छत्तीसगढ़
रायपुर : मंत्रिपरिषद की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए
रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां सिविल लाईन स्थित उनके निवास कार्यालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –
1 मंत्रिपरिषद ने अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति सूची में तकनीकी कारणों से शामिल होने से वंचित जातियों को प्राप्त होने वाली कतिपय सुविधाएं के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए डिहारी कोरवा, बघेल क्षत्री, संसारी उरांव तथा पबिया, पविया, पवीया समाज के विद्यार्थियों को अनुसूचित जनजाति के समतुल्य एवं डोमरा जाति के विद्यार्थियों को अनुसूचित जाति के समतुल्य राज्य मद से मात्र राज्य छात्रवृत्ति तथा शिष्यवृत्ति प्रदान किये जाने एवं छात्रावास-आश्रमों में स्वीकृत सीट के अधीन प्रवेश दिए जाने की सुविधा प्रदान करने की सहमति दी है।
2 मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ में अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली उपभोक्ताओं को आर्थिक लाभ पहुँचाने के लिए प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत घर की छतों में सोलर रूफटॉप संयंत्र की स्थापना में राज्य शासन द्वारा उपभोक्ताओं को वित्तीय सहायता दिए जाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के माध्यम से पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरेलू उपभोक्ताओं के घरों पर सोलर रूफटॉप संयंत्र लगाने पर केंद्रीय वित्तीय सहायता के साथ-साथ राज्य की ओर से अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी दी जाएगी, जो सोलर प्लांट की क्षमता (1 किलोवाट, 2 किलोवाट, 3 किलोवाट और उससे अधिक) के आधार पर अलग-अलग होगी। उदाहरण के लिए, 1 किलोवाट प्लांट के लिए कुल 45,000 रूपए, (30,000 रूपए केंद्रीय और 15,000 रूपए राज्य सहायता) जबकि 3 किलोवाट या उससे अधिक के प्लांट के लिए 1,08,000 रूपए (78,000 रूपए केंद्रीय और 30,000 रूपए राज्य सहायता) की मदद मिलेगी। हाउसिंग सोसाइटी/रेसिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन के लिए भी इसी तरह की सहायता प्रस्तावित की गई है। यह अनुदान राशि CSPDCL को अग्रिम रूप से मिलेगी और वही इसे लाभार्थियों को देगी। वर्ष 2025-26 में 60,000 और 2026-27 में 70,000 सोलर पावर प्लांट की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। इससे वित्तीय वर्ष 2025-26 में 180 करोड़ एवं 2026-27 में 210 करोड़ रूपए का वित्तीय भार आएगा।
CSPDCL इस योजना की कार्यान्वयन एजेंसी होगी और नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार इसे लागू करेगी। कंपनी इस योजना के संचालन के लिए एक अलग बैंक खाता खोलेगी, जिसमें सब्सिडी की राशि रखी जाएगी और उसका हिसाब-किताब किया जाएगा। राज्य वित्तीय सहायता उन घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता से दी जाएगी जिनके सोलर प्लांट का ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन 1 अप्रैल 2025 या उसके बाद हुआ है।
3 मंत्रिपरिषद ने राज्य में वन्यजीव, खासकर बाघों के संरक्षण और ईको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘‘छत्तीसगढ़ टाइगर फाउंडेशन सोसायटी‘‘ का गठन करने का निर्णय लिया है। यह सोसायटी वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत काम करेगी। मध्य प्रदेश में यह 1996 से संचालित है। इसका मुख्य लक्ष्य छत्तीसगढ़ में लगातार घट रही बाघों की आबादी (फिलहाल लगभग 18-20) को बचाना है। यह संस्था स्व-वित्तपोषित होगी, जिससे सरकारी खजाने पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। यह सहयोग देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं से फंड जुटाएगी।
यह सोसायटी बाघों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों में सीधे शामिल होगी। यह स्थानीय समुदाय की भागीदारी से ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देगी, जिससे न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार और आय के अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही, यह पर्यावरणीय शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षण को प्रोत्साहित करेगी, जिससे भविष्य के संरक्षणवादी तैयार होंगे। इस पहल से संरक्षण के लिए बाहरी धन, विशेषज्ञता और संसाधन मिलेंगे, जिससे स्थानीय समुदायों को रोज़गार के नए अवसर मिलेंगे और राज्य का पर्यावरणीय संतुलन बना रहेगा।
यह छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी, जो जैव विविधता की रक्षा के साथ-साथ ईको-टूरिज्म को भी मजबूत आधार देगी।
4 मंत्रिपरिषद द्वारा अशासकीय अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्था ‘‘रामकृष्ण मिशन आश्रम नारायणपुर की सहयोगी संस्था ‘‘विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल हेल्थ वेलफेयर एवं सेवायें, छत्तीसगढ़ (विश्वास)‘‘ को रामकृष्ण मिशन आश्रम नारायणपुर में अंतर्भूत (मर्ज) करने का अनुमोदन किया गया।
5 उद्यानिकी महाविद्यालय (उद्यानिकी विश्वविद्यालय) की स्थापना के लिए बेमेतरा जिले के साजा तहसील अंतर्गत बेलगांव में राजगामी संपदा की 94.290 हेक्टेयर भूमि में से 100 एकड़ भूमि उद्यानिकी विभाग को निःशुल्क प्रदान करने का निर्णय लिया गया।
6 जशपुर जिले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा हर्बल व महुआ चाय जैसे पारंपरिक उत्पाद ‘JashPure’ ब्रांड के तहत तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने और विपणन को बढ़ावा देने हेतु इस ब्रांड को राज्य शासन अथवा CSIDC को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव का मंत्री परिषद ने अनुमोदन किया है।
ब्रांड हस्तांतरण से एग्रो व फूड प्रोसेसिंग इकाइयों को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय कच्चे माल की मांग बढ़ेगी और आदिवासी महिलाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे। ट्रेडमार्क हस्तांतरण से राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।
7 मंत्रिपरिषद द्वारा शहीद पुलिसकर्मियों के सर्वाेच्च बलिदान को ध्यान में रखते हुए अनुकम्पा नियुक्ति हेतु जारी एकजाई पुनरीक्षित निर्देश-2013 की कंडिका 13 (3) में संशोधन करते हुए निर्णय लिया है कि – नक्सली हिंसा में शहीद पुलिस सेवकों के प्रकरण में उनके परिवार के किसी भी पात्र सदस्य (महिला या पुरूष) को विकल्प के आधार पर पुलिस विभाग के अलावा, किसी अन्य विभाग में, राज्य के किसी भी जिला, संभाग में अनुकम्पा नियुक्ति दी जा सकेगी। पहले अनुकम्पा नियुक्ति यथासंभव उसी विभाग या कार्यालय में देने की व्यवस्था थी, जिसमें दिवंगत शासकीय सेवक निधन के पूर्व कार्यरत था।
8 मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में गौण खनिजों के सुव्यवस्थित अन्वेषण, पूर्वेक्षण एवं अधोसंरचना के विकास के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ‘‘स्टेट मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट‘‘ (एसएमईटी) के गठन की अधिसूचना के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में स्टेट मिनिरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट के तहत समस्त गौण खनिजों से प्राप्त होने वाली रायल्टी 2 प्रतिशत राशि अतिरिक्त रूप से एसएमईटी फंड में जमा की जाएगी। जिसका उपयोग गौण खनिजों के अन्वेषण, अधोसंरचना विकास में उच्च तकनीकों का उपयोग, इन्फॉर्मेशन सिस्टिम, लॉजिस्टिक सपोर्ट, मानव संसाधनों के उन्नयन आदि में किया जा सकेगा। भारत सरकार के नेशनल मिनिरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट की तर्ज पर राज्य में स्टेट मिनिरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट का गठन किया जाएगा।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूलों में रोजाना गायत्री, भोजन और दूसरे मंत्रों का पाठ अनिवार्य किया, कांग्रेस ने जताई आपत्ति
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे 2026-27 शैक्षणिक सत्र से रोजाना सांस्कृतिक, शैक्षिक व मूल्यों पर आधारित गतिविधियां आयोजित करें। अधिकारियों ने बताया कि इसमें इनमें राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ-साथ गायत्री, दीप, भोजन और अन्य मंत्रों का पाठ भी शामिल होगा। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद छात्रों के बौद्धिक विकास को बढ़ावा देना और उन्हें भारतीय संस्कृति व परंपराओं से परिचित कराना है।

इस कदम की विपक्षी दल कांग्रेस ने आलोचना की है और भाजपा सरकार पर स्कूलों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एजेंडा थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से 12 जून को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी आदेश के अनुसार स्कूल अब दिन में तीन अलग-अलग समय पर अनिवार्य गतिविधियां आयोजित करेंगे। उन्होंने कहा कि नए निर्देश के तहत, सुबह प्रार्थना में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और महान हस्तियों की जीवनियों का पाठ शामिल होगा।
अधिकारी ने बताया कि मध्याह्न भोजन के दौरान छात्र सामूहिक रूप से भोजन मंत्र का पाठ करेंगे, जबकि शाम को स्कूल की छुट्टी के दौरान राज्य गीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का पाठ किया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि इस पहल का मकसद छात्रों में देशभक्ति, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना है, साथ ही भारतीय परंपराओं और राष्ट्रीय आदर्शों के साथ उनके जुड़ाव को मजबूत करना है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे और तय निर्देश का उल्लंघन करने वाले स्कूल प्रबंधन या प्राचार्य के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
कांग्रेस ने साधा निधाना
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने शैक्षणिक संस्थान में धार्मिक मंत्रों का पाठ अनिवार्य करने की ज़रूरत पर सवाल उठाया।शुक्ला ने कहा, “राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और राज्य गीत का पाठ करना उचित है। लेकिन गायत्री मंत्र, दीप मंत्र, सरस्वती मंत्र और भोजन मंत्र को अनिवार्य क्यों किया गया है? सरकार स्कूलों को सरस्वती शिशु मंदिरों में बदलने के लिए दृढ़ संकल्पित दिखती है। सरकारी स्कूलों में आरएसएस का एजेंडा थोपना गलत है।”
उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में सभी धर्मों, जातियों और समुदायों के छात्र पढ़ते हैं और कुछ खास धार्मिक मंत्रों का पाठ अनिवार्य करने से दूसरे धर्मों के लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।शुक्ला ने कहा, “भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और हमारा संविधान सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की गारंटी देता है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा किसी खास धर्म पर आधारित नहीं होनी चाहिए।”
छत्तीसगढ़
जगदलपुर : बस्तर में पुनर्वास की नई मिसाल:पुनर्वासित नक्सलियों के लिए निःशुल्क रिवर्स वासेक्टॉमी कैंप, 73 सफल सर्जरी

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में, विशेष रूप से जगदलपुर के महारानी अस्पताल में, मुख्यधारा में लौटे (पुनर्वासित) माओवादियों के लिए मुफ्त रिवर्स वासेक्टॉमी (रिवर्स नसबंदी) शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन जटिल सर्जिकल शिविरों का उद्देश्य उन पूर्व नक्सलियों को माता-पिता बनने का अवसर प्रदान करना है, जिन्हें प्रतिबंधित संगठनों द्वारा जबरन नसबंदी (नसबंदी शिविरों) के लिए मजबूर किया गया था।

बस्तर संभाग में मुख्यधारा में लौट रहे पुनर्वासित नक्सलियों को सामान्य और खुशहाल पारिवारिक जीवन प्रदान करने की दिशा में जिला प्रशासन और बस्तर पुलिस ने एक ऐतिहासिक एवं मानवीय पहल की है। जगदलपुर के ऐतिहासिक महारानी अस्पताल में पुनर्वासित लाभार्थियों के लिए विशेष निःशुल्क रिवर्स वासेक्टॉमी (रीकैनालाइजेशन) सर्जिकल कैंप का सफल आयोजन किया गया। यह शिविर बस्तर जिला प्रशासन, बस्तर पुलिस और यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (वेस्ट जोन) के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया, जिसमें देश के प्रतिष्ठित यूरोलॉजिस्ट एवं माइक्रोसर्जरी विशेषज्ञों ने अपनी सेवाएं दीं।

73 सफल सर्जरी, पुनर्वास को मिली नई दिशा
यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. राजेश कुकरेजा ने बताया कि इस मानवीय अभियान के प्रथम चरण में 33 तथा द्वितीय चरण में 40 सफल सर्जरी की गईं। इस प्रकार दो चरणों में कुल 73 सफल रिवर्स वासेक्टॉमी ऑपरेशन संपन्न हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह अत्यंत जटिल माइक्रोसर्जरी है, जिसकी सफलता दर सामान्यतः सीमित होती है। ऐसे में बस्तर जैसे सुदूर क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर सफल ऑपरेशन चिकित्सा सेवा और मानवीय संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
देशभर के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दी सेवाएं
शिविर में इंदौर से डॉ. राजेश कुकरेजा, मुंबई से डॉ. निनाद तांबोली एवं डॉ. पार्थ मानेक, पुणे से डॉ. सागर भालेराव एवं डॉ. राहुल पाटिल, नांदेड़ से डॉ. अभिषेक भालेराव और रायपुर से डॉ. राहुल कपूर और डॉ. घनश्याम हटवार सहित कई विशेषज्ञ चिकित्सकों ने स्वैच्छिक सेवाएं प्रदान कीं।
पहले भी मिली सफलता, गूंजी हैं किलकारियां
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने कहा कि इस प्रकार के प्रयासों से पहले भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और कई आत्मसमर्पित परिवारों के घरों में बच्चों की किलकारियां गूंज चुकी हैं। उन्होंने इसे पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
दो माह की बच्ची का पिता बना पूर्व नक्सली
बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने एक प्रेरणादायक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि हाल ही में एक पुनर्वासित नक्सली, जिसकी पहले रिवर्स वासेक्टॉमी की गई थी, वह वर्तमान में दो माह की बच्ची का पिता बना है। उन्होंने कहा कि यह इस पूरी मुहिम की सबसे बड़ी सफलता और मानवीय पुनर्वास का जीवंत प्रमाण है। पहले ऐसी जटिल सर्जरी के लिए मरीजों को महानगरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब बस्तर के महारानी अस्पताल में ही यह सुविधा उपलब्ध होना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।
विशेषज्ञों और कर्मचारियों का हुआ सम्मान
कैंप के सफल आयोजन पर महारानी अस्पताल प्रबंधन एवं बस्तर पुलिस द्वारा सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों को बस्तर की कला एवं संस्कृति से जुड़े स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं शिविर में योगदान देने वाले अस्पताल कर्मियों और जमीनी कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में सीएमएचओ डॉ. संजय बसाक तथा सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद ने सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों, प्रशासनिक अधिकारियों, पैरामेडिकल स्टाफ और पुलिस विभाग का आभार व्यक्त किया। यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया ने भी बस्तर पुलिस और जिला प्रशासन की इस संवेदनशील पुनर्वास पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे अभियानों में सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई। यह पहल केवल चिकित्सा सेवा नहीं, बल्कि हिंसा से प्रभावित जीवन में नई उम्मीद, परिवार जीवन और भविष्य लौटाने का एक संवेदनशील प्रयास बनकर उभरी है।
छत्तीसगढ़
रायपुर : पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर चमका छत्तीसगढ़ की संस्कृति
इंडिया टुडे टूरिज्म समिट एंड अवॉर्ड्स 2026 में मिला ‘कल्चरल टूरिज्म विनर’ अवार्ड
गोवा में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने किया सम्मानित, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने ग्रहण किया अवॉर्ड
लोक संस्कृति, जनजातीय विरासत और पर्यटन नवाचारों को मिली राष्ट्रीय पहचान

रायपुर। छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन क्षमता का परचम लहराया है। गोवा में आयोजित प्रतिष्ठित ’‘इंडिया टुडे टूरिज्म समिट एंड अवॉर्ड्स-2026’’ में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड को ’‘कल्चरल टूरिज्म विनर’’ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अद्वितीय जनजातीय परंपराओं, स्थानीय लोककला और पर्यटन विकास के क्षेत्र में किए गए नवाचारों को मिली राष्ट्रीय मान्यता है। केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने यह सम्मान प्रदान किया, जिसे राज्य की ओर से पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने ग्रहण किया। इस अवसर पर गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत सहित बिहार, तेलंगाना, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और गोवा के पर्यटन मंत्री तथा देशभर के पर्यटन विशेषज्ञ और उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे।

जीवंत संस्कृति और जनजातीय विरासत से बनी छत्तीसगढ़ की पहचान
यह सम्मान छत्तीसगढ़ द्वारा अपनी समृद्ध लोक संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, कला, हस्तशिल्प, लोक उत्सवों और सांस्कृतिक धरोहरों को पर्यटन विकास से जोड़ने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण सफलता है। पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ ने सांस्कृतिक पर्यटन को राज्य की पर्यटन नीति के केंद्र में रखकर जिस तरह योजनाबद्ध ढंग से कार्य किया है, उसने देशभर का ध्यान आकर्षित किया है। यही कारण है कि आज छत्तीसगढ़ केवल प्राकृतिक सौंदर्य और जलप्रपातों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी जीवंत संस्कृति और जनजातीय विरासत के लिए भी तेजी से पहचान बना रहा है।
छत्तीसगढ़ का पर्यटन मॉडल चर्चा का केंद्र रहा
समिट के दौरान आयोजित विशेष पैनल चर्चा ’‘हिडन इंडिया हाउ इमर्जिंग डेस्टिनेशंस आर ड्राइविंग डोमेस्टिक टूरिज्म ग्रोथ’’ में भी छत्तीसगढ़ का पर्यटन मॉडल चर्चा का केंद्र रहा। इस सत्र में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा, पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने राज्य की पर्यटन उपलब्धियों, नवाचारों, निवेश संभावनाओं और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से विचार रखे। पैनल चर्चा में बताया गया कि किस प्रकार छत्तीसगढ़ ने स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए पर्यटन को सांस्कृतिक संरक्षण और आर्थिक विकास का माध्यम बनाया है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि
पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने अवॉर्ड प्राप्त करने के बाद कहा कि यह सम्मान पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य की लोक संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, कला, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल पर्यटन स्थलों का विकास करना ही नहीं, बल्कि पर्यटन को स्थानीय लोगों की आजीविका, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनाना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत सहित पूरी टीम का योगदान
श्री अग्रवाल ने कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की पूरी टीम, पर्यटन उद्योग से जुड़े हितधारकों, कलाकारों, शिल्पकारों और स्थानीय समुदायों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। मैं इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर सभी प्रदेशवासियों, पर्यटन विभाग तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की पूरी टीम को हार्दिक बधाई देता हूं। यह सम्मान हमें पर्यटन विकास के क्षेत्र में और अधिक उत्साह तथा प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की प्रेरणा देगा।
’‘कल्चरल टूरिज्म विनर’’ अवार्ड राज्य की बढ़ती पर्यटन पहचान का प्रतीक
’इंडिया टुडे टूरिज्म समिट एंड अवॉर्ड्स’ देश के सबसे प्रतिष्ठित पर्यटन आयोजनों में से एक है। इस मंच पर पर्यटन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले राज्यों, संस्थानों और पर्यटन परियोजनाओं को सम्मानित किया जाता है। साथ ही, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को पर्यटन विकास की चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार-विमर्श का अवसर भी मिलता है। ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर छत्तीसगढ़ को ’‘कल्चरल टूरिज्म विनर’’ के रूप में सम्मानित किया जाना राज्य की बढ़ती पर्यटन पहचान का प्रतीक है।
छत्तीसगढ़ ने सांस्कृतिक पर्यटन का विकसित किया विशिष्ट मॉडल
छत्तीसगढ़ ने सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में जो विशिष्ट मॉडल विकसित किया है, वह देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है। बस्तर की जनजातीय संस्कृति, सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहर, भोरमदेव मंदिर समूह, चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे विश्वस्तरीय प्राकृतिक पर्यटन स्थल, पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक संगीत और लोक नृत्य राज्य की पर्यटन पहचान को विशिष्ट बनाते हैं। इन सभी को योजनाबद्ध तरीके से पर्यटन परिपथों से जोड़कर राज्य ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने कलाकारों, शिल्पकारों और जनजातीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने का कार्य
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और जनजातीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में भी लगातार कार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार पर्यटन स्थलों पर बेहतर सुविधाओं के विकास, डिजिटल प्रचार-प्रसार, सामुदायिक पर्यटन और सांस्कृतिक आयोजनों के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। इसका सकारात्मक परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देने लगा है।
छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण भूमिका
इस उपलब्धि पर पर्यटन विभाग, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड, पर्यटन उद्योग से जुड़े हितधारकों तथा प्रदेशवासियों में हर्ष का वातावरण है। यह सम्मान राज्य में पर्यटन निवेश, पर्यटकों की संख्या और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देगