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छत्तीसगढ़

मिशनरी-सिस्टर्स गिरफ्तारी केस…संसद भवन में कांग्रेस का प्रदर्शन

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प्रियंका गांधी बोलीं- सरकार को सिर्फ चुनाव प्रचार की चिंता, विजय बघेल बोले-भ्रम फैला रही कांग्रेस

दुर्ग,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन से केरल की 2 मिशनरी सिस्टर्स की गिरफ्तारी के खिलाफ कांग्रेस ने संसद भवन में प्रदर्शन किया। प्रियंका गांधी के साथ कई कांग्रेसी प्रदर्शन में शामिल हुए। सभी ने हाथों में ‘ननों को रिहा करो, गुंडों को गिरफ्तार करो’ लिखा स्लोगन रखा था।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पुलिस ने ननों के साथ बदसलूकी की, उनपर झूठा आरोप लगाया। प्रियंका ने कहा कि, राज्य सरकार को केवल चुनाव प्रचार की चिंता रहती है, जबकि वे अपराधियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

वहीं माकपा नेता वृंदा करात और CPI नेता एनी राजा ने भी बुधवार को दुर्ग जेल पहुंचकर दोनों ननों से मुलाकात की। इस दौरान वृंदा ने कहा कि, छत्तीसगढ़ में गुंडाराज चल रहा है। बीजेपी सरकार ईसाई समुदाय को टारगेट कर रही है। पुलिस ने बजरंग दल के लोगों को फोन कर रेलवे स्टेशन में बेवजह हंगामा कराया। धर्मांतरण और मानव तस्करी के झूठे केस में फंसाया।

वहीं पूर्व CM भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया X पर लिखा कि दोहरापन नहीं चलेगा विष्णु देव साय जी और विजय शर्मा जी!। भाजपा केरल के अध्यक्ष कह रहे हैं कि गिरफ्तार की गईं नन का धर्मांतरण से कोई लेना देना नहीं है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि गिरफ्तार की गईं नन धर्मांतरण में लिप्त हैं। आप अपना मत स्पष्ट कीजिए। प्रदेश जानना चाहता है।

इन आरोपों पर दुर्ग से बीजेपी के सांसद विजय बघेल ने संसद में कहा कि क्या हम अपनी आदिवासी बेटियों की रक्षा नहीं करेंगे? कांग्रेस के जिम्मेदार पद पर बैठे लोगों ने भ्रम फैलाया है। उन्होंने कहा कि दुर्ग रेलवे स्टेशन में मानव तस्करी और धर्मांतरण कर दो नन द्वारा बस्तर की भोली-भाली आदिवासी बेटियों को आगरा ले जाया जा रहा था।

बघेल ने कहा कि दुर्ग जिले के जागरूक नागरिकों ने युवतियों को बचाया। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस भ्रम फैलाकर अराजकता पैदा करना चाह रही है। कानून अपना काम कर रहा है।

रायपुर से बीजेपी सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में लालच देकर और दबाव बनाकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। दोनों नन केरल की रहने वाली हैं तो छत्तीसगढ़ में क्या कर रहीं थी। कांग्रेस साफ करे कि वे धर्मान्तरण के समर्थन में हैं या खिलाफ हैं।

वहीं बजरंग दल के प्रांत संयोजक ऋषि मिश्रा ने कहा कि दुर्ग में नन गिरफ्तारी मामले में सरकार लीपापोती की तो बजरंग प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन करेगा। कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर में चक्काजाम और छत्तीसगढ़ बंद कराएंगे।

दुर्ग जेल में बंद ननों से नेताओं ने की थी मुलाकात

बुधवार को माकपा नेता और सीपीआई नेता एनी राजा ने भी दुर्ग जेल में ननों से मुलाकात की थी।

बुधवार को माकपा नेता और सीपीआई नेता एनी राजा ने भी दुर्ग जेल में ननों से मुलाकात की थी।

मिशनरी सिस्टर्स की गिरफ्तारी के खिलाफ सांसद प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को दुर्ग जेल पहुंचा था।

मिशनरी सिस्टर्स की गिरफ्तारी के खिलाफ सांसद प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को दुर्ग जेल पहुंचा था।

मिशनरी सिस्टर्स मिलने के लिए मंगलवार को सांसद प्रतिनिधि मंडल दुर्ग जेल पहुंचा था।

मिशनरी सिस्टर्स मिलने के लिए मंगलवार को सांसद प्रतिनिधि मंडल दुर्ग जेल पहुंचा था।

