जोहान्सबर्ग,एजेंसी। PM मोदी ने जोहान्सबर्ग में हो रहे G20 समिट के दौरान दुनिया के 20 ग्लोबल लीडर्स से मुलाकात की। इनमें इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों समेत कई बड़े अंतरराष्ट्रीय नेता शामिल रहे।
मोदी ने रविवार को समिट के तीसरे सेशन में दुनिया को AI के गलत इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इससे दुनिया को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है, इसलिए सभी देशों को मिलकर इसके लिए मजबूत नियम-कानून बनाने चाहिए।
मोदी ने कहा कि AI पर एक ग्लोबल कॉम्पैक्ट (यानी अंतरराष्ट्रीय समझौता) होना जरूरी है। इसमें तीन चीजें सबसे जरूरी होंगी। निगरानी (Oversight), सुरक्षा (Safety) और पारदर्शिता (Transparency)।
उन्होंने खास तौर पर चेतावनी दी कि डीपफेक वीडियो-ऑडियो, अपराध और आतंकवाद में AI का इस्तेमाल बहुत खतरनाक है। मोदी ने कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो AI का गलत इस्तेमाल समाज के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। इसलिए समय रहते पूरी दुनिया को एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए।
G20 समिट के फैमिली फोटो सेशन में वर्ल्ड लीडर्स शामिल हुए।
मोदी-रामफोसा की द्विपक्षीय बैठक, टेक्नोलॉजी, स्किल डेवलपमेंट पर चर्चा
पीएम मोदी ने रविवार को G20 शिखर सम्मेलन से इतर साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के साथ द्विपक्षीय बैठक की।
इससे पहले मोदी ने बताया था कि, कल G20 शिखर सम्मेलन की बैठक अच्छी रही। उन्होंने कहा, ‘मैंने दो सत्रों में भाग लिया और प्रमुख मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।’
मोदी ने X पर बताया कि, ‘जोहान्सबर्ग में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति रामफोसा के साथ शानदार बैठक हुई। हमने भारत-दक्षिण अफ्रीका साझेदारी के सभी पहलुओं की समीक्षा की, विशेष रूप से ट्रेड, कल्चर, इंवेस्टमेंट और टेक्नोलॉजी, स्किल डेवलपमेंट, AI, रेयर अर्थ मेटल में सहयोग में विविधता लाने पर।’ इसके साथ ही मोदी ने G20 की सफल अध्यक्षता के लिए राष्ट्रपति रामफोसा को बधाई दी।
मोदी ने साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के साथ बैठक की।
IBSA बैठक में मोदी बोले- वैश्विक संस्थानोंमें सुधार अब जरूरत बन गई है
मोदी G20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (IBSA) नेताओं की बैठक में शामिल हुए। इसमें विदेश मंत्री एस.जयशंकर भी शामिल हुए। ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा और दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा भी बैठक में मौजूद रहे।
इस दौरान मोदी ने 4 मुद्दों पर बात रखी-
वैश्विक संस्थाओं में सुधार जरूरी: IBSA को दुनिया को एक संदेश देना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक संस्थानों में सुधार अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि जरूरी हो गया है। ये संस्थाएं 21वीं सदी की वास्तविकता से बहुत दूर हो चुकी हैं। अब बदलाव का समय आ गया है।
आतंकवाद के खिलाफ एकजुट लड़ाई: आतंकवाद के मुद्दे पर कोई दोहरा मापदंड नहीं चल सकता। तीनों देशों को इस लड़ाई में पूरा समन्वय रखना होगा।
आईबीएसए डिजिटल इनोवेशन एलायंस की शुरुआत: तकनीक का इस्तेमाल इंसान-केंद्रित विकास के लिए किया जाए। इसके लिए एक नया ‘आईबीएसए डिजिटल इनोवेशन अलायंस’ बनाया जाना चाहिए।
