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मणिशंकर अय्यर बोले- थरूर विदेश मंत्री बनना चाहते हैं:मैं गांधीवादी-नेहरूवादी हूं, राहुलवादी नहीं, पवन खेड़ा को जयराम रमेश का तोता बताया

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नई दिल्ली,एजेंसी। कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने सोमवार को कहा कि INDIA ब्लॉक को मजबूत करने के लिए एमके स्टालिन सबसे सही नेता हैं, जबकि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बन सकते हैं। अय्यर ने कहा कि राहुल भूल गए हैं कि मैं पार्टी का मेंबर हूं। इसलिए मैं गांधीवादी, नेहरूवादी और राजीववादी हूं लेकिन राहुलवादी नहीं हूं।

अय्यर ने एक मीडिया चैनल से बातचीत में कहा कि कांग्रेस सांसद शशि थरूर एंटी-पाकिस्तान हैं। वे अगले विदेश मंत्री बनना चाहते हैं।

अय्यर ने पवन खेड़ा को प्रवक्ता की जगह ‘तोता’ बताया। उन्होंने कहा- पवन खेड़ा वही दोहराते हैं, जो जयराम रमेश उन्हें बताते हैं।

इसके बाद पवन खेड़ा ने X पर लिखा- मणिशंकर अय्यर का पिछले कुछ सालों से कांग्रेस से कोई संबंध नहीं है। वे अपनी व्यक्तिगत क्षमता से बोलते और लिखते हैं।

अय्यर के बयान की 2 बड़ी बातें…

  • पवन खेड़ा पिछले दो साल से मुझ पर आरोप लगा रहे हैं। अगर कांग्रेस पार्टी को अपने प्रवक्ता के लिए पवन खेड़ा के अलावा कोई नहीं मिलता, तो पार्टी की हालत वैसी ही रहेगी जैसी आज है।वहीं, जयराम रमेश को सिर्फ अपनी नौकरी बचानी है।
  • क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि एक पार्टी की क्या स्थिति होगी, जो केसी वेणुगोपाल जैसे राउडी को राहुल गांधी के लिए सरदार पटेल के स्तर तक उठा दे?

अय्यर बोले- केरल में कांग्रेस नहीं जीतेगी

केरल विधानसभा चुनाव को लेकर अय्यर ने कहा- मैं चाहता हूं कि कांग्रेस जीते, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वह जीतेगी। कांग्रेस नेता आपस में बंटे हुए हैं। वे कम्युनिस्टों से ज्यादा एक-दूसरे से नफरत करते हैं।

उन्होंने पहले भी केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की तारीफ की थी और कहा था कि पिनराई सरकार की उपलब्धियों के बाद वाम सरकार की वापसी संभव है।

‘INDIA ब्लॉक के लिए स्टालिन सबसे बेहतर’

अय्यर ने ANI से बातचीत में कहा कि अगर INDIA ब्लॉक को मजबूत करना है, तो एमके स्टालिन सबसे बेहतर व्यक्ति हैं। राहुल गांधी भारत के प्रधानमंत्री बन सकते हैं, बशर्ते कोई ऐसा हो जो अपना पूरा समय INDIA ब्लॉक को मजबूत करने और उसे एकजुट रखने में लगाए।

अय्यर के बयान पर नेताओं की प्रतिक्रिया

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल- पार्टी का आधिकारिक रुख अय्यर के बयान से अलग है। इसे कांग्रेस की स्थिति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

कांग्रेस सांसद जेबी मैथर- अय्यर ने उन राजनीतिक ताकतों को नहीं समझा है, जो आगामी केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों को तय करेंगी।

कांग्रेस नेता सचिन पायलट- मैं इतना बता सकता हूं कि अय्यर कांग्रेस पार्टी में नहीं हैं। इसके अलावा मैं और कुछ नहीं कहना चाहता।

मणिशंकर अय्यर के पिछले चार विवादित बयान…

1. कश्मीर पर PAK नीति पर फख्र: 2018 में कराची गए अय्यर ने कहा था कि उन्हें कश्मीर पर पाकिस्तान की नीति पर फख्र है। वो पाकिस्तान से भी उतना ही प्यार करते हैं जितना कि हिंदुस्तान से। उन्होंने भारत को नसीहत देते हुए कहा था कि भारत को भी अपने पड़ोसी देश से प्यार करना चाहिए जैसा वो खुद से करते हैं।

2. PAK के लोग हमें दुश्मन नहीं मानते: 22 अगस्त 2023 को कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा कि पाकिस्तान के लोग हमें दुश्मन नहीं मानते। ये हमारे लिए बहुत बड़ा एसेट (संपत्ति) है। बीते 9 साल से पाकिस्तान से कोई बातचीत नहीं हो रही। इससे वहां की सरकार, आर्मी पर फर्क नहीं पड़ रहा, वहां के लोग परेशान हो रहे हैं। PM नरेंद्र मोदी को छोड़कर करीब-करीब हर प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान से बात की है।

3. PM मोदी को अपमानजनक शब्द कहे थे: 2019 में मणिशंकर ने मोदी पर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था- जो अंबेडकर जी की सबसे बड़ी ख्वाहिश थी, उसे साकार करने में एक व्यक्ति का सबसे बड़ा योगदान था। उनका नाम था जवाहरलाल नेहरू। अब इस परिवार के बारे में ऐसी गंदी बातें करें, वो भी ऐसे मौके पर जब अंबेडकर जी की याद में बहुत बड़ी इमारत का उद्घाटन किया गया, मुझे लगता है कि ये आदमी बहुत नीच किस्म का है, इसमें कोई सभ्यता नहीं है। ऐसे मौके पर इस प्रकार की गंदी राजनीति की क्या आवश्यकता है। इस बयान के बाद पार्टी ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था।

4. नरसिम्हा राव सांप्रदायिक थे: अगस्त 2023 में मणिशंकर अय्यर ने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को सांप्रदायिक बताया था। उन्होंने कहा था- जब बाबरी मस्जिद गिराई जा रही थी, उस दौरान नरसिम्हा राव पूजा कर रहे थे। वे भारत को हिंदू राष्ट्र बताते थे। भाजपा के पहले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नहीं बल्कि पीवी नरसिम्हा राव थे।

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नेपाल सीमा से गिरफ्तार हुए TMC के पूर्व विधायक जहांगीर खान, STF की बड़ी कार्रवाई

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कोलकाता, एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को ‘जबरन वसूली’ के आरोप में सोमवार को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खान को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम सुरक्षा 26 मई को वापस ले ली थी। खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा थाने में सात प्राथमिकी दर्ज हैं।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ”खान को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।” हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। खान 21 मई को फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में चौथे स्थान पर रहे थे। हालांकि, उन्होंने चुनाव से कुछ दिन पहले अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन नाम वापस लेने की अवधि समाप्त हो चुकी थी इसीलिए उनका नाम ईवीएम में दर्ज रहा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान को मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ली
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान के खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामलों में पुलिस की किसी भी सख्त कार्रवाई से उन्हें मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी। कोर्ट ने 18 मई को खान को सख्त कार्रवाई से राहत दी थी, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। जजों ने कहा कि राज्य में राजनीतिक स्थिति में बदलाव और याचिकाकर्ता द्वारा राजनीतिक बदले की भावना के दावों के कारण ऐसी सुरक्षा जारी रखना उचित नहीं होगा।

खान के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि ये मामले राजनीतिक बदले की भावना का नतीजा थे और कहा कि सुरक्षा न केवल चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी थी, बल्कि खान को कथित उत्पीड़न से बचाने के लिए भी थी। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले दी गई सुरक्षा केवल खान को 21 मई को फाल्टा में हुए दोबारा मतदान (रीपोल) में भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए थी, जिसके नतीजे 24 मई को घोषित किए गए थे।

 पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा विधानसभा उपचुनाव (रीपोल) के बीच एक बड़ी राजनीतिक घटनाक्रम में, जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका था। उन्होंने कहा कि दौड़ से हटने का फैसला फाल्टा के लोगों की भलाई के लिए लिया गया था। खान ने कहा, “मैं फाल्टा का बेटा हूं और चाहता हूं कि फाल्टा शांतिपूर्ण रहे और तरक्की करे। हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसलिए मैंने निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है।”

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भाजपा की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी, क्रॉस वोटिंग की आशंका पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला

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भोपाल, एजेंसी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामाकंन दाखिल किया। उनका मुकाबले में भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारा है। ऐसे में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। वहीं कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। हालांकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की गलतफहमी बताया है।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का कहना है, “बीजेपी को गलतफहमी है कि वे पार्टी में फूट डाल सकते हैं। कांग्रेस पूरी तरह से संगठित और एकजुट है; सभी कांग्रेस विधायक पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को मजबूती से अपना पूरा समर्थन देंगे और बीजेपी की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी। मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उम्मीदवार हैं और हम कांग्रेस में एकजुट हैं।”

बता दें कि 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रभावी वोट संख्या 228 है। इनमें से BJP के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। बीना की विधायक निर्मला सप्रे के वोट की स्थिति साफ न होने (जो BJP की तरफ झुकती दिख रही है) और विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा ​​के वोटिंग पर रोक के कारण, कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर 62 रह गई है।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए हर उम्मीदवार को 58 वोटों की ज़रूरत होती है। इस तरह, BJP को दो सीटें जीतने के लिए 116 वोटों की ज़रूरत है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कुल 164 वोटों में से 116 वोट डालने के बाद BJP के पास 48 वोट बचेंगे, जबकि तीसरी सीट पक्की करने के लिए उसे 10 और वोटों की ज़रूरत होगी। कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए ज़रूरी संख्या तो है, लेकिन BJP द्वारा तीसरे उम्मीदवार के ऐलान ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और नटराजन के चुनाव जीतने की राह मुश्किल कर दी है।

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क्या शिवसेना की तहर दो गुटों में बंट जाएगी TMC?, सांसद के इस्तीफे से बंगल में गरमाई सियासत

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कोलकाता, एजेंसी। बंगाल चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत की पूरे देश में चर्चा है तो वहीं तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के बीच अंदरूनी कलह भी सामने आने लगी है इसे लेकर अब पार्टी के भविष्य की रणनीति पर लोग चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या तृणमूल कांग्रेस में भी Shiv Sena की तरह अंदरूनी खींचतान बढ़ेगी या पार्टी नेतृत्व समय रहते हालात संभाल लेगा। विपक्ष लगातार TMC में असंतोष और गुटबाजी के आरोप लगा रहा है, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम बता रहा है।

अगल गुट बनाने को लेकर चर्चा तेज इस्तीफा 
दरअसल, अंदरूनी कलह के बीच पार्टी के सांसदों के एक समूह ने भविष्य की रणनीति और पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बनाने की संभावना पर चर्चा करने के लिए सोमवार को यहां बैठक की। बैठक में हिस्सा लेने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर राय भी शामिल थे, जिन्होंने सोमवार को ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। उनके अलावा तृणमूल के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपद सरन खेरवाल और अरूप चक्रवर्ती भी बैठक में मौजूद थे। 

ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप पर भेजा 
मीडिया से बातचीत में राय ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राय ने कहा, ”मैंने पार्टी से इस्तीफा देने के अपने फैसले से ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिये अवगत करा दिया है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 60 विधायकों द्वारा एक अलग गुट बनाने के बाद सामने आया है, जहां रिताब्रता बनर्जी ने ममता बनर्जी के नामित उम्मीदवार के बजाय नेता प्रतिपक्ष का कार्यभार संभाल लिया है।

इस्तीफे को लेकर दिया ये बयान 
राय ने कहा, “विधानसभा में जो कुछ भी हुआ, क्या कोई यह बता सकता है कि राज्यसभा या लोकसभा में वैसी ही स्थिति पैदा नहीं होगी?” हालांकि, राय ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा और पार्टी से उनका इस्तीफा राज्य विधानसभा में हुए घटनाक्रम से अलग है, क्योंकि वहां के विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा, ”उनके कदम और मेरे कदम के बीच कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह से अलग है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दिया है, उन्होंने नहीं। राज्यसभा में मेरा कार्यकाल 2029 में समाप्त होना था, लेकिन मैंने सैद्धांतिक तौर पर इस्तीफा दे दिया, क्योंकि मेरे लिए (पार्टी में) बने रहना मुश्किल हो गया था।”

‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में शामिल हुए अभिषेक बनर्जी
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे एवं पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक में गठबंधन के भीतर एकजुटता पर जोर दिया गया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा जनता की आजीविका से जुड़े मुद्दों को उठाने की आवश्यकता बताई गई।

तृणमूल के इन दोनों नेताओं के अलावा बैठक में कांग्रेस की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ वामपंथी नेता भी मौजूद थे। हालांकि ममता से नाराज विधायकों ने अभी तक अलग पार्टी बनाए जाने को लेकर कोई भी अधिकारिक ऐलान नहीं किया। 

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