छत्तीसगढ़
रायपुर : राज्यपाल डेका ने खैरागढ़ विश्वविद्यालय की नई बस को दिखाई हरी झंडी
संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के विद्यार्थियों को मिलेगी सुविधा
रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने आज लोकभवन में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की नई बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल छात्रों और स्टाफ के लिए परिवहन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई है।
इस वाहन के माध्यम से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को कला, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए विभिन्न स्थानों तक आवागमन में सुविधा मिलेगी। इससे विद्यार्थियों को अपने प्रतिभा प्रदर्शन के लिए बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। यह कदम विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन और छात्रों की यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए उठाया गया है।

राज्यपाल श्री डेका ने वाहन के सदुपयोग, नियमित रखरखाव और विद्यार्थियों के हित में प्रभावी उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे संसाधन संस्थानों की शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को नई गति देते हैं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़
जनगणना पर बोले भूपेश- मोदी की नियत पर शक:रायपुर में कहा- हिरण का शिकार करने वालों के साथ PM पतंग उड़ाते हैं
रायपुर, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में काले हिरण का जिक्र होने के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मुद्दे पर तंज कसते हुए पीएम मोदी और अभिनेता सलमान खान पर निशाना साधा।

बघेल ने कहा, ‘काले हिरण का जिसने शिकार किया, मोदी जी उनके साथ पतंग उड़ाते हैं और संरक्षण की बात करते हैं। छत्तीसगढ़ में हिरण की कोई कमी नहीं है, यहां पहले से संरक्षण हो रहा है। प्रधानमंत्री यहां आकर पिंजरे में बंद शेर के साथ फोटो खिंचवा रहे थे, उसके पहले से यहां हिरण है।
वहीं, PM मोदी के जनगणना को सफल बनाने की अपील पर भूपेश बघेल ने कहा कि जनगणना 2021 से लंबित है, SIR कराया जा सकता है, लेकिन नियत पर शक होता है।’

26 अप्रैल को मन की बात कार्यक्रम में PM मोदी ने छत्तीसगढ़ में काले हिरण का जिक्र किया।
‘मन की बात’ में काले हिरण का जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने 26 अप्रैल को ‘मन की बात’ के 133वें एपिसोड में कहा कि मध्य भारत में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के खुले इलाकों में काले हिरण की वापसी हुई है, जो जैविक विरासत के पुनरुद्धार का प्रतीक है।
पीएम ने कहा कि कई सालों तक स्थानीय स्तर पर विलुप्त रहने के बाद अब ये हिरण फिर से प्राकृतिक वातावरण में दिखाई दे रहे हैं।
बारनवापारा-बिलासपुर में चला पुनर्वास अभियान
बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में काले हिरणों के पुनर्वास के लिए पांच साल का विशेष अभियान चलाया गया। 2017 में इन्हें स्थानीय रूप से विलुप्त घोषित किए जाने के बाद वन विभाग ने पुनर्प्रवेश योजना शुरू की।
इसके तहत नई दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणि उद्यान और बिलासपुर के कानन पेंडारी प्राणि उद्यान से हिरणों को लाकर यहां बसाया गया। 2021 में शुरू इस योजना के तहत दिल्ली से 50 और बिलासपुर से 27 काले हिरण लाए गए। अनुकूल वातावरण और लगातार निगरानी के कारण अब इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।

बघेल ने कहा, ‘काले हिरण का जिसने शिकार किया, मोदी जी उनके साथ पतंग उड़ाते हैं।
PM ने जनगणना 2027 को सफल कराने की अपील की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से जनगणना 2027 को मिलकर सफल बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना है। देश की जनगणना सिर्फ सरकारी काम नहीं है। यह हम सब की जिम्मेदारी है।
‘मन की बात’ कार्यक्रम में PM ने कहा, “देश में इस समय एक बहुत अहम अभियान चल रहा है, जिसके बारे में हर भारतीय को जानकारी होनी जरूरी है।
ये जनगणना का अभियान है। जो साथी पहले से इस तरह की प्रक्रिया से गुजरे हैं, इस बार जनगणना का उनका अनुभव अलग होने वाला है। जनगणना 2027 को डिजिटल बनाया गया है।
सारी जानकारी सीधे डिजिटल माध्यम में दर्ज हो रही है। घर-घर जाने वाले कर्मचारियों के पास मोबाइल ऐप है। वे आपसे बात करके उसी में जानकारी दर्ज करेंगे।”
‘जनगणना में आप भी भर सकते हैं जानकारी’
देशवासियों से जनगणना में हिस्सा लेने की अपील करते हुए पीएम मोदी ने कहा, इस बार जनगणना में आपकी भागीदारी भी आसान बनाई गई है, आप खुद भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। कर्मचारी के आने से 15 दिन पहले आपके लिए सुविधा शुरू होगी। आप अपने समय के अनुसार जानकारी भर सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा, जब आप प्रक्रिया पूरी करते हैं, तो आपको एक विशेष आईडी मिलती है। ये आईडी आपके मोबाइल या ईमेल पर आती है। बाद में जब कर्मचारी आपके घर आता है, तो आप यही आईडी दिखाकर जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं। इससे दोबारा जानकारी देने की जरूरत नहीं पड़ती।
पीएम मोदी ने जानकारी दी कि जिन राज्यों में स्व-गणना का काम पूरा हो गया है, वहां गणना कर्मचारी की ओर से घरों के सूचीकरण का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। अब तक लगभग 1 करोड़ 20 लाख परिवारों का मकान सूचीकरण का कार्य पूरा भी हो चुका है।
छत्तीसगढ़
धमतरी में पूर्व मंत्री के भाई के घर ED रेड:12 से ज्यादा अधिकारी खंगाल रहे दस्तावेज, अभनपुर में भी एक्शन, भारतमाला से जुड़ा मामला
धमतरी, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के चर्चित भारतमाला घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। सोमवार तड़के ईडी की टीम ने धमतरी के कुरुद में पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर के ठिकानों पर छापेमारी की।
इसके साथ ही जमीन कारोबारी गोपाल गांधी और उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर भी दबिश दी गई है। यह कार्रवाई सुबह से जारी है। हालांकि अभी तक प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने रेड की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

सुबह तीन गाड़ियों में 12 से अधिक ईडी के अधिकारी भूपेंद्र चंद्राकर के घर पहुंचे। टीम घर के अंदर जांच-पड़ताल कर रही है। आरोप है कि उन्होंने कथित भारतमाला घोटाले में अपने करीबियों को सिर्फ अभनपुर ही नहीं, बल्कि कायाबांधा (अभनपुर), दुर्ग, पाटन, राजनांदगांव के देवादा और मगरलोड जैसे क्षेत्रों में करोड़ों रुपए का मुआवजा दिलवाया है।
इन आरोपों से संबंधित शिकायत दस्तावेजों के साथ दर्ज कराई गई थी, जिसके आधार पर ईडी यह जांच कर रही है।

तीन गाड़ियों में 12 से अधिक ईडी के अधिकारी भूपेंद्र चंद्राकर के घर पहुंचे।

टीम घर के अंदर जांच-पड़ताल कर रही है।
घर अंदर से लॉक कर दस्तावेजों की जांच
धमतरी में कुरूद के सरोजिनी चौक के पास भूपेंद्र चंद्राकर का घर है, जहां पर ईडी की टीम पहुंची हुई है। ईडी की टीम घर के अंदर जांच कर रही है। सुरक्षा के मद्देनजर सुरक्षाबल भी मौजूद हैं। घर के अंदर से ताला लगाया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति बाहर से अंदर ना जा सके।
शिकायतों के आधार पर ईडी की जांच
रायपुर, अभनपुर में इससे पहले भी ED ने गोपाल गांधी और उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज जब्त किए थे।
भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण में करीब 500 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले की आशंका जताई जा रही है।

जमीन कारोबारी गोपाल गांधी और उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर भी दबिश दी गई है।
जमीन अधिग्रहण में अनियमितताओं का खुलासा
शुरुआती जांच में सामने आया है कि कृषि भूमि को बैकडेट में गैर-कृषि घोषित कर उसका मुआवजा कई गुना बढ़ाया गया। साथ ही एक ही खसरे की जमीन को कागजों में अलग-अलग हिस्सों में बांटकर अलग-अलग लोगों के नाम पर भुगतान किया गया। ED इससे पहले भी छत्तीसगढ़ के कई जिलों में छापेमारी कर करोड़ों की संपत्ति अटैच कर चुकी है।
अफसरों ने नहीं की पुष्टि
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रेड की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है। ईडी बीजेपी नेता के भाई और कुछ जमीन कारोबारियों के ठिकानों पर जांच कर रही है, हालांकि पूरे मामले में अधिकारी मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं।
छत्तीसगढ़
खेत एक एकड़ से कम:तरबूज, मिर्च, टमाटर और बैंगन उगाकर 4 गुना कमाई, नरेगा सुपरवाइजर की नौकरी छोड़ रामनारायण ने शुरू की मल्टी-लेयर फार्मिंग
जांजगीर-चांपा। जिले को धान की खेती के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यहां की आबोहवा में विदेशी किस्मों के फल भी मिठास घोल रहे हैं। करनौद गांव स्थित शिखा नर्सरी के संचालक रामनारायण जलतारे ने अपनी तकनीकी दक्षता और नवाचार से जिले की जलवायु में यूएसएम स्पेशल (कैप्सूल) तरबूज की खेती कर 100% सफलता हासिल की है।
यह प्रयोग इसलिए खास है क्योंकि यह किस्म आमतौर पर दूसरे राज्यों और अलग जलवायु के लिए उपयुक्त मानी जाती थी, लेकिन यहां के युवाओं ने इसे संभव कर दिखाया है। रामनारायण जलतारे ने बताया कि उनके पिता हॉर्टिकल्चर विभाग में थे, जहां से उन्हें बचपन में ही प्रेरणा मिली।
वे खुद भी नरेगा सुपरवाइजर के पद पर थे, लेकिन बागवानी के प्रति प्रेम ने उनसे नौकरी छुड़वा दी और उन्होंने अपनी नर्सरी स्थापित की। आज वे न केवल खुद खेती कर रहे हैं, बल्कि जिले के लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में अन्य किसानों को भी वैज्ञानिक पद्धति से खेती के लिए मार्गदर्शन दे रहे हैं।

उन्होंने पहली बार तरबूत उगाने का प्रयोग झर्रा ग्राम के कृषक गिरजानन्द चंद्रा के साथ मिलकर किया। 90 डेसिमल खेत में किए गए इस ट्रायल से उम्मीद से बेहतर नतीजे मिले हैं।
आमतौर पर तरबूज की इस किस्म यानी किरण वैरायटी के बीज आसानी से उपलब्ध नहीं होते, लेकिन बागवानी में 11 साल का अनुभव रखने वाले रामनारायण ने अपनी तकनीकी टीम के साथ मिलकर इसे सफल बनाया।
इस खेती से बंपर उत्पादन हुआ है। महज 90 डेसिमल खेत से ही 5 ट्रैक्टर ट्रॉली (लगभग 12-14 टन) तरबूज निकल रहा है, जबकि प्रति एकड़ 15 से 20 टन तक की क्षमता है। यह फसल मात्र 65 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है।
2 महीने की इस मेहनत से किसान को तरबूज से ही 1 से 1.5 लाख रुपए की आय हो रही है। कैप्सूल आकार का यह तरबूज अपनी जबरदस्त मिठास और बेहतर शेल्फ लाइफ के लिए जाना जाता है।
रामनारायण केवल पारंपरिक तरीके से खेती नहीं कर रहे, बल्कि उन्होंने मिश्रित फसल का बेहतरीन मॉडल पेश किया है। उन्होंने तरबूज की फसल के बीच ही मिर्च के पौधे लगाए हैं। जब तक तरबूज की हार्वेस्टिंग पूरी होगी, तब तक मिर्च के पौधे बड़े हो जाएंगे।
इसके अलावा वे इसी जमीन पर बैंगन और टमाटर का भी प्रायोगिक उत्पादन कर रहे हैं। इस मॉडल से 90 डेसिमल की जमीन से सालभर की आमदनी 4 गुना बढ़कर करीब 4 लाख रुपए तक होने का अनुमान है।
बिना किसी बड़े डिग्रीधारियों की मदद के रामनारायण अपनी तकनीक और अनुभव से ऐसी फसलें ले रहे हैं जिन्हें देखकर कृषि विशेषज्ञ भी हैरान हैं। उन्होंने ताइवान की रेड लेडी पपीता का भी सफल उत्पादन किया है।
वे अधिया मॉडल पर दूसरों की बंजर या कम उपजाऊ जमीनों को भी सोना उगलने लायक बना रहे हैं। उनकी नर्सरी में फल और सब्जियों के ए-टू-जेड पौधे उपलब्ध हैं।
रामनारायण का कहना है कि धान की पारंपरिक खेती में बढ़ती लागत और गिरते जल स्तर को देखते हुए शिखा नर्सरी का यह प्रयास किसानों के लिए नई राह है। यदि सही तकनीक और बाजार की मांग को समझा जाए, तो जांजगीर की मिट्टी किसी भी फल या सब्जी के उत्पादन के लिए सक्षम है।
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