देश
बिलासपुर में पटवारी ने की करोड़ों की जमीन की हेराफेरी:मंत्री के निर्देश पर उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित, कई अफसरों पर हो सकती है कार्रवाई
बिलासपुर, एजेंसी। बिलासपुर में करोड़ों रुपए के जमीन के दस्तावेजों में हेराफेरी करने वाले तत्कालीन पटवारी कौशल यादव की मुश्किलें बढ़ गई है। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के निर्देश पर कलेक्टर ने जांच के लिए अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की है।
समिति 10 बिंदुओं पर जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। वहीं, अन्य शिकायतों के आधार पर पटवारी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए जांजगीर-चांपा जिले के कलेक्टर को अनुशंसा भी की गई है। पटवारी अभी जांजगीर-चांपा जिले में पदस्थ है।
फर्जी तरीके से नामांतरण करने का आरोप
दरअसल, सरकंडा क्षेत्र के बिजौर में पदस्थ तत्कालीन पटवारी कौशल यादव पर मोपका में पोस्टिंग के दौरान फर्जी तरीके से नामांतरण करने का आरोप लगाते हुए शिकायत की गई थी। चार एकड़ जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण कराया गया।इस दौरान तहसीलदार नारायण गबेल थे और पटवारी कौशल यादव था। तत्कालीन तहसीलदार गबेल ने नामांतरण के इस आवेदन को खारिज कर दिया था।
अतिरिक्त तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर से हो गया नामांतरण
नामांतरण के आवेदन को तहसीलदार की ओर से खारिज करने के बाद पटवारी और डायवर्सन प्रभारी ने बगैर सील के अज्ञात व्यक्ति से हस्ताक्षर कराकर नामांतरण कर दिया था। बाद में पता चला कि अतिरिक्त तहसीलदार का फर्जी हस्ताक्षर किया गया है, जिसमें सील भी नहीं लगा है।इस मामले की शिकायत अधिवक्ता प्रकाश सिंह ने कलेक्टर से की थी। तब तत्कालीन कलेक्टर सारांश मित्तर ने भू-अभिलेख अधीक्षक को जिला कार्यालय से हटाकर बेलगहना में पदस्थ कर दिया था। साथ ही SDM को जांच के आदेश भी दिए थे। इस मामले में पटवारी को सस्पेंड भी किया गया था।
मोपका-चिल्हाटी और बिजौर में चल रहा फर्जीवाड़ा
मोपका-लिंगियाडीह के साथ ही बिजौर में बड़े पैमाने पर जमीन की हेराफेरी चल रही है। यहां सरकारी और पट्टे की जमीन में कब्जा कर प्लाटिंग करने के ढेरों शिकायतें लंबित है। जमीन के खेल में चर्चित रिक्शा चालक भोंदूदास के केस में भी रसूखदारों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।मोपका जमीन घोटाले को लेकर शहर विधायक शैलेष पाण्डेय ने विधानसभा में सवाल पूछा था। अब इन मामलों की शिकायत राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा से की गई है, जिस पर उन्होंने जांच कर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
कार्रवाई के लिए जांजगीर-चांपा कलेक्टर को लिखा पत्र
पटवारी कौशल यादव वर्तमान में जांजगीर-चांपा जिले में पदस्थ है। लिहाजा, कलेक्टर अवनीश शरण ने उसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए जांजगीर-चांपा जिले के कलेक्टर को पत्र लिखा है।
इसमें बताया गया है कि पटवारी कौशल यादव के खिलाफ सरकारी, कोटवारी जमीन की रजिस्ट्री, नामांकन, बटांकन जैसे राजस्व गडबड़ी के कई मामले हैं, जिसमें उसने अनियमितताएं की है। लिहाजा, जांच प्रतिवेदन के तथ्यों के आधार पर उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए।
कई अफसरों पर भी हो सकती है कार्रवाई
बताया जा रहा है कि जमीन संबंधी गड़बड़ी में सिर्फ पटवारी कौशल यादव ही दोषी नहीं है, बल्कि और भी कई अफसरों की मिलीभगत है। कलेक्टर अवनीश शरण इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराएंगे तो जल्द ही जमीन हेराफेरी करने के इस केस में शामिल अफसरों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
देश
‘महिला आरक्षण बिल का समर्थन न करना विपक्ष की बड़ी राजनीतिक गलती है’: कैबिनेट बैठक में पीएम मोदी बोले
नई दिल्ली,एजेंसी। संसद में महिला आरक्षण बिल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में टकराव जारी है। प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण बिल को परिसीमन का धोखा बताया है। पीएम मोदी ने कैबिनेट बैठक में विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया है। सूत्रों के मुताबिक, पीएम ने कहा है कि महिला आरक्षण बिल का समर्थन का इनकार विपक्ष की एक बड़ी राजनीतिक गलती है और इसके लिए उन्हें भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।


