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छत्तीसगढ़

बिलासपुर में 331 मीटर टनल में अब नहीं टूटेगा सिग्नल:रेलवे ने भनवारटंक की सुरंग में पहली बार कम्युनिकेशन-सिस्टम किया इंस्टॉल,हादसों का जोखिम हुआ कम

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बिलासपुर,एजेंसी। SECR ने सुरक्षा और तकनीक में एक नई सफलता हासिल की है। बिलासपुर रेल मंडल के भनवारटंक स्टेशन और इसके आस-पास के खतरनाक अप और डाउन 331 मीटर लंबे टनल में सिग्नल समस्या को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है।

100 साल से भी अधिक पुराने दोनों हाई रिस्क टनल हैं, जिसमें रेलवे ने आधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम की सफल कमीशनिंग की है। इस तकनीक के बाद अब पहाड़ों के बीच से निकलने वाली ट्रेनों और वहां काम करने वाले स्टाफ के बीच जीरो गैप कनेक्टिविटी रहेगी। इस सिग्नलिंग सिस्टम में पहाड़ों के बीच भी भरपूर सिग्नल मिलेगा।

दरअसल, ब्रिटिश शासन काल में भनवारटंक रेलवे स्टेशन के बाद दो पहाड़ों के बीच की 115 फीट की गहराई पर पुल बनाकर सुरंग बनाई गई है। छत्तीसगढ़ के सबसे ऊंचे पहाड़ों को काटकर बनाई गई सुरंग में ट्रेनों को 10 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से निकाला जाता है। ताकि हादसे का कोई खतरा न हो।

अब SECR के जीएम तरूण प्रकाश के मार्गदर्शन में रेलवे की यह प्रणाली सुरक्षित और स्मार्ट रेल परिवहन की दिशा में बड़ी सफलता है। इससे न केवल परिचालन दक्षता बढ़ेगी, बल्कि रखरखाव कार्यों में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

भनवारटंक रेलवे स्टेशन।

भनवारटंक रेलवे स्टेशन।

क्यों खास है यह हाईटेक तकनीक

आमतौर पर रेल सुरंगों के भीतर जाते ही मोबाइल और वॉकी-टॉकी के सिग्नल फेल हो जाते हैं, जो आपात स्थिति में बड़ा खतरा साबित होता है। नई प्रणाली में लीकी केबल और ऑप्टिकल फाइबर का ऐसा जाल बिछाया गया है, जो रेडियो तरंगों को सुरंग के आखिरी कोने तक पहुंचाता है।

ऐसे काम करेगा यह डिजिटल कवच

स्टेशन पर एक मुख्य यूनिट यानी मास्टर यूनिट लगाई गई है, जो सिग्नल को कंट्रोल करेगी। सुरंग के भीतर रिमोट यूनिट्स लगाई गई हैं, जो ऑप्टिकल सिग्नल को फिर से रेडियो सिग्नल में बदलकर रेलकर्मियों के हैंडहेल्ड सेट तक पहुंचाएंगी। सिस्टम फेल न हो, इसके लिए हाई-कैपेसिटी यूपीएस और एडवांस ग्राउंडिंग सिस्टम तक लगाया गया है।

भनवारटंक रेलवे टनल।

भनवारटंक रेलवे टनल।

वीएचएफ बैंड पर काम करेगा सिग्नल

यह सिस्टम 146–163 मेगाहर्ट्ज के वीएचएफ बैंड पर काम करता है। इस फ्रीक्वेंसी के जरिए दुर्घटना या खराबी की स्थिति में टनल के अंदर से भी तुरंत स्टेशन मास्टर और ड्राइवर से संपर्क साधा जा सकेगा हो सकेगा। किसी भी तकनीकी खराबी का पता सॉफ्टवेयर के जरिए दूर बैठे ही लगाया जा सकेगा।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : मुख्यमंत्री साय ने हाटकेश्वर जयंती पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाटकेश्वर जयंती के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संदेश में कहा है कि हाटकेश्वर जयंती आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक पर्व है, जो हमें धर्म, संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ता है। यह दिवस समाज में सद्भाव, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

उन्होंने भगवान हाटकेश्वर से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में शांति और प्रगति  लेकर आए।

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कोरबा

राज्यपाल रमेन डेका 1 अप्रैल को रहेंगे कोरबा जिले प्रवास पर

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सामूहिक विवाह हनुमंत कथा में होंगे शामिल

कोरबा। राज्यपाल रमेन डेका कल 1 अप्रैल को कोरबा जिले के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार श्री डेका रायपुर लोकभवन से सवेरे 7.30 बजे सड़क मार्ग द्वारा मुंगेली जिले के चंदखुरी विश्राम गृह के लिए प्रस्थान करेंगे। ततपश्चात राज्यपाल सुबह 9 बजे कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ढपढप बांकीमोंगरा के लिए रवाना होंगे। यहां वे प्रातः 11 बजे आयोजित “दिव्य श्री हनुमंत कथा एवं 108 दिव्यांग एवं निर्धन कन्याओं के सामूहिक विवाह” कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम के पश्चात राज्यपाल श्री डेका दोपहर 12:30 बजे रतनपुर (बिलासपुर) स्थित विश्राम गृह के लिए प्रस्थान करेंगे।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : नाचा के जनक दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर मुख्यमंत्री साय ने किया नमन

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला परंपरा के संवाहक और ‘नाचा’ के जनक माने जाने वाले स्वर्गीय दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दाऊ मंदराजी ने ‘नाचा’ जैसी लोकविधा को न केवल पुनर्जीवित किया, बल्कि उसे जन-जन तक पहुँचाकर सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बनाया। उन्होंने गांवों के लोक कलाकारों को संगठित कर ‘नाचा’ को नई पहचान और गरिमा प्रदान की। उनके प्रयासों से यह लोककला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का प्रभावी मंच बनी।

उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी ने अपने समर्पण और साधना से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखा और उसके संरक्षण के लिए जीवनपर्यंत कार्य किया। उनका योगदान प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लोक कला और शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को ‘दाऊ दुलार सिंह मंदराजी सम्मान’ प्रदान किया जाता है, जो उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी का व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और लोकसंस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

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