रायपुर, एजेंसी। नकटी गांव के प्रभावित ग्रामीण शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मुख्यमंत्री आवास पहुंच गए और वहां प्रदर्शन शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सड़क पर बैठकर भोजन किया। पुलिस ने उन्हें हटाने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि पहले उनके घर तोड़ दिए गए, अब खाना भी नहीं खाने दिया जा रहा है।
इससे पहले ग्रामीणों ने मंत्री ओपी चौधरी के बंगले का घेराव किया था। वहीं, बुलडोजर कार्रवाई के बाद कई परिवार अपने टूटे हुए मकानों में बारिश और कीचड़ के बीच भी धरने पर बैठे रहे। इससे पहले वे रायपुर कलेक्ट्रेट के सामने भी प्रदर्शन कर चुके हैं और लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
प्रशासन को 5 दिन का अल्टीमेटम
ग्रामीणों ने कहा कि उनकी जमीन वापस चाहिए। तोड़े गए घरों का मुआवजा दें और लोगों पर की गई FIR वापस ली जाए। कलेक्टर ने 10 महिलाओं को मिलने बुलाया। इस दौरान उन्होंने अपनी मांग रखी। कलेक्टर ने ऊपर तक मांग पहुंचाने की बात कही।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सुनवाई नहीं हुई तो राज्यपाल के पास जाएंगे। वहां भी सुनवाई नहीं हुई तो छत्तीसगढ़ में बंद बुलाया जाएगा। 5 दिन का अल्टीमेटम देकर ग्रामीण रवाना हुए।
नकटी गांव के विस्थापितों ने रायपुर में मंत्री ओपी चौधरी के बंगले का घेराव किया था।
85 घर पर चला था बुलडोजर
3 दिन पहले नकटी गांव में 85 घरों पर बुलडोजर चला दिया गया था। बता दें कि प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को EWS मकान दिए हैं, लेकिन सभी को आवास नहीं मिला है। वहीं हाउसिंग बोर्ड का दावा है कि गांव के 77 लोगों ने 15 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा किया था।
सांसद के कार्रवाई नहीं होने के आश्वासन के बाद टूटे घर
बता दें कि कार्रवाई से 2 दिन पहले ही ग्रामीण सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात करने पहुंचे थे। सांसद ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि बरसात तक कोई तोड़फोड़ नहीं होगी। उन्होंने कहा था कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है। इसी बीच 29 जून को 80 घर तोड़ दिए गए।
ग्रामीणों को फिर से उसी जगह बसाया जाए- देवजी भाई
भाजपा नेता देवजी भाई पटेल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विधायक कॉलोनी नवा रायपुर में बनाने और नकटी के ग्रामीणों को उनकी पुरानी जगह पर फिर से बसाने की मांग की है। उन्होंने घर तोड़ने की कार्रवाई को क्रूर बताया।
पटेल ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और पंचायत की आपत्ति के बावजूद कार्रवाई की गई, जो गलत है।
देवजी भाई ने सीएम को पत्र लिखा है।
1 साल पुरानी लिखी चिट्ठी वायरल
नकटी गांव को लेकर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखी एक साल पुरानी चिट्ठी वायरल हो रही है। जिसमें उन्होंने विधायक कॉलोनी के लिए जमीन चयन पर आपत्ति जताई थी। पत्र में कहा था कि गरीबों को हटाना मानवीय दृष्टि से उचित नहीं है।
विधायक कॉलोनी दूसरी जगह शिफ्ट करने की मांग
सरायपाली से कांग्रेस विधायक चातुरीनंद ने नकटी गांव तोड़ने के विरोध में सीएम साय को पत्र लिखा। उन्होंने नकटी गांव में विधायक कॉलोनी बनाने की योजना वापस लेने या नया रायपुर में कहीं कॉलोनी को शिफ्ट करने की मांग की है। विधायक ने इस पूरी घटना को अत्यंत पीड़ादायक, अमानवीय और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
‘गरीबों का घर उजाड़कर विधायक आवास नहीं चाहिए’
चातुरीनंद ने पत्र में लिखा है कि, गरीबों का आशियाना उजाड़कर जनप्रतिनिधियों के लिए आलीशान आवास बनाना किसी भी तरह से सही नहीं है। जनता ने हमें उनके अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए चुना है, न कि उनके सिर से छत छीनकर अपने लिए सुविधाएं खड़ी करने के लिए।
