सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने एवं यातायात सुगम बनाने हेतु प्रभावी कदम उठाने के निर्देश
आवश्यक स्थानों पर रेडियम पट्टी, संकेतक और साइन बोर्ड लगाने हेतु किया निर्देशित
सड़क सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता :- कलेक्टर दुदावत
कोरबा। सांसद लोकसभा क्षेत्र कोरबा श्रीमती ज्योत्सना चरण दास महंत की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में सांसद ने जिले की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने हेतु सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह, कलेक्टर कुणाल दुदावत, पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी, वनमण्डलाधिकारी कोरबा श्रीमती प्रेमलता यादव, जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग और जिला परिवहन अधिकारी विवेक सिन्हा सहित विभागीय अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। सांसद श्रीमती महंत ने सड़कों पर बढ़ती दुर्घटनाओं पर नियंत्रण हेतु विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि दुर्घटनाओं को रोकने प्रभावी कदम उठाएं जाएं। इस हेतु आवश्यक स्थानों में गति अवरोधक, रेडियम पट्टी, संकेतक, साइन बोर्ड अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाए। उन्होंने ओवर स्पीडिंग, बिना हेलमेट, तीन सवारी और बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों पर सख्त चालानी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए। सांसद ने स्कूल-कॉलेजों में शिविर आयोजित कर युवाओं को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए।
बैठक को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्री दुदावत ने जिले में सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण, सड़क सुरक्षा से संबंधित किए गए प्रयास व सड़क सुरक्षा जागरूकता के संबंध में किए गए कार्यो की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने जिले में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में पहल करते हुए सभी विभागों को सौंपे गए दायित्वों का समय पर निर्वहन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने दुर्घटना जन्य क्षेत्रों पर ब्रेकर्स, स्पष्ट साइनेज, रेडियम पट्टियाँ, तथा पेड़ों और झाड़ियों की छटाई कर दृष्टि बाधाओं को प्राथमिकता से दूर करने निर्देश दिए। पुलिस अधीक्षक श्री तिवारी ने बताया कि विभाग द्वारा जिले में ओवर स्पीडिंग, शराब पीकर वाहन चलाने और मोडिफाइड साइलेंसर का उपयोग करने वालों के खिलाफ निरंतर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि अब तक कई लापरवाह चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त किए जा चुके हैं। साथ ही सैकड़ो प्रकरणों में चलानी कार्यवाही भी की गई है। जिससे गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष सड़क दुर्घटना में होने वाली मृत्यु में कमी आई है। उन्होंने बताया कि जिले में नेत्र परीक्षण शिविर आयोजित कर ट्रक, बस जैसे भारी वाहन चालकों सहित हल्की वाहन चालकों एवं आमजनों का दृष्टि परीक्षण कराया जाएगा। जिससे दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके।
बैठक में परिवहन विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान चलाए गए जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। आमजनों एवं विद्यार्थियों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु स्कूल एवं कॉलेजों में प्रत्येक सप्ताह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें शैक्षिक संस्थानों में एनसीसी, एनएसएस, स्काउट गाइड के सदस्यों को शामिल कर सड़क सुरक्षा पर आधारित रंगोली, नुक्कड़ नाटक, क्विज, निबंध आदि गतिविधियाँ नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा।
