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छत्तीसगढ़

लोकसभा चुनाव:आचार संहिता लागू , 46 दिन में 7 फेज, पहली वोटिंग 19 अप्रैल, आखिरी 1 जून को, नतीजे 4 जून को

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छत्तीसगढ़ में तीन चरणों में वोटिंग: 19 अप्रैल, 26 अप्रैल एवं 07 मई

नई दिल्ली, एजेंसी । लोकसभा चुनाव 2024 की तारीखों का शनिवार को ऐलान हो गया। इसी के साथ आचार संहिता भी लागू हो गई। 543 सीटों के लिए चुनाव सात फेज में होगा। पहले फेज की वोटिंग 19 अप्रैल को और आखिरी फेज की वोटिंग 1 जून को होगी। 4 जून को नतीजे आएंगे। वोटिंग से लेकर नतीजे तक इसमें 46 दिन लगेंगे। लोकसभा के साथ 4 राज्यों- आंध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के विधानसभा चुनाव की तारीखें भी जारी कर दी गई हैं। ओडिशा में 13 मई, 20 मई, 25 मई और 1 जून को वोटिंग होगी। बाकी तीन राज्यों में एक फेज में चुनाव होंगे। अरुणाचल और सिक्किम में 19 अप्रैल, आंध्र प्रदेश में 13 मई को वोट डाले जाएंगे। आगामी लोकसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने शनिवार को चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही देशभर में आचार संहिता भी लागू हो गई है। लोकसभा की 543 सीटों के साथ ही 26 विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव कराने का फैसला लिया गया है। लोकसभा के चुनाव सात चरणों में होंगे। 22 राज्यों में एक चरण में चुनाव प्रस्तावित हैं। जबकि, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव कराने का फैसला लिया गया है। चुनाव आयोग के चीफ कमिश्नर राजीव कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस बार चुनाव 19 अप्रैल से एक जून के बीच सात चरणों में होंगे और मतगणना चार जून को होगी। राजीव कुमार ने कहा कि 18वीं लोकसभा के गठन के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही देश में आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इसके साथ ही सरकार ऐसा कोई नीतिगत फैसला नहीं कर सकेगी, जो मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सके। कुमार ने बताया कि लोकसभा चुनाव 2024 में कुल 97 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें से 49.7 करोड़ पुरुष, 47.1 करोड़ महिलाएं और 48 हजार ट्रांसजेंडर शामिल हैं। साल 2019 के चुनाव में मतदाताओं की कुल संख्या 90 करोड़ थी। उन्होंने बताया कि ऐसे मतदाताओं की संख्या 1.8 करोड़ है, जो पहली बार मतदान करेंगे और मतदाता सूची में 85 साल से अधिक उम्र के 82 लाख और सौ साल से अधिक उम्र के 2.18 लाख मतदाता शामिल हैं। कुमार ने बताया कि देशभर में मतदाता लिंगानुपात 948 है और 12 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में पुरुष मतदाताओं की तुलना में महिला मतदाताओं की संख्या अधिक है। उन्होंने कहा कि देश में 10.5 लाख से अधिक मतदान केंद्र होंगे और 55 लाख इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल होगा। उन्होंने कहा कि आयोग हिंसामुक्त चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सीईसी ने कहा कि चुनाव अधिकारी देशभर में 10.5 लाख मतदान केंद्र स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं। दो नए निर्वाचन आयुक्तों ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू के साथ मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने कहा, हम पूरी तरह तैयार हैं और मैं मतदाताओं से अनुरोध करता हूं कि वे स्याही (मतदान वाली) लगवाएं। उन्होंने कहा, ”यह हम सभी के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग राष्ट्रीय चुनाव इस तरह से कराने का वादा करता है कि वैश्विक मंच पर भारत का गौरव बढ़े। कुमार ने कहा, सभी राज्यों में आकलन के बाद हम एक यादगार, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने को लेकर आश्वस्त हैं। कुमार ने कहा कि आयोग ने 17 लोकसभा, 16 राष्ट्रपति चुनाव और 400 से अधिक विधानसभा चुनाव कराए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 11 राज्यों के चुनाव शांतिपूर्ण और हिंसामुक्त रहे और लगभग एक भी सीट पर दोबारा चुनाव नहीं हुआ। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भी सात चरणों में मतदान हुआ था। उस चुनाव में कुल 91.2 करोड़ योग्य मतदाता थे, जिनमें लगभग 43.8 करोड़ महिला मतदाता और लगभग 47.3 करोड़ पुरुष मतदाता थे। कुल लगभग 61.5 करोड़ वोट डाले गए थे और 67.4 प्रतिशत मतदान हुआ था। साल 2019 के चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 303, कांग्रेस ने 52, तृणमूल कांग्रेस ने 22, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 10, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने पांच, माकपा ने तीन और भाकपा ने दो सीटें जीती थीं।

छत्तीसगढ़ में 19, 26 अप्रैल और 7 मई को वोटिंग,11 सीटों पर 3 चरणों में मतदान, देश में 7 चरण में चुनाव; 4 जून को नतीजे

लोकसभा चुनाव के तारीखों का ऐलान हो गया है। छत्तीसगढ़ की 11 सीटों के लिए 3 चरणों में मतदान होगा। वहीं 7 चरणों में देश की 543 सीटों पर वोटिंग होगी। इसमें 19 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग होगी। 4 जून को लोकसभा चुनाव के नतीजे आएंगे। छत्तीसगढ़ में 19 अप्रैल को एक सीट, 26 अप्रैल को 3 सीट और 7 मई को 7 लोकसभा सीटों पर वोटिंग होगी। 2019 में भी 3 चरणों में प्रदेश में वोटिंग हुई थी। वहीं प्रदेश में 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद 1 लाख 20 हजार 92 वोटर्स बढ़े हैं।

छत्तीसगढ़ में लोकसभा की 11 सीटें

प्रदेश में लोकसभा की 11 सीटें हैं। इनमें से सामान्य वर्ग के लिए 06, एसटी के लिए 04 और एससी वर्ग के लिए 01 सीट आरक्षित है। प्रदेश में वोटिंग के लिए 24 हजार 109 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। वोटर्स की बात करें तो विधानसभा चुनाव के बाद इनकी संख्या में 1 लाख 20 हजार 92 की बढ़ोतरी हुई है। इनमें 18 से 19 वर्ष के 5 लाख 77 हजार 184 मतदाता हैं। 002019 लोकसभा चुनाव में पड़े 71.49 प्रतिशत वोट00 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों पर 1 करोड़ 35 लाख 82 हजार 366 मतदाताओं ने वोट किया था। प्रदेश की 11 सीटों पर कुल 71.49 प्रतिशत मतदान हुआ था। 2019 के चुनाव में रायगढ़ लोकसभा सीट पर सबसे अधिक 77.78 प्रतिशत और सबसे कम बिलासपुर लोकसभा सीट पर 64.36 वोट प्रतिशत था।

85 प्लस वाले मतदाता डाक मत-पत्र से कर सकेंगे मतदान

85 प्लस उम्र के मतदाताओं को घर बैठे वोटिंग की सुविधा दी गई है। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश में 80 से ज्यादा उम्र वाले 1 लाख 86 हजार 215 वोटर्स है। इनमें से 85 साल और उससे ज्यादा उम्र वाले मतदाताओं का आंकड़ा तैयार किया जा रहा है। ऐसे मतदाताओं की संख्या 64 हजार से ज्यादा है। इसके अलावा प्रदेश में 100 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र वाले मतदाताओं की संख्या 2 हजार 462 है। लोकसभा चुनाव में 2.05 करोड़ से ज्यादा मतदाता पंजीबद्ध है। आंकड़ों की बात करें तो पिछले 5 साल में 15 लाख 96 हजार 967 मतदाताओं की बढ़ोतरी हुई है। इनमें 7 लाख 41 हजार 942 पुरुष और 11 लाख 26 हजार 505 महिला मतदाता बढ़े हैं। हालांकि 277 थर्ड जेंडर मतदाता कम हुए हैं। इस बार 1 लाख 60 हजार 955 दिव्यांग मतदाता हैं।

महिला वोटरों की संख्या अधिक

प्रदेश में पुरुषों के मुकाबले महिला वोटरों की संख्या ज्यादा है। प्रदेश में महिला वोटर्स की संख्या कुल 1 करोड़ 3 लाख 32 हजार 115 है। राज्य में महिला मतदाताओं का जेंडर रेश्यो पुरुषों से अधिक है। यहां 1000 पुरुष वोटर पर 1,015 महिला मतदाता हैं।

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कोरबा

संस्कृत विषय बचाओ अभियान: घोषणा को अमल में लाने संस्कृत शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन

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कोरबा। प्रदेश अध्यक्ष दौलत राम साहू के नेतृत्व में संघ के पदाधिकारी नोयन कुमार बुडेक, मनोज कुमार वर्मा, डॉ नारायण प्रसाद, गंगाराम साहू, हेमंत कुमार हिरवानी, दुर्गेश कुमार साहू, कुलेश्वर प्रसाद, दिनेश मंडावी, सुनील महार, ईश्वरी यदु कामिनी पिल्लई, रेणुका लदेर, शारदा साहू, सुरेखा सेन, सोमप्रभा साहू सहित प्रदेश के पांच शिक्षा संभाग के शिक्षक एवं शिक्षिकाएं भारतीय संविधान में आठवीं अनुसूची की भाषा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप संस्कृत विषय के संवर्धन एवं संरक्षण हेतु उल्लेख किया गया है को ध्यान में रखते हुए गजेंद्र यादव शिक्षा मंत्री द्वारा 30 अप्रैल को विधानसभा से घोषणा किया गया कि संस्कृत भाषा को अनिवार्य कर रहे हैं, जिनका लघु चलचित्र सोशल मीडिया पर बहुत प्रसारित हैं।

इसे देख सुनकर प्रदेश भर के संस्कृत शिक्षकों में शासन की सौहार्द्रपूर्ण निर्णय से हर्ष की लहर है। संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा, सभ्यता और संस्कार परक एक राष्ट्रभाषा है, जिनमें सनातन संस्कृति पूर्ण रूप से समाहित है। संघ के पदाधिकारियों द्वारा 10 मई एवं 26 मई 2026 को नवा रायपुर स्थित एम -14 आवास में शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर घोषणा के धरातल पर क्रियान्वयन के लिए शीघ्र अति शीघ्र शासकीय आदेश जारी करवाने हेतु मांग पत्र सौपा, जिससे शिक्षक आश्वस्त हो जावे तथा मंत्री द्वारा संस्कृत विषय को अनिवार्य करने विभागीय अधिकारी को निर्देश दिए यह शिक्षकों के लिए बहुत बड़ा पुरस्कार है, किन्तु आज पर्यन्त कोई कार्यवाही नहीं हुई है। पदाधिकारियों ने आगे बताया कि इस पावन कार्य के लिए निरंतर प्रदेश के जिला शिक्षा अधिकारी, जिला कलेक्टर, विधायकगण, वित्त मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री अरूण साव, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय , राज्यपाल रमेन डेका , संचालक लोक शिक्षण संचालनालय, मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, सचिव छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, सचिव सहायक संचालक छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मण्डलम्, प्रदेश संयोजक व अध्यक्ष अधिकारी कर्मचारी फेड़रेशन कमल वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, डॉ अतुल कोठारी राष्ट्रीय सचिव शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली, आयुक्त राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा सहित 50 से भी अधिक आवेदन बारंबार संस्कृत विषय को पूर्व की भांति अनिवार्य करने तथा नवीन व्यावसायिक शिक्षा को सातवें विषय के रूप में रखने के लिए मांग पत्र ज्ञापन सौपा गया था। 25 अगस्त 2025 को शिक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक में एससीईआरटी रायपुर को कक्षा छठवीं से लेकर कक्षा दसवीं का संस्कृत विषय को अनिवार्य करने निर्देशित भी किया गया था। इसी क्रम में 07 सितंबर 2025 को सरयू पारिण भवन मठपुरेना में आयोजित विराट संस्कृत विद्वत सम्मेलन में उपस्थित मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह को भी मांग पत्र सौपा गया था। वहां पर अध्यक्ष ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत संकल्प का विषय है विकल्प का नहीं। संस्कृत भाषा के साथ अन्याय नहीं होगा। एक तरफ पूरा विश्व संस्कृत भाषा के महत्व को अपना रहा है। अपने देश के विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों में संस्कृत भाषा को अनिवार्य शिक्षा कर रहे हैं तथा अनुच्छेद 351 आठवीं अनुसूची की भाषाओं के सम्मान के लिए बनाया गया है।

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कोरबा

सुशासन  तिहार में जनमन सहित अन्य प्रचार समाग्री का किया गया वितरण

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कोरबा। सुशासन तिहार के उपलक्ष्य में जनसंपर्क विभाग द्वारा राज्य शासन की जन कल्याणकारी और महत्वकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित तथा जिले के विकास कार्यों, उपलब्धियों  एवं नवाचारों पर आधारित प्रदर्शनी के साथ ही जिले के सभी पांच ब्लाक में आयोजित महत्वपूर्ण शिविर स्थल-ग्राम पिपरिया, जल्के, बसीबार, बैरा, चोढ़ा, चुईया, गिधौरी, केराकछार, सिरमिना, लमना, नगोई, मोरगा, निरधी, जटगा, छिंदपुर आदि स्थानों में शिविर के माध्यम से जनमन सहित अन्य पत्रिका का वितरण भी किया गया।

ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में शिविर का अवलोकन किया। शिविर के माध्यम से केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों के जीवन मे हुए सकारात्मक बदलाव सहित जिले के अनेक विकास कार्यों, उपलब्धियों, नवाचार के संबंध में प्रचार सामग्री सुशासन के नवीन आयाम, तब और अब, विकसित भारत के बढ़ते कदम, बिल्डिंग टूमारो छ.ग.टूडे, अटल निर्माण वर्ष 2 साल (रिपोर्ट कार्ड) आदि का वितरण किया गया।

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कोरबा

31 मई को मनाया जाएगा विश्व तम्बाकू निषेध दिवस

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कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदशन में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.एन.केशरी के नेतृत्व में कोरबा जिले में 31 मई 2026 को राष्ट्रीय तम्बाकू निषेध दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर जिले में तंबाकू सेवन एवं धुम्रपान  से हाने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जनसामान्य को जागरूक करने हेतु विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिससे जनसामान्य में धुम्रपान और तम्बाकू सेवन करने की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण हो सके।
कार्यक्रम के अंतर्गत जागरूकता रैली, शपथ ग्रहण, जनजागरूकता अभियान, स्वास्थ्य परामर्श एवं तंबाकू मुक्त जीवनशैली को बढ़ावा देने संबंधी गतिविधयां आयोजित की जाएंगी। स्कूलों, महाविद्यालयों एवं स्वास्थ्य संस्थाओं में विशेष जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं एवं आम नागरिकों को तंबाकू सेवन से दूर रहने हेतु प्रेरित किया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि तंबाकू सेवन न केवल व्यक्तिगत स्वाथ्य के लिए हानिकारक है , बल्कि यह हमारे परिवारों और पर्यावरण को भी नुकसान पहॅंुचाता है वर्तमान समय में कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की गंभीर बिमारियॉं एवं अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण तंबाकू सेवन  है।
उन्होंने आमजन से अपील किया है कि वे स्वयं तंबाकू उत्पादों का सेवन न करें तथा अपने परिवार एवं समाज को भी इसके दुष्प्रभावो के प्रति जागरूक करें साथ ही विश्व तंबाकू निषेघ कार्यक्रम में सहभागिता कर तंबाकू मुक्त समाज निर्माण में सहयोग प्रदान करें।

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