देश
महिला आरक्षण से जुड़ा बिल 54 वोट से गिरा:पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम
नई दिल्ली,एजेंसी। महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान (131वां) संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। लोकसभा में मौजूद 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह ये बिल 54 वोट से गिर गया। लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, लेकिन 3 सीटें खाली होने की वजह से मौजूदा सांसद 540 है।

सरकार ने दो बिल वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किए
पहला- परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026
दूसरा- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026
सरकार ने इन पर वोटिंग से इनकार किया। कहा कि ये बिल एक-दूसरे से लिंक है इसलिए वोटिंग की जरूरत नहीं है।
12 साल के शासन में यह पहला मौका जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई। इससे पहले अमित शाह ने एक घंटा स्पीच दी थी। कहा कि अगर ये बिल पास नहीं होते हैं तो जिम्मेदारी विपक्ष की होगी। देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह का रोड़ा कौन है।
बिल गिरने के बाद विपक्ष ने कहा- हमने हरा दिया
- राहुल गांधी ने कहा- हमने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया है। हमने साफ कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है।
- प्रियंका ने कहा– यह हमारे लोकतंत्र और देश की एकता के लिए एक बड़ी जीत है। जैसा कि मैंने अंदर कहा, यह संविधान पर हमला था, और हमने इसे विफल कर दिया है, जो कि एक अच्छी बात है।
- शशि थरूर ने कहा– हमने हमेशा कहा है कि हम महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करते हैं और आज भी इसके पक्ष में मतदान करने को तैयार हैं। हालांकि, इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
- एमके स्टालिन ने कहा- 23 अप्रैल को हम दिल्ली का अहंकार और उस अहंकार का समर्थन करने वाले गुलामों को हराएंगे।
संसद के बाहर भाजपा महिला सांसदों के प्रदर्शन की तस्वीरें…

बिल गिरने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

महिला सांसदों ने ‘महिला का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारे लगाए।
सरकार को पता था बिल पास नहीं होगा, मोदी ने 3, शाह ने एक अपील की
सरकार जानती थी कि उसके पक्ष में लोकसभा में नंबर नहीं है, इसीलिए सरकार बार-बार सभी सांसदों से समर्थन की मांग कर रही थी। पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू समेत बीजेपी और NDA नेताओं ने विपक्ष से बिल को सपोर्ट करने की अपील की।
पीएम की 3 अपील
- 13 अप्रैल एक कार्यक्रम में: मैं आपसे आग्रह करता हूं कि अपने स्थानीय सांसदों को पत्र लिखें और इस ऐतिहासिक संसद सत्र में हिस्सा लेते समय उनका हौसला बढ़ाएं।
- 16 अप्रैल लोकसभा में: ‘हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने को तैयार हूं। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं।’
- 17 अप्रैल सोशल मीडिया में: सभी सांसद वोटिंग से पहले अपनी अंतर्रात्मा की आवाज सुनें।

शाह ने कहा- महिलाएं माफ नहीं करेंगी
17 अप्रैल लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है। यहां पर तो शोर-शराबा करके बच जाओगे लेकिन माताओं-बहनों का आक्रोश बाहर पता चलेगा। चुनाव में वोट मांगने जाएंगे तो मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।

देश
‘परिसीमन एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा’- शशि थरुर का केंद्र सरकार पर तीखा हमला
नई दिल्ली,एजेंसी। लोकसभा में शुक्रवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और ‘परिसीमन’ (Delimitation) पर चल रही बहस के दौरान कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया की तुलना ‘नोटबंदी’ से करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र की आत्मा के लिए खतरा बताया।

थरुर ने अपने भाषण में कहा
शशि थरूर ने कहा कि दशकों से महिला आरक्षण का वादा किया गया और इसे टाला गया। आज जब इस पर राजनीतिक सहमति बनी है, तब सरकार ने इसे परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रिया से बांधकर महिलाओं की आकांक्षाओं को ‘बंधक’ बना लिया है। थरूर ने सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा, “आपने परिसीमन का प्रस्ताव वैसी ही जल्दबाजी में पेश किया है जैसी नोटबंदी के समय दिखाई थी। हम सब जानते हैं कि नोटबंदी ने देश का क्या हाल किया था। परिसीमन भी एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा, इसे मत कीजिए।”


थरूर ने उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच शक्ति संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई। उन्होंने तर्क दिया कि केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और मानव विकास में बेहतरीन काम किया है। यदि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो जनसंख्या नियंत्रण में विफल रहने वाले राज्यों को अधिक राजनीतिक ताकत मिलेगी और अच्छा काम करने वाले राज्य हाशिए पर चले जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आर्थिक रूप से समृद्ध और विकासशील राज्यों की आवाज को दबाया गया, तो इससे देश के संघीय ढांचे पर बुरा असर पड़ेगा। उनके अनुसार, यह “बहुसंख्यकवाद की तानाशाही” (Tyranny of the democratic majority) पैदा करने जैसा होगा।

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