कोरबा। पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक के कर्री मार्ग पर बैरा उदरदा पर्यटन स्थल तक आवाजाही का मार्ग गेवरा-पेंड्रा रोड रेल लाइन बिछाने से बाधित हो गया है। ग्रामीणों ने अब इस मुद्दे को लेकर सड़क चक्काजाम आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने 10 दिनों का अल्टीमेटम देकर वैकल्पिक मार्ग बनाने की मांग की है।
सोमवार को ग्रामीणों ने कांग्रेस नेता युसूफ खान के नेतृत्व में कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा है कि पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक का बैरा उदरदा पर्यटन स्थल प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यह 70 किलोमीटर के आसपास के लोगों का एकमात्र प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी है। पर्यटन स्थल पर घने जंगल और विशाल जलराशि पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं। लेकिन यहां तक पहुंचने का मार्ग गेवरा-पेंड्रा रोड रेल कॉरिडोर की लाइन बिछाने से बाधित हो गया है। 5 साल से काम जारी है। कई दशकों से आवाजाही के मार्ग के बंद होने से ग्रामीणों को परेशानी होगी। इस मार्ग पर अंडरपास, ओवरब्रिज या फिर वैकल्पिक मार्ग का निर्माण कराकर ग्रामीणों को राहत दी जाए। अन्यथा चक्काजाम आंदोलन के लिए विवश होंगे। ज्ञापन में इस मांग के समर्थन में ग्राम पंचायत अड़सरा, बैरा, लैंगी, कुम्हारसानी, पसान, पुटीपखना समेत आसपास की ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने भी हस्ताक्षर किए हैं।
कोरबा। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन का आजीवन संगठन सेवा सम्मान समारोह जमनीपाली के परमेश्वरी होटल में हुआ। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनी से सेवानिवृत्त संगठन के वरिष्ठ सदस्यों को शॉल, श्रीफल, सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया। 28 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आजीवन संगठन सेवा सम्मान दिया गया।
जनता यूनियन के प्रांताध्यक्ष अनिल द्विवेदी ने कहा कर्मचारी की सेवानिवृत्ति केवल शासकीय सेवा से है, संगठन से नहीं। प्रांताध्यक्ष द्विवेदी ने कहा कि वरिष्ठ साथियों का लगाव, अनुभव व चिंतन बना रहता है। उनके मार्गदर्शन से वर्तमान पीढ़ी को नई दिशा मिलती है। विशिष्ट अतिथि प्रदीप पाठक ने कहा कि संगठन की मजबूती समर्पित कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ साथियों के सम्मान से है।
अतिविशिष्ट अतिथि उमाशंकर वर्मा ने कहा कि कर्मचारी हितों के संघर्ष में सेवानिवृत्त साथियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम का संचालन उदय राठौर व दिनेश कुमार चंद्रा ने किया।इस मौके पर संगठन के सचिव घनश्याम गबेल, प्रांतीय सदस्य संजय लसार, प्रमोद राठौर, प्रकाश सिंह राठौर, अरुण सागर, पुष्पेंद्र सिंह बैस, दिलेश्वर प्रजापति, मो. नासिर खान, मुरलीधर सोनिकर, त्रिलोक पटेल, सुधेश पाठक आदि मौजूद रहे।
सेवानिवृत्त अतिविशिष्ट अतिथि एसए सईद ने कहा कि यह सम्मान सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए भावुक और यादगार क्षण है। युवा संगठन की अमूल्य धरोहर हैं। वरिष्ठों के अनुभव से सीख लेकर संगठन को आगे बढ़ाएं। सम्मानित सेवानिवृत्त डीएस दीक्षित ने संगठन से अपने लंबे जुड़ाव के अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में संगठन की आजीवन सेवा और कर्मचारी हितों में योगदान के लिए उमेश कुमार श्रीवास्तव, लक्ष्मी नारायण यादव, दुर्गा शंकर दीक्षित, टीपी गुप्ता, राजकुमार अग्रवाल, सत्यनारायण राठौर, सुंदरलाल साहू, उमाशंकर सिंह, छविराम साहू, जोहित राम राठौर, विजय मेहरा समेत अन्य का सम्मान किया।
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में मोबाइल पर रील और सीरियल देखने की लत ने एक महिला की जान ले ली। 52 साल की मंगलो बाई ने रील देखते समय नेटवर्क चले जाने से गुस्से में कीटनाशक पी लिया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
