छत्तीसगढ़
रायपुर : सीएम हेल्पलाइन 1076 का शुभारंभ : अब एक कॉल पर सुनी जाएगी जनता की हर समस्या
मुख्यमंत्र विष्णु देव साय ने कहा – सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मिलेगी नई मजबूती
42 विभागों के 8 हजार अधिकारी 1195 श्रेणियों में शिकायतों का करेंगे समयबद्ध निराकरण

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राज्य की बहुप्रतीक्षित सीएम हेल्पलाइन 1076 का बटन दबाकर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने सीएम हेल्पलाइन प्रणाली के आधिकारिक लोगो का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में मंत्रिपरिषद के सदस्यगण तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारीगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक की समस्या सुनी जाए, उसका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए तथा शासन-प्रशासन को और अधिक जवाबदेह बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के दौरान प्रदेशभर से प्राप्त शिकायतों, सुझावों और जनप्रतिसाद ने एक प्रभावी, सशक्त एवं स्थायी जनसंपर्क तंत्र की आवश्यकता को रेखांकित किया। इसी सोच के साथ सीएम हेल्पलाइन प्रणाली विकसित की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेशवासी टोल फ्री नंबर 1076 पर अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे, सुझाव दे सकेंगे तथा शासन की योजनाओं और सेवाओं के संबंध में फीडबैक भी साझा कर सकेंगे। यह प्रणाली सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को नई मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ जनता और शासन के बीच विश्वास के रिश्ते को और सशक्त बनाएगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि डिजिटल युग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हेल्पलाइन को व्हाट्सएप प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा गया है, जिससे नागरिक मोबाइल के माध्यम से आसानी से अपनी बात सरकार तक पहुंचा सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली अपने व्यापक दायरे के कारण विशेष महत्व रखती है। इसमें राज्य शासन के 42 विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारी जुड़े हुए हैं तथा 1195 श्रेणियों में निर्धारित समय-सीमा के भीतर शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक शिकायत को एक यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी, जिससे आवेदक अपने आवेदन की स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक कर सकेगा। यदि किसी शिकायतकर्ता को प्राप्त समाधान से संतोष नहीं होगा, तो संबंधित शिकायत स्वतः उच्च अधिकारियों के पास पुनः परीक्षण एवं जांच के लिए अग्रेषित हो जाएगी। इससे शिकायतों के सतही निराकरण की संभावना समाप्त होगी और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन प्रणाली 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन संचालित रहेगी। इसके संचालन के लिए तीन शिफ्टों में कर्मचारियों की तैनाती की गई है। सचिव स्तर के अधिकारी डैशबोर्ड के माध्यम से इसकी नियमित निगरानी करेंगे, वहीं मुख्यमंत्री सचिवालय भी इसकी सतत मॉनिटरिंग करेगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन केवल शिकायत निवारण का माध्यम नहीं है, बल्कि जनभागीदारी को सशक्त बनाने का एक प्रभावी मंच भी है। प्रदेशवासी राज्य के विकास से जुड़े अपने सुझाव भी इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा कर सकेंगे, जिससे नीति निर्माण और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “नागरिक देवो भव” के मंत्र को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार डिजिटल गवर्नेंस को लगातार मजबूत बना रही है। सीएम हेल्पलाइन शासन और जनता के बीच संवाद को और अधिक प्रभावी बनाएगी तथा समस्याओं के त्वरित समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सचिव एवं सचिव, सुशासन एवं अभिसरण विभाग राहुल भगत ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से सीएम हेल्पलाइन प्रणाली की कार्यप्रणाली, उद्देश्यों और विशेषताओं की विस्तार से जानकारी दी।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव एवं विजय शर्मा, मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यगण, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल सहित वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़
PTRSU में एग्जाम फीस 46% तक बढ़ी:मार्कशीट वेरिफिकेशन के लिए देने होंगे 5 हजार, विरोध में उतरी ABVP, कहा- छात्रों के साथ अन्याय
रायपुर, एजेंसी। रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में परीक्षा और दूसरे शैक्षणिक शुल्क बढ़ाने के फैसले पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने नाराजगी जताई है। परिषद का कहना है कि विश्वविद्यालय ने एक साथ फीस में बड़ी बढ़ोतरी कर दी है, जिससे छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

