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होर्मुज में फायरिंग पर भड़के ट्रंपः बोले- “No More Mr Nice Guy, अब ईरान ने बात न मानी तो…”

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वाशिंगठन, एजेंसी। जलमार्ग होर्मुज में हुई कथित गोलीबारी ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान (Iran) ने इस क्षेत्र में फायरिंग की, जिसमें एक फ्रांसीसी जहाज और एक ब्रिटेन का मालवाहक जहाज निशाने पर आए। इस घटना को युद्धविराम समझौते का उल्लंघन माना जा रहा है।इस मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अमेरिका का प्रस्तावित समझौता नहीं माना, तो अमेरिका उसके पावर प्लांट और पुलों को निशाना बना सकता है। ट्रंप ने साफ कहा कि अब अमेरिका सख्ती से कार्रवाई करेगा और पीछे नहीं हटेगा।  ट्रंप ने ईरान को “आखिरी मौका” देते हुए कहा है कि वह समझौता स्वीकार करे, वरना कड़ी कार्रवाई होगी। अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर पाकिस्तान जाकर वार्ता करेंगे। 

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 हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर यहां तनाव बढ़ता है या रास्ता बंद होता है, तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। ईरान को भी इससे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी बीच अमेरिका ने अपनी टीम को Islamabad भेजने का फैसला किया है, जहां अगले दौर की बातचीत होगी। ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका के विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner सोमवार को Islamabad पहुंचेंगे। वहां वे ईरान के साथ युद्धविराम (ceasefire) को लेकर अहम बातचीत करेंगे। ट्रंप के अनुसार, यह कूटनीति का “आखिरी प्रयास” है।उन्होंने कहा कि इस डील के अधिकांश बिंदु पहले ही तय हो चुके हैं और ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने होंगे। अब केवल औपचारिक सहमति बाकी है।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलना होगा, जो वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पिछले हफ्ते भी J. D. Vance के नेतृत्व में इस्लामाबाद में बातचीत हुई थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। अब एक बार फिर से कोशिश की जा रही है कि 22 अप्रैल को खत्म हो रहे सीज़फायर से पहले कोई समझौता हो जाए। हालांकि, अभी तक ईरान की ओर से इन नई वार्ताओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। अगर यह बातचीत भी असफल रही, तो अमेरिका और ईरान के बीच बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

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क्या पाकिस्तान रोक पाएगा ईरान-अमेरिका युद्ध? ट्रंप की सख्ती बाद गृह मंत्री नकवी पहुंचे तेहरान, डार की कतर नेताओं से बातचीत

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इस्लामाबाद/तेहरान,एजेंसी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच ठप पड़ी वार्ता को दोबारा शुरू कराने के लिए पाकिस्तान ने अपनी कूटनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी की तेहरान यात्रा और विदेश मंत्री इशाक डार की कतर के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहसिन नकवी ने तेहरान में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच अमेरिका-ईरान वार्ता को फिर से शुरू करने और क्षेत्रीय तनाव कम करने पर चर्चा हुई।

‘डॉन’ अखबार ने राजनयिक सूत्रों के हवाले से दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के नए प्रस्तावों को खारिज किए जाने के बाद पाकिस्तान ने कूटनीतिक प्रयास और तेज कर दिए हैं। इस्लामाबाद की कोशिश है कि वार्ता पूरी तरह विफल न हो और दोनों पक्ष फिर से बातचीत की मेज पर लौटें। इसी बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कतर के राज्य मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलअजीज अल-खुलैफी से फोन पर बातचीत की। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात, पश्चिम एशिया संकट और शांति बहाली के प्रयासों पर चर्चा की।बयान में कहा गया कि दोनों देशों ने क्षेत्रीय चुनौतियों के समाधान के लिए “संवाद और कूटनीतिक भागीदारी” की अहमियत पर जोर दिया। इशाक डार ने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र और दुनिया में “शांति, स्थिरता और समृद्धि” के साझा उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति और ईरान-अमेरिका तनाव पर विचार-विमर्श किया। गौरतलब है कि अप्रैल में पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच पहली वार्ता इस्लामाबाद में हुई थी। हालांकि बातचीत किसी समझौते तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद दोनों देशों के बीच प्रस्ताव और जवाबी प्रस्तावों का दौर जारी है।विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य संकट, तेल आपूर्ति में रुकावट और क्षेत्रीय अस्थिरता को देखते हुए पाकिस्तान खुद को एक अहम मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

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ईरान ने की पुष्टिः युद्ध रोकने के लिए अमेरिका से बातचीत जारी, पाकिस्तान के जरिए नए प्रस्ताव पर दोनों देशों ने भेजी टिप्पणियां

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तेहरान, एजेंसी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच ईरान ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत अभी भी जारी है और इसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने सोमवार को तेहरान में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान दोनों ने तेहरान के हालिया प्रस्ताव पर अपनी-अपनी टिप्पणियां भेज दी हैं। उन्होंने संकेत दिए कि बैकडोर डिप्लोमेसी के जरिए युद्ध रोकने की कोशिशें जारी हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान ने रविवार रात ईरान का संशोधित शांति प्रस्ताव अमेरिका तक पहुंचाया। सूत्रों ने कहा कि “समय बहुत कम है” और दोनों पक्ष लगातार अपनी शर्तें बदल रहे हैं, जिससे समझौते तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।

इस बीच ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब के साथ संबंधों को लेकर भी सफाई दी। इस्माइल बकाई ने कहा कि ईरान की यूएई से कोई दुश्मनी नहीं है। उनका बयान ऐसे समय आया जब यूएई और सऊदी अरब में ड्रोन हमलों की खबरें सामने आईं। यूएई अधिकारियों के अनुसार, अबू धाबी के पास एक परमाणु संयंत्र के नजदीक ड्रोन हमले के बाद आग लग गई थी, हालांकि संयंत्र को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और सभी यूनिट सामान्य रूप से काम करती रहीं। वहीं सऊदी अरब ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने इराकी हवाई क्षेत्र से आए तीन ड्रोन मार गिराए।

ईरानी प्रवक्ता ने यह भी बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन को लेकर ओमान के साथ बातचीत चल रही है। इस जलमार्ग से दुनिया की बड़ी तेल आपूर्ति गुजरती है और यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में चिंता बनी हुई है। ईरान ने साफ किया कि उसकी प्रमुख मांगों में विदेशी बैंकों में जमा ईरानी फंड जारी करना और अमेरिकी प्रतिबंध हटाना शामिल है। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, ताकि क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के खतरे को रोका जा सके।

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ईरान की मस्जिदों में युद्ध की तैयारी ! AK-47 चलाना सीख रहे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी ले रहे ट्रेनिंग

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तेहरान, एजेंसी। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान से कई चौंकाने वाले वीडियो सामने आए हैं, जिनमें आम नागरिकों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती दिखाई दे रही है। इन वीडियो में छोटे बच्चों, युवाओं, लड़कियों और बुजुर्गों तक को AK-47 जैसी राइफल इस्तेमाल करना सिखाया जा रहा है।रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के कई शहरों की मस्जिदों और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष “डिफेंस ट्रेनिंग सेशन” आयोजित किए जा रहे हैं। सरकारी टीवी चैनलों पर भी इन कार्यक्रमों का प्रसारण किया गया, जहां इसे “देश की रक्षा के लिए जनता की तैयारी” बताया गया।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लड़कियों को AK-47 को असेंबल और डिसअसेंबल करना सिखाया जा रहा है। वहीं बड़ी संख्या में युवा और आम नागरिक तेहरान की सड़कों पर हथियार चलाने की प्रैक्टिस करते नजर आ रहे हैं। ईरानी सरकारी मीडिया ने इस अभियान को “जान फिदा बराए ईरान” नाम दिया है। अधिकारियों के अनुसार इसका उद्देश्य अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच लोगों को इस्लामी गणराज्य के समर्थन में एकजुट करना है।सरकारी दावों के मुताबिक, इस अभियान के लिए अब तक करीब 3.1 करोड़ लोगों ने पंजीकरण कराया है। हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

इससे पहले ईरानी टीवी का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें स्टूडियो के अंदर एक एंकर को AK-47 चलाने और इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी जा रही थी। वीडियो में सैन्य वर्दी पहने एक व्यक्ति बंदूक के इस्तेमाल का तरीका समझाता नजर आया था। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की लगातार चेतावनियों और संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं के बीच ईरान नागरिक स्तर पर “राष्ट्रीय रक्षा तैयारी” का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।

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