विदेश
हॉर्मुज़ में ईरान का ‘खतरनाक स्मार्ट’ दाव, ‘मच्छर फ्लीट’ से अमेरिकी नौसेना की नाक में किया दम
तेहरान/तेल अवीव/वाशिंगठन, एजेंसी। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान (Iran) ने होर्मुज (Strait of Hormuz) में एक खास तरह की समुद्री रणनीति अपनाई है, जिसे “मच्छर फ्लीट” कहा जाता है। यह रणनीति ईरान की इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड कोर (Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) नौसेना द्वारा इस्तेमाल की जा रही है, जो पारंपरिक नौसेना से अलग काम करती है। इस “मच्छर फ्लीट” में बड़ी युद्धपोतों की बजाय छोटी, बेहद तेज और फुर्तीली नावें शामिल होती हैं। ये नावें अचानक हमला करती हैं और तुरंत गायब हो जाती हैं, इसलिए इन्हें पकड़ना या रोकना मुश्किल होता है। कुछ नावों की रफ्तार 100 knots (करीब 180–185 किमी/घंटा) तक बताई जाती है, जिससे ये बड़े जहाजों के लिए गंभीर खतरा बन जाती हैं।

ईरान इन नावों के साथ ड्रोन और मिसाइलों का भी इस्तेमाल कर रहा है। ये हमले कभी समुद्र से, तो कभी तट पर छिपे ठिकानों से किए जाते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तरह की रणनीति से अब तक कई व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जा चुका है। खासकर छोटे-छोटे समूहों में एक साथ हमला (swarm attack) करना इसकी सबसे खतरनाक रणनीति मानी जाती है। हाल के समय में United States और Israel के हमलों में ईरान के कई बड़े युद्धपोत नष्ट हो गए हैं। इसके बावजूद, ईरान की यह छोटी नावों वाली फ्लीट अब भी सक्रिय है और बड़ी चुनौती बनी हुई है। ये नावें अक्सर समुद्र किनारे बने गुप्त ठिकानों और अंडरग्राउंड बेस में छिपाकर रखी जाती हैं, जहां से इन्हें अचानक तैनात किया जा सकता है।
यह रणनीति नई नहीं है। इसकी शुरुआत Iran-Iraq War के दौरान हुई थी, जब ईरान ने समझा कि वह सीधे बड़े देशों की ताकतवर नौसेना से मुकाबला नहीं कर सकता। इसके बाद उसने “असममित युद्ध” (asymmetric warfare) की रणनीति अपनाई, जिसमें कम संसाधनों से बड़े दुश्मन को नुकसान पहुंचाया जाता है।Strait of Hormuz दुनिया का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जहां से लगभग 20% वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का हमला या बाधा सीधे तौर पर दुनिया की अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि United States की नौसेना तकनीकी रूप से बहुत मजबूत है, लेकिन इतनी छोटी और तेज नावों को ट्रैक करना आसान नहीं होता। अगर बड़ी संख्या में ये नावें एक साथ हमला करें, तो यह बड़े युद्धपोतों के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकती हैं। कुल मिलाकर, ईरान की “मच्छर फ्लीट” रणनीति यह दिखाती है कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ बड़े हथियार ही नहीं, बल्कि स्मार्ट और तेज रणनीति भी बहुत प्रभावी हो सकती है। यही कारण है कि हॉर्मुज़ में बढ़ता यह खतरा अब पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है।
देश
Cannes में राजस्थान की बेटी ने रचा इतिहास, घूंघट ओढ़ रेड कार्पेट पर उतरीं Ruchi Gurjar…महिलाओं की आजादी के लिए उठाई आवाज
कान, एजेंसी। जहां एक तरफ बॉलीवुड की बड़ी-बड़ी हस्तियां लाखों-करोड़ों की ड्रेस पहनकर कान फिल्म फेस्टिवल में शिरकत कर रही हैं। वहीं इसी मंच पर राजस्थान की बेटी ने एक नया इतिहास रच दिया है। आपको बता दें कि अभिनेत्री रुचि गुज्जर ने मॉडर्न ड्रेस न पहनते हुए उन्होंने राजपूती पोशाक पहनकर सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। इतना ही नहीं घाघरा चोली पहनकर उन्होंने साथ में घुघंट भी किया है। रूचि गुज्जर का यह लुक पूरे सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रहा है। इसी के साथ सोशल मीडिया पर अपनी फोटोज के साथ रूचि के एक कैप्शन भी लिखा है। उन्होंने इस कैप्शन में बताया है कि लाइमलाइट लूटने के लिए उन्होंने घूघंट नहीं किया बल्कि इसके पीछे मकसद कुछ और ही था। तो चलिए देखते हैं रूचि गुज्जर की ट्रेंडिंग तस्वीर-


रूचि गुज्जर ने इंटरनेशनल मंच पर राजस्थान की परंपरा और संस्कृति की एक नई कहानी लिख दी है। यह पोशाक पहनकर वो हर जगह चर्चा का विषय बन चुकी हैं।

