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मोदी बोले-TMC के गुंडे संदेशखाली की बहनों को डरा रहे:हुगली में कहा- कांग्रेस को शहजादे की उम्र से भी कम सीटें मिलेंगी

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कोलकाता, एजेंसी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पश्चिम बंगाल के बैरकपुर, हुगली, आरामबाग और हावड़ा में रैली की। प्रधानमंत्री ने कहा कि संदेशखाली की बहनों को डराया-धमकाया जा रहा है। कांग्रेस को इस बार उनके शहजादे की उम्र से भी कम सीटें मिलेंगी। राहुल गांधी इस साल 19 जून को 54 साल के हो जाएंगे।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में संदेशखाली में यौन उत्पीड़न के मामले में कथित वीडियो पर कहा- पहले TMC नेताओं को पुलिस ने बचाया। अब TMC ने एक नया खेल शुरू किया है। TMC के गुंडे संदेशखाली की बहनों को डरा रहे हैं, धमका रहे हैं। सिर्फ इसलिए कि अत्याचारी का नाम शाहजहां शेख है।

उन्होंने कहा- बंगाल में TMC की सरकार में राम का नाम नहीं लेने दिया जाता। रामनवमी नहीं मनाने दी जाती। CAA का विरोध किया जाता है। ये तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति करते हैं। यहां की तस्वीर बता रही है कि बंगाल में इस बार एक अलग माहौल है। कुछ अलग होने जा रहा है। प्रधानमंत्री ने बंगाल के लोगों को 5 गारंटी भी दी।

कांग्रेस राज में सिर्फ गरीबी और पलायन मिला
आजादी के बाद 50 वर्ष तक कांग्रेस के परिवार ने ही सरकारें चलाईं, लेकिन पूर्वी भारत को सिर्फ गरीबी और पलायन मिला। पश्चिम बंगाल हो, बिहार हो, झारखंड हो, ओडिशा हो, आंध्र प्रदेश हो। कांग्रेस और इंडी अलायंस के दलों ने पूर्वी भारत को पिछड़ा ही छोड़ दिया।

मोदी पूर्वी हिस्से को विकसित भारत का ग्रोथ इंजन बनाएगा
मोदी ने ठाना है कि वो देश के पूर्वी हिस्से को विकसित भारत का ग्रोथ इंजन बनाएगा। आज हम पूर्वी राज्यों में सड़क मार्ग, रेलवे और जलमार्ग का एक नेटवर्क बना रहे हैं। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने इस क्षेत्र में औद्योगीकरण को बढ़ाया है। आने वाले वर्ष बंगाल और आसपास के राज्यों के विकास को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित होंगे।

TMC ने बंगाल को घोटाले का गढ़ बना दिया है
बैरकपुर की धरती इतिहास रचने वाली धरती है। आजादी में अहम भूमिका निभाने वाली धरती है, लेकिन TMC ने इसका क्या हाल बना दिया है। एक समय था, जब बंगाल की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में ये अपना बड़ा योगदान देता था, आज TMC ने इसे घोटाले का गढ़ बना दिया है।

TMC राज में बम बनाने की इंडस्ट्री चल रही है
एक समय था, जब बंगाल में एक से बढ़कर एक वैज्ञानिक खोज हुआ करती थीं, आज TMC के राज में जगह-जगह बम बनाने की होम इंडस्ट्री चल रही है। एक समय था, जब बंगाल घुसपैठियों के खिलाफ क्रांति किया करता था, लेकिन आज TMC के संरक्षण में यहां घुसपैठिए फल-फूल रहे हैं।

. बंगाल में राम का नाम लेने नहीं दिया जाता
आज स्थिति ये है कि बंगाल में अपनी आस्था का पालन करना भी गुनाह है। बंगाल में TMC सरकार राम का नाम नहीं लेने देती। बंगाल में TMC सरकार रामनवमी नहीं मनाने देती। कांग्रेस और लेफ्ट के लोगों ने भी राम मंदिर के विरुद्ध मोर्चा खोल रखा है। क्या TMC, कांग्रेस और लेफ्ट के हाथ में देश सौंपा जा सकता है।

TMC ने हिंदुओं को दोयम दर्जे का नागरिक बनाया
TMC-कांग्रेस के इंडी अलांयस ने तुष्टिकरण और वोटबैंक की पॉलिटिक्स के आगे घुटने टेक दिए हैं। TMC के MLA ने कहा कि हिंदुओं को भागीरथी में बहा देंगे। सोचिए, इतनी हिम्मत, इतना साहस। इन लोगों ने बंगाल में हिंदुओं को दोयम दर्जे का नागरिक बना कर रख दिया है।

वोट बैंक की राजनीति के चलते CAA का विरोध हो रहा
वोट बैंक की राजनीति ने CAA जैसे मानवता की रक्षा करने वाले कानून को विलेन बनाकर पेश किया। CAA कानून तो पीड़ितों को नागरिकता देने का कानून है, इससे किसी की नागरिकता नहीं छिनती। लेकिन कांग्रेस-TMC जैसे दलों ने इसे भी अपने झूठ के रंग से रंग दिया।

कांग्रेस ने OBC का आरक्षण मुस्लिमों को दिया
तुष्टिकरण की जिद में INDI गठबंधन SC-ST-OBC को मिलने वाला आरक्षण भी छीनना चाहती है। ये लोग कह रहे हैं कि आरक्षण अब मुसलमानों को दिया जाए। पूरा का पूरा आरक्षण मुसलमानों को दिया जाए। कर्नाटक में कांग्रेस ने OBC को मिलने वाले सारे आरक्षण मुसलमान को दे चुकी है।

भ्रष्टाचारियों को मोदी नहीं छोड़ेगा
ये जो नोटों के पहाड़ निकल रहे हैं, इन पहाड़ के मालिकों को छोड़ा नहीं जाएगा। मैं भ्रष्टाचार से पीड़ित हर बंगालवासी को कहूंगा, कोई भी भ्रष्टाचारी बचने वाला नहीं है। ये जो करोड़ों रुपए इनसे बरामद हो रहे हैं, ये पीड़ितों को कैसे मिलें। मोदी इसका भी रास्ता खोज रहा है।

संदेशखाली में नया खेल शुरू हुआ है
संदेशखाली के गुनहगार को, पहले TMC की पुलिस ने बचाया, अब TMC ने एक नया खेल शुरू किया है। TMC के गुंडे, संदेशखाली की बहनों को डरा रहे हैं, धमका रहे हैं, सिर्फ इसलिए कि अत्याचारी का नाम शाहजहां शेख है।

सारी बुराइयों को को मिला दें तो TMC बनती है
कांग्रेस का भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टिकरण, लेफ्ट का अत्याचार और अराजकता, इन सारी बुराइयों को मिला दें तो बनती है TMC। कांग्रेस, लेफ्ट और TMC ने बंगाल को तबाह कर दिया। इंडी गठबंधन की ज्यादातर पार्टियां छिपकर घोटाले करती हैं, लेकिन TMC घोटालों की ओपन इंडस्ट्री चलाती है। कांग्रेस और तुष्टिकरण का कॉम्पिटीशन चल रहा है।

TMC घुसपैठियों का भला कर रही, विकसित बंगाल का सपना बीजेपी पूरा करेगी
TMC सरकार उन्हीं लोगों को पैसा रिलीज करती है, जो या तो उनसे जुड़े हैं या उन्हें कट मनी देते हैं। गरीबों को ये लोग हमारी योजनाओं का लाभ मिलने नहीं दे रहे। TMC का एजेंडा है- घुसपैठियों का भला, घुसपैठियों का हित। ये बाहर से आए लोगों को यहां कब्जा दिलवाते हैं। विकसित बंगाल का सपना सिर्फ बीजेपी पूरा कर सकती है, क्योंकि ये हमारा संकल्प है।

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मानसून अब 7 दिन बाद केरलम पहुंचेगा:तूफानी हवाओं ने श्रीलंका में रोका, 10% कम बारिश का अनुमान, जून-जुलाई में भी हीटवेव चलेगी

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नई दिल्ली, एजेंसी। देश में मानसून की एंट्री लेट हो गई है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को बताया कि श्रीलंका के ऊपर कम दबाव वाली तूफानी हवाओं के चलते मानसून केरलम तट से 30-35 किमी दूर 5 दिन से अटका है और अगले 2-3 दिन इसके आगे बढ़ने के आसार नहीं हैं।

केरलम के तट पर मानसून पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून मानी जाती है। इससे पहले मौसम विभाग ने 26 मई तक ही मानसून आने का अनुमान जताया था। ताजा अनुमान के मुताबिक अब यह 7 दिन बाद केरल तट पर पहुंचेगा। यानी, पिछले अनुमान से मानसून करीब 10 दिन बाद देश में एंट्री करेगा।

IMD के मुताबिक जून-जुलाई में भी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश में हीटवेव चलने की संभावना है। आमतौर पर उस वक्त तापमान 30-35 डिग्री तक रहता है। इस बार 3 डिग्री ज्यादा टेंपरेचर रहेगा।

इस साल बारिश भी 10% तक कम होगी

मौसम विभाग ने बताया कि इस साल देश में औसतन 78 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान है। जो सामान्य से करीब 10% कम है। 13 अप्रैल को 80 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान लगाया गया था। 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर देश में औसत बारिश 87 सेंटीमीटर मानी जाती है।

जून में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार में कम बारिश

मौसम विभाग ने बताया कि जून में मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड में सामान्य से भी कम बारिश होगी। वहीं महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में सामान्य बारिश का अनुमान है।

देश के कोर जोन में कम बारिश से खेती पर सीधा असर

मौसम विभाग ने बताया कि इस साल मानसून के कोर जोन में कम बारिश होगी। इस इलाके में खेती सबसे ज्यादा मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। यानी बारिश का सीधा असर फसलों और खाद्य उत्पादन पर पड़ता है।

मानसून कोर जोन में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र का विदर्भ, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, कुछ हिस्से उत्तर प्रदेश और बिहार के इलाके आते हैं। यहां खेती पर असर पड़ने से किसानों को सीधा नुकसान होगा।

कमजोर मानसून, कम बारिश का आम आदमी पर असर…

देश में कुल बारिश का करीब 75% हिस्सा मानसून के दौरान होता है, जो सिंचाई, पीने के पानी और बिजली उत्पादन के लिए बेहद जरूरी है।

करीब 64% आबादी कृषि पर निर्भर है। सिर्फ 55% खेती योग्य जमीन ही सिंचाई से कवर है।

कम बारिश का असर खरीफ सीजन की बुवाई, फसल उत्पादन और कुल कृषि गतिविधियों पर पड़ेगा, जिससे किसानों की लागत और जोखिम दोनों बढ़ सकते हैं।

बारिश कम होने से उत्पादन घट सकता है, जिसका असर सप्लाई पर पड़ेगा और इससे सब्जियों, दालों सहित खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

खेती कमजोर रहने पर गांवों में आय कम हो सकती है, जिससे ग्रामीण बाजार में खर्च और मांग दोनों प्रभावित होंगे।

ग्रामीण मांग में कमी आने पर ट्रैक्टर और टू-व्हीलर जैसे वाहनों की बिक्री पर भी असर पड़ने की संभावना है।

अगर बारिश कम रहती है तो डैम और जलाशयों का जलस्तर सामान्य से नीचे रह सकता है, जिससे आगे चलकर पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

कम बारिश और ज्यादा गर्मी की स्थिति में बिजली की खपत बढ़ेगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां तापमान ज्यादा रहता है।

पिछले साल 8 दिन पहले आया था मानसून

पिछले साल मानसून तय समय से 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरलम पहुंच गया था। मानसून केरलम से आगे बढ़ते हुए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आमतौर पर मध्य जून तक पहुंचता है। 11 जून तक मुंबई और 8 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है।

इसकी वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से 17 सितंबर को शुरू होती है और यह पूरी तरह 15 अक्टूबर तक लौट जाता है। अल नीनो इफेक्ट की वजह से मानसून में देरी हो सकती है। हालांकि सीजन के आखिर में थोड़ी राहत मिल सकती है।

IMD के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 150 साल में मानसून के केरलम पहुंचने की तारीखें अलग-अलग रही हैं। 1918 में मानसून सबसे पहले 11 मई को केरलम पहुंच गया था, जबकि 1972 में सबसे देरी से 18 जून को केरलम पहुंचा था।

मौसम विभाग ने कहा कि कमजोर मानसून के पीछे की वजह अल-नीनो है। जून में अल नीनो का असर दिख सकता है। जुलाई और अगस्त में भी कमजोर से मध्यम स्तर का अल नीनो बने रहने की संभावना है।

अल नीनो के कारण समुद्र का पानी असमान्य रूप से गर्म हो जाता है, जिसके साथ हवा के पैटर्न में भी बदलाव आता है। इसके असर से दुनियाभर में बारिश का चक्र बिगड़ जाता है। कहीं भयंकर सूखा तो कहीं मूसलाधार बारिश और बाढ़ आती है।

सीधे शब्दों में कहें तो जब अल-नीनो एक्टिव होगा, तब प्रशांत महासागर से भारत की तरफ आने वाली मानसूनी हवाओं को रोक देगा। इससे बारिश पर असर पड़ेगा।

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सुप्रीम कोर्ट बोला- NTA को UPSC से सीखने की जरूरत:वहां कभी पेपर लीक नहीं होता, जवाबदेही तय होने तक ऐसी घटनाएं नहीं रुकेंगी

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नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को NEET-UG पेपर लीक मामले पर कहा कि जवाबदेही तय होने तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। कोर्ट में मौजूद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से सवाल किया कि UPSC तो आपसे बड़े पैमाने पर परीक्षा करवाता है, वहां कभी पेपर लीक नहीं हुआ। NTA को उनसे सीखने की जरूरत है।

सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद NEET पेपरलीक की जांच पर नजर रख रहे हैं ताकि कोई चूक न हो।

केस की सुनवाई कर रहे जस्टिस नरसिम्हा ने शिक्षा मंत्रालय से NEET-UG परीक्षाओं की जांच प्रक्रिया का ब्योरा मांगा। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि पेपर लीक के बाद बड़े लेवल पर सुधार किए हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हम युवाओं को लेकर गंभीर हैं। NEET-UG री-टेस्ट के लिए नए तरीके अपनाए गए हैं।

देशभर में 3 मई को NEET-UG परीक्षा हुई थी। 7 मई की शाम पेपर लीक की खबर सामने आई थी। 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। 21 जून को री-एग्जाम होगा।

SC का सवाल- सुधार के बावजूद नाकामी क्यों

सुप्रीम कोर्ट ने NTA को भंग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। इस दौरान 2024 में NEET पेपर लीक के बाद बनाई गई हाई-पावर मॉनिटरिंग कमेटी के प्रमुख और पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के राधाकृष्णन से पूछा कि सिफारिशों और सुधारों के बावजूद इस बार नाकामी क्यों हुई।

राधाकृष्णन ने बताया कि समिति की अधिकांश सिफारिशें लागू की जा चुकी हैं। NEET-PG 2025 सफल रहा और इस साल सामने आई कमजोरियों को आगामी री-टेस्ट से पहले दूर किया जा रहा है।

कोर्ट ने कहा- NTA अभी स्थायी और मजबूत संस्था की तरह काम नहीं कर रही है। केंद्र सरकार NTA को मजबूत बनाने के लिए क्या करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि NTA को IIT और दूसरे बड़े संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए, ताकि भविष्य में परीक्षाएं सुरक्षित तरीके से हो सकें।

कोर्ट रूम LIVE

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस नरसिम्हा, सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और कमेटी की ओर से राधाकृष्णन सुनवाई में शामिल हुए।

जस्टिस नरसिम्हा: हाई पावर्ड कमेटी के बावजूद पेपर लीक जैसी घटना कैसे हुई? गड़बड़ी सिफारिशों में थी या इम्प्लीमेंटेशन में।

राधाकृष्णन: कमेटी ने 35 लॉन्ग टर्म और 60 शॉर्ट टर्म सुझाव दिए थे, ज्यादातर लागू हो चुके हैं।

जस्टिस नरसिम्हा: अगर तैयारी थी तो NEET-UG में फिर समस्या क्यों हुई।

राधाकृष्णन: पेपर से छेड़छाड़ बड़ी चुनौती थी, लेकिन अगले महीने होने वाले री-एग्जाम में सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

जस्टिस नरसिम्हा: असली जवाबदेही तय किए बिना ऐसी घटनाएं नहीं रुकेंगी।

जस्टिस नरसिम्हा: UPSC में ऐसी स्थिति नहीं बनती, NTA को उससे सीखने की जरूरत है।

सॉलिसिटर जनरल: 21 जून के एग्जाम के लिए नया सुरक्षा मैकेनिज्म बनाया गया है, जिसकी हाई लेवल मॉनिटरिंग हो रही है।

राधाकृष्णन: NTA में एक्सपर्ट्स की कमी थी, इसलिए अलग-अलग सिस्टम और विशेषज्ञों को जोड़ा गया है।

जस्टिस नरसिम्हा: संस्थाएं एड-हॉक तरीके से नहीं चल सकतीं, मजबूत इंस्टीट्यूशनल सिस्टम बनाना जरूरी है।

जस्टिस नरसिम्हा: बड़ी यूनिवर्सिटीज और IITs के साथ मिलकर फुल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया जाए।

जस्टिस नरसिम्हा: छात्रों की मेहनत और भावनाओं को देखते हुए उन्हें इस तरह के ट्रॉमा से बचाना जरूरी है।

25 मई को सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था- क्या सबक लिया

इससे पहले 25 मई को सुनवाई हुई थी। तब कोर्ट ने NTA को फटकार लगाई थी। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने NTA को फटकारते हुए कहा था कि यह दुखद की बात है कि आपने (NTA) ने पहले हुए पेपर लीक मामले से कोई सबक नहीं लिया।

बेंच ने कहा था कि साल 2024 में भी पेपर लीक का मामला कोर्ट तक पहुंचा था। तब एक कमेटी बनाई गई थी, जिसने कई सिफारिशें दीं, जिन्हें स्वीकार भी किया गया था। NTA 28 मई तक हलफनामा दाखिल करे और बताए कि 2024 में दिए गए निर्देशों और मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों पर क्या कदम उठाए गए। कोर्ट ने मौजूदा मामले में केंद्र सरकार और CBI से भी जवाब मांगा था।

NEET पेपर लीक में अब तक 13 गिरफ्तार, 21 जून को परीक्षा

NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित हुई थी। इसमें करीब 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। NTA के अनुसार 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिली थी। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया।

12 मई को परीक्षा रद्द की गई और री-एग्जाम का फैसला लिया गया। 15 मई को शिक्षा मंत्रालय और NTA ने NEET री-एग्जाम की तारीख 21 मई को होने का ऐलान किया। इस मामले की जांच CBI कर रही है। अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

NEET से 1 लाख से ज्यादा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में दाखिले के लिए होने वाली राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी।

इस परीक्षा के माध्यम से देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, आयुष (BAMS, BHMS) और नर्सिंग जैसे कोर्सेज में दाखिला मिलता है, जिसमें AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। भी देश में लगभग 1 लाख से अधिक MBBS और 27000 से अधिक BDS सीटें हैं।

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Monsoon 2026: IMD की बड़ी चेतावनी: साल 2026 में सूखे का संकट, पूरे देश में सिर्फ 90% बारिश का अनुमान

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नई दिल्ली, एजेंसी। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साल 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के लिए अपना दूसरा दीर्घकालिक अनुमान शुक्रवार को जारी कर दिया। इसके अनुसार देश के प्रमुख कई हिस्सों में इस साल मानसून की बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार देश में मानसून दीर्घावधि अनुमान के 90 प्रतिशत रह सकता है। यह स्थिति सामान्य से कम मानसून को दर्शाती है। विभाग के अनुसार इस प्रतिशत में चार प्रतिशत घट बढ़ हो सकता है। 

मौसम विभाग ने यहां बताया कि उत्तर-पूर्वी भारत में मानसून की स्थिति सामान्य रहने का अनुमान है, जहां दीर्घावधि औसत की 94 से 106 प्रतिशत तक बारिश हो सकती है। जबकि उत्तर-पश्चिमी भारत में समग्र रूप से बारिश सामान्य से कम (दीर्घावधि औसत के 92 प्रतिशत से भी कम) रहने की आशंका है। इसके अलावा मध्य भारत में भी मानसून की रफ्तार सुस्त रह सकती है और यहां बारिश सामान्य से कम ( दीर्घावधि औसत के 94 प्रतिशत से कम) रहने का पूर्वानुमान है। 

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के इस क्षेत्र में भी मानसून की स्थिति सामान्य से कम (दीर्घावधि औसत के 94 प्रतिशत से नीचे) रह सकती है। मौसम विभाग के अनुसार देश का‘मानसून कोर जोन’जिसमें देश के अधिकांश वर्षा-आधारित कृषि क्षेत्र शामिल हैं, वहां इस साल मानसून सामान्य से कम दीर्घावधि औसत के 94 प्रतिशत रहने की सबसे अधिक संभावना है। इस साल बारिश सामान्य से कम रहने पर देश में पानी की कमी, जल संकट और बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।

 मौसम विभाग ने यह दूसरा पूर्वानुमान जून से सितंबर के चार महीनों की अवधि को ध्यान में रखकर जारी किया है। पहला पूर्वानुमान 13 अप्रैल को जारी किया था। इसमें भी मौसम विभाग ने कहा था कि साल 2026 का मानसून सामान्य से कम या कमजोर रह सकता है। मौसम विभाग के अनुसार देश में तापमान सामान्य से अधिक बना रह सकता है।  

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