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छत्तीसगढ़

नक्सलियों ने 2 ग्रामीणों को किडनैप कर मार डाला:इनमें एक सरेंडर नक्सली भी, कहा-पुलिस के मुखबिर थे, बीजापुर में 7 दिन में 5 हत्याएं

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बीजापुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सलियों ने शनिवार देर रात 2 ग्रामीणों की हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि इनमें एक सरेंडर नक्सली भी शामिल है। नक्सलियों ने पुलिस मुखबिरी के शक पर इनकी जान ली है। मामला पामेड़ थाना क्षेत्र का है।

मिली जानकारी के मुताबिक मृतकों का नाम समैय्या और वेको देवा है। समैय्या पहले नक्सली था। उसने 2025 में आत्मसमर्पण किया है। वहीं वेको देवा ग्रामीण है। दोनों नक्सल प्रभावित गांव सेंड्राबोर और एमपुर के रहने वाले थे। इन्हें मिलाकर बीजापुर में 7 दिन में ये 5वीं हत्या है।

ये तस्वीर बीजापुर जिले के पेद्दाकोरमा गांव की है। 5 दिन पहले यहीं 3 लोगों की हत्या की गई थी। ये उनके परिजन हैं।

ये तस्वीर बीजापुर जिले के पेद्दाकोरमा गांव की है। 5 दिन पहले यहीं 3 लोगों की हत्या की गई थी। ये उनके परिजन हैं।

जानिए क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, शनिवार रात बड़ी तादाद में हथियारबंद नक्सली सेंड्राबोर और एमपुर पहुंचे। उनके घर से सरेंडर नक्सली समैय्या और ग्रामीण वेको देवा को किडनैप कर ले गए। इस दौरान दोनों को नक्सलियों ने बेरहमी से पीटा। उनपर आरोप लगाया कि तुमने पुलिस से मुखबिरी की है।

इस दौरान नक्सलियों ने दोनों की बेरहमी से हत्या कर दी। मर्डर के बाद लाश को गांव में ही फेंककर भाग गए। वहीं इसकी जानकारी जब पुलिस को मिली तो जवानों को मौके के लिए भेजा गया है। पुलिस इस मामले की जांच में जुटी हुई है।

17 जून 2025 को नक्सलियों ने बीजापुर जिले में 3 लोगों को मार डाला। परिजनों ने दस्तावेज दिखाए।

17 जून 2025 को नक्सलियों ने बीजापुर जिले में 3 लोगों को मार डाला। परिजनों ने दस्तावेज दिखाए।

5 दिन पहले 3 लोगों की हत्या, 7 को बेदम पीटा

17 जून 2025 को नक्सलियों ने बीजापुर जिले के एक गांव में 3 ग्रामीणों की रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी। इनमें एक 13 साल का 7वीं और दूसरा 20 साल का कॉलेज का छात्र और तीसरा ग्रामीण युवक शामिल है। पूरा मामला पेद्दाकोरमा गांव का है।

नक्सली गांव के 10 से ज्यादा लड़कों को बंधक बनाकर अपने साथ लेकर गए। हालांकि, उनकी बेदम पिटाई करने के बाद उन्हें छोड़ दिया। पुलिस के एक्शन से बौखलाए नक्सली अब स्कूल और कॉलेज के बच्चों का कत्ल कर रहे हैं।

सरेंडर नक्सली के रिश्तेदारों की हत्या

दरअसल, ये सभी ग्रामीण DVCM कैडर के सरेंडर नक्सली दिनेश मोड़ियम के रिश्तेदार हैं। नक्सलियों ने आरोप लगाया कि इन्हीं लोगों ने उसे सरेंडर करने के लिए उकसाया, उससे पैसे लिए। इसी वजह से इनकी हत्या कर मौत की सजा दे दी।

सोमा के परिजनों ने दस्तावेज दिखाए। सोमा सरकारी नौकरी की तैयारी में भी जुटा हुआ था।

सोमा के परिजनों ने दस्तावेज दिखाए। सोमा सरकारी नौकरी की तैयारी में भी जुटा हुआ था।

70 से 80 की संख्या में पहुंचे थे नक्सली

गांववालों का कहना था कि 17 जून की शाम करीब 70 से 80 की संख्या में हथियार बंद नक्सली पहुंचे थे। उन्होंने छात्र सोमा मोड़ियाम (20), अनिल माड़वी (13) समेत एक अन्य ग्रामीण को घर से उठा लिया था।सोमा इसी साल 12वीं पास कर कॉलेज में दाखिल हुआ था, जबकि अनिल 7वीं का छात्र था।

