खेल
ईशान किशन जयपुर की मॉडल से शादी करेंगे:क्रिकेटर के दादा ने अदिति हुंडिया का नाम बताया, बोले- ईशान की पसंद ही मेरी पसंद
पटना,एजेंसी। टी-20 वर्ल्ड कप में रविवार को भारत और पाकिस्तान का मुकाबला हो रहा है। भारत ने टी-20 वर्ल्ड कप में भारत के 176 रन के टारगेट का पीछा कर रही पाकिस्तान टीम के टॉप-4 बैटर्स पवेलियन लौट गए हैं। 7 ओवर में पाकिस्तान टीम का स्कोर 47/4 है। उस्मान खान और शादाब खान क्रीज पर हैं।
5वें ओवर की 5वीं बॉल पर अक्षर पटेल ने बाबर आजम को बोल्ड कर दिया। बाबर 5 रन बनाकर आउट हुए। दूसरे ओवर में जसप्रीत बुमराह ने सलमान अली आगा (6 रन) और सईम अयूब (6 रन) को पवेलियन भेजा। हार्दिक पंड्या ने साहिबजादा फरहान (जीरो) को आउट किया।
कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए भारतीय टीम ने 20 ओवर में 7 विकेट पर 175 रन बनाए। ईशान किशन ने 40 बॉल पर 77 रन की पारी खेली। इस पारी में 10 चौके और 3 छक्के शामिल हैं। कप्तान सूर्यकुमार ने 32 रन बनाए। सईम अयूब ने 3 विकेट।
टीम इंडिया के ओपनर और बिहार के रहने वाले ईशान किशन की शादी की चर्चा जोरों पर है। ऐसा इसलिए, क्योंकि उनके और जयपुर की मॉडल अदिति हुंडिया के अफेयर की पुष्टि हो गई है। ईशान की गर्लफ्रेंड का नाम उनके दादा अनुराग पांडेय ने ही बताया, जिससे उनके रिलेशनशिप पर मुहर लग गई है एक इंटरव्यू में पांडेय ने कहा-
ईशान जिससे भी शादी करेगा हमें स्वीकार है। उसके बड़े भाई ने कहा था कि पल्लवी से शादी करेंगे, तो हमने करवा दी थी। अब इसकी भी करवा देंगे। अदिति उसकी गर्लफ्रेंड है। वो जयपुर में रहती है। मॉडल है, मिस इंडिया कंटेस्ट में दूसरे नंबर पर आई थी।
बताया जा रहा है कि टी-20 वर्ल्ड कप के बाद ईशान शादी के बंधन में बंध सकते हैं। हालांकि इस बारे में अभी दोनों परिवारों की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है।
ईशान की गर्लफ्रेंड अदिति की तस्वीरें..

अदिति पेशे से मॉडल हैं। वे नेशनल ब्यूटी क्वीन कॉन्टेस्ट तक पहुंची हैं।

अदिति हुंडिया मिस डीवा 2018 की विनर भी रह चुकी हैं।

अदिति फेमिना मिस इंडिया की फाइनलिस्ट रह चुकी हैं।

पटियाला सूट में फोटो शूट कराती हुईं अदिति का वीडियो।
अदिति पेशे से मॉडल, पिता जयपुर में कारोबारी
अदिति हुंडिया के पिता जयपुर में कारोबारी हैं। वे मिस डीवा 2018 की विनर रह चुकी हैं। यहीं से उन्हें मॉडलिंग की दुनिया में अलग पहचान मिलनी शुरू हुई थी।
वे फेमिना मिस इंडिया की फाइनलिस्ट भी रह चुकी हैं। नेशनल ब्यूटी क्वीन कॉन्सटेस्ट तक पहुंची हैं। फैशन क्रेडिबिलिटी के साथ सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं।
ईशान किशन और अदिति हुंडिया के अफेयर की चर्चा 2019 IPL के दौरान ही होने लगी थी। स्टैंड में अदिति की मौजूदगी ‘मिस्ट्री फैनगर्ल’ के रूप में चर्चा का विषय बनने लगी थी।
ईशान के दादा बोले- लोग क्या कहेंगे, इससे फर्क नहीं पड़ता
ईशान किशन के दादा अनुराग पांडेय शनिवार को औरंगाबाद स्थित अपने गांव पहुंचे थे। यहां उन्होंने गांव वालों से मुलाकात की और कुछ मीडियाकर्मियों से भी बातचीत की। मीडियार्मियों ने उनसे ईशान किशन की शादी को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने कहा-
ईशान किशन की एक दोस्त है। जिसका नाम अदिति है। वो जयपुर की रहने वाली है। मॉडलिंग की दुनिया में अपना करियर बना रही है। इन दोनों की काफी दिनों से जान पहचान है। परिवार में इसको लेकर बातचीत हुई है। जो ईशान की पसंद है। हम उस पर तैयार हैं।
न्यूज एजेंसी से बात करते हुए ईशान के दादा ने कहा- अदिति ने उनका एक इंटरव्यू देखा था और उनकी खूब तारीफ की थी। वो कह रही थी कि आपके बाबा अभी भी बहुत सुंदर लगते हैं, उनका चेहरा चमकता है।
2 साल बाद T-20 वर्ल्डकप में ईशान किशन की वापसी
ईशान किशन पिछले डेढ़ साल से टीम इंडिया से बाहर थे। इस दौरान वे करियर के मुश्किल दौर में रहे। लेकिन अब ईशान ने जोरदार कमबैक किया है।
ईशान का बल्ला लगभग हर मुकाबले में चलता नजर आ रहा है। ईशान के हर मैच में अदिति भी नजर आ रही हैं।
ईशान ने क्रिकेट के लिए स्कूल छोड़ दिया था
इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे तेज दोहरा शतक लगाने वाले ईशान किशन ने खेल के लिए स्कूल छोड़ दिया था। ईशान की क्रिकेट के प्रति दीवानगी से टीचर भी परेशान थे, बार-बार क्लास में खड़ा किए जाने के बाद भी ईशान ग्राउंड में टिके रहते।
टीचर ने साफ कह दिया कि पढ़ाई और क्रिकेट एकसाथ नहीं चल सकता, ईशान को दोनों में से एक रास्ता चुनना होगा। ईशान ने टीचर से साफ कह दिया कि वे खेल के लिए पढ़ाई भी छोड़ सकते हैं।
ईशान के बचपन के दोस्त यशस्वी सिंह बताते हैं कि ईशान के जैसा क्रिकेट का दीवाना नहीं देखा। वह खाना-पीना सब भूल जाते थे। ऐसा लगता था कि ईशान के लिए क्रिकेट से बढ़कर कुछ भी नहीं। वह कब खेलने के लिए पटना से रांची पहुंच जाते थे कुछ पता ही नहीं चल पाता था।
स्कूल से बाहर कर दिए जाने के बाद भी ईशान को कोई तकलीफ नहीं थी, क्योंकि वह जानते थे कि उनका बल्ला एक न एक दिन भारत के लिए इतिहास बनाएगा। यशस्वी बताते हैं कि वे क्लास 9 में ईशान के साथ डीपीएस पब्लिक स्कूल में पढ़ते थे। इस स्कूल से ईशान को निकाल दिया गया था। बाद में ईशान ने फुलवारी के एक प्राइवेट स्कूल से मैट्रिक किया था।

ईशान किशन (बाएं से दूसरे) अपने दोस्त यशस्वी (बाएं से तीसरा) के साथ।
7 साल की उम्र में पकड़ा था बल्ला
पटना के बेली रोड के आशियाना में 7 साल की उम्र में ही बल्ला पकड़ने वाले ईशान बेहतरीन विकेट कीपर और बैट्समैन हैं। वे झारखंड की ओर से रणजी खेलते थे। ईशान का टैलेंट कोच और टीम इंडिया के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ के मार्गदर्शन में निखरा और उन्हें अंडर-19 टीम की कप्तानी का मौका मिला।
ईशान बचपन से ही क्रिकेट के दीवाने रहे। क्रिकेट के प्रति उनका जुनून ऐसा था कि वे पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते थे। उनके इस जुनून के चलते वे पढ़ाई में पीछे हो गए थे।