मिशनरी सिस्टर्स की गिरफ्तारी के खिलाफ दुर्ग जेल जा रहे सांसद प्रतिनिधि मंडल को मिलने से पुलिस ने रोका था।

मिशनरी सिस्टर्स की गिरफ्तारी के खिलाफ दुर्ग जेल जा रहे सांसद प्रतिनिधि मंडल को मिलने से पुलिस ने रोका था।

जेल में बंद कैथोलिक नन वंदना फ्रांसिस और प्रीति मेरी पर कार्रवाई के खिलाफ 28 जुलाई को सांसदों ने प्रदर्शन किया था।

जेल में बंद कैथोलिक नन वंदना फ्रांसिस और प्रीति मेरी पर कार्रवाई के खिलाफ 28 जुलाई को सांसदों ने प्रदर्शन किया था।

सरकार की दोहरी नीति नहीं चलेगी

वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ और केरल भाजपा में विरोधाभास क्यों है? लड़कियां बालिग हैं, वे अपना फैसला खुद ले सकती हैं। केरल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि नन धर्म परिवर्तन में शामिल नहीं थीं। यह गिरफ्तारी गलत है।

दीपक बैज ने कहा कि केरल बीजेपी के मुताबिक ननों को गलत तरीके से फंसाया गया है। वह मानव तस्करी में शामिल नहीं थीं। छत्तीसगढ़ सरकार गलत है या केरल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। यह दोहरी नीति नहीं चलेगी।

कोर्ट में याचिका खारिज, जेल में रहेंगी नन

दुर्ग में‌ केरल की दो ननों की गिरफ्तारी मामले में लोअर कोर्ट के बाद सेशन कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। सेशन कोर्ट के जज अनीश दुबे ने कहा हमें यह प्रकरण सुनने का अधिकार नहीं है। यह मानव तस्करी से जुड़ा मामला था, जिसमें बिलासपुर NIA कोर्ट को सुनवाई का अधिकार है।

वहीं थाना प्रभारी को निर्देश दिया गया है कि, मानव तस्करी मामले में केंद्रीय एजेंसी को जानकारी दें। कोर्ट में अपील के बाद सुनवाई होगी, तब तक ननों को जेल में रखा जाएगा। वहीं अब ननों के वकील राजकुमार तिवारी NIA कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।

29 जुलाई को सांसदों ने ननों से की थी मुलाकात

इससे पहले मंगलवार को सांसदों का प्रतिनिधिमंडल दुर्ग जेल में कैथोलिक नन वंदना फ्रांसिस और प्रीति मेरी से मुलाकात की। इस दौरान सांसद सप्तगिरि उल्का ने कहा कि सत्यता जानने के लिए आए थे। सिस्टर्स को झूठे केस में फंसाया गया।

वहीं माकपा नेता वृंदा करात ने कहा कि मुख्यमंत्री का काम लॉ एंड ऑर्डर का है, लेकिन धर्मांतरण और मानव तस्करी पर झूठ बोल रहे हैं। गरीब आदिवासी लड़के को पीटा गया, उसे पीटने वालों को जेल में डालना चाहिए था, लेकिन ननों को जेल में डाल दिया। एक नर्स और एक फार्मासिस्ट है। ये देश की आदिवासी महिलाओं की बेइज्जती है।

पूर्व CM भूपेश बघेल ने कहा कि सांसद प्रतिनिधिमंडल संसद सत्र छोड़कर मिलने आए थे, लेकिन मिलने से रोका गया। यह बीजेपी की अल्पसंख्यकों के खिलाफ रणनीति है। अल्पसंख्यकों को टारगेट करो, ताकि वह संख्या वोट को केंद्रीकरण किया जा सके। ननों को जबरन फंसाया गया है।

अब जानिए किस सांसद ने क्या क्या कहा ?

सांसद बेनी बेहनन ने कहा कि हमने जेल में बंद दोनों सिस्टर्स से विस्तार से चर्चा की। वे युवतियों को नौकरी के लिए आगरा, शहडोल और एक अन्य स्थान पर ले जा रही थीं, लेकिन गलतफहमी पैदाकर धर्मांतरण और मानव तस्करी का आरोप लगाकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दबाव बनाया।

उन्होंने कहा कि यह सब पुलिस ने नहीं किया, बल्कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने किया है। क्या यही लॉ एंड ऑर्डर है। पुलिस के संरक्षण में बजरंग दल ने सब किया है। हम सब यह मुद्दा संसद में उठाने जा रहे हैं। सिस्टर्स के साथ बहुत गलत हुआ है। सरकार ने गलत कार्रवाई की है।