IBSA फंड फॉर क्लाइमेट-रेजिलिएंट एग्रीकल्चर: खाद्य सुरक्षा और सतत विकास के लिए ‘आईबीएसए फंड फॉर क्लाइमेट-रेजिलिएंट एग्रीकल्चर’ शुरू किया जाए। यह कोष जलवायु परिवर्तन से प्रभावित कृषि को मजबूत बनाने में मदद करेगा।
IBSA (India-Brazil-South Africa) एक त्रिपक्षीय अंतरराष्ट्रीय मंच है जो भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है।
6 जून 2003 को ब्राजील में तीनों देशों के तत्कालीन विदेश मंत्रियों ने ब्रासीलिया घोषणापत्र (Brasília Declaration) पर हस्ताक्षर करके IBSA की औपचारिक शुरुआत की।
IBSA बैठक में भाग लेते पीएम मोदी, ब्राजीली राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा और दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा।
IBSA बैठक में भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के अधिकारी शामिल हुए।
साउथ अफ्रीका के बनाए घोषणा पत्र को मंजूरी मिली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बॉयकॉट के बावजूद 20वीं G20 समिट के पहले दिन शनिवार को सदस्य देशों ने साउथ अफ्रीका के बनाए घोषणा पत्र को सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया।
साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने बताया कि सभी देशों का अंतिम बयान पर सहमत होना बेहद जरूरी था, भले ही अमेरिका इसमें शामिल नहीं हुआ। वहीं, ट्रम्प ने आखिरी सेशन में 2026 की मेजबानी लेने के लिए एक अमेरिकी अधिकारी को भेजने की बात कही थी।
रॉयटर्स के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीकी अध्यक्षता ने अमेरिकी अधिकारी को मेजबानी सौंपने के प्रस्ताव को नकार दिया। अफ्रीकी राष्ट्रपति रामफोसा आज G20 की अगली अध्यक्षता ‘खाली कुर्सी’ को सौंपेंगे।
साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति ने परंपरा तोड़ी
इस बार के G20 समिट में दो बड़ी परंपराएं टूट गईं और यही वजह है कि यह बैठक ऐतिहासिक रूप से अलग मानी जा रही है।
पहली परंपरा मेजबानी सौंपने की है। हर G20 समिट में पिछले साल की मेजबानी करने वाला देश, इस साल के मेजबानी देश को औपचारिक रूप से ‘गवेल’ (अध्यक्षता का प्रतीक) सौंपता है।
यह एक लाइव सेरेमनी होती है, जिसमें दोनों देशों के नेता आमने-सामने मौजूद रहते हैं। इस बार अमेरिका की तरफ से राष्ट्रपति ट्रम्प शामिल नहीं हुए।
2024 में G20 की मेजबानी अमेरिका (सैन फ्रांसिस्को) ने की थी, इसलिए गवेल ट्रम्प को ही सौंपना था। लेकिन उनकी गैरहाजिरी की वजह से साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति ने खाली कुर्सी को मेजबानी सौंपने का ऐलान किया है।
पहले दिन ही पास हुआ G20 समिट का घोषणापत्र
दूसरी बड़ी परंपरा घोषणापत्र से जुड़ी है। G20 समिट के अंत में सभी देश मिलकर एकमत से संयुक्त घोषणापत्र जारी करते हैं।
यानी दो दिन की बैठकें, चर्चाएं, ड्राफ्टिंग सब पूरा होने के बाद अंतिम सत्र में घोषणापत्र जारी किया जाता है। लेकिन इस बार घोषणापत्र पहले ही दिन सर्वसम्मति से पास हो गया।
जानिए पीएम मोदी ने पहले और दूसरे समिट में क्या कहा…
मोदी बोले- पुराने डेवलपमेंट मॉडल को बदलना जरूरी
पीएम मोदी ने G20 समिट के पहले दो सत्रों को संबोधित किया। पहले सेशन में उन्होंने वैश्विक चुनौतियों पर भारत का नजरिया दुनिया के सामने रखा।
मोदी ने पुराने डेवलपमेंट मॉडल के मानकों पर दोबारा सोचने की अपील की। उन्होंने कहा- पुराने डेवलपमेंट मॉडल ने रिसोर्स छीने, इसे बदलना जरूरी है।
वहीं समिट के दूसरे सत्र में पीएम ने भारत के श्री अन्न (मोटा अनाज), जलवायु परिवर्तन, G20 सैटेलाइट डेटा पार्टनरशिप और डिजास्टर रिस्क रिडक्शन पर बात की।
पीएम मोदी ने कहा-
G20 ने भले ही दुनिया की अर्थव्यवस्था को दिशा दी हो, लेकिन आज की ग्लोबल विकास मॉडल के पैरामीटर्स ने बड़ी आबादी को रिसोर्स से वंचित किया है और प्रकृति के दोहन को बढ़ावा दिया है। अफ्रीकी देशों पर इसका असर सबसे ज्यादा दिखता है।
मोदी ने G20 समिट में तीन पहल पेश कीं
1.वैश्विक पारंपरिक ज्ञान भंडार : इसका मकसद दुनिया के लोक ज्ञान, पारंपरिक चिकित्सा और सामुदायिक प्रथाओं को एक साथ लाना है।
2. अफ्रीका स्किल इनिशिएटिव: अफ्रीकी युवाओं के लिए कौशल विकास, ट्रेनिंग और रोजगार के नए अवसर बढ़ाने की योजना।
3. ड्रग–टेरर नेक्सस के खिलाफ इनिशिएटिव: प्रधानमंत्री ने इसे अहम बताते हुए कहा कि ड्रग तस्करी, अवैध पैसों का नेटवर्क और आतंकवाद की फंडिंग आपस में जुड़े हैं।
यह पहल इन्हें रोकने के लिए सदस्य देशों के वित्तीय, सुरक्षा और शासन तंत्र को एकजुट करेगी।मोदी के मुताबिक, इस फ्रेमवर्क से ड्रग नेटवर्क पर सख्त चोट की जा सकेगी और आतंकवाद की फंडिंग भी कमजोर होगी।
दिल्ली घोषणा-पत्र की सराहना की गई
इस G-20 समिट के दौरान दिल्ली में 2023 के 18वें जी-20 घोषणा-पत्र की सभी सदस्य देशों ने सराहना की। इसके तहत महिला सशक्तिकरण, जलवायु परिवर्तन फंड और डिजिटल लिटरेसी को बढ़ावा देने के बिंदुओं की समीक्षा कर नए फैसले किए गए।
UN सुरक्षा परिषद (UNSC) का विस्तार कर भारत को भी जगह दिए जाने का प्रस्ताव पारित हुआ।
लुधियाना/महाराष्ट्र,एजेंसी। महाराष्ट्र के नांदेड़ में गुरुवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर हमला हुआ। पुलिस के मुताबिक, गुरुद्वारा माता साहिब कौर में एक निहंग ने उन पर कृपाण से हमला किया। बादल के हाथ में चोट लगी है। हमले के दौरान उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी भी घायल हो गया। घटना दोपहर करीब 1 बजे की बताई जा रही है। पुलिस ने हमले के आरोपी निहंग जसपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। सुखबीर बादल परिवार के साथ नांदेड़ के गुरुद्वारे में माथा टेकने पहुंचे थे। हमले के बाद उन्हें यशोसाई अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सुखबीर बादल पर 4 दिसंबर 2024 को भी हमला हुआ था। गोल्डन टेंपल में सेवादार की धार्मिक सजा भुगतने के दौरान उन पर फायरिंग की गई थी।
सुखबीर सिंह बादल ने अपने परिवार के साथ तख्त श्री हजूर साहिब में मत्था टेका।
हमले के बाद सुखबीर सिंह बादल को अस्पताल ले जाया गया।
यशोसाईं अस्पताल के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
हमले से पहले बादल अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल के साथ नांदेड़ में तख्त श्री हजूर साहिब गए थे।
महाराष्ट्र सीएम फडणवीस ने जांच के आदेश दिए
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नांदेड़ के पुलिस अधीक्षक से बात की और सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले की जांच के आदेश दिए।
इस हमले के दौरान बादल के सुरक्षाकर्मी संतोष हेगड़े ने भी हमलावर को रोकने का प्रयास किया, जिसमें वह भी घायल हुआ। हमलावर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। घटना से जुड़े CCTV फुटेज तथा चश्मदीद लोगों से जानकारी जुटाई जा रही है।
हमलावर को सम्मानित करने का दावा
इस घटना के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि हमला करने वाले निहंग जसपाल सिंह को सम्मानित किया गया। हालांकि, वीडियो को लेकर किए जा रहे दावे की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दावा है कि जिस निहंग को दस्तार बांधा जा रहा है उसी ने हमला किया है। मौके पर एक पुलिसवाला भी मौजूद है, जो बाद में इसे पकड़कर ले गया।
अकाली दल के प्रवक्ता बोले- सिख धर्म विरोधी ताकतों की साजिश
इस मामले में अकाली दल के प्रवक्ता एडवोकेट अर्शदीप सिंह कलेर ने कहा कि सुखबीर बादल पूरी तरह स्वस्थ हैं। मामला महाराष्ट्र का है, इसलिए वहां की पुलिस जांच करेगी कि हमलावर कौन है?। उसने किसके कहने पर हमला किया?।उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे कुछ सिख धर्म विरोधी ताकतों की साजिश हो सकती है।
अकाल तख्त जत्थेदार ने कहा- हमलावर सच्चा सिख नहीं
इस बारे में सिखों की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब ऐसी जगह है, जहां श्रद्धालु सभी की भलाई के लिए अरदास करने आते हैं। सच्चा सिख किसी ऐसे व्यक्ति पर हमला नहीं कर सकता, जो गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने आया हो। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से गुरुद्वारों की मर्यादा को ठेस और पूरे सिख समुदाय की छवि को नुकसान पहुंची है।
2024 में भी हुआ था हमला
गोल्डन टेम्पल में सुखबीर सिंह बादल पर दिसंबर 2024 में हुए हमले की तस्वीर।
एक बुजुर्ग व्यक्ति भीड़ के बीच से धीरे-धीरे सुखबीर बादल की ओर बढ़ा। उसने अपनी जेब से 9mm की पिस्टल निकाली और सीधे बादल पर निशाना साधकर गोली चला दी।
सुखबीर सिंह बादल पर 4 दिसंबर 2024 को अमृतसर के गोल्डन टेंपल के प्रवेश द्वार पर जानलेवा फायरिंग की गई थी। इसमें वह बाल-बाल बच गए थे।
यह हमला उस समय हुआ था जब वह अकाल तख्त की ओर से सुनाई गई एक धार्मिक सजा (तनखैया) काट रहे थे।
सुखबीर बादल को सिखों की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त ने धार्मिक रूप से दोषी घोषित किया था। यह सजा अकाली दल सरकार के दौरान हुई गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं के प्रायश्चित के रूप में दी गई थी।
उस दिन उनकी सजा का दूसरा दिन था। पैर में फ्रैक्चर होने के कारण वह व्हीलचेयर पर बैठे थे। गले में पट्टी लटकी हुई थी, नीली पोशाक पहने थे और हाथ में भाला लेकर द्वार पर पहरेदार के रूप में सेवा दे रहे थे।
नई दिल्ली, एजेंसी। देश के मध्य और पूर्वी हिस्से में मानसून एक्टिव है। मध्यप्रदेश, राजस्थान के कई इलाकों में लगातार तीसरे दिन भारी बारिश से हालात खराब हैं। इसकी वजह तीन मानसूनी सिस्टम हैं। इनके कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी आ रही है।
भोपाल में बुधवार को लगातार तीसरे दिन स्कूलों में छुट्टी है। यहां दो दिनों में 8.57 इंच बारिश हुई। करीब 200 मकानों में ढाई फीट तक पानी भर गया। रतलाम, झाबुआ, धार, बड़वानी और इंदौर में अगले 24 घंटे में यहां 4 इंच से ज्यादा बारिश का अनुमान है।
उधर, राजस्थान में खोखी बांध की दीवार टूटने से 300 बीघा फसल खराब हो गई है। कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की टनल के एक हिस्से में दो-तीन फीट तक पानी भरा हुआ है।
वहीं, उत्तर प्रदेश में पिछले 2 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मंगलवार को पानी भर गया था। इसका वीडियो आज सामने आया है। वाराणसी में घाटों की सीढ़ियों तक पानी पहुंच गया है। 100 से ज्यादा छोटे मंदिर डूब गए हैं।
सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति
देशभर से मौसम की तस्वीरें
मध्य प्रदेश में पिछले तीन दिनों से बारिश हो रही है। वहीं, शिवपुरी में NH-46 पर करीब एक फीट तक पानी भर गया। इससे काफी देर तक जाम लगा रहा। प्रदेश में अब तक 19.6 इंच बारिश हो चुकी है।
राजस्थान में पिछले 3 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की टनल में पानी भर गया है। इस वजह से बुधवार सुबह से यहां लंबा जाम लगा हुआ है। पिछले दो दिनों से ट्रैफिक रेंग-रेंगकर चल रहा है।
उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बारिश के बाद पानी भर गया था। एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक, इससे फ्लाइट ऑपरेशन और यात्रियों की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ा। घटना मंगलवार की है, जिसका वीडियो अब वायरल हो रहा है।
मुंबई में कुर्ला के अशोक नगर इलाके में बुधवार सुबह 3 बजे गौसिया चॉल के पास बारिश की वजह से मिट्टी का बड़ा हिस्सा गिर गया। इसकी चपेट में दो-तीन घर आ गए। महाराष्ट्र के कई इलाकों में 24 घंटे से बारिश हो रही है।
उत्तराखंड के चमोली की नीति घाटी में दो दिन पहले बादल फटने से तमक नाला उफान पर आ गया था। तेज बहाव में 17 टन स्टील से बना वैली ब्रिज बह गया। अब नाले पर अस्थायी ब्रिज बनाने का काम किया जा रहा है।
हिमाचल के शिमला-धर्मशाला NH-205 पर भराड़ीघाट के पास मंगलवार को चलती कार पर बड़ी चट्टान गिर गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 2 लोग घायल हो गए। राज्य में लैंडस्लाइड से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है।
मुंबई, एजेंसी। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने आज 12 अगस्त को इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एजीएम से ठीक पहले आया है। हालांकि, वे फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे।
चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के साथ सहमति नहीं बन पाई थी। नए कारोबारों में भारी निवेश, उनके प्रदर्शन और टाटा संस के भविष्य को लेकर मतभेद इस फैसले की बड़ी वजह बने।
एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर के बाद टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में गिरावट है। टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाटा कंज्यूमर के शेयर 3% तक नीचे हैं।
चंद्रशेखरन ने इस्तीफा देते हुए क्या कहा
चंद्रशेखरन ने कहा कि, “टाटा संस के चेयरमैन के रूप में मेरा मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके मेरे अगले 5 साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की थी।
इसे टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी और बोर्ड ने दर्ज किया था और आगे बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसके बाद, यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड के सामने रखा गया था।
हालांकि, यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया। सर्वसम्मत समर्थन न मिलने की वजह से मैंने इस फैसले को टालने का विकल्प चुना। उस बोर्ड मीटिंग को हुए 6 महीने बीत चुके हैं और आज तक कोई फैसला नहीं हो पाया है।
टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और कई बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट्स अभी अहम मोड़ पर हैं। फरवरी 2027 के बाद ग्रुप की अगुआई करने के लिए न सिर्फ एक लीडर का होना जरूरी है, बल्कि कर्मचारियों, निवेशकों, पार्टनर्स और बाकी स्टेकहोल्डर्स के लिए लीडरशिप को लेकर स्पष्टता होना भी बहुत जरूरी है।”
इस्तीफे की 4 बड़ी वजह
चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने पर मतभेद
फरवरी 2026 में टाटा संस बोर्ड ने चंद्रशेखरन के अगले 5 साल के कार्यकाल की सिफारिश की थी। बाद में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया और सिर्फ 2 साल का कार्यकाल देने की वकालत की।
24 फरवरी 2026 को 5 साल के विस्तार का प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा गया। एक सदस्य के समर्थन न देने से इस पर सहमति नहीं बन सकी है।
नए कारोबारों के प्रदर्शन पर सवाल
चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप ने एविएशन, डिजिटल कारोबार, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और बैटरी जैसे नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। इनमें से कुछ कारोबार अभी घाटे में हैं।
एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस को FY26 में कुल रू.22,238 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि टाटा डिजिटल का घाटा रू.4,974 करोड़ रहा। इन्हीं मुद्दों पर नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के प्रदर्शन को लेकर आपत्ति जताई थी।
टाटा संस की लिस्टिंग हो या नहीं
टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए या निजी कंपनी ही रखा जाए, इस पर टाटा ट्रस्ट्स के अंदर अलग-अलग राय सामने आई। नोएल टाटा लिस्टिंग के पक्ष में नहीं बताए जाते हैं, जबकि कुछ ट्रस्टी लिस्टिंग की वकालत कर चुके हैं।
टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच तालमेल
टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है, इसलिए दोनों के बीच बड़े फैसलों पर सहमति बेहद अहम है। नए कारोबारों की रणनीति, निवेश और चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर मतभेदों से दोनों के बीच तालमेल का सवाल भी सामने आया।
चंद्रशेखरन का 9 साल का सफर: रेवेन्यू रू.16.24 लाख करोड़ पहुंचा
चंद्रशेखरन के 2017 में कमान संभालने के बाद टाटा ग्रुप का दायरा काफी बढ़ा है। चंद्रशेखरन ने ग्रुप को एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे नए क्षेत्रों में उतारा।
रेवेन्यू: वित्त वर्ष 2020 में ग्रुप का रेवेन्यू रू.7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर रू.16.24 लाख करोड़ हो गया।
मुनाफा: ग्रुप का मुनाफा रू.32,000 करोड़ से बढ़कर रू.1.71 लाख करोड़ हो गया।
मार्केट कैप: लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 2020 के रू.9.31 लाख करोड़ से बढ़कर 2026 में रू.24.39 लाख करोड़ पहुंच गया।
टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में फर्क
टाटा ग्रुपः टाटा नाम से चलने वाली अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों को मिलाकर टाटा ग्रुप बनता है। जैसे- टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एअर इंडिया।
टाटा संसः टाटा संस, टाटा ग्रुप की मुख्य कंपनी है। यह ग्रुप की बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाती है।
टाटा ट्रस्ट्सः टाटा ट्रस्ट्स सामाजिक और परोपकारी काम करने वाले ट्रस्टों का समूह है। इसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।
कैसे चुना जाएगा नया चैयरमैन
टाटा संस के चेयरमैन को चुनने की प्रक्रिया में पहले चयनसमिति उम्मीदवारों पर विचार करती है। इस समिति में टाटा ट्रस्ट्स की ओर से नामित सदस्य, टाटा संस बोर्ड का एक सदस्य और एक स्वतंत्र बाहरी सदस्य शामिल होते हैं।
समिति उम्मीदवार के नाम की सिफारिश टाटा संस के बोर्ड से करती है। बोर्ड उम्मीदवार की योग्यता और ग्रुप की जरूरतों को देखते हुए अंतिम नियुक्ति का फैसला करता है। अगर मौजूदा चेयरमैन को ही जारी रखना हो, तो उनके कार्यकाल के विस्तार पर भी इसी प्रक्रिया के तहत फैसला होता है।