कोरबा
जिला साहू संघ में दो फाड़: नाराज दूसरे पक्ष ने बनाया पैरलल कोरबा महानगर साहू संघ
पूर्व अध्यक्ष गिरधारीलाल साहू ने कहा- गिरजा साहू स्वयंभू अध्यक्ष, चुनाव अवैध
कोरबा। आज प्रेस क्लब तिलक भवन टी पी नगर कोरबा में जिला साहू संघ के पूर्व अध्यक्ष गिरधारीलाल साहू सहित नाराज पक्ष ने पत्रकार वार्ता लेकर कोरबा महानगर साहू संघ गठन की जानकारी दी। गिरधारीलाल साहू ने कहा कि मैंने अपने कार्यकाल में विघटित समाज को एकजूट किया और कल जिला साहू संघ चुनाव के पूर्व एकजूट करने का प्रयास किया, लेकिन हर तरह से यह प्रयास असफल रहा और 330 आजीवन सदस्यों का नाम मतदाता सूची से विलोपित कर दिया गया और हम चुनाव नहीं लड़ पाए, क्योंकि उन्होंने अपने बनाए नए बायलॉज में शर्त रख दी थी, जिसमें कहा गया है- जिनका नाम मतदाता सूची में होगा, वही चुनाव लड़ सकेंगे। यूं कहें तो जो उम्मीदवार सामने आ रहे थे, उन्हें हटा दिया गया और गिरजा साहू स्वयंभू अध्यक्ष बन गए।
हम चुनाव का बहिष्कार करते हैं
गिरधारीलाल साहू, वरिष्ठ सदस्य एवं प्रदेश साहू संघ के वरिष्ठ सदस्य रविन्द्र साहू, तहसील अध्यक्ष बालाराम साहू, पूर्व महासचिव धनीराम साहू सहित उपस्थित पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि गिरजा साहू का निर्विरोध अध्यक्ष बनना फर्म एवं सोसायटी के नियम एवं शर्तों के मुताबिक नहीं हुआ और उन्होंने कहा कि जानबूझ कर 330 आजीवन सदस्यों का नाम काट दिया गया और 690 नए सदस्यों को मतदाता सूची में जोड़ा गया। हमें चुनाव लड़ने से रोका गया और हमारे अधिकारों का हनन किया गया। रविन्द्र साहू और गिरधारीलाल साहू ने कहा कि हमने प्रदेश साहू संघ के सामने भी आपत्ति की और पिछली कार्यकारिणी से बातचीत के जरिए एकजुटता का परिचय देने के लिए संवाद की कोशिश की, लेकिन वे हमारी बात सुनने को तैयार नहीं हुए और हमें समाज को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से नया संगठन-कोरबा महानगर साहू संघ का गठन करना पड़ा। हम गत 09 दिसम्बर को हुए जिला साहू संघ के चुनाव का विरोध करते हैं और उस चुनाव को अवैध घोषित कराने के लिए फर्म एवं सोसायटी सहित न्यायालय का शरण लेंगे।
गिरजा साहू के कार्यकाल में एक भी रचनात्मक कार्य नहीं
रविन्द्र साहू एवं पूर्व अध्यक्ष गिरधारीलाल साहू ने कहा कि गिरजा साहू का कार्यकाल तीन साल का था, लेकिन हमारे दबाव के बाद भी वे और प्रदेश संघ ने चुनाव पर कोई दिलचस्पी नहीं ली और दो साल और समय तक वे अध्यक्ष बने रहे। पिछले चुनाव में भी अवैध तरीके से गिरजा साहू जिला अध्यक्ष बने। मात्र 21 मतदाताओं के जरिए वे अध्यक्ष बने।
उन्होंने कहा कि फाऊंडर अध्यक्ष गजानंद प्रसाद साहू ने जिला साहू संघ के लिए जमीन और भवन तथा मैंने विस्तार के लिए काम किया और जिला साहू संघ को उनका अपना भवन मिला और जमीन भी मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि हमारे द्वारा डॉ. रमन सिंह द्वारा झगरहा में 1.85 एकड़ समाज को दी गई जमीन को तात्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को साफ-साफ कह दिया कि हमें जमीन नहीं चाहिए और इस तरह हमें मिली मिलाई जमीन हमारे हाथ से छूट गई। उन्होंने गिरजा साहू पर आरोप लगाया कि वे अपने 5साल के कार्यकाल में एक भी रचनात्मक कार्य नहीं किया और आय-व्यय, लेखाजोखा में 32 लाख खर्च करना बताया, जिसमें 7 लाख की लेनदारी बताई गई है, जबकि समाज के लिए उन्होंने एक भी कार्य नहीं किया।
जिला कोरबा महानगर की नई कार्यकारिणी कुछ इस तरह है