ABVP के मुताबिक, सेमेस्टर एग्जाम फीस रू.1075 और वार्षिक परीक्षा फीस रू.1085 से बढ़ाकर सीधे रू.1580 कर दी गई है। परिषद का दावा है कि यह करीब 46% की बढ़ोतरी है। संगठन का कहना है कि इसका सबसे ज्यादा असर गरीब, मध्यमवर्गीय और ग्रामीण इलाकों से आने वाले छात्रों पर पड़ेगा।

ज्ञापन सॉफ्टवेयर हुए ABVP के वॉलिंटियर्स
नौकरी और एडमिशन के लिए महंगा पड़ेगा वेरिफिकेशन
परिषद ने इस बात पर भी आपत्ति जताई है कि यूनिवर्सिटी ने मार्कशीट और सिलेबस वेरिफिकेशन फीस रू.5000 तय कर दी है। ABVP का कहना है कि नौकरी, एडमिशन या दूसरे शैक्षणिक कामों के लिए दस्तावेजों का वेरिफिकेशन कराने वाले छात्रों और पूर्व छात्रों के लिए इतनी बड़ी रकम देना आसान नहीं होगा।

प्रदर्शन करते हुए ABVP के वॉलिंटियर्स
शिक्षा को महंगा बनाने का आरोप
रायपुर महानगर मंत्री सुजल गुप्ता ने कहा कि शिक्षा को आसान और सुलभ बनाने की बात की जाती है, लेकिन दूसरी तरफ छात्रों पर लगातार फीस का बोझ बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परीक्षा फीस में भारी बढ़ोतरी और हर साल 5% फीस बढ़ाने का फैसला छात्रों के हित में नहीं है।
ABVP ने दी आंदोलन की चेतावनी
ABVP ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से परीक्षा फीस बढ़ोतरी वापस लेने, हर साल 5% फीस बढ़ाने का फैसला रद्द करने और वेरिफिकेशन फीस कम करने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो छात्र हित में आंदोलन किया जाएगा।
छत्तीसगढ़
हेपेटाइटिस-सेप्टिसीमिया से हाथी शावकों की मौत:रायगढ़ में 25 दिन में 4 शावकों की गई थी जान, देहरादून-बरेली लैब से आई रिपोर्ट
रायगढ़, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ और धर्मजयगढ़ वन मंडल में 8 मई से 1 जून के बीच, यानी महज 25 दिनों के भीतर 4 हाथी शावकों की मौत के मामले में जांच रिपोर्ट से अहम खुलासे हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार एक शावक की मौत हेपेटाइटिस (लिवर संक्रमण) और दूसरे की सेप्टिसीमिया (रक्त संक्रमण) के कारण हुई है। जबकि इससे पहले एक अन्य शावक की मौत निमोनिया से होने की पुष्टि भी हो चुकी है।
एक ही हाथी दल के शावकों की लगातार हो रही मौतों को देखते हुए वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया था और पोस्टमॉर्टम के बाद सैंपल जांच के लिए देहरादून और बरेली के लैब भेजे गए थे, जहां से आई रिपोर्ट के बाद अब मौतों का असली कारण साफ हो गया है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार हेपेटाइटिस लिवर को प्रभावित करने वाला संक्रमण है, जबकि सेप्टिसीमिया में रक्त संक्रमित हो जाता है, वहीं लगातार सामने आ रहे इन गंभीर मामलों को देखते हुए वन विभाग ने अब हाथी शावकों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को पहले से काफी ज्यादा बढ़ा दिया है।

दो दिन के वर्कशॉप में हाथी से संबंधित कई तरह की जानकारियां दी गई।
लगातार मौतों से वन विभाग की बढ़ी चिंता
दरअसल, जिले में पिछले कुछ समय से हाथी शावकों की लगातार मौत के मामले सामने आ रहे थे। तालाबों और अन्य जल स्रोतों के पास शावकों के शव मिलने से वन विभाग की चिंता बढ़ गई थी। जांच में सामने आया कि मृत शावक एक ही हाथी दल के थे और वे संक्रमण से प्रभावित थे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को हाथियों की मौत के कारणों और बचाव के उपायों पर चर्चा के लिए एक कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें एक्सपर्ट्स ने जांच प्रक्रिया, संक्रमण की पहचान और हाथियों की सुरक्षा को लेकर अहम जानकारी शेयर की।
हाथियों की बीमारियों और बचाव की जानकारी दी
कार्यशाला में कई राज्यों से आए वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। उन्होंने हाथियों में होने वाली बीमारियों, उनके कारणों, बचाव के उपायों और निगरानी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी।
दो दिन तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में रायगढ़ समेत अन्य वन मंडलों के अधिकारियों और कर्मचारियों को हाथियों की देखभाल, स्वास्थ्य जांच और संरक्षण के बारे में विस्तार से बताया गया।
अब हाथी शावकों पर बढ़ाई गई निगरानी
जिले के दोनों वन मंडलों के जंगलों में इस समय 137 हाथी मौजूद हैं। इनमें 37 नर, 62 मादा और 35 शावक शामिल हैं। हाल के दिनों में शावकों की लगातार मौत के बाद वन विभाग ने उनकी निगरानी बढ़ा दी है।
अधिकारियों के अनुसार ट्रैकर्स, हाथी मित्र दल और वनकर्मियों की टीम हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है। साथ ही ड्रोन और ट्रैप कैमरों की मदद से भी निगरानी की जा रही है।
रात के समय थर्मल ड्रोन के जरिए हाथियों की लोकेशन और मूवमेंट पर विशेष नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।
शावकों की मौत पर रिपोर्ट आई, संक्रमण की हुई पुष्टि
डीएफओ जितेंद्र उपाध्याय ने बताया कि रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडलों में एक ही हाथी दल के शावकों की मौत हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की मौजूदगी में शावकों का पोस्टमॉर्टम कराया गया।
आवश्यक सैंपल एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट में एक शावक की मौत का कारण हेपेटाइटिस (यकृत संक्रमण) और दूसरे की मौत का कारण सेप्टीसीमिया (गंभीर रक्त संक्रमण) पाया गया है।
डीएफओ ने कहा कि हाथी शावकों को सुरक्षित रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विभाग कार्ययोजना तैयार कर रहा है। हाल ही में आयोजित कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने हाथियों में होने वाले संक्रमण और उसके बचाव को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां शेयर की हैं।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में 30 घंटे में हाथी ने ली 4 जानें:जंगल जा रहे दंपती को कुचला; सड़क किनारे सो रहे मजदूरों पर किया हमला
बलरामपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में पिछले 30 घंटे के भीतर हाथी के हमले में 4 लोगों की मौत हो गई। बलरामपुर में मंगलवार सुबह जंगल जा रहे पति-पत्नी को हाथी ने कुचल कर मार डाला। इस घटना के बाद वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। घटना राजपुर वन परिक्षेत्र की है।

कोरिया में गुरु घासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व इलाके में रविवार देर रात दंतैल हाथी ने सड़क निर्माण में लगे 2 मजदूरों पर हमला कर उन्हें मार डाला। दोनों मजदूर रात को सड़क किनारे सो रहे थे। घटना सोनहत वन परिक्षेत्र की है।