सोमा सरकारी नौकरी की तैयारी में भी जुटा हुआ था। सोमा के परिजनों ने उसके दस्तावेज दिखाए, जिसमें आबकारी निरीक्षक की भर्ती का आवेदन से लेकर NCC सर्टिफिकेट और दसवीं, बारहवीं की अंकसूचियां शामिल थी।

डॉक्टर बनना चाहता था अनिल

अनिल के परिजनों ने बस इतना कहा कि, वह फिलहाल 7वीं में पढ़ाई कर रहा था। बड़ा होकर MBBS की पढ़ाई कर डॉक्टर बनना चाहता था। नक्सलियों ने तीनों ग्रामीणों के हाथ को पहले रस्सी से बांधा, फिर परिवार और गांव वालों के सामने रस्सी से गला घोंटकर मार डाला।

दहशत में ग्रामीण

3 लोगों की हत्या करने के बाद 10 से ज्यादा लड़कों को अपने साथ लेकर चले गए थे। उन लड़कों की रात में बेदम पिटाई किए। जिसके बाद उन्हें रिहा कर दिए। गांव में इतनी दहशत है कि कोई भी ग्रामीण कैमरे के सामने घटना को लेकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं था।

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कोरबा

कटघोरा बाइपास पर पेड़ से टकराकर वाहन में लगी आग:तेज रफ्तार में चालक ने खोया नियंत्रण, कूदकर बचाई जान, वाहन जलकर राख

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कोरबा। कोरबा जिले के कटघोरा बाईपास पर रविवार देर रात एक 407 वाहन पेड़ से टकराने के बाद आग की चपेट में आ गया। देखते ही देखते पूरा वाहन जलकर राख हो गया। हालांकि, चालक ने वाहन से कूदकर अपनी जान बचा ली।

हादसा बाइपास के हुकरा क्षेत्र में हुआ। बताया जा रहा है कि 407 वाहन तेज रफ्तार में कटघोरा की ओर आ रहा था। इसी दौरान चालक ने नियंत्रण खो दिया और वाहन सड़क किनारे पेड़ से जा टकराया। टक्कर के बाद इंजन में आग लग गई, जिसने कुछ ही मिनटों में पूरे वाहन को अपनी चपेट में ले लिया।

आग लगते ही चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए वाहन से कूदकर अपनी जान बचाई। राहगीरों ने तुरंत कटघोरा पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक वाहन पूरी तरह जल चुका था। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

एक घंटे तक यातायात प्रभावित

हादसे के बाद मौके पर राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई। बाईपास पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। इससे करीब एक घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। कटघोरा थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भीड़ हटाई और यातायात सुचारु कराया।

तेज रफ्तार और तकनीकी खराबी की आशंका

पुलिस ने चालक से पूछताछ की है। शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और वाहन में तकनीकी खराबी को हादसे की वजह माना जा रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। जले हुए वाहन को सड़क से हटाने का इंतजाम किया जा रहा है।

सुरक्षा इंतजाम की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि कटघोरा बाईपास पर अक्सर हादसे होते रहते हैं। सड़क किनारे पेड़ और गड्ढों के कारण वाहन बेकाबू होने की आशंका रहती है। लोगों ने प्रशासन से सुरक्षा के इंतजाम करने, स्पीड ब्रेकर लगाने और सड़क किनारे पेड़ों पर रेडियम वाले निशान लगाने की मांग की है।

बड़ा हादसा टला

राहत की बात रही कि हादसे में किसी की जान नहीं गई। चालक सुरक्षित बच गया। पुलिस ने वाहन मालिक को घटना की जानकारी दे दी है।

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कोरबा

कोरबा जेल में कैदियों को लोकगीत से साक्षरता का संदेश:जेल में रहकर भी कर सकते हैं पढ़ाई, 27 सितंबर 2026 को होगी महापरीक्षा

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कोरबा। कोरबा में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस से पहले साक्षरता पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इसके तहत स्कूलों और कॉलेजों में कई प्रतियोगिताएं और जागरूकता कार्यक्रम हो रहे हैं। इसी कड़ी में सार्वजनिक जगहों पर नुक्कड़ नाटक, लोकगीत और संगीत से लोगों को साक्षरता के लिए जागरूक किया गया।

इसी क्रम में कोरबा जिला जेल में भी साक्षरता कार्यक्रम हुआ। यहां संगीत के जरिए कैदियों को साक्षर बनने के लिए प्रेरित किया गया। लोकगीतों की प्रस्तुति ने ऐसा माहौल बनाया कि सभी कैदी मंत्रमुग्ध हो गए।

