कोरबा
कलिंगा कंपनी (KCCL) निभाएगा सामाजिक दायित्व, कोरबा की कोरवा जनजातियों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध
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2 months agoon
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Divya Akash
कोरबा।कलिंगा कॉमर्शियल कारपोरेशन (KCC) ने अपने कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत कोरबा जिले की विशेष रूप से कमज़ोर कोरवा जनजातियों जिनके नाम से क्षेत्र का नाम कोरबा पड़ा के आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है, कंपनी ने इन समुदायों को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए ठोस प्रयास करने का भरोसा दिलाया है ।
कम्बल वितरण से हुई शुरुआत

इस पहल की शुरुआत आज बालको से 15 किलोमीटर दूर ग्राम दूधीटाँगर में आयोजित एक कार्यक्रम से हुई, जहाँ कंपनी के महाप्रबंधक विकास दुबे ने शीत ऋतु को देखते हुए कोरवा समुदायों के बीच कम्बलों का वितरण किया, कंबल वितरण के समय अनेक छोटे बच्चे जो गर्म कपड़े तो छोड़िये बिना शर्ट के उपस्थित थे, कंबल ओढ़ने के बाद उनके मुख से ख़ुशी देखेने लायक़ थी। श्री दूबे अपनी टीम व छतीसगढ़ नव प्रगति मंच के सम्पूरन कुलदीप एव समिति के सदस्यों के साथ दिन भर जनजातीय के बीच रह कर उनके साथ भोजन भी किया इसमें दुधी टांगर ग्राम के साथ ही आस पास के ग्रामीण इस दौरान उपस्थित रहे ।
KCC का विकास का भरोसा

कम्बल वितरण के बाद, कंपनी के जीएम ने समुदाय से चर्चा करते हुए कहा KCC अपने व्यावसायिक लक्ष्यों के साथ-साथ समाज के प्रति अपने दायित्वों को भी प्राथमिकता देती है, हमारा उद्देश्य केवल व्यवसाय करना नहीं बल्कि उस क्षेत्र का विकास सुनिश्चित करना भी है, जहाँ हम कार्य करते हैं। कोरबा की कोरवा जनजाति एक विशेष रूप से संवेदनशील समूह है और हम उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं ।
उन्होंने आगे तीन मुख्य क्षेत्रों पर फोकस करने का आश्वासन दिया

- पेयजल सुविधा :- श्री दुबे ने कोरवा बस्तियों में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता की जानकारी ली, तो पता चला की विद्युत नहीं होने के वजह से ग्रामीणों द्वारा पहाड़ से आने वाले स्वच्छ जल को बिना किसी पम्प के पाइप द्वारा गांव तक लाया जाता है और उसका उपयोग किया जाता है , इसके लिए कम्पनी द्वारा शीघ्र ही संभव सहयोग करेगी ।
- विद्युतीकरण:- बिजली से वंचित क्षेत्रों में बिजली पहुँचाना। ग्रामीणों ने बताया की पूर्व में सोलर लाइट लगाई गई थी किंतु बिगड़ने के बाद आज तक नहीं बनी । कलिंगा के महा प्रबंधक विकास दुबे ने सी एस पी डी सी एल के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर से चर्चा कर समस्या से अवगत कराया, भीम सिंह कंवर ने अपने अधीनस्थ अधिकारी से ग्राम दूधी टांगर का नाम नोट करवा कर निर्देश दिया की यदि ग्राम तक सड़क है, तो निरीक्षण कर विद्युत लाइन पहुंचाने हेतु आवश्यक कार्यवाही करे ।
- मुख्य धारा से जोड़ना:- शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास के माध्यम से इन समुदायों को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर विकास की मुख्यधारा में शामिल करने के लिए स्वास्थ शिविर एव रोजगार प्रशिक्षण आदि करने का प्रयास करेंगे ।

KCC प्रबंधन ने विश्वास जताया कि इन पहलों के माध्यम से कोरवा जनजातियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा और वे सम्मान के साथ जीवन यापन कर सकेंगे। इस अवसर पर रवि सिंह , संतोष चौहान , तारेश राठौर , सुरेंद्र कंवर , रुद्र , मयंक राठौर ,सोनू नामदेव एव ललित महिलांगे उपस्थित थे ।
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कोरबा
सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य आयोजन
Published
16 hours agoon
January 16, 2026By
Divya Akash220 मातृशक्तियों की सहभागिता, नन्हे भैया-बहनों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया पारिवारिक संस्कारों का संदेश
कोरबा। सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी, कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य, सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्राचार्य राजकुमार देवांगन रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में दीपक सोनी (कोरबा विभाग समन्वयक) एवं संजय कुमार देवांगन (प्रधानाचार्य, पूर्व माध्यमिक) उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत विद्यालय परिवार द्वारा पारंपरिक रीति से किया गया।