गिरधारीलाल साहू-संरक्षक, धनीराम साहू-संरक्षक, मनकराम साहू-अध्यक्ष, बद्रीप्रसाद साहू-उपाध्यक्ष, पद्मिनी साहू-उपाध्यक्ष, मदनगोपाल साहू-संगठन सचिव, पुनीराम साहू-सचिव, मुन्ना साहू-कोषाध्यक्ष, रविन्द्र साहू-मीडिया प्रभारी/सलाहकार, बालाराम साहू-कार्यवाहक अध्यक्ष, कार्यकारिणी सदस्य- दमन साहू-खरमोरा, सीपी साहू-एमपी नगर, दिनेश साहू-रजगामार, कृष्णा साहू-नेवसा, लोटनापारा, कृपाराम साहू-बालकोनगर, राधेश्याम साहू-हरदीबाजार, घनश्याम साहू-दीपका, श्रीमती रामकुमारी साहू- संरक्षक (महिला), संध्या साहू-कोहड़िया, मुन्ना साहू-संरक्षक/सलाहकार।
पत्रकार वार्ता में सुमनबाला साहू, अंजू साहू, शिवकुमारी साहू, रजनी साहू, नंदिनी साहू, रामकुमारी साहू, राधा साहू, जानकी साहू, सविता साहू, कमला साहू, खुशबू साहू, माधुरी साहू सहित अन्य लोग उपस्थित थे। पूर्व पार्षद पालूराम साहू भी विशेष रूप से उपस्थित थे।
कोरबा
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 का उद्देश्य कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से पर्यावरण प्रदूषण रोकना है – सीईओ
जिला पंचायत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 पर हुई कार्यशाला
कोरबा। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 27 जनवरी 2026 को अधिसूचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026, वर्ष 2016 के पुराने नियमों का स्थान लेंगे। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण को रोकना तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उक्त बातें जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री दिनेश कुमार नाग ने बुधवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 संबंधी कार्यशाला में कही।

सीईओ श्री नाग ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार यह नियम 01 अप्रैल 2026 से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों सहित पूरे देश में लागू हो चुका है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर इन नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे कचरे का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित निपटान हो सके। इसके लिए ग्राम पंचायतों में कचरा संग्रहण शुल्क, शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी। साथ ही नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधान भी सुनिश्चित किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि ग्राम एवं जनपद स्तर पर उत्पन्न होने वाले कचरे की रिपोर्ट प्रत्येक 15 दिवस में तैयार कर प्रस्तुत करनी होगी। राज्य शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति हेतु जून माह तक जिले की 25 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को वैज्ञानिक तरीके से कचरा मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
श्री नाग ने कहा कि स्वच्छता अभियान की शुरुआत स्वयं से करनी होगी। जिला, जनपद एवं ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं कर्मचारी अपने घरों में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन अपनाएं तथा कचरे के पृथक्करण के लिए नीले, हरे, लाल एवं पीले रंग के डस्टबिन का उपयोग करें, ताकि विभिन्न प्रकार के कचरे का पृथक-पृथक निपटान किया जा सके।
कार्यशाला में स्वच्छ भारत मिशन के श्री दीप सरकार द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के उद्देश्य, महत्वपूर्ण विशेषताओं एवं मुख्य प्रावधानों की जानकारी पॉवर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से दी गई।
कार्यक्रम में लेखा अधिकारी श्री राजेंद्र यादव, सहायक परियोजना अधिकारी श्रीमती इंदिरा भगत, श्रीमती अमिता साहू, जनपद पंचायतों के सीईओ, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अधिकारी-कर्मचारी, सहायक विकास विस्तार अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी एवं तकनीकी सहायक उपस्थित रहे।
कोरबा
अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन हेतु अशोक मोदी सहित 13 पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल इंदौर रवाना
कोरबा। अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में सम्मिलित होने हेतु छत्तीसगढ़ संगठन के प्रांतीय चेयरमैन अशोक मोदी, प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. अशोक अग्रवाल, बाबूलाल अग्रवाल, जयदेव सिंघल, महेन्द्र सक्सेरिया, आशीष सक्सेरिया एवं डाॅ. अनिता मोहनलाल सहित अन्य पदाधिकारी आज इंदौर के लिए रवाना हो गए।

विदित हो कि अखिल भारतीय अग्रवाल संगठन का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन दिनांक 30 एवं 31 मई 2026 को इंदौर में आयोजित है। इस अधिवेशन में संगठन के देशभर के प्रदेशाध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री, राष्ट्रीय पदाधिकारीगण एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सम्मिलित होंगे।
अधिवेशन में उपस्थित पदाधिकारीगणों के द्वारा राष्ट्रहित एवं समाजहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा की जायेगी। साथ ही समाजसेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक समरसता एवं राजनीतिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे एवं संगठन की सदस्यता को बढ़ाने एवं इसको 1 करोड तक पहुॅचाने का लक्ष्य रखा जायेगा जिस पर कार्य करने पर भी विचार किया जायेगा।
उक्त कार्यक्रम राष्ट्रीय चेयरमैन प्रदीप मित्तल के सानिध्य में तथा नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण मित्तल की अध्यक्षता में संपन्न होगा।
अशोक मोदी ने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन के कार्यक्रम सराहनीय रहे हैं तथा सामाजिक सेवा, धार्मिक सेवा, व्यापार एवं उद्योग में छत्तीसगढ़ अग्रवाल समाज की बड़ी भूमिका रही है और राष्ट्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में जो ठोस निर्णय लिए जाएंगे, उसे छत्तीसगढ़ में भी लागू किया जाएगा।
कोरबा
कोरबा दीपका में उपचुनाव, हाईकोर्ट पहुंचा मामला, क्या पावर का हुआ गलत इस्तेमाल
प्रत्याशी को चुनाव लड़ने से रोकने मनमाना नियम थोपने का आरोप
हाईकोर्ट के निर्णय पर टिकी शोभा तिग्गा की उम्मीदें
बिलासपुर//कोरबा। कोरबा जिले के नगर पालिका परिषद दीपका अंतर्गत वार्ड क्रमांक 15 में हो रहे उपचुनाव को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है इस उपचुनाव में भाग लेने की इच्छुक अभ्यर्थी का नामांकन पत्र मनमाना नियम थोप कर लेने से अस्वीकार कर कर दिया गया इससे क्षुब्ध हो कर शोभा तिग्ग ने उच्च न्यायालय की शरण ली है अपने अधिवक्ता अंशुल तिवारी के माध्यम से याचिका दायर कर राहत देने की गुहार लगाई है इसमें छत्तीसगढ़ राज्य के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव छत्तीसगढ़ निर्वाचन आयोग के साचिव/कमिश्नर, रायपुर, जिला निर्वाचन अधिकारी कोरबा, मुख्य नगर पालिका अधिकारी दीपका व रिटर्निंग ऑफिसर, वार्ड नंबर 15 को प्रतिवादी बनाया गया है ।

याचिकाकर्ता शोभा तिग्गा वार्ड 15 दीपका की निवासी है, उसने दीपका के वार्ड नंबर 15 के काउंसलर/पार्षद के पद के लिए उसकी उम्मीदवारी में रुकावट डालने के लिए नगर पालिका अधिकारियों की मनमानी कार्रवाई को चुनौती दी है। 11.05.2026 के इलेक्शन नोटिफिकेशन के मुताबिक वह पालिका चुनाव लड़ना चाहती थी और उसने कानून के मुताबिक अपने नामांकन पत्र तैयार किए थे। इलेक्शन शेड्यूल में नॉमिनेशन पेपर फाइल करने की आखिरी तारीख 18.05.2026 तय की गई थी, जिसमें 01.06.2026 को पोलिंग और 04.06.2026 को काउंटिंग तय है ।
दुकान का एनओसी मांगा गया,इसी पर सवाल
शोभा तिग्गा ने हाईकोर्ट को बताया कि उसने पहले साल 2021 में नगर पालिका दीपका के अंतर्गत चौपाटी में दुकान नंबर 06 चलाने के लिए एक एग्रीमेंट किया था और उसी साल उस दुकान से जुड़े सभी ड्यूज़ (बकाया) भी क्लियर कर दिए थे लेकिन जब उसने 18 मई 2026 को अपना नॉमिनेशन पेपर जमा करने के लिए ऑफिस गई तो चीफ म्युनिसिपल ऑफिसर ने एक विवादित लेटर जारी किया जिसमें उसे उस दुकान के संबंध में म्युनिसिपल काउंसिल से एक NOC या पंचनामा पेश करने का निर्देश दिया गया था इसके तुरंत बाद 18 मई को ही शोभा तिग्गा ने एक रिक्वेस्ट दी जिसमें उसी ऑफिस से NOC जारी करने की मांग की गई क्योंकि CMO खुद ही वह अथॉरिटी थे जो ऐसे NOC पर ज़ोर दे रहे थे और किसी भी बकाया का स्टेटस साफ़ करने और NOC जारी करने के लिए भी वही अथॉरिटी थे याचिकाकर्ता ने कहा है कि ऐसे डॉक्यूमेंट पर ज़ोर देना पूरी तरह से मनमाना था और किसी भी कानूनी नियम से सपोर्टेड नहीं था पिटीशनर का कहना है कि 2021 के बाद से उसके खिलाफ कभी कोर्ड बकाया नोटिस डिमांड या रिकवरी की कार्रवाई शुरू नहीं की गई है।
न्याय सिद्धान्तों का उल्लंघन
पिटीशनर शोभा तिग्गा का कहना है कि विवादित कार्रवाई गैर-कानूनी मनमाना और नेचुरल जस्टिस के सिद्धांतों का उल्लंघन है क्योंकि रेस्पोंडेंट्स ने नॉमिनेशन पेपर स्वीकार करने के लिए एक गैर-कानूनी शर्त लगाने की कोशिश की है यह खास तौर पर कहा गया है कि पिटीशनर छत्तीसगढ़ म्युनिसिपैलिटीज एक्ट 1961 के सेक्शन 35 के तहत किसी भी तरह की डिसक्वालिफिकेशन के दायरे में नहीं आती है क्योंकि उसके खिलाफ कोई मौजूदा म्युनिसिपल बकाया नहीं है और डिसक्वालिफिकेशन लिए कानूनी शर्तें नहीं हैं रेस्पोंडेंट बिना इजाज़त NOC की ज़रूरत पर ज़ोर देकर कानूनी तौर पर अयोग्य ठहराए जाने का दायरा नहीं बढ़ा सकते। पिटीशनर ने 18.05.2026 के विवादित लेटर को रद्द करने और रेस्पोंडेंट को यह निर्देश देने की मांग की है कि वे कानून के तहत तय नहीं किए गए किसी भी डॉक्यूमेंट पर ज़ोर दिए बिना उसका नॉमिनेशन पेपर स्वीकार करें और प्रोसेस करें ।
मनमानी, बेमतलब और पावर का गलत इस्तेमाल
शोभा तिग्गा ने याचिका में कहा है कि यह पूरी प्रक्रिया मनमानी बेमतलब और सही प्रक्रिया की बुनियादी ज़रूरतों के खिलाफ है उसको ऐसा कोई कानूनी नियम नहीं दिखाया गया जिसके तहत काउंसिलर/पार्षद के ऑफिस के लिए नॉमिनेशन स्वीकार करने की शर्त के तौर पर नगर निगम से पहले किराए पर ली गई दुकान के संबंध में कोई NOC जमा करने की ज़रूरत हो शोभा का कहना है कि जिस लेटर पर सवाल उठाया गया है वह उसे उसका नॉमिनेशन पेपर दाखिल करने से रोकने का एक साफ तरीका है जिससे चुनाव लड़ने के उसके डेमोक्रेटिक (लोकतांत्रिक) अधिकार को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है आरोप है कि यह सब जानबूझकर रुकावट डालने के मतलब में गलत इरादे से की गई है भले ही किसी भी अधिकारी के खिलाफ कोई निजी गलत इरादे न बताए गए हों बार-बार कहने के बावजूद नॉमिनेशन स्टेज पर एक गैर-कानूनी डॉक्यूमेंट पर ज़ोर देना, पावर का मनमाना इस्तेमाल दिखाता है ।
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