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खालिस्तानी आतंकी जगतार हवारा बरी

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चंडीगढ़ पुलिस आरडीएक्स मामले में सबूत नहीं कर पाई पेश, 2005 में दर्ज हुआ था केस

चंडीगढ़ (एजेंसी)। खालिस्तानी आतंकी जगतार सिंह हवारा को चंडीगढ़ जिला अदालत में दूसरे मामले में भी बरी कर दिया है। पुलिस इस मामले में भी कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाई। पुलिस की तरफ से जो गवाह बनाया गया था उसकी मौत हो चुकी है। इस कारण आतंकी को बरी किया गया है। 2005 में चंडीगढ़ के सेक्टर 17 में हवारा के खिलाफ देश के खिलाफ साजिश रचने, आम्र्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। हवारा अभी दिल्ली की मंडोली जेल में बंद है। हवारा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह का हत्यारा है। उसने अपनी खालिस्तानी सोच के कारण बेअंत सिंह की हत्या की थी। इस मामले में उसे उम्र कैद की सजा दी गई है।

साथी के साथ हुआ था गिरफ्तार

आतंकी जगतार सिंह हवारा को चंडीगढ़ पुलिस ने 11 जुलाई 2005 को अपने साथी समीर मल्लाह उर्फ टोनी के साथ गिरफ्तार किया था। पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तारी के समय दोनों से आरडीएक्स बरामद किया था। यह भारत सरकार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए खालिस्तान गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे थे। पुलिस ने खुफिया सूत्रों से जानकारी मिलने पर दोनों को गिरफ्तार किया था। इसमें आरोपी समीर, जोगदास उर्फ जोगा और जोगिंदर सिंह को पहले ही दोषी करार दिया जा चुका है।

चंडीगढ़ प्रशासन ने लगाई थी जेल से बाहर आने पर रोक

आरोपी जगतार सिंह हवारा पर चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से सीआरपीसी की धारा 268 लगाई थी। इसके तहत आरोपी को जेल से बाहर निकाल कर अदालत में पेश करने पर रोक होती है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के वकील कमलदीप सिंह सिद्धू ने बताया कि सीआरपीसी की धारा 268 के तहत किसी भी सरकार के पास यह पावर है कि वह किसी भी दोषी के जेल से बाहर आने पर रोक लगा सकती है। मुख्य रूप से इसकी तीन वजहें होती है। अगर किसी दोषी के खिलाफ गंभीर आरोप है और उसके बाहर आने पर किसी भी प्रकार के समाज में उपद्रव होने की संभावना हो। दूसरा कारण है कि आरोपी को जेल से बाहर निकलने पर भगाया जा सकता हो और तीसरा कारण है कि आरोपी पर हमले की संभावना हो तो इस धारा का उपयोग किया जाता है।

आरडीएक्स से जुड़े एक मामले में हो चुका है बरी

आतंकी जगतार सिंह हवारा को चंडीगढ़ जिला अदालत पहले भी एक मामले में बरी कर चुकी है। 22 नवंबर को जिला अदालत ने सेक्टर 36 में दर्ज एक मामले में इसे बरी किया था। पुलिस ने इसके दो साथी कमलजीत और परमजीत को किसान भवन चौक के पास से गिरफ्तार किया था। इस पर उन्हें आरडीएक्स उपलब्ध कराने के आरोप थे, लेकिन पुलिस इस मामले में गवाह और सबूत पेश नहीं कर पाई थी। इसलिए अदालत की तरफ से इसे बरी कर दिया था।

रिहाई के लिए मोहाली में चल रहा है धरना

मोहाली में कौमी इंसाफ मोर्चा की तरफ से बंदी सिखों की रिहाई के लिए पिछले करीब 10 महीने से वाईपीएस चौक पर एक धरना लगाया गया है। इस धरने में मुख्य रूप से आतंकी जगतार सिंह हवारा की रिहाई का नाम शामिल है। इस धरने की तरफ से सरकार से मांग की जा रही है कि जिनकी सजा पूरी हो चुकी है, ऐसे सिखों को जल्द से जल्द रिहा किया जाना चाहिए।

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बुनियादी उद्योगों का उत्पादन मार्च में 0.4% घटा, पांच माह की पहली गिरावट

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नई दिल्ली,एजेंसी। कोयला, कच्चे तेल, उर्वरक और बिजली के उत्पादन में गिरावट के कारण मार्च में आठ बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। पांच माह में बुनियादी उद्योगों का उत्पादन पहली बार घटा है। फरवरी, 2026 में, आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 2.8 प्रतिशत बढ़ा था। 

वित्त वर्ष 2025-26 में बुनियादी उद्योगों की उत्पादन वृद्धि दर घटकर 2.6 प्रतिशत रह गई। वित्त वर्ष 2024-25 में बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 4.5 प्रतिशत बढ़ा था।  

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बिंदी-तिलक विवाद में Lenskart को झटका, डूबे 4500 करोड़!

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मुंबई, एजेंसी। देश की बड़ी आईवियर ​कंपनी में से एक Lenskart को बिंदी, तिलक से जुड़ा विवाद काफी महंगा पड़ गया। सोमवार को कंपनी के शेयर में बड़ी गिरावट आई है, जिससे इसकी मार्केट वैल्यूएशन में करीब 4,500 करोड़ रुपए की कमी आ गई।

विवाद की वजह कंपनी की एक पुरानी इंटरनल ग्रूमिंग पॉलिसी बनी, जो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इस पॉलिसी में कथित तौर पर कर्मचारियों को बिंदी, तिलक जैसे कुछ धार्मिक प्रतीकों को पहनने से रोकने की बात कही गई थी। इसके बाद ऑनलाइन विरोध तेज हो गया और कंपनी के बहिष्कार की मांग भी उठने लगी।

शेयर में गिरावट

BSE पर कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर करीब 5% तक गिरकर 508.70 रुपए के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी आई और यह 533.70 रुपए के आसपास बंद हुआ।

गिरावट के दौरान कंपनी की वैल्यूएशन घटकर लगभग 88,331 करोड़ रुपए रह गई, जो पहले करीब 92,872 करोड़ रुपए थी यानी एक ही सत्र में करीब 4,540 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। बाद में आंशिक सुधार के साथ वैल्यूएशन में कुछ बढ़त भी दर्ज की गई।

कंपनि ने दी थी सफाई

इस विवाद पर कंपनी के फाउंडर Peyush Bansal ने सफाई देते हुए कहा कि वायरल डॉक्यूमेंट पुराना है और मौजूदा पॉलिसी को नहीं दर्शाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी में किसी भी धार्मिक पहनावे या प्रतीकों पर कोई प्रतिबंध नहीं है और इस गलतफहमी के लिए माफी भी मांगी।

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बंगाल की पहचान बचाने की लड़ाई है यह विधानसभा चुनाव, PM मोदी का बड़ा दावा

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झाड़ग्राम, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को राज्य की पहचान बचाने की लड़ाई बताते हुए राज्य की ममता बनर्जी सरकार पर मूल निवासियों के बजाय ‘घुसपैठियों’ के पक्ष में राजनीति करने का आरोप रविवार को लगाया। मोदी ने आदिवासी बहुल झाड़ग्राम जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ”घुसपैठियों के लिए घुसपैठियों की सरकार’ बनाना चाहती है और मतदाताओं से इसे सत्ता से हटाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, ”यह चुनाव इस भूमि की समृद्ध विरासत को बचाने के लिए है। यह बंगाल की पहचान को बचाने के लिए है। आज बंगाल को अपनी पहचान खोने का डर है।” उन्होंने आरोप लगाया, “तृणमूल जिस रास्ते पर चल रही है वह बहुत खतरनाक है। तृणमूल कांग्रेस ‘घुसपैठियों के लिए घुसपैठियों की और सरकार बनाना चाहती है। एक ऐसी सरकार जो बंगाल की जनता के धर्म, भाषा और रीति-रिवाजों की रक्षा करने के बजाय केवल घुसपैठियों के धर्म, भाषा और रीति-रिवाजों की रक्षा करेगी।”

मोदी ने दावा किया कि ऐसी सरकार के लिए सबसे बड़ी बाधा पश्चिम बंगाल के आम लोग होंगे। उन्होंने कहा, ”तृणमूल कांग्रेस की घुसपैठियों वाली सरकार के लिए, अगर कोई शत्रु है, तो वे यहीं बैठे भाई-बहन होंगे, जो घुसपैठियों के शत्रु होंगे।” प्रधानमंत्री ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ असंतोष राज्य के सभी समुदायों और क्षेत्रों में फैल गया है। उन्होंने कहा, “इसलिए, बंगाल के हर समुदाय, हर वर्ग, हर क्षेत्र ने इस बार ठान लिया है और तृणमूल कांग्रेस सरकार को सत्ता से हटाने का संकल्प लिया है।”

मोदी ने तृणमूल कांग्रेस पर जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करने और भ्रष्टाचार व जबरन वसूली की व्यवस्था चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया, “अगर किसी को घर बनाना है, तो उसे तृणमूल कांग्रेस के सिंडिकेट पर निर्भर रहना पड़ता है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद और विधायक आपकी समस्याओं की परवाह नहीं करते। वे अपनी जेबें भरने में व्यस्त हैं।”

प्रधानमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस नेता राज्य के कई हिस्सों में आदिवासियों की जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया, “आदिवासियों की हजारों एकड़ जमीन पर तृणमूल कांग्रेस के गुंडों ने कब्जा कर लिया है।” पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होगा। झाड़ग्राम में 23 अप्रैल को मतदान होगा।

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