मैं इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध करती हूं और नकटी गांव के सभी पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी हूं। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि, गरीबों का घर उजाड़कर उन्हें ऐसा विधायक आवास बिल्कुल नहीं चाहिए।
विधायक का सुझाव- नवा रायपुर में बनाएं कॉलोनी
विधायक चातुरी नंद ने मुख्यमंत्री को पत्र के माध्यम से सुझाव दिया है कि, विधायकों के लिए आवास कॉलोनी का निर्माण बहुत जरूरी है, तो नवा रायपुर में सैकड़ों एकड़ सरकारी रिक्त भूमि उपलब्ध है।
वहां एक आधुनिक और सुव्यवस्थित विधायक कॉलोनी विकसित की जा सकती है, जिससे राजधानी के किसी भी गरीब परिवार को बेघर होने की पीड़ा नहीं झेलनी पड़ेगी।
जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा के कोटमी सोनार क्षेत्र में पुलिस ने अवैध कच्ची शराब बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है। 22 और 23 अगस्त को उद्यान मोहल्ले में पुलिस ने दबिश दी। पुलिस के पहुंचते ही शराब बनाने में शामिल कुछ लोग मौके से फरार हो गए। टीम ने शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को मौके पर ही नष्ट कर दिया।
पुलिस को ग्रामीणों से लगातार सूचना मिल रही थी कि, उद्यान मोहल्ले में बड़ी मात्रा में महुआ से कच्ची शराब बनाई जा रही है। बताया गया कि यह मोहल्ला देशी शराब दुकान के पास है। आरोप है कि वन विभाग द्वारा लगाए गए पेड़ों की आड़ में अवैध शराब बनाने का काम किया जा रहा था।
एक सप्ताह से लगातार गश्त और दबिश
पुलिस सहायता केंद्र कोटमी सोनार की टीम पिछले करीब एक सप्ताह से क्षेत्र में लगातार गश्त और दबिश दे रही है। पुलिस की कार्रवाई के बाद अवैध शराब के कारोबार से जुड़े कुछ लोगों के गांव से चले जाने की भी जानकारी सामने आई है।
अवैध शराब और जुए पर कार्रवाई जारी
ग्रामीणों के अनुसार, पुलिस सहायता केंद्र में सब इंस्पेक्टर विनोद जाटवर की पदस्थापना के बाद से अवैध शराब बिक्री, शराब कोचियों और जुए के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है। पुलिस की गश्त बढ़ने से अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों पर संरक्षण देने का आरोप
कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधि अवैध शराब से जुड़े लोगों को संरक्षण देने और पुलिस पर दबाव बनाने का प्रयास करते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
नशे से दूर रहने के लिए जागरूकता भी
पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय के निर्देशन में जिले में नशे के खिलाफ जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। अवैध शराब बनाने वाले परिवारों को मुख्यधारा से जुड़ने, बच्चों को शिक्षा दिलाने और नशे से दूर रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने कार्रवाई जारी रखने की मांग की
कोटमी सोनार में पुलिस सहायता केंद्र खुलने के बाद गांवों में पुलिस की पहुंच बढ़ी है। पेट्रोलिंग टीम लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही है। ग्रामीणों ने अवैध शराब और जुए के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रखने की मांग की है।
कोरबा। कोरबा में नाबालिग किशोरी से छेड़छाड़ और अश्लील हरकत के आरोप में सिटी कोतवाली पुलिस ने 67 वर्षीय व्यवसायी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। आरोपी की पहचान चेतन चौधरी के रूप में हुई है, जो शहर के पावर हाउस रोड स्थित शारदा टेलीकॉम का संचालक है।
मामले में पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की है।
विरोध करने पर गाली-गलौज का आरोप