कार्यक्रम में शिक्षक कृष्णानंद चौहान ने राज्यगीत ‘अरपा पैरी के धार’ और शिक्षा प्रेरणा गीत ‘चला दीदी पढ़े बर जाबो’ गाया। सत्यनारायण मनहर ने ‘चलव ओ दीदी, चलव वो बहनी, स्कूल पढ़े जाना है’ और ‘झोला दे दे दीदी, ओ पाठशाला जाबो न’ जैसे गीत सुनाकर शिक्षा का महत्व समझाया। ढोलक पर कृष्णा वैष्णव और पवन सिंह चौहान ने साथ दिया।

इस मौके पर जिला परियोजना अधिकारी ज्योति शर्मा ने बताया कि उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम से असाक्षर लोगों को साक्षर बनाया जा रहा है। साक्षर होने के बाद कोई भी व्यक्ति नौकरी के लिए आवेदन कर सकता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का शिक्षित और साक्षर होना जरूरी है।

जेलर अमितेश साहू ने जानकारी दी कि 15 साल से ज्यादा उम्र के असाक्षर लोगों को साक्षर बनाने के लिए 27 सितंबर 2026 को महापरीक्षा होगी। जिले के सभी असाक्षर लोग इस महापरीक्षा में शामिल होकर साक्षरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

संदीप शर्मा, रामकुमार कुर्रे और प्रधान पाठक अंधरी कछार ने भी उल्लास और साक्षरता के बारे में प्रेरणादायक बातें कहीं। उन्होंने अपील की कि साक्षरता सिर्फ पढ़ना-लिखना सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाती है।

अधिकारियों ने कहा कि हम सभी मिलकर ‘सभी पढ़ें, सभी बढ़ें और सभी को साक्षर करें’ के संकल्प को पूरा करें।

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कोरबा

90 दिन में चार्जशीट मिलने पर निलंबन खत्म नहीं होगा:हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश को पलटा, कोरबा के कर्मचारी ने लगाई थी याचिका

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बिलासपुर/कोरबा। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरकारी कर्मचारियों के निलंबन अवधि से जुड़े नियमों को स्पष्ट करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को पलट दिया है, जिसमें 90 दिन बाद जारी एक्सटेंशन आदेश को रद्द कर दिया गया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत अगर किसी निलंबित कर्मचारी को 90 दिन के भीतर विभागीय चार्जशीट दे दी गई है, तो निलंबन को आगे बढ़ाने का आदेश जारी न होने मात्र से सस्पेंशन अपने आप खत्म नहीं माना जाएगा।

क्या है पूरा मामला

कोरबा कलेक्टोरेट में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 शिवम सहाय चौहान को आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद 25 मार्च 2022 को उन्हें निलंबित कर दिया गया था। कर्मचारी को तय समय सीमा के भीतर 20 अप्रैल 2022 को विभागीय चार्जशीट दे दी गई थी, लेकिन उनके निलंबन को आगे बढ़ाने का आदेश करीब डेढ़ साल बाद 28 अगस्त 2023 को जारी किया गया था।

निलंबन आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में लगाई याचिका

विभागीय चार्जशीट देने के बाद भी निलंबन आदेश को आगे बढ़ाने के खिलाफ कर्मचारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी, जिसमें डेढ़ साल बाद निलंबन आदेश को नियम विरूद्ध बताया।

वहीं, हाईकोर्ट के सिंगल बेंच ने इस देरी को आधार बनाते हुए पूर्व में सिंगल बेंच ने कर्मचारी के निलंबन आदेश और एक्सटेंशन आदेश को रद्द कर बहाली का निर्देश दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य शासन ने डिवीजन बेंच में अपील की थी।

हाईकोर्ट ने कहा- निलंबन स्वत: समाप्त होने का प्रावधान लागू नहीं

शासन की अपील स्वीकार करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि चूंकि कर्मचारी को 90 दिन के भीतर चार्जशीट मिल गई थी, इसलिए निलंबन स्वतः समाप्त होने का नियम इस मामले में लागू नहीं होता। 90 दिन की समय सीमा को पूर्ण रूप से लागू करने से विभागीय नियमों के प्रावधानों का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। इस आधार पर कर्मचारी की बहाली का पूर्व आदेश निरस्त कर दिया गया।

लंबे समय तक निलंबन उचित नहीं

हालांकि, डिवीजन बेंच ने यह भी सख्त हिदायत दी है कि विभाग कर्मचारियों को अनिश्चित काल तक निलंबित नहीं रख सकता। सक्षम प्राधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निलंबन को जारी रखने की आवश्यकता की नए सिरे से और निष्पक्ष रूप से समीक्षा करें, ताकि जरूरत न होने पर कर्मचारी को विभागीय कामकाज के लिए किसी गैर संवेदनशील पद पर वापस लिया जा सके।

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