ईशान किशन (ऊपर बाएं) अपने बड़े भाई राज (बाएं), नीचे बाएं से मां-दादी और पिता के साथ।
डेफिनेट के नाम से बुलाते हैं दोस्त
ईशान को उनके दोस्त डेफिनेट बुलाते हैं। यह नाम फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में जिशान कादरी द्वारा निभाए गए डेफिनेट के किरदार से आया था। दोस्तों का मानना है कि किशन जो एक बार तय कर लेते हैं, उसे पूरा ही करते हैं। इसलिए लोग उन्हें इसी नाम से पुकारते हैं।
ईशान- एडम गिलक्रिस्ट, राहुल द्रविड़ और धोनी के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। क्रिकेट के अलावा, ईशान को टेबल टेनिस और बिलियर्ड्स खेलना काफी पसंद है।

खेल
पहली बार छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी का इंडिया A में चयन:आयुष पांडेय श्रीलंका के खिलाफ खेलेंगे, 25 जून से होने वाले 4 दिवसीय-सीरीज में दिखेंगे
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। प्रदेश के रणजी खिलाड़ी और बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज आयुष पांडे का चयन भारतीय ए टीम में हुआ है। राज्य में यह पहली बार है, जब किसी खिलाड़ी का चयन भारतीय ए टीम के लिए हुआ है।

आयुष 25 जून 2026 से शुरू होने वाली श्रीलंका ए के खिलाफ चार दिवसीय सीरीज में भारत ए टीम का हिस्सा होंगे। आयुष पांडे ने पिछले रणजी ट्रॉफी सीजन में छत्तीसगढ़ की ओर से शानदार प्रदर्शन किया था।
उन्होंने 7 मैचों की 13 पारियों में 57.30 की औसत से 573 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 2 शतक और 2 अर्धशतक निकले। उनका सर्वोच्च स्कोर 183 रन रहा। रणजी ट्रॉफी में लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर आयुष का चयन दलीप ट्रॉफी के लिए भी हुआ था।
वहां भी उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित किया। दलीप ट्रॉफी में 2 मैचों की 3 पारियों में उन्होंने 53.92 की औसत से 102 रन बनाए।
भारत A टीम क्या है?
भारत A टीम को भारतीय क्रिकेट की “दूसरी राष्ट्रीय टीम” या राष्ट्रीय टीम की फीडर टीम कहा जाता है। इसमें घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी, विजय हजारे आदि) में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को मौका दिया जाता है।
इसका मुख्य उद्देश्य सीनियर भारतीय टीम के संभावित खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर जैसी प्रतिस्पर्धा में परखना होता है।

भारत A टीम का रोल क्या होता है?
- सीनियर भारतीय टीम के लिए खिलाड़ियों की तैयारी करना।
- घरेलू क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बीच की खाई को कम करना।
- चयनकर्ताओं को यह देखने का मौका देना कि खिलाड़ी विदेशी या मजबूत विपक्ष के खिलाफ कैसा प्रदर्शन करता है।
- टेस्ट क्रिकेट के संभावित खिलाड़ियों को लंबे प्रारूप के मैचों में परखना।
खेल
कवर्धा: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने राष्ट्रीय पदक विजेता बेसबॉल खिलाडि़यों का किया सम्मान
कवर्धा के पांच खिलाडि़यों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीते 3 स्वर्ण और 2 रजत पदक


कवर्धा। ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित 31वीं राष्ट्रीय सब जूनियर बेसबॉल बालक एवं बालिका प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले कवर्धा के खिलाडि़यों से उप मुख्यमंत्री एवं विधायक कवर्धा विजय शर्मा ने अपने कवर्धा स्थित निवास कार्यालय में मुलाकात कर उन्हें शुभकामनाएं दीं तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

एमेच्योर बेसबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में 24 से 29 मई तक आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रयास स्पोर्ट्स अकादमी कवर्धा के पांच खिलाडि़यों का छत्तीसगढ़ टीम में चयन हुआ था। इनमें बालक वर्ग से चंद्रेश कोर्राम, पंकज मेरावी और शुभम सेन तथा बालिका वर्ग से चांदनी साहू और जयश्री घृतलहरे शामिल थीं। प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की बालक टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि बालिका टीम ने रजत पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने खिलाडि़यों को बधाई देते हुए कहा कि ग्रामीण अंचलों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। खिलाडि़यों की यह सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी।
अकादमी के प्रशिक्षक राजा जोशी ने बताया कि खिलाडि़यों का चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर हुआ था। राष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान छत्तीसगढ़ की बालक टीम ने मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, राजस्थान और दिल्ली जैसी मजबूत टीमों को हराकर फाइनल में महाराष्ट्र को 6-2 से पराजित कर राष्ट्रीय खिताब अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में चंद्रेश कोर्राम ने शानदार होमरन लगाकर टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में तीन होमरन लगाए।
वहीं बालिका वर्ग में छत्तीसगढ़ टीम ने दिल्ली, तेलंगाना और मेजबान ओडिशा को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। हालांकि फाइनल मुकाबले में महाराष्ट्र के खिलाफ टीम को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन रजत पदक जीतकर खिलाडि़यों ने शानदार प्रदर्शन किया। चांदनी साहू और जयश्री घृतलहरे ने टीम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। खिलाडि़यों की इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर खेल प्रेमियों, अभिभावकों और जिलेवासियों में उत्साह का माहौल है। सभी ने खिलाडि़यों एवं उनके प्रशिक्षकों को बधाई देते हुए भविष्य में और बड़ी सफलताओं की शुभकामनाएं दी हैं।
खेल
20 साल के प्रज्ञानानंदा ने रचा इतिहास, प्रतिष्ठित ‘नार्वे शतरंज’ का खिताब जीतने वाले बने पहले भारतीय
ओस्लो/नई दिल्ली/चेन्नई, एजेंसी। भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा (R Praggnanandhaa) ने वैश्विक शतरंज की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने सबसे कड़े और प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में से एक ‘नार्वे शतरंज’ (Norway Chess) का खिताब अपने नाम कर लिया है। वह इस महामुकाबले को जीतने वाले देश के पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। अंतिम दौर (लास्ट राउंड) के करो या मरो के मुकाबले में चेन्नई के इस 20 वर्षीय युवा खिलाड़ी ने जर्मनी के दिग्गज विन्सेंट कीमर को क्लासिकल बाजी में मात देकर पूरे 3 अंक बटोरे और एलीट शतरंज की सबसे चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम कर ली। प्रज्ञानानंदा ने आखिरी दिन की शुरुआत 15 अंक के साथ तीसरे स्थान से की।

उन्होंने सबसे अहम मौके पर बेहतरीन खेल दिखाया और क्लासिकल बाजी में जीत हासिल करके पूरे तीन अंक बटोरे। इस तरह वे 18 अंक पर पहुंचे और एलीट शतरंज की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफियों में से एक अपने नाम की। चेन्नई के इस 20 वर्षीय खिलाड़ी ने वह उपलब्धि हासिल की जो 2013 में टूर्नामेंट की शुरुआत के बाद से भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद और मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश जैसे खिलाड़ी भी हासिल नहीं कर पाए थे।

नार्वे शतरंज में दूसरी बार हिस्सा ले रहे प्रज्ञानानंदा की शुरुआत धीमी रही थी लेकिन टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में उन्होंने रफ्तार पकड़ी और लगातार चार जीत हासिल की। प्रज्ञानानंदा के अभियान की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने नार्वे शतरंज के सात बार के चैंपियन और दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल बाजी में दो बार हराया। मौजूदा विश्व चैंपियन गुकेश के अंतिम चरण में खिताब की दौड़ से बाहर होने के बाद प्रज्ञानानंदा ने भारत की उम्मीदों को जीवंत रखा और आखिरकार खिताब अपने नाम किया।
अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो आखिरी दौर से पहले 15.5 अंक के साथ सबसे आगे थे लेकिन अलीरेजा फिरोजा के खिलाफ उनकी क्लासिकल बाजी ड्रॉ रही जिससे मुकाबला आर्मागेडन टाईब्रेक में चला गया। इस नतीजे ने प्रज्ञानानंदा के लिए रास्ता खोल दिया। उन्हें पता था कि कीमर के खिलाफ क्लासिकल बाजी में जीत उन्हें अंक तालिका में सबसे ऊपर पहुंचा देगी और यादगार खिताब दिला देगी।

हालांकि वेस्ली सो ने टाईब्रेक जीत लिया लेकिन उस जीत से उन्हें सिर्फ डेढ़ अंक मिला जिससे उनके कुल अंक 17 रहे जबकि प्रज्ञानानंदा ने 18 अंक के साथ खिताब जीता। खिताब जीतने की उम्मीद के साथ आखिरी दौर में उतरे अलीरेजा 15.5 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहे। मैच के बाद प्रज्ञानानंदा ने बताया कि चेन्नई में अपनी मां से हुई बातचीत ने उनका हौसला बढ़ाया था।
उन्होंने कहा, उन्होंने मेरे से कहा था कि जून का महीना मेरे लिए अच्छा रहेगा और उनकी यह भविष्यवाणी सच साबित हुई। प्रज्ञानंदा ने कहा, मैं एक जून को अलीरेजा के खिलाफ मुकाबले से पहले अपनी मां से बात कर रहा था और वह मुझे कह रही थी, ‘यह नया महीना है, तुम अच्छा खेलोगे।’ यह वैसी ही बात है जो मां हमेशा कहती हैं और फिर मैंने ये चार बाजी जीतीं। मुझे लगता है कि उन्हें कुछ पता था।
इसके बाद प्रज्ञानानंदा ने लगातार चार जीत हासिल कीं। यहां तक कि कार्लसन ने भी प्रज्ञानानंदा की जमकर तारीफ की और पूरे टूर्नामेंट में इस युवा भारतीय खिलाड़ी के प्रदर्शन को ‘शानदार’ बताया। कार्लसन ने प्रसारणकर्ता से कहा, ”यह वाकई कमाल की बात है। यह बहुत ही निर्णायक और जबरदस्त प्रदर्शन था और इससे पता चलता है कि अगर मैं भी इसी तरह का नतीजा हासिल करता तो मेरे लिए भी यह मुमकिन हो सकता था लेकिन हां यह अविश्वसनीय है।

वह एक जबरदस्त फाइटर है और उसे इसका इनाम मिलते देखना अच्छा लगता है। इस बीच गुकेश का निराशाजनक सफर जारी रहा। टूर्नामेंट में उनकी तीसरी मौजूदगी भी उस कामयाबी के बिना खत्म हुई जिसकी उन्हें उम्मीद थी विशेषकर ऐसे साल में जब उन्हें चैलेंजर जावोखिर सिंदारोव के खिलाफ अपने विश्व खिताब का बचाव करना है।
आखिरी दौर में सफेद मोहरों से खेलते हुए कार्लसन ने क्लासिकल बाजी में 20 साल के गुकेश को हराकर तीन अंक हासिल किए। नार्वे का यह दिग्गज हालांकि इस जीत के बावजूद 13 अंक के साथ पांचवें स्थान पर रहा।
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