छत्तीसगढ़
परिवार के 4 लोगों का मर्डर…1 ही गड्ढे में गाड़ा:स्निफर-डॉग भतीजे के घर के सामने रुकी, संदेहियों से पूछताछ, पड़ोसी हो सकते हैं कातिल
रायगढ़,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक ही परिवार के 4 सदस्यों की हत्या कर दी गई। किसी ने पति-पत्नी और उनके 2 बच्चों को कुल्हाड़ी से मारकर बाड़ी में एक ही गड्ढे में दफनाया गया। 11 सितंबर (गुरुवार) को चारों की लाश मिली। मामला खरसिया थाना क्षेत्र का है।
आखिर चारों की हत्या क्यों की गई ये मामला अभी तक सुलझा नहीं है। पुलिस जांच कर रही है। संदेहियों से भी पूछताछ की जा रही है। यह वारदात संपत्ति विवाद और जमीन मुआवजे के पैसों को लेकर भी अंजाम दी गई हो सकती है।
पुलिस पड़ोस के लोगों और कुछ संदेहियों से इस एंगल से भी पूछताछ कर रही है। वहीं आज शुक्रवार को बिलासपुर रेंज के आईजी डॉ संजीव शुक्ला गांव पहुंचे, जहां उन्होंने घटना स्थल का जायजा लिया।

एक ही परिवार के 4 लोगों की हत्या के कारणों का पता लगाने में जुटी पुलिस।

राजीवनगर गांव में मृतक का वह घर जहां चारों की लाश मिली।

शुक्रवार को बिलासपुर रेंज के आईजी डॉ संजीव शुक्ला जायजा लेने गांव पहुंचे।
मृतक को मुआवजे के पैसे मिलने वाले थे
घरघोड़ा के ग्राम चांटीगुड़ा निवासी बुधराम उरांव (40) अपना गांव छोड़कर पत्नी सहोद्रा उरांव (35), बेटा अरविंद (12), बेटी शिवांशी (6) के साथ खरसिया के ग्राम ठुसेकेला में रहकर मजदूरी करता था। उसकी बड़ी बेटी बुआ के यहां कोतरलिया में रहकर पढ़ाई करती है।
उसके पैतृक गांव में उसके नाम जमीन है। उसका कुछ हिस्सा किसी प्लांट में निकला है। उसे मुआवजे की एक किस्त मिल चुकी थी, और शेष राशि मिलना बाकी था। पुलिस इस एंगल से जांच कर रही है कि कहीं मुआवजे के पैसे को लेकर ही यह हत्या न की गई हो।

पुलिस की टीम, फॉरेंसिंक और डॉग स्क्वायड की टीम मौके पर पहुंचकर जांच की थी।
बगल के कमरे को खोदने का प्रयास
जानकारी के मुताबिक, जिस कमरे में चारों की लाश मिली है। ठीक उसके बगल के कमरे भी खुदे हुए मिले हैं, पुलिस ने इससे अंदाजा लगाया है कि किसी ने इस कमरे को भी खोदने का प्रयास किया था, लेकिन खोद नहीं पाया जिसके बाद लाश को बाड़ी में दफनाया गया।
घर के लोगों ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं होने पर गुरुवार सुबह गांववालों को फोन लगाकर बात कराने को कहा गया। तब हादसे की जानकारी हुई। हत्या की वजह संपत्ति विवाद होने की आशंका जताई जा रही है।
घटना की जानकारी खरसिया चौकी प्रभारी ने उच्चाधिकारियों को दी गई। पुलिस की टीम, फॉरेसिंक और डॉग स्क्वायड की टीम पहुंची। घर के पीछे बाड़ी जहां बदबू आ रही थी वहां खोदा गया।
जहां एक की गड्ढे में पति-पत्नी और दोनों बच्चों का शव मिला। बाड़ी में गिली मिट्टी होने से तकरीबन 1 से 2 फीट आसानी से गड्ढा कर उन्हें दफना दिया गया और ऊपर से पैरा डाल दिया गया था।

6 साल की शिवांगी की भी हत्या कर दी गई है। उसकी लाश बाड़ी में दफन मिली।

2 बच्चों को भी कुल्हाड़ी से मारकर बाड़ी में दफना दिया गया, ये तस्वीर अरविंद की है।
नींद में हत्या का शक, कमरे में कुल्हाड़ी, हंसिया, रॉड मिले
पुलिस जांच में यह सामने आया है कि मृतकों के शरीर पर प्रतिरोध के कोई निशान नहीं मिले हैं। इससे आशंका है कि चारों की हत्या नींद में ही कर दी गई। घटनास्थल से कुल्हाड़ी, हंसिया, गैंती, 2 फावड़ा और रॉड भी मिले हैं।
हंसिया-रॉड में खून के दाग थे। ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि उन्हें मारने के लिए इनका भी उपयोग किया गया है और मर्डर करने वाले 1 से ज्यादा लोग हो सकते हैं।

पुलिस डॉग मृतक के भतीजे के घर के सामने जाकर रुकी।
स्निफर डॉग भतीजे के घर के सामने रुकी
पुलिस ने पंचनामा कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। घटना की जानकारी के बाद डॉग स्क्वॉयड की टीम मौके पर पहुंची। खोजी डॉग रूबी घटनास्थल पर मिली कुल्हाड़ी को सूंघकर पहले गांव के रास्ते मृतक की भतीजे के घर के पास बैठी।
फिर गांव के तालाब के पचरी पहुंची। उसके बाद उसी मार्ग से एनएच मार्ग से बोतल्दा रॉक गार्डन जाने वाले मार्ग तक पहुंची।

पुलिस ने कुल्हाड़ी जब्त कर ली है। स्निफर डॉग उसे स्मेल करता हुआ।
मेन गेट अंदर से बंद था
मृतक बुधराम का घर 2-3 दिनों से बंद था और तेज दुर्गंध आ रही थी। लेकिन घर का गेट अंदर से लॉक था। वहीं, बाड़ी तक पहुंचने का रास्ता घर से ही जाता है। ऐसे में यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि हत्यारे पीछे की ओर से रात में अंदर आकर हत्या कर भाग गए होंगे।
संदेहियों से पूछताछ जारी
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश मरकाम ने बताया कि ठुसेकेला राजीव नगर में हुए हत्या के मामले में अभी कोई कारण पता नहीं चल सका है। पुलिस हर एंगल में जांच कर रही है। ताकि जल्द से जल्द आरोपियों तक पुलिस पहुंच सके। मामले में कुछ संदेहियों से पूछताछ की जा रही है।
छत्तीसगढ़
सुकमा : मरीज को मिला समय पर उपचार, सुकमा के चिकित्सकों की टीम ने दिखाई तत्परता
जिला अस्पताल में मौत के मुंह से लौटाई महिला की सांसें
सुकमा। सुकमा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा की तत्परता और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है। सिविल सर्जन डॉ. एमआर कश्यप से प्राप्त जानकारी के अनुसार छिंदगढ़ विकासखंड के कुन्ना निवासी 38 वर्षीय श्रीमती पाली कवासी को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल सुकमा में भर्ती कराया गया।

देरी से अस्पताल पहुंचने के कारण स्थिति अत्यंत जोखिमपूर्ण थी और तत्काल सर्जरी आवश्यक हो गई। अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुजा ने बिना समय गंवाए तुरंत एलएससीएस (सीजर) ऑपरेशन कर मरीज का उपचार प्रारंभ किया। हालांकि ऑपरेशन के दौरान मृत बच्चा पैदा होने से महिला की स्थिति और अधिक जटिल हो गई।
महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और रेफर करने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान महिला का श्वास बंद सा हो गया, साथ ही नाड़ी और हृदय की धड़कन भी थम सी गई। ऐसे संकट की घड़ी में जिला अस्पताल की मेडिकल टीम ने त्वरित निर्णय लेते हुए महिला को दो बार सीपीआर दिया और तत्काल वार्ड में शिफ्ट कर आधुनिक वेंटीलेटर की सहायता से उपचार शुरू किया गया। इसके बाद महिला को दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया।
डॉक्टरों की सतर्कता और उपलब्ध संसाधनों के कारण महिला की जान बचा ली गई। आज श्रीमती पाली कवासी पूरी तरह स्वस्थ हैं और जिला अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ के प्रयासों की सराहना कर रही हैं।

छत्तीसगढ़
जशपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के मातृत्व वन में किया सीता अशोक के पौधे का रोपण
जशपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने सर्किट हाउस जशपुर के मातृत्व वन में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत सीता अशोक के पौधे का रोपण कर पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर कलेक्टर रोहित व्यास वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार और वनमंडला अधिकारी शशि कुमार और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस मातृत्व वन में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मातृत्व वन में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया गया है। इस पहल ने अभियान को भावनात्मक और सामाजिक रूप से विशेष महत्व प्रदान किया है।
राज्यपाल रमेन डेका ने इस अवसर पर कहा कि माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च होता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति सम्मान को प्रकृति से जोड़ रहे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व वन जैसी पहल न केवल हरित क्षेत्र बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव भी विकसित करेंगी।
मातृत्व वन के अंतर्गत पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का चयन कर उनका रोपण किया गया है। इनमें टिकोमा, झारुल, सीता अशोक, गुलमोहर, लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन एवं जामुन जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं। ये पौधे न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाले समय में औषधीय एवं जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मातृत्व वन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, माताओं के प्रति सम्मान को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त करना तथा नई पीढ़ी में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल ‘हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता’ के संदेश को साकार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

छत्तीसगढ़
जशपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के केरेगांव होम-स्टे का किया अवलोकन

जशपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर प्रवास के दौरान शनिवार को जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल देशदेखा के समीप स्थित केरेगांव में विकसित होम-स्टे का अवलोकन किया। इस दौरान वे स्थानीय आदिवासी संस्कृति, जनजीवन और पारंपरिक आतिथ्य परंपरा से रूबरू हुए। होम-स्टे प्रवास के दौरान उन्होंने देशदेखा समूह की महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से तैयार किए गए व्यंजनों का स्वाद चखा। राज्यपाल श्री डेका ने ग्रामीण परिवेश में विकसित होम-स्टे को प्रेरणादायक कदम बताया और कहा कि यह प्रयास न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाते हैं।
इस दौरान स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने ‘जसक्राफ्ट’ ब्रांड के तहत छिंद एवं कांसा से निर्मित पारंपरिक आभूषण माला एवं झुमके राज्यपाल को भेंट किए। राज्यपाल श्री डेका ने स्थानीय महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल कौशल विकास, रोजगार सृजन तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगी।

इस दौरान ‘देशदेखा क्लाइंबिंग कम्पनी’ के सदस्यों ने भी राज्यपाल से भेंट की। उन्होंने क्षेत्र में एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि यहां नियमित रूप से रॉक क्लाइंबिंग जैसे खेलों का आयोजन किया जाता है। राज्यपाल ने अधिकारियों को ऐसे खेलों को निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन देने को कहा, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले और अधिक से अधिक युवा इन गतिविधियों की ओर आकर्षित हों। इस दौरान कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार,वनमंडलाधिकारी शशि कुमार सहित अन्य अधिकारीगण एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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