छत्तीसगढ़
आबकारी विभाग ने पकड़ी 40 लाख की शराब:सरगुजा में नए साल में खपाने हरियाणा से लाई गई थी, पहले भी पकड़ा चुका है ट्रांसपोर्टर
सरगुजा,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सरगुजा में आबकारी विभाग के संभागीय उड़नदस्ता दल ने ट्रांसपोर्टर के गोदाम से 300 पेटी अवैध अंग्रेजी शराब जब्त की है। जिसकी अनुमानित कीमत करीब 40 लाख रुपए बताई जा रही है। अंग्रेजी शराब की खेप हरियाणा से नए साल में खपाने के लिए मंगाई गई थी।
मामला मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है। जानकारी के मुताबिक, ट्रांसपोर्टर का नाम सौरभ सिंह (34) है। जो अंबिकापुर से लगे कांतिप्रकाशपुर का रहने वाला है। आबकारी टीम आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। इसके पहले भी ट्रांसपोर्टर को पुलिस ने इसी मामले में गिरफ्तार किया था।

पिकअप के जरिए आबकारी गोदाम में रखवाया गया शराब।

गोदाम में हाई क्वालिटी की ब्लैक डॉग व्हिस्की मिली।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, सौरभ सिंह ट्रांसपोर्ट का काम करता है। अंबिकापुर से लगे कांतिप्रकाशपुर में उसका गोदाम है। जहां से वह अवैध तरीके से कारोबार को संचालित करता था। हरियाणा और दूसरे राज्य से शराब मांगता और आसपास के इलाकों में सप्लाई करता था।
ऐसे में एक महीने से उड़नदस्ता टीम निगरानी कर रही थी। टीम को कांतिप्रकाशपुर में शराब की खेप छिपाकर रखने की जानकारी मिली। इसके बाद टीम ने आज सुबह छापामार कार्रवाई की। इस दौरान गोदाम में 300 पेटी अंग्रेजी शराब की खेप मिली।

जब्त की गई शराब की कीमत 40 लाख रुपए आंकी गई है।
हाई क्वालिटी की ब्लैक डॉग व्हिस्की
जांच में पाया गया कि अंग्रेजी शराब हाई क्वालिटी की ब्लैक डॉग व्हिस्की है। जिसे हरियाणा से ट्रकों के जरिए से मंगाई थी। जब्त शराब को 2 पिकअप से आबकारी विभाग के गोदाम में रखा गया है। जबकि आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
एक साल पहले जब्त की गई थी 30 लाख की शराब
इस मामले में संभागीय उड़नदस्ता प्रभारी रंजीत गुप्ता ने बताया कि शराब हरियाणा से लाकर गोदाम में रखा गया था। एक साल पहले भी 30 लाख रुपए की अंग्रेजी शराब जब्त की गई थी। जो कि पंजाब से मंगाई गई थी।
आबकारी एक्ट के तहत केस दर्ज
इस बार हरियाणा की शराब जब्त हुई है। यह जानकारी एकत्र की जा रही है कि शराब किस माध्यम से मंगाई गई थी। मामले में आबकारी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। आबकारी अमले ने आरोपी को हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। मामले की जांच की जा रही है।
कोरबा
कोरबा कार्बन फैक्ट्री में टैंक फटा:कर्मचारी बाल-बाल बचे, दमकल ने आग पर पाया काबू
कोरबा। कोरबा के इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक कार्बन फैक्ट्री में सोमवार दोपहर एक टैंक फट गया। इस घटना से मौके पर हड़कंप मच गया, हालांकि प्लांट के अंदर काम कर रहे कर्मचारी बाल-बाल बच गए। एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

यह फैक्ट्री कार्बन बनाने का काम करती है। इसमें बाहर से टैंकरों के माध्यम से तरल पदार्थ लाकर टैंकों में रखा जाता है, जहां कार्बन तैयार किया जाता है। टैंक फटने के समय फैक्ट्री में कई महिला और पुरुष कर्मचारी मौजूद थे। टैंक फटने के बाद गर्म हार्ड पीच फैक्ट्री के अंदर फैल गया, जो बेहद गर्म था और किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता था।

