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छत्तीसगढ़

संस्कृति की रक्षा के लिए जांजगीर-नैला में दिखा जनसैलाब, व्यापारियों के अभूतपूर्व समर्थन से ऐतिहासिक ‘नगर बंद’ सफल

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जांजगीर-चांपा। कांकेर के आमाबेड़ा में जनजातीय समाज की परंपराओं पर हुए आघात और ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों के विरोध में आज जांजगीर-नैला की सड़कों पर एकता का शंखनाद हुआ। सर्व समाज छत्तीसगढ़ के आह्वान पर आयोजित ‘जांजगीर नगर बंद’ पूर्णतः सफल रहा, जहाँ व्यापारियों से लेकर आम जनमानस ने अपनी स्वेच्छा से प्रतिष्ठान बंद रख इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

विशाल पदयात्रा और गगनभेदी नारे

प्रातः 9 बजे नैला के परशुराम चौक से विशाल पैदल रैली का शुभारंभ हुआ। रैली में सर्व समाज के भारी संख्या में लोग हाथों में अपनी संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा की तख्तियां लिए शामिल हुए। “अपनी संस्कृति-अपनी पहचान” के नारों से पूरा नगर गूंज उठा। यह पदयात्रा नैला से प्रारंभ होकर नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए कचहरी चौक पहुंची।

व्यापारी जगत का ऐतिहासिक सहयोग

बंद का असर व्यापक रहा। छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स (इकाई जांजगीर) के आह्वान पर शहर की छोटी-बड़ी सभी दुकानें और व्यापारिक संस्थान पूरी तरह बंद रहे। विशेष बात यह रही कि जिन आवश्यक सेवाओं (दवाई दुकान, स्वास्थ्य एवं अन्य सभी आवश्यक आपातकालीन सेवाएं, स्कूल, सरकारी कार्यालय) को बंद से राहत दी गई थी, उन्होंने भी अपना आधा शटर गिराकर और आंशिक रूप से कार्य कर इस विरोध प्रदर्शन को अपना नैतिक समर्थन दिया। व्यापारियों के इस एकजुट सहयोग की सर्व समाज द्वारा मुक्त कंठ से प्रशंसा की गई।

प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन

रैली के समापन पर कचहरी चौक में एक सभा आयोजित की गई, जिसके पश्चात SDM (अनुविभागीय अधिकारी) को राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मांग की गई कि जनजातीय परंपराओं पर हो रहे प्रहार और अवैध मतांतरण की साजिशों पर तुरंत रोक लगाई जाए तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

शांतिपूर्ण और अनुशासित प्रदर्शन

सर्व समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि यह आंदोलन पूर्णतः लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहा। उन्होंने कहा, *”आज का यह जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि समाज अपनी जड़ों और गौरवशाली परंपराओं के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगा।”*

इस सफल आयोजन के लिए सर्व समाज छत्तीसगढ़ ने नगर के व्यापारियों, युवाओं, मातृशक्ति और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।

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कोरबा

जनता प्राथमिक उपभोक्ता भंडार सहकारी समिति नगोईखार का मतदाता सूची प्रकाशित

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दावा- आपत्ति 15 सितंबर तक आमंत्रित

कोरबा 09 सितंबर 2026। जनता प्राथमिक उपभोक्ता भंडार सहकारी समिति मर्यादित नगोईखार पंजीयन क्रमांक 3584 के सदस्यों के मतदाता सूची को अंतिम रूप देने के लिए मतदाता सूची प्रकाशित किया गया है। मतदाता सूची के संबंध में सदस्यों से दावा-आपत्ति 15 सितंबर 2026 तक आमंत्रित किया गया है।
रजिस्ट्रीकरण अधिकारी श्रीमती सुष्मिता लकड़ा ने बताया कि दावा- आपत्ति लिखित में मय प्रमाण के साथ सोसायटी कार्यालय नगोईखार में समिति प्रबंधक विजय कुमार अग्रवाल के पास  15 सितंबर 2026 तक कार्यालयीन समय पर  प्रस्तुत किया जा सकता है। दावा- आपत्तियों का निराकरण 16 सितंबर को 12 बजे से किया जायेगा। निराकरण उपरांत अंतिम सूची का प्रकाशन किया जाएगा।

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कोरबा

रोजगार मेला के आयोजन हेतु नियोजकों से रिक्त पदों की मंगाई गई जानकारी

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कोरबा 09 सितंबर 2026। जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र, कोरबा के माध्यम से जिला स्तरीय ”रोजगार मेला“ का आयोजन शासकीय ई.व्ही.पी.जी.कॉलेज, कोरबा में किया जायेगा। जो नियोजक अपने संस्थाओं के रिक्त पदों को रोजगार मेला के माध्यम से पूर्ति करना चाहते हैं, वे अपने रिक्त पदों की जानकारी 15 सितंबर 2026 तक रोजगार कार्यालय कोरबा के ई-मेल पर उपलब्ध करा सकते हैं या जिला रोजगार कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। ताकि जिला स्तरीय ”रोजगार मेला“ में  शामिल किया जा सके।