सांसद प्रतिनिधिमंडल बोला- केंद्र सरकार अल्पसंख्यकों को टारगेट कर रही

जेल के बाहर मीडिया से बात करते हुए सांसदों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अल्पसंख्यकों को टारगेट कर रही है। बिना वजह जेल भेजा जा रहा है। दोनों नन निर्दोष हैं और उनके साथ अन्याय हो रहा है। ये सरकार की गलत कार्रवाई है। बिना जांच के सिस्टर्स के खिलाफ कार्रवाई की गई।

बता दें कि प्रतिनिधिमंडल में सांसद के. फ्रांसिस जॉर्ज, बेनी बेहनन, सप्तगिरी उल्का, एन. के. प्रेमचंद्रन, इंग्रिड मैकलोड, अनिल थॉमस के साथ कांग्रेस की महासचिव जरिता लैतफलॉन्ग और सामाजिक कार्यकर्ता एनी पीटर शामिल थीं।

छत्तीसगढ़ में आदिवासियों महिलाओं की सार्वजनिक बदनामी हुई- वृंदा करात

माकपा वृंदा करात ने कहा कि क्रिश्चन के साथ बहुत गलत हो रहा है। देश की महिलाओं की बेइज्जती हुई है। दोनों ननों की सार्वजनिक बदनामी की गई है। कौन होते हैं, ये बजरंग दल वाले। इनको संविधान भी पता है।

यहां की भाजपा सरकार नौकरी नहीं दे पा रही है। आदिवासी युवतियों को नौकरी के लिए ले जाया जा रहा था। युवतियों का अधिकार है, कहीं भी जाकर नौकरी कर सकती हैं।

28 जुलाई को दिल्ली में संसद के बाहर सांसदों का प्रदर्शन

28 जुलाई को केरल की 2 कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी के खिलाफ दिल्ली में संसद के बाहर प्रदर्शन हुआ। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर लिखा था कि छत्तीसगढ़ में 2 कैथोलिक ननों को उनकी आस्था के कारण निशाना बनाकर जेल भेज दिया गया। यह न्याय नहीं, बल्कि भाजपा-RSS का भीड़तंत्र है।

राहुल गांधी ने कहा कि यह एक खतरनाक पैटर्न को दर्शाता है। ये बीजेपी के शासन में अल्पसंख्यकों का सिस्टेमैटिक उत्पीड़न है। हम चुप नहीं बैठेंगे। धार्मिक स्वतंत्रता एक संवैधानिक अधिकार है। हम ननों की तत्काल रिहाई और इस अन्याय के लिए जवाबदेही की मांग करते हैं।

ननों की गिरफ्तारी के खिलाफ संसद परिसर में विपक्ष के सांसदों ने सोमवार को प्रदर्शन किया।

ननों की गिरफ्तारी के खिलाफ संसद परिसर में विपक्ष के सांसदों ने सोमवार को प्रदर्शन किया।

सरकार ने मानव तस्करी का आरोप लगाकर जेल में डाला- केसी वेणुगोपाल

वहीं सोमवार को कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा था कि हमने ननों की हिरासत के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। वे केरल की रहने वाली हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में काम कर रही हैं। सरकार ने मानव तस्करी का आरोप लगाकर जेल में डाल दिया। धर्मांतरण का आरोप पूरी तरह से झूठ है।

केसी वेणुगोपाल ने कहा था कि ननों ने पुलिस को बताया कि हम उन्हें कानूनी तौर पर ले जा रहे हैं और हमारे पास उनके माता-पिता की अनुमति है, लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी। भाजपा शासित राज्यों में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं।

अल्पसंख्यकों को बदनाम किया जा रहा- प्रियंका गांधी

इसके साथ ही कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा था कि मैं 25 जुलाई को छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर हुई घटना की निंदा करती हूं। ननों पर धर्मांतरण और मानव तस्करी के झूठे आरोप लगाए गए हैं। ये अल्पसंख्यक अधिकारों पर एक गंभीर हमला है।

प्रियंका गांधी ने कहा था कि यह केवल एक मामला नहीं है। भाजपा शासन में अल्पसंख्यकों को सिस्टेमैटिक रूप से परेशान और बदनाम किया जा रहा है। भीड़ द्वारा न्याय और सांप्रदायिक निशाना बनाने का हमारे लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है। कानून का शासन कायम रहना चाहिए।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में ननों की गिरफ्तारी के खिलाफ संसद परिसर में विपक्ष के सांसदों ने किया प्रदर्शन।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में ननों की गिरफ्तारी के खिलाफ संसद परिसर में विपक्ष के सांसदों ने किया प्रदर्शन।