अपने संबोधन में अतिथियों ने मातृशक्ति की भूमिका को बाल संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में माता का योगदान सबसे निर्णायक होता है। इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे भैया-बहनों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। बच्चों ने आकर्षक नृत्य, गीत एवं लघु प्रस्तुतियों के माध्यम से पारिवारिक वातावरण, नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं संस्कारों का संदेश दिया। बच्चों की सहज एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित माताओं एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम में कुल 220 मातृशक्तियों की गरिमामयी सहभागिता रही, जिससे मातृसंगोष्ठी अत्यंत सफल रही। माताओं ने विद्यालय की शिक्षण पद्धति, संस्कार आधारित शिक्षा एवं गतिविधियों की सराहना की। शिशु नगरी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय की 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं एवं सहयोगी संस्थाओं की जीवंत प्रदर्शनी लगाई गई। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास, कौशल निर्माण, संस्कार शिक्षा एवं व्यवहारिक ज्ञान को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। अभिभावक बंधुओं के सहयोग से आनंद मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्राथमिक विभाग के भैया-बहनों ने विभिन्न खेलों, गतिविधियों एवं मनोरंजन कार्यक्रमों में भाग लेकर भरपूर आनंद उठाया। आनंद मेला बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रधानाचार्य पंकज तिवारी ने सभी अतिथियों, मातृशक्तियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यालय एवं परिवार के बीच सहयोग और विश्वास और अधिक मजबूत होता है। उप-प्रधानाचार्य श्रीमती सीमा त्रिपाठी सहित समस्त आचार्य परिवार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कोरबा
बॉयोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन कर संजय सुमन ने कमाए साल में 3.20 लाख
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16 hours agoon
January 16, 2026By
Divya Akashकोरबा। विकासखंड करतला के ग्राम बड़मार निवासी संजय सुमन ने मछली पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत नवीन बॉयोफ्लॉक तकनीक अपनाकर उन्होंने कम भूमि में अधिक उत्पादन कर उल्लेखनीय आय अर्जित की है।
संजय सुमन ने अपनी 25 डिसमिल भूमि पर बॉयोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया। इस तकनीक में तालाब में लाइनर बिछाकर पानी भरा जाता है और तेजी से बढ़ने वाली उन्नत प्रजाति की मछलियों का पालन किया जाता है। इसकी विशेषता है कि वर्ष में दो बार उत्पादन लेकर अधिक आय प्राप्त की जा सकती है।
सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत उन्हें 8.40 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। पिछले वर्ष संजय सुमन ने बॉयोफ्लॉक तालाब से 6 मैट्रिक टन मछली उत्पादन किया, जिसे बेचकर 07 लाख 20 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। उत्पादन लागत निकालने के बाद उन्हें 03 लाख 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
सफलता से उत्साहित संजय सुमन इस वर्ष अपने कार्य का विस्तार कर उत्पादन एवं आय को दुगुना करने की योजना बना रहे हैं। बॉयोफ्लॉक तकनीक की खासियत यह है कि कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव होता है, जिससे किसानों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
संजय सुमन की यह कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।
कोरबा
सुशासन सरकार की नीतियों से किसान हुआ आत्मनिर्भर और निश्चिंत
Published
16 hours agoon
January 16, 2026By
Divya Akashसुगम व्यवस्था और सर्वाधिक समर्थन मूल्य, किसानों की आर्थिक ढाल
कोरबा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की सुशासन आधारित नीतियों का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेश के खेतों तक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। शासन की पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था और सर्वाधिक समर्थन मूल्य से छोटे एवं बड़े सभी किसानों को समान रूप से उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे किसानों का जीवन स्तर सुदृढ़ हो रहा है।
कोरबा जिले के ग्राम कल्दामार निवासी कृषक अरुण कुमार इसकी मिसाल हैं, उन्होंने उपार्जन केंद्र भैंसमा में इस वर्ष 190 क्विंटल धान का विक्रय बिना किसी असुविधा के किया। गत वर्ष भी उन्होंने लगभग 350 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया था। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती टिकैतिन बाई के नाम से टोकन कटवा कर धान विक्रय की प्रक्रिया पूर्ण की।
कृषक कुमार का कहना है कि शासन की पहल से उपार्जन केंद्रों में सभी आवश्यक सुविधाएं सुचारू रूप से उपलब्ध हैं। उच्च समर्थन मूल्य मिलने से अब किसानों को अगली फसल के लिए आर्थिक चिंता नहीं रहती और उन्हें उधार लेने की मजबूरी से भी मुक्ति मिली है। खेत से लेकर धान विक्रय तक की पूरी प्रक्रिया आज किसानों के लिए सहज, सुरक्षित और तनावमुक्त हो गई है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाया है और वे अब समृद्धि की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। किसानों के हित में संचालित योजनाओं और प्रभावी नीतियों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार एवं मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

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