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कोरबा

सुरक्षित मातृत्व के लिए गर्भवती महिलाओं की समय पर जॉंच एवं संस्थागत प्रसव जरूरी

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मॉं और बच्चे की सुरक्षा, पूरे परिवार की जिम्मेदारी

कोरबा  09 सितंबर 2026। कोरबा जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने तथा मातृ मृत्यु को रोकथाम के लिए गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिवार से समय पर स्वास्थ्य जांच, उचित उपचार एवं सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने गर्भावस्था के दौरान आवश्यक सावधानियों एवं स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने को कहा गया है जो इस प्रकार है- गर्भावस्था की जानकारी मिलते ही मितानिन / एएनएम को सूचित करें तथा 45 दिनों के भीतर गर्भावस्था का पंजीयन कराएं। गर्भावस्था के शुरूआती 03 महीनों में कम से कम एक बार चिकित्सकीय जांच कराना अत्यंत आवश्यक है।

प्रसव पूर्व जांच अवश्य कराएं –

गर्भवती की कम से कम चार नियमित प्रसवपूर्व जांच(ए.एन.सी) कराना जरूरी है। शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में हर महीने की 9 एवं 24 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में जांच की सुविधा उपलब्ध है। जांच में रक्तचाप(बीपी) हीमोग्लोबिन(एचबी), पेशाब, सिकल सेल सहित आवश्यक परीक्षण निःशुल्क उपलब्ध है।

खून की कमी(एनीमिया) को हल्के में न लें-

यदि चिकित्सक द्वारा हीमोग्लोबिन कम बताया गया है अथवा सिकल सेल की पुष्टि होती है, तो इसे गंभीरता से लें। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयरन- फोलिक एसिड की गोलियां नियमित ले तथा हरी सब्जियॉं, गुड-चना एवं पौष्टिक आहार का सेवन करें। आवश्यकता पड़ने पर रक्त की व्यवस्था के लिए पहले से संभावित रक्तदाताओं के नाम में मोबाईल नंबर सुरक्षित रखें।

जोखिम वाली गर्भावस्था (लाल निशान) में प्रसव घर या छोटे अस्पताल में न कराएं-

कम उम्र, जुड़वा गर्भ, उच्च रक्तचाप, पूर्व में आपरेशन/सीजेरियन प्रसव अथवा अन्य चिकित्सकीय जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का प्रसव डॉक्टर की सलाह के अनुसार सीएचसी अथवा जिला चिकित्सालय, मेडिकल कॉलेज जैसे उच्च स्वास्थ्य संस्थान में कराया जाए। एैसे मामलों में घर प्रसव कराने की जिद न करें।
प्रसव से पहले परिवहन की तैयारी रखे-

परिवार 108 का  नम्बर सभी मोबाईल में सेव रखें। तथा प्रसव की संभावित तिथि से पहले आवश्यक परिवहन व्यवस्था की योजना बनाए । विशेष रूप से दूरस्थ एवं बरसात प्रभावित क्षेत्रों (पोंड़ी उपरोड़ एवं करतला) की गर्भवती महिलाओं का प्रसव से 07 दिन पूर्व अस्पताल के नजदीक आ जावें।

खतरे का 05 लक्षण दिखें तो तुरंत 108 पर संपर्क करें-

गर्भावस्था के दौरान तेज बुखार/दौरे, अत्यधिक रक्तस्त्राव, रक्तचाप(बीपी) बढ़ना, तेज सिरदर्द या ऑंखों के सामने धंुध /अंधेरा छा जाना, पानी की थैली फटना तथा बच्चे की हलचल कम या बंद होनेा जैसे खतरे के लक्षण दिखाई देने पर देरी न करें और तत्काल स्वास्थ्य संस्था से संपर्क कर 108 एंबुलेंस की सहायता लेकर अस्पताल लाएं।

प्रसव के 48 घंटे बेहद खतरनाक है-

प्रसव के बाद के 48 घंटै मां एवं नवजात दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए प्रसव के बाद मां को कम से कम 48 घंटे स्वास्थ्य संस्था में निगरानी में रखना आवश्यक है। उसके बाद घर आने के बाद भी बुखार , अत्यधिक रक्तस्त्राव, बदबूदार पानी अथवा अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य केन्द्र लेकर आयें।
कलेक्टर कुणाल दुदावत एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.एन.केशरी ने जिले के आम नागरिको से अपील किए हैं कि  गर्भवती महिला की देखभाल को परिवार प्राथमिक जिम्मेदारी मानते हुए प्रथम तीन महीने के भीतर पंजीयन, नियमित जांच, पौष्टिक आहार, चिकित्सकीय सलाह का पालन तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल अस्पताल पहॅुचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें क्योंकि आपकी बहु-बेटियों की जान बचाना सिर्फ डॉक्टर का नहीं पूरे परिवार का काम है।           

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