कानून अपने हिसाब से काम करेगा- CM साय

CM विष्णुदेव साय ने कहा था कि छत्तीसगढ़ एक शांतिप्रिय प्रदेश है, जहां सभी धर्म-समुदाय के लोग सद्भाव से रहते हैं। हमारी बस्तर की बेटियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक रूप देना बेहद दुर्भाग्यजनक है। प्रकरण कोर्ट में है और कानून अपने हिसाब से काम करेगा।

साय ने कहा था कि नारायणपुर की तीन बेटियों को नर्सिंग की ट्रेनिंग दिलाने और जॉब दिलाने का वादा किया गया था। नारायणपुर के एक व्यक्ति ने दुर्ग स्टेशन पर दो ननों को सौंपा था। वह उन बेटियों को आगरा ले जा रही थी। इसमें प्रलोभन के माध्यम से ह्यूमन ट्रैफिकिंग कर मतांतरण किए जाने की कोशिश की जा रही थी। इस मामले में अभी जांच जारी है।

अब जानिए 25 जुलाई को क्या-क्या हुआ था ?

दरअसल, 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन में धर्मांतरण और ह्यूमन ट्रैफिकिंग को लेकर जमकर बवाल हुआ। बजरंग दल ने 2 मिशनरी सिस्टर (नन) और एक युवक पर 3 आदिवासी युवतियों को UP के आगरा में काम दिलाने के बहाने बेचने ले जाने का आरोप लगाया।

बजरंग दल ने आरोप लगाया था कि दोनों मिशनरी सिस्टर्स नारायणपुर की कमलेश्वरी, ललिता और सुखमति को आगरा लेकर जा रहे थे, जिन्हें पकड़ा गया। बवाल के बाद दुर्ग GRP ने मानव तस्करी के आरोप में FIR दर्ज की। केरल की वंदना फ्रांसिस और प्रीति मेरी को गिरफ्तार कर लिया।

ये तस्वीरें देखिए…

भिलाई थाना-3 के दुर्ग जीआरपी चौकी में बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता पहुंचे।

भिलाई थाना-3 के दुर्ग जीआरपी चौकी में बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता पहुंचे।

दुर्ग GRP चौकी में धर्मांतरण और ह्यूमन ट्रैफिकिंग को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जमकर बवाल किया।

दुर्ग GRP चौकी में धर्मांतरण और ह्यूमन ट्रैफिकिंग को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जमकर बवाल किया।

नारायणपुर की इन 3 युवतियों को दुर्ग रेलवे स्टेशन से छुड़ाया गया है।

नारायणपुर की इन 3 युवतियों को दुर्ग रेलवे स्टेशन से छुड़ाया गया है।

अब जानिए क्यों और कैसे हुई गिरफ्तारी ?

बजरंग दल की प्रदेश संयोजिका ज्योति शर्मा के मुताबिक शुक्रवार सुबह 8:30 बजे यानी 25 जुलाई को 2 मिशनरी सिस्टर और एक युवक 3 लड़कियों के साथ रेलवे स्टेशन में घूम रहे थे। इस दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक लड़की को रोते हुए देखा। उसके साथ मौजूद युवक लड़की से कह रहा था कि तुम इतनी दूर आ गई हो, इसलिए तुम्हें जाना होगा।

ज्योति शर्मा के मुताबिक इस दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ता युवक की बातचीत सुन रहे थे। ऐसे में उन्हें मिशनरी सिस्टर और युवक पर शक हुआ। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने तीनों से पूछताछ की। पता चला कि मिशनरी सिस्टर और युवक तीनों लड़कियों को आगरा ले जा रहे थे।

मिशनरी सिस्टर और युवक के बीच बातचीत पर शक होने पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने स्टेशन पर हंगामा खड़ा कर दिया। हंगामे के बीच तीनों लड़कियों, 2 ननों और उनके साथ एक युवक को जीआरपी ने पकड़ लिया और थाने ले आई और पूछताछ की।

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कोरबा

अपना बैंक खाता एवं मोबाइल नंबर दूसरों को देना पड़ा भारी

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कोरबा निवासी 02 लोगों के विरुद्ध म्यूल अकाउंट के मामले में पुलिस की कार्रवाई

कोरबा पुलिस की अपील—अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम एवं मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें

कोरबा। पुलिस अधीक्षक जिला कोरबा सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटेल एवं साइबर नोडल अधिकारी नितेश ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कटघोरा के मार्गदर्शन में साइबर थाना प्रभारी ललित कुमार चंद्रा के नेतृत्व में म्यूल अकाउंट के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है।

भारत सरकार के गृह मंत्रालय से म्यूल अकाउंट (Mule Account) के संबंध में प्राप्त निर्देशों के पालन में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा ऐसे बैंक खातों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिनका उपयोग साइबर अपराधों में किए जाने की आशंका है।

इसी क्रम में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा अलग अलग बैंक खातों के संबंध में अपराध पंजीबद्ध कर धारा 317(2), 318(4) बीएनएस के तहत विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान दो अलग अलग अपराधों में दो खाताधारकों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई।

पूछताछ में खाता धारक महेंद्र कुमार धीवर निवासी मानस नगर, कोरबा एवं के प्रभाकर राव निवासी कृष्ण नगर कोरबा द्वारा अपने बैंक खातों को लाभ कमाने के उद्देश्य से अन्य व्यक्तियों को कमीशन के बदले उपयोग हेतु दिए जाने की बात सामने आई। बाद में उन्हें जानकारी हुई कि संबंधित बैंक खाते होल्ड हो गए हैं।

प्रकरण में उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर दोनों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई है। प्रकरण की विवेचना वर्तमान में जारी है।

म्यूल अकाउंट के विरुद्ध कोरबा पुलिस की कार्रवाई

साइबर अपराधियों द्वारा आम नागरिकों को कमीशन अथवा आसान कमाई का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाकर अथवा पहले से संचालित बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराध से प्राप्त राशि के लेन-देन के लिए किया जाता है। ऐसे बैंक खातों को म्यूल अकाउंट (Mule Account) कहा जाता है।

साइबर अपराध में प्रयुक्त ऐसे खातों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध कराने वाले खाताधारक भी साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं।

कोरबा पुलिस की आम नागरिकों से अपील

साइबर अपराधी लोगों को कमीशन अथवा अन्य प्रकार के लाभ का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर अथवा सिम का उपयोग साइबर अपराधों में कर सकते हैं। अतः नागरिक निम्न सावधानियां बरतें—

  • अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें।
  • अपना एटीएम/डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी को न दें।
  • अपना मोबाइल नंबर अथवा सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने के लिए न दें।
  • किसी व्यक्ति द्वारा कमीशन या आसान कमाई का लालच देकर बैंक खाता उपलब्ध कराने की बात कही जाए तो सतर्क रहें।
  • अपने बैंक खाते में होने वाले लेन-देन की नियमित रूप से जानकारी रखें।
  • किसी संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिलने पर तत्काल अपने बैंक एवं पुलिस को सूचित करें।
  • किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में राशि प्राप्त कर उसे दूसरे खाते में ट्रांसफर अथवा नकद निकालकर न दें।

कोरबा पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि थोड़े से आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम अथवा मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को देकर स्वयं को साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई का हिस्सा न बनाएं।

सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।

सजग कोरबा – सतर्क कोरबा।

— जिला कोरबा पुलिस, छत्तीसगढ़

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कोरबा

SECL मानिकपुर जनसुनवाई रद्द करने की मांग:ग्रामीणों ने प्रक्रिया को फर्जी बताया,भू-विस्थापित बोले- पहले पुराने वादे पूरे करो,नहीं तो 3 हजार ग्रामीण करेंगे विरोध

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कोरबा। SECL मानिकपुर ओपन कास्ट खदान विस्तार परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। भू-विस्थापित संगठन मानिकपुर ने 21 अगस्त को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई को रद्द करने की मांग की है।

संगठन ने जनसुनवाई की प्रक्रिया को फर्जी बताते हुए चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो 8 प्रभावित गांवों के करीब 2 से 3 हजार महिला-पुरुष ग्रामीण मौके पर पहुंचकर इसका उग्र विरोध करेंगे।

200-250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप

200-250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप

250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों पहले खदान के लिए अपनी उपजाऊ जमीन देने के बावजूद करीब 200 से 250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। वहीं, SECL द्वारा गोद लिए गए 7-8 गांवों में सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी खराब है।

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और SECL प्रबंधन खदान विस्तार और कॉर्पोरेट मुनाफे को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि विस्थापित परिवारों की पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है।

युवाओं के लिए 400-500 स्थायी नौकरी की मांग

भू-विस्थापितों ने प्रभावित गांवों के युवाओं के लिए मौके पर ही 400 से 500 पदों पर नियमित और स्थायी भर्ती शुरू करने की मांग रखी है। इसके अलावा भिलाई खुर्द-1, 2 और 3 में बचे मकानों और जमीनों का दोबारा पारदर्शी तरीके से भौतिक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग की गई है।

रापाखरा और दादर खुर्द को लेकर भी मांग

ग्रामीणों ने रापाखरा के विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने और आने-जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, दादर खुर्द के तालाब को गांव की निस्तारी का प्रमुख स्रोत बताते हुए वहां ओबी डंपिंग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।

ग्रामीणों को सूचना दिए बिना जनसुनवाई कराने का आरोप

ग्रामीण अमन पटेल ने आरोप लगाया कि SECL प्रबंधन 21 अगस्त को जनसुनवाई कराने जा रहा है, लेकिन प्रभावित गांवों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि करीब 15-20 दिन पहले अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा गया था कि जनसुनवाई की जानकारी मिलने पर ग्रामीणों को बताया जाएगा। इसके बावजूद अब पंचायत सचिव, सरपंच और अन्य क्षेत्रों को नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुराने मुआवजे, रोजगार, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े वादे पूरे नहीं होते, तब तक खदान विस्तार के लिए जनसुनवाई नहीं होने दी जाएगी।

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कोरबा

भूमि के बदले रोजगार संबंधी शिकायतों की जांच के लिए एसईसीएल ने गठित की उच्चस्तरीय समिति

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पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध शिकायत निवारण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

बिलासपुर/कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने भूमि के बदले रोजगार से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा समिति का गठन किया है। समिति उपलब्ध अभिलेखों, दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण कर अपनी अनुशंसाएं सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

भूमि के बदले रोजगार की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से लागू की गई यह उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था प्रत्येक पात्र हितग्राही के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

समिति के अध्यक्ष महाप्रबंधक (भू-राजस्व), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर होंगे। समिति में महाप्रबंधक (योजना एवं परियोजना), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/श्रमशक्ति), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/औद्योगिक संबंध) तथा उप-महाप्रबंधक (विधि), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर सदस्य होंगे।

गठित समिति आवश्यकता के अनुसार संबंधित अभिलेखों एवं दस्तावेजों की जांच करेगी, अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करेगी तथा उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों का सत्यापन करते हुए प्रचलित नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप शिकायतों का परीक्षण करेगी। इससे प्रकरणों के त्वरित, निष्पक्ष एवं तार्किक निस्तारण में सहायता मिलेगी।

भूमि के बदले रोजगार से संबंधित अनियमितता, जाली अथवा कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग, तथ्य छिपाकर रोजगार प्राप्त करने अथवा अन्य संबंधित मामलों के संबंध में कोई भी व्यक्ति आवश्यक दस्तावेजों एवं साक्ष्यों सहित समिति के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर सकता है।

एसईसीएल ने स्पष्ट किया है कि विधिवत दर्ज की गई शिकायत को वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। अतः शिकायतकर्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे केवल प्रामाणिक तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही शिकायत दर्ज कराएं।
कंपनी ने सभी संबंधित पक्षों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि शिकायत केवल अधिकृत माध्यमों से ही प्रस्तुत करें तथा किसी भी प्रकार के बिचौलियों, अपुष्ट सूचनाओं अथवा भ्रामक दावों से सावधान रहें।

एसईसीएल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान कोई शिकायत जानबूझकर असत्य, दुर्भावनापूर्ण अथवा भ्रामक तथ्यों पर आधारित पाई जाती है, अथवा किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करने या अनावश्यक उत्पीड़न के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती है, तो संबंधित शिकायतकर्ता के विरुद्ध प्रचलित नियमों एवं लागू विधिक प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

एसईसीएल सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं संस्थागत निष्पक्षता के उच्च मानकों के प्रति प्रतिबद्ध है। कंपनी का विश्वास है कि उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था के माध्यम से भूमि के बदले रोजगार संबंधी शिकायतों के परीक्षण की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं विश्वसनीय बनेगी। साथ ही, वास्तविक एवं पात्र हितग्राहियों के हितों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित होने के साथ शिकायत निवारण तंत्र में जनविश्वास एवं संस्थागत जवाबदेही भी और सुदृढ़ होगी।

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