पुलिस के अनुसार, 16 वर्षीय किशोरी ने शिकायत में आरोप लगाया कि चेतन चौधरी उसके साथ अश्लील हरकतें करता था। विरोध करने पर उसके साथ गाली-गलौज भी की जाती थी। घटना से परेशान किशोरी ने इसकी जानकारी अपने परिजनों को दी, जिसके बाद परिजनों ने सिटी कोतवाली थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। मामला पॉक्सो एक्ट से जुड़ा होने के कारण पुलिस आरोपी की तलाश में जुट गई, लेकिन एफआईआर के बाद वह फरार हो गया।
अग्रिम जमानत की अर्जी हुई खारिज
फरारी के दौरान आरोपी ने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक सुनील कुमार मिश्रा ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने कोर्ट के समक्ष मामले की गंभीरता और नाबालिग पीड़िता से जुड़े होने का हवाला दिया।
दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपी का अग्रिम जमानत आवेदन खारिज कर दिया। इसके बाद भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर था।
शहर में छिपे होने की सूचना पर घेराबंदी
मंगलवार (25 अगस्त) को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी शहर में ही छिपा हुआ है। सूचना के आधार पर सिटी कोतवाली पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
पुलिस के मुताबिक मामले की जांच जारी है। पीड़िता के बयान और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इटारसी/जांजगीर-चांपा, एजेंसी। मध्य प्रदेश में छत्तीसगढ़ की 3 बच्चियों की उल्टी-दस्त से मौत हो गई। इंदौर के बेटमा थाना क्षेत्र में फूड पॉइजनिंग के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन 2 बच्चियों ने इंदौर और तीसरी ने इटारसी में दम तोड़ दिया। तीनों एक ही परिवार की थीं।
बेटमा पुलिस के मुताबिक, तीनों बच्चियों की उम्र 10, 8 और 5 साल बताई गई है। इनमें से दो ने इंदौर में दम तोड़ा, जबकि तीसरी की तबीयत छत्तीसगढ़ ले जाते समय बिगड़ गई। उसे इटारसी के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। तीनों बच्चियां मूल रूप से जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़ की रहने वाली थीं।
छत्तीसगढ़ की 3 बच्चियों की उल्टी-दस्त से मौत हो गई।
रात में खाना खाने के बाद तीनों की तबीयत बिगड़ी
परिजन के मुताबिक, पीथमपुर की एलएनटी कंपनी में कार्यरत नरेंद्र सिंह और उनकी पत्नी अमरोतिन के परिवार ने रात करीब 2 बजे दाल, चावल, रोटी और सब्जी खाई थी। खाना खाने के तुरंत बाद उनकी तीनों बेटियों को उल्टी-दस्त शुरू हो गए।
तबीयत बिगड़ने पर बच्चियों को अस्पताल ले जाया गया। इंदौर के अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद दो बच्चियों को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन दोनों के शव एंबुलेंस से पैतृक गांव जांजगीर-चांपा ले जाने के लिए रवाना हुए।
बिना पोस्टमॉर्टम कराए सौंप दिया गया शव
परिजन का आरोप है कि इंदौर के अस्पताल में दोनों बच्चियों के शवों को बिना पोस्टमॉर्टम कराए उन्हें सौंप दिया गया। इसी दौरान एंबुलेंस में साथ मौजूद तीसरी बेटी की तबीयत भी बिगड़ गई। उसे रास्ते में इटारसी के सरकारी अस्पताल ले जाया गया।
डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
मौत की वजह पोस्टमॉर्टम और बिसरा रिपोर्ट से होगी स्पष्ट
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने तीनों बच्चियों के शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल मौत की सटीक वजह स्पष्ट नहीं है। संदिग्ध फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि तीनों की तबीयत खाना खाने के तुरंत बाद बिगड़ी थी।
TI सौरभ पांडे ने बताया कि तीनों लड़कियों का पोस्टमॉर्टम इटारसी में किया जाएगा। इसके बाद, शव उनके परिवारों को सौंप दिए जाएंगे। मौत के वास्तविक कारण का पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और बिसरा जांच के बाद ही चल सकेगा। पुलिस मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर रही है।