फोटोज के साथ उन्होंने लिखा है- ”मेरा घूंघट चुप्पी नहीं, विरोध है Freedom From Ghughat”

कान फेस्टिवल में पहुंचकर उन्होंने महिलाओं के लिए आवाज उठाई है। इसी के साथ उन्होंने कहा है कि हमें घूंघट से आजादी चाहिए, ये मेरी चुप्पी नहीं है।

अपने इस खास लुक के जरिए रुचि गुज्जर ने सिर्फ फैशन नहीं दिखाया, बल्कि एक मजबूत सामाजिक संदेश भी दिया। उन्होंने घूंघट प्रथा के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हुए महिलाओं की स्वतंत्रता और पहचान की बात की।

आपको बता दें कि रूचि गुज्जर ने जो ये पोशाक पहनी है वो रूपा शर्मा द्वारा डिज़ाइन की गई है। गुलाबी रंग की इस लहंगा-चोली पर सिल्वर जरी वाली कढ़ाई की गई है।

इसी के साथ उन्होंने कोई सोने-चांदी के गहने नहीं बल्कि राजस्थानी गहने, चूड़ियां पहनी हैं। कान फेस्टिवल में उन्होंने घूघंट के साथ एंट्री की लेकिन बाद में इसे हटा दिया।
कैसे फेमस हुई Ruchi Gurjar ?
इसी के साथ आपको बता दें कि रूचि गुज्जर का पिछले साल वाला लुक भी काफी वायरल हुआ था। पिछली बार उन्होंने अपने गले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर का हार पहना था। इसी नेकलेस के बाद उनकी लोकप्रियता पहले से ज्यादा बढ़ गई।
विदेश
ईरान की संसद में विवादित प्रस्तावः ट्रंप-नेतन्याहू की हत्या करने वाले को मिलेगा ₹500 करोड़ का ईनाम !
तेहरान, एजेंसी। ईरान (Iran) में इन दिनों एक बेहद विवादित प्रस्ताव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी संसद में ऐसा बिल लाने की तैयारी की जा रही है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की हत्या करने वाले को लगभग 58 मिलियन डॉलर (रू.500 करोड़) का इनाम देने की बात कही गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह कदम फरवरी में तेहरान पर हुए हमलों के बाद सामने आया है। दावा किया गया कि उन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई (Ali Khamenei) मारे गए थे।

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी (Ebrahim Azizi) ने कथित तौर पर कहा कि संसद जल्द इस प्रस्ताव पर चर्चा कर सकती है। एक अन्य सांसद महमूद नबावियन( Mahmoud Nabavian) ने भी ट्रंप और नेतन्याहू के खिलाफ “कार्रवाई” की बात कही। इसी बीच ईरान समर्थक कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म और साइबर समूहों ने भी “Kill Trump” जैसे अभियान चलाने के दावे किए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की कोशिशें भी जारी हैं। पाकिस्तान और खाड़ी देशों की मध्यस्थता से बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक कोई बड़ा समझौता नहीं हो पाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है। इजराइल और अमेरिका पहले ही ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं। हालांकि अभी तक ईरानी सरकार की ओर से इस प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। कई विश्लेषक इसे राजनीतिक दबाव और प्रचार रणनीति भी मान रहे हैं।
विदेश
यूक्रेन युद्ध के बीच रूस ने दिखाई परमाणु ताकत ! 64000 सैनिकों संग न्यूक्लियर ड्रिल की शुरू, 200 मिसाइल L व 13 पनडुब्बियां भी शामिल
मॉस्को, एजेंसी। रूस ने मंगलवार से तीन दिन का बड़ा परमाणु सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि इस दौरान बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल लॉन्च का अभ्यास भी किया जाएगा। इस अभ्यास में करीब 64 हजार सैनिक और 7,800 सैन्य उपकरण शामिल हैं। रूस का कहना है कि यह अभ्यास युद्ध जैसी स्थिति में परमाणु बलों की तैयारी जांचने के लिए किया जा रहा है।

रूस ने बताया कि ड्रिल में 200 से ज्यादा मिसाइल लॉन्चर, 140 से ज्यादा विमान, 73 युद्धपोत और 13 पनडुब्बियां शामिल हैं। इनमें 8 रणनीतिक परमाणु पनडुब्बियां भी हैं। रूस की रॉकेट फोर्स, नॉर्दर्न फ्लीट, पैसिफिक फ्लीट और लंबी दूरी की एयर फोर्स इस अभ्यास में हिस्सा ले रही हैं। रूस ने यह भी कहा कि Belarus में तैनात सामरिक परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी इस दौरान दी जाएगी।
यह सैन्य अभ्यास ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया पहले से रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व तनाव और नाटो के साथ बढ़ते टकराव जैसी स्थितियों से गुजर रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ सैन्य अभ्यास नहीं बल्कि रूस का शक्ति प्रदर्शन भी है। माना जा रहा है कि Vladimir Putin पश्चिमी देशों और NATO को रूस की परमाणु ताकत का संदेश देना चाहते हैं। हालांकि रूस का कहना है कि यह एक नियमित सैन्य अभ्यास है।
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