दरअसल, शनिवार दोपहर वह खाना खाते समय मोबाइल पर रील देख रही थी, तभी नेटवर्क गायब हो गया। काफी देर तक रील नहीं चली तो उसने गुस्से में मोबाइल जमीन पर पटक दिया। इसके बाद कमरे में जाकर खुद को बंद कर लिया। अंदर उसने कीटनाशक पी लिया।
पति को जब यह बात पता चली तो उल्टी कराने महिला को गोबर पानी पिला दिया। लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। परिजन उसे करतला स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। रविवार को इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई।
यह घटना करतला थाना क्षेत्र के केराकछार गांव की है। वहीं, कोरबा मेडिकल कॉलेज में पिछले 8 महीनों में आत्महत्या से जुड़े मामलों में 57 लोगों की मौत हो चुकी है।
पुलिस परिजनों को बयान दर्ज कर मामले की जांच शुरू की है।
जानकारी के अनुसार, केराकछार गांव में रहने वाला प्रेमलाल सारथी मजदूरी करता है। वह पत्नी मंगलो बाई (52) और 3 बच्चों का पालन-पोषण करता था। परिजनों के मुताबिक, मंगलो बाई को मोबाइल पर रील और सीरियल देखने की आदत थी।
शनिवार दोपहर करीब 12 बजे मंगलो खाना खा रही थी और साथ में मोबाइल पर रील देख रही थी। इसी दौरान अचानक मोबाइल में नेटवर्क चला गया। उसने कुछ देर इंतजार किया, लेकिन नेटवर्क नहीं आया और रील शुरू नहीं हुई। इससे वह गुस्सा हो गई और मोबाइल को जमीन पर पटक दिया, जिससे वह टूट गया।
इसके बाद मंगलो कमरे के अंदर चली गई और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। करीब 10 मिनट बाद वह कमरे से बाहर आई और बरामदे में जाकर बैठ गई। कुछ देर बाद उसे लगातार उल्टियां होने लगी।
मोबाइल पर रील नहीं चली तो महिला ने कीटनाशक पी लिया।
कमरे में मिला कीटनाशक का खाली डिब्बा
शुरुआत में परिजनों को लगा कि उसकी तबीयत खराब हो गई है। लेकिन उल्टी से जहरीले पदार्थ जैसी दुर्गंध आने पर उन्हें शक हुआ। परिजनों ने कमरे की जांच की तो वहां कीटनाशक का खाली डिब्बा मिला। इसके बाद उन्हें अंदेशा हुआ कि मंगलो ने कीटनाशक पी लिया है।
परिजन तुरंत डायल-112 की मदद से उसे करतला स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर उसे संजीवनी एक्सप्रेस से कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया। यहां उसका इलाज चल रहा था। रविवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
अस्पताल ले जाने से पहले गोबर पानी पिलाया
मृतका के पति प्रेमलाल ने पुलिस को बताया कि गांव में चली आ रही पुरानी मान्यता के चलते अस्पताल ले जाने से पहले उन्होंने मंगलो को उल्टी कराने के लिए गोबर पानी भी पिलाया था। हालांकि, उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ और बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया।
मोबाइल की लत को लेकर एक्सपर्ट ने दी चेतावनी
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अंकित गुप्ता के मुताबिक, आजकल कई परिवारों में माता-पिता काम में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में बच्चों को व्यस्त रखने के लिए उन्हें मोबाइल दे दिया जाता है। धीरे-धीरे मोबाइल ही उनका साथी बन जाता है।
उन्होंने बताया कि स्कूल-कॉलेज में भी मोबाइल का इस्तेमाल और उससे जुड़ी बातें आम हो गई हैं। ऐसे में जब मोबाइल छीन लिया जाता है या ज्यादा इस्तेमाल करने पर डांट पड़ती है तो कुछ बच्चों और युवाओं में अकेलापन, चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ सकता है।
गंभीर स्थिति में वे आत्मघाती कदम तक उठा सकते हैं। ऐसे मामलों में परिवार को बच्चों से बातचीत करने और उनकी परेशानी समझने पर ध्यान देना चाहिए।
8 महीने में 57 लोगों की सुसाइड से मौत
कोरबा मेडिकल कॉलेज में आत्महत्या के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इनमें कई मरीजों को समय पर इलाज मिलने से बचा लिया जाता है, लेकिन पिछले 8 महीनों में ऐसे मामलों में 57 लोगों की मौत हो चुकी है।
यानी औसतन हर महीने करीब 7 लोगों की जान सुसाइड से जा रही है। इन मामलों में बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल हैं।