टैंक फटने के बाद गर्म हार्ड पीच फैक्ट्री के अंदर फैल गया
गर्म पीच को पानी,फायर फोम की मदद से ठंडा किया गया
फैक्ट्री कर्मचारियों ने तत्काल दमकल विभाग को सूचना दी। सीएसईबी के दमकल वाहन मौके पर पहुंचे और गर्म पीच को पानी तथा फायर फोम की मदद से ठंडा किया। सीएसईबी के फायरमैन धर्मेंद्र कुमार पटेल ने बताया कि फायर टीम को इंडस्ट्रियल एरिया में टैंक फटने की सूचना मिली थी, जिसके बाद मौके पर पहुंचकर दो टैंकर पानी और फोम का छिड़काव कर स्थिति को नियंत्रित किया गया।

टैंक फटने से अस पास फिला मलबा और गर्म हार्ड पीच पर फोम का छिड़काव पर किया गया
फैक्ट्री में औद्योगिक नियमों का उल्लंघन:स्थानीय लोग
स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री में औद्योगिक नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है और संबंधित अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कहीं न कहीं लापरवाही के कारण ही यह घटना सामने आई है। फैक्ट्री के बाहर कोई बोर्ड भी नहीं लगा है, जिससे यह पता चल सके कि यहां क्या काम होता है।
इंडस्ट्रियल एरिया से निकलने वाले जहरीले केमिकल और धुएं से आसपास के लोग, खासकर पुलिस लाइन में रहने वाले परिवार, काफी परेशान हैं। इस संबंध में पर्यावरण विभाग से भी शिकायतें की जा चुकी हैं।
कोरबा
कोरबा में निर्माणाधीन मकान की दीवार गिरी:पड़ोस के घर में सो रहे पति-पत्नी और बच्चा मलबे में दबे, हालत गंभीर
कोरबा/कुसमुंडा। कोरबा में रविवार देर रात संतोष वर्मा के निर्माणाधीन मकान की तीसरी मंजिल की दीवार गिर गई। यह दीवार बगल में स्थित अजय धनवार के घर पर गिरी, जिससे अजय धनवार, उनकी पत्नी और उनका छोटा बच्चा मलबे में दब गए।

घटना कुसमुंडा थाना क्षेत्र के प्रेम नगर की है। हादसा तेज आंधी-तूफान और भारी बारिश के दौरान हुआ। मौसम खराब होते ही निर्माणाधीन मकान की ऊपरी दीवार कमजोर होकर सीधे अजय धनवार के घर की छत पर गिर गई।

छप्पर टूटा, घर में मचा हड़कंप
इससे छप्पर टूट गया और सैकड़ों ईंटें घर के अंदर जा गिरीं। घटना के बाद घर में चीख-पुकार मच गई। आवाज सुनकर पड़ोसी तुरंत मौके पर पहुंचे और मलबे में दबे तीनों लोगों को बाहर निकाला। गंभीर रूप से घायल तीनों को तत्काल मोहल्लेवासियों की मदद से कोरबा अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घरेलू सामान को भारी नुकसान
हादसे में घर के अंदर रखा दोपहिया स्कूटर, बर्तन, बिस्तर और अन्य घरेलू सामान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। मकान के भीतर अभी भी ईंटों का मलबा पड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों का ध्यान नहीं रखा गया था, जिसके कारण तेज हवा और बारिश में दीवार गिर गई।
लापरवाही के आरोप, पुलिस जांच में जुटी
लोगों ने निर्माणकर्ता की लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की है। पुलिस को घटना की सूचना दे दी गई है और घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है। यह घटना निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का एक गंभीर मामला बनकर सामने आई है।

कोरबा
राजस्व कार्यों में गंभीर लापरवाही और भू-अभिलेखों में हेराफेरी पर पटवारी निलंबित
कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने शासकीय कार्यों के प्रति उदासीनता और घोर लापरवाही बरतने के कारण पटवारी दीपक कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। तहसीलदार भैंसमा द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर यह पाया गया कि श्री सिंह ने अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन करने में गंभीर अनियमितताएं की हैं, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का उल्लंघन है।
जांच के दौरान ग्राम करूमौहा में राजस्व अभिलेखों के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की पुष्टि हुई है, जिसमें खसरा नंबर 176/1/ख/1 के वास्तविक रकबे 0.016 हेक्टेयर को नियम विरुद्ध तरीके से बढ़ाकर 1.600 हेक्टेयर दर्ज कर दिया गया था। इसी प्रकार एक अन्य मामले में खसरा नंबर 84/4 ख के रकबे को 0.710 हेक्टेयर से बढ़ाकर सीधे 71.000 हेक्टेयर कर दिया गया और बिना किसी वैध आदेश के इसे ऑनलाइन भुइयां पोर्टल पर दर्ज कर दिया गया।
इन गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई करते हुए पटवारी को निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय पसान निर्धारित किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
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