बलरामपुर में दंपती जंगल जाने के लिए निकले थे, इस दौरान हाथी ने हमला कर मार डाला।

कोरिया में सड़क किनारे सो रहे 2 मजदूरों को हाथी ने कुचल कर मार डाला।
केस- 1 जंगल जा रहे थे दंपती
पहली घटना बलरामपुर जिले के राजपुर वन परिक्षेत्र की है। ग्राम कुंदी के बांधपारा में रहने वाले जूठन गोंड़ (65) अपनी पत्नी सुंदरी बाई (56) के साथ मंगलवार सुबह करीब 5 बजे घर से कुछ दूर स्थित जंगल की ओर जा रहे थे।
घर से करीब 200 मीटर दूर पहुंचने पर दंपती का सामना एक दंतैल हाथी से हो गया। हाथी ने अचानक उन पर हमला कर दिया। जान बचाने के लिए दोनों ने भागने की कोशिश की, लेकिन हाथी ने उनका पीछा कर लिया और दौड़ाकर दोनों को कुचल दिया।
मौके पर तोड़ा दम, पहुंचे अधिकारी
जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने घटना की जानकारी वन अमले को दी। एसडीओ फॉरेस्ट आरएसएल श्रीवास्तव, रेंजर अजय वर्मा सहित टीम घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया और दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।

घटनास्थल पर पहुंचे अधिकारियों ने जायजा लिया और शव को अस्पताल भिजवाया।
5 हाथियों का दल घूम रहा
रेंजर अजय वर्मा ने बताया कि 5 हाथियों का एक दल कल्याणपुर जंगल क्षेत्र में घूम कर रहा है। देर रात एक दंतैल हाथी दल से अलग होकर कुंदी गांव की ओर पहुंच गया था। फिलहाल हाथी पास के जंगल में मौजूद है और वन विभाग उसकी लगातार निगरानी कर रहा है।
ग्रामीणों को किया जा रहा सतर्क
वन विभाग की ओर से हाथी की मौजूदगी की जानकारी आसपास के ग्रामीणों को दी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। विभाग की टीम लगातार मुनादी और जनसंपर्क के माध्यम से लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रही है।
परिजनों को 25-25 हजार रुपए सहायता
वन विभाग ने मृतक दंपती के परिजनों को तात्कालिक सहायता के रूप में 25-25 हजार रुपए किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि नियमानुसार आगे की सहायता राशि की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।
केस- 2 सड़क किनारे सो रहे 2 मजदूरों को हाथी ने मार-डाला
दूसरी घटना सोनहत वन परिक्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक, कोरिया जिले के रामगढ़ से कोटाडोल तक 27 किलोमीटर सड़क निर्माण का काम कराया जा रहा है। सड़क निर्माण में काम करने वाले दो युवक गौरव (22) और अमर सिंह (35) देवसील बस्ती के आगे सड़क किनारे सो रहे थे।
रात करीब 11.30 बजे एक दंतैल हाथी मौके पर पहुंचा और उसने दोनों पर हमला कर दिया। हाथी के हमले के दौरान पास ही बाकी मजदूर भी मौजूद थे, जिन्होंने भागकर अपनी जान बचाई। हमले की सूचना पर वन विभाग की टीम और स्थानीय लोग रात में ही मौके पर पहुंचे।

अकेले घूम रहे हाथी ने किया हमला।
एक ने अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम
हाथी के हमले में गौरव की मौके पर ही मौत हो गई थी। गंभीर रूप से घायल अमर सिंह को सोनहत लाया जा रहा था, रास्ते में उसकी भी मौत हो गई। दोनों मृतक ग्राम नगर के निवासी बताए गए हैं, जो निर्माण कार्य में काम करने के लिए गए थे। वन विभाग ने आसपास के इलाके में लोगों को सतर्क कर दिया है।
दल से बिछड़े दंतैल ने किया हमला
इस मामले में रेंजर राजाराम ने बताया कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से 8 हाथियों का दल घूम रहा है, जिनमें से एक हाथी दल से बिछड़ गया है। उस बिछड़े दंतैल ने ही दो मजदूरों पर हमला किया है, जिससे उनकी मौत हो गई। वहीं सड़क निर्माण में लगे मजदूरों को भी सतर्क रहने कहा गया है।
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