।
अतिविशिष्ट अतिथि उमाशंकर वर्मा ने कहा कि कर्मचारी हितों के संघर्ष में सेवानिवृत्त साथियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम का संचालन उदय राठौर व दिनेश कुमार चंद्रा ने किया।इस मौके पर संगठन के सचिव घनश्याम गबेल, प्रांतीय सदस्य संजय लसार, प्रमोद राठौर, प्रकाश सिंह राठौर, अरुण सागर, पुष्पेंद्र सिंह बैस, दिलेश्वर प्रजापति, मो. नासिर खान, मुरलीधर सोनिकर, त्रिलोक पटेल, सुधेश पाठक आदि मौजूद रहे।
सेवानिवृत्त अतिविशिष्ट अतिथि एसए सईद ने कहा कि यह सम्मान सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए भावुक और यादगार क्षण है। युवा संगठन की अमूल्य धरोहर हैं। वरिष्ठों के अनुभव से सीख लेकर संगठन को आगे बढ़ाएं। सम्मानित सेवानिवृत्त डीएस दीक्षित ने संगठन से अपने लंबे जुड़ाव के अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में संगठन की आजीवन सेवा और कर्मचारी हितों में योगदान के लिए उमेश कुमार श्रीवास्तव, लक्ष्मी नारायण यादव, दुर्गा शंकर दीक्षित, टीपी गुप्ता, राजकुमार अग्रवाल, सत्यनारायण राठौर, सुंदरलाल साहू, उमाशंकर सिंह, छविराम साहू, जोहित राम राठौर, विजय मेहरा समेत अन्य का सम्मान किया।
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में मोबाइल पर रील और सीरियल देखने की लत ने एक महिला की जान ले ली। 52 साल की मंगलो बाई ने रील देखते समय नेटवर्क चले जाने से गुस्से में कीटनाशक पी लिया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
दरअसल, शनिवार दोपहर वह खाना खाते समय मोबाइल पर रील देख रही थी, तभी नेटवर्क गायब हो गया। काफी देर तक रील नहीं चली तो उसने गुस्से में मोबाइल जमीन पर पटक दिया। इसके बाद कमरे में जाकर खुद को बंद कर लिया। अंदर उसने कीटनाशक पी लिया।
पति को जब यह बात पता चली तो उल्टी कराने महिला को गोबर पानी पिला दिया। लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। परिजन उसे करतला स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। रविवार को इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई।
यह घटना करतला थाना क्षेत्र के केराकछार गांव की है। वहीं, कोरबा मेडिकल कॉलेज में पिछले 8 महीनों में आत्महत्या से जुड़े मामलों में 57 लोगों की मौत हो चुकी है।
पुलिस परिजनों को बयान दर्ज कर मामले की जांच शुरू की है।
जानकारी के अनुसार, केराकछार गांव में रहने वाला प्रेमलाल सारथी मजदूरी करता है। वह पत्नी मंगलो बाई (52) और 3 बच्चों का पालन-पोषण करता था। परिजनों के मुताबिक, मंगलो बाई को मोबाइल पर रील और सीरियल देखने की आदत थी।
शनिवार दोपहर करीब 12 बजे मंगलो खाना खा रही थी और साथ में मोबाइल पर रील देख रही थी। इसी दौरान अचानक मोबाइल में नेटवर्क चला गया। उसने कुछ देर इंतजार किया, लेकिन नेटवर्क नहीं आया और रील शुरू नहीं हुई। इससे वह गुस्सा हो गई और मोबाइल को जमीन पर पटक दिया, जिससे वह टूट गया।
इसके बाद मंगलो कमरे के अंदर चली गई और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। करीब 10 मिनट बाद वह कमरे से बाहर आई और बरामदे में जाकर बैठ गई। कुछ देर बाद उसे लगातार उल्टियां होने लगी।
मोबाइल पर रील नहीं चली तो महिला ने कीटनाशक पी लिया।
कमरे में मिला कीटनाशक का खाली डिब्बा
शुरुआत में परिजनों को लगा कि उसकी तबीयत खराब हो गई है। लेकिन उल्टी से जहरीले पदार्थ जैसी दुर्गंध आने पर उन्हें शक हुआ। परिजनों ने कमरे की जांच की तो वहां कीटनाशक का खाली डिब्बा मिला। इसके बाद उन्हें अंदेशा हुआ कि मंगलो ने कीटनाशक पी लिया है।
परिजन तुरंत डायल-112 की मदद से उसे करतला स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर उसे संजीवनी एक्सप्रेस से कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया। यहां उसका इलाज चल रहा था। रविवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
अस्पताल ले जाने से पहले गोबर पानी पिलाया
मृतका के पति प्रेमलाल ने पुलिस को बताया कि गांव में चली आ रही पुरानी मान्यता के चलते अस्पताल ले जाने से पहले उन्होंने मंगलो को उल्टी कराने के लिए गोबर पानी भी पिलाया था। हालांकि, उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ और बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया।
मोबाइल की लत को लेकर एक्सपर्ट ने दी चेतावनी
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अंकित गुप्ता के मुताबिक, आजकल कई परिवारों में माता-पिता काम में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में बच्चों को व्यस्त रखने के लिए उन्हें मोबाइल दे दिया जाता है। धीरे-धीरे मोबाइल ही उनका साथी बन जाता है।
उन्होंने बताया कि स्कूल-कॉलेज में भी मोबाइल का इस्तेमाल और उससे जुड़ी बातें आम हो गई हैं। ऐसे में जब मोबाइल छीन लिया जाता है या ज्यादा इस्तेमाल करने पर डांट पड़ती है तो कुछ बच्चों और युवाओं में अकेलापन, चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ सकता है।
गंभीर स्थिति में वे आत्मघाती कदम तक उठा सकते हैं। ऐसे मामलों में परिवार को बच्चों से बातचीत करने और उनकी परेशानी समझने पर ध्यान देना चाहिए।
8 महीने में 57 लोगों की सुसाइड से मौत
कोरबा मेडिकल कॉलेज में आत्महत्या के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इनमें कई मरीजों को समय पर इलाज मिलने से बचा लिया जाता है, लेकिन पिछले 8 महीनों में ऐसे मामलों में 57 लोगों की मौत हो चुकी है।
यानी औसतन हर महीने करीब 7 लोगों की जान सुसाइड से जा रही है। इन मामलों में बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल हैं।