नई दिल्ली, एजेंसी। भारत में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश 2026 में रिकॉर्ड 170 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। यह वृद्धि सौर ऊर्जा और तेल शोधन क्षेत्र के तेज विस्तार के दम पर हो रही है, क्योंकि देश बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने एवं स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के प्रयास तेज कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की ‘विश्व ऊर्जा निवेश 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्ष में भारत में ऊर्जा निवेश औसतन 11 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ा है।
इस दौरान सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) में सालाना आधार पर निवेश 25 प्रतिशत और तेल शोधन में 23 प्रतिशत की दर से बढ़ा। ये दोनों क्षेत्र मिलकर कुल ऊर्जा व्यय में वृद्धि का लगभग एक-चौथाई हिस्सा रहे। रिपोर्ट में कहा गया कि शोधन क्षेत्र में तेज निवेश से भारत 2030 तक अपनी शोधन क्षमता में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, हालांकि देश अब भी आयातित कच्चे तेल पर काफी निर्भर है। वर्ष 2020 के बाद से तेल और गैस के ‘अपस्ट्रीम’ क्षेत्र में निवेश औसतन सात प्रतिशत प्रतिवर्ष घटा है जिससे सरकार ने अन्वेषण एवं उत्पादन में नई पूंजी आकर्षित करने के उद्देश्य से नया लाइसेंसिंग ढांचा लागू किया है।
आईईए के अनुसार, भारत कोयला आपूर्ति में दूसरा सबसे बड़ा निवेशक है और पिछले एक दशक में इस क्षेत्र में निवेश तीन गुना हो गया है। कोयला अब भी भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्रमुख बना हुआ है और यह बिजली उत्पादन तथा औद्योगिक मांग दोनों को आधार प्रदान करता है। कोयला आपूर्ति में निवेश 2026 में 13 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है क्योंकि भारत 2030 तक घरेलू कोयला उत्पादन को वर्तमान लगभग एक अरब टन से बढ़ाकर 1.5 अरब टन करना चाहता है। ऊर्जा क्षेत्र के कुल व्यय में बिजली क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग आधी है।
वर्ष 2025 में भारत ने गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत प्राप्त करने का राष्ट्रीय लक्ष्य तय समय से पांच वर्ष पहले हासिल कर लिया जिसे सौर निवेश में तेज वृद्धि (20 अरब डॉलर तक) का समर्थन मिला। इस बीच, कोयला आधारित बिजली उत्पादन में निवेश 2010 के उच्चतम स्तर के लगभग 40 प्रतिशत तक घट गया है। अब भारत हर एक डॉलर जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन पर खर्च करने के मुकाबले नवीकरणीय और परमाणु ऊर्जा में तीन डॉलर निवेश कर रहा है जो पांच वर्ष पहले 1.5 डॉलर था। देश ग्रिड आधुनिकीकरण, बैटरी भंडारण एवं नियंत्रित (डिस्पैचेबल) बिजली उत्पादन पर भी खर्च बढ़ा रहा है, ताकि नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते हिस्से का समर्थन किया जा सके।
सौर और पवन ऊर्जा अब स्थापित क्षमता का आधे से अधिक हिस्सा हैं जिससे पारेषण उन्नयन और भंडारण प्रणालियों की आवश्यकता बढ़ गई है। जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा में निवेश 2020 के बाद से तीन गुना हो गया है। भारत 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखता है जो वर्तमान नौ गीगावाट से काफी अधिक है। इसके लिए 2025 में सुधार किए गए जिनके तहत 49 प्रतिशत तक विदेशी हिस्सेदारी वाली निजी कंपनियों को रिएक्टर एवं छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर स्थापित व संचालित करने की अनुमति दी गई है। ऊर्जा भंडारण प्रणाली के लिए 2025 में निविदाएं 100 गीगावाट-घंटे से अधिक हो गईं जो पिछले वर्ष से दोगुनी और 2023 के स्तर से 10 गुना अधिक हैं। परियोजनाओं के बड़े पैमाने पर आने से बैटरी भंडारण की दरों में भी तेज गिरावट आई है।
रिपोर्ट में कहा गया, ”पिछले पांच वर्ष में भारत में ऊर्जा निवेश औसतन 11 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ा है और 2026 में 170 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। इस अवधि में सौर पीवी में 25 प्रतिशत और तेल शोधन में 23 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि हुई है और ये दोनों क्षेत्र कुल वृद्धि के एक-चौथाई के लिए जिम्मेदार हैं।” सौर और पवन ऊर्जा में तेज निवेश वृद्धि के कारण इनकी हिस्सेदारी भारत की स्थापित क्षमता में 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है।
रिपोर्ट में कहा गया, ”इन दोनों स्रोतों से परिवर्तनीय नवीकरणीय बिजली में वृद्धि के कारण बिजली क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में उन्नयन आवश्यक हो गया है ताकि उत्पादन में कटौती से बचा जा सके। इसके तहत ग्रिड उन्नयन, ऊर्जा भंडारण क्षमता में वृद्धि और नियंत्रित बिजली उत्पादन का विकास शामिल है जो 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता स्थापित करने के भारत के लक्ष्य के अनुरूप है।” वर्ष 2020 और 2025 के बीच, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा में गैर-जीवाश्म ईंधन से प्राप्त होने वाले स्रोतों में निवेश तीन गुना हो गया है, क्योंकि नई परियोजनाओं पर काम जारी है।
नेपाल में भारतीय करंसी पर नए नियम लागू, जानिए कौन-से नोट होंगे मान्य और कितना ले सकेंगे कैश
काठमांडू,
भारत और नेपाल के बीच यात्रा और व्यापार करने वालों के लिए अच्छी खबर है। नेपाल सरकार ने भारतीय और नेपाली नागरिकों को 9 नवंबर 2016 के बाद जारी रू.200 और रू.500 के भारतीय नोट अधिकतम रू.25,000 तक नेपाल लाने और ले जाने की अनुमति दे दी है। नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने नई अधिसूचना जारी कर इस संबंध में नियम स्पष्ट किए हैं। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि 8 नवंबर 2016 से पहले जारी रू.500 और रू.1,000 के भारतीय नोट पहले की तरह प्रतिबंधित रहेंगे। इन पुराने नोटों को नेपाल में लाने या ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
नेपाली नागरिकों के लिए विशेष नियम
नई अधिसूचना के अनुसार, नेपाली नागरिक भारतीय मुद्रा केवल भारत से नेपाल ला सकेंगे। उन्हें भारतीय करेंसी नेपाल से किसी तीसरे देश में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने कहा कि नए नियम से नेपाल आने वाले भारतीय पर्यटकों और भारत के साथ व्यापार करने वाले नेपाली नागरिकों को काफी सुविधा मिलेगी। इससे सीमा पार नकदी लेन-देन की प्रक्रिया भी सरल होगी। नई अधिसूचना के अनुसार, नेपाली नागरिक और विदेशी यात्री 5,000 अमेरिकी डॉलर या उसके बराबर विदेशी मुद्रा बिना कस्टम घोषणा के नेपाल ला सकते हैं। यदि इससे अधिक राशि लाई जाती है तो कस्टम अधिकारियों के समक्ष इसकी घोषणा करना अनिवार्य होगा। एजेंसी।
दिल्ली-एनसीआर में खुदरा स्थलों का पट्टा जनवरी-जून में 78% बढ़ा: रिपोर्ट
नई दिल्ली,
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में इस वर्ष जनवरी-जून के दौरान शॉपिंग मॉल और खुदरा बाजारों में खुदरा दुकानों की पट्टा गतिविधि 78 प्रतिशत बढ़कर 13 लाख वर्ग फुट हो गई। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। कुशमैन एंड वेकफील्ड की रिपोर्ट कहती है कि यह वृद्धि मुख्य रूप से फैशन दुकानों, खाद्य एवं पेय (एफएंडबी) कंपनियों और डिपार्टमेंटल स्टोर के विस्तार से हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में शॉपिंग मॉल में पट्टा गतिविधि मजबूत रही और इसमें सालाना आधार पर दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मुख्य सड़कों पर पट्टे में चार प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। कुल पट्टा गतिविधियों में फैशन खंड की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत रही, जबकि एफएंडबी का 16 प्रतिशत और डिपार्टमेंटल स्टोर का 12 प्रतिशत योगदान रहा।
कंपनी के अनुसार, बेहतर लोकेशन वाले मॉल और बाजार परिसरों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने से रिक्तता घटी है और किराया बढ़ा है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बुनियादी ढांचे, आवासीय विस्तार और उपभोक्ता मांग में वृद्धि के कारण एनसीआर देश के प्रमुख संगठित खुदरा बाजारों में तेजी से उभर रहा है। एजेंसी।
विदेशी निवेशकों का बदला मूड, ताइवान-कोरिया से पैसा निकाल भारत-चीन में कर रहे निवेश
मुंबई,
वैश्विक निवेशकों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर शेयरों से पैसा निकालकर विदेशी फंड अब भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों के बैंकिंग, आईटी और अन्य अपेक्षाकृत स्थिर सेक्टरों में निवेश बढ़ा रहे हैं। AI निवेश से मिलने वाले रिटर्न को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच यह बदलाव एशियाई बाजारों का निवेश परिदृश्य बदलता दिख रहा है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, फिडेलिटी इंटरनेशनल, BNP Paribas और M&G Investments जैसे निवेशकों ने दक्षिण कोरिया और ताइवान के AI एवं सेमीकंडक्टर शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम करना शुरू किया है। विश्लेषकों का कहना है कि AI पर हो रहे भारी निवेश से मिलने वाले वास्तविक रिटर्न को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे में फंड मैनेजर बैंकिंग, आईटी, ई-कॉमर्स और अन्य अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। विदेशी बिकवाली का असर दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों पर भी दिखा है। निवेशकों की निकासी से दोनों बाजारों में दबाव बना हुआ है और अस्थिरता बढ़ी है।
भारत और चीन विदेशी निवेशकों का केंद्र
दूसरी ओर, भारत और चीन विदेशी निवेशकों के लिए फिर आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। जुलाई के दौरान भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश बढ़ा है, जिससे आईटी सहित कई प्रमुख सेक्टरों को समर्थन मिला। वहीं, चीन में इंटरनेट कंपनियों और बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। इसके अलावा इंडोनेशिया और थाईलैंड के बाजारों में भी मजबूत तेजी देखने को मिल रही है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल तेज जोखिम वाले AI शेयरों की तुलना में बेहतर मूल्यांकन और स्थिर रिटर्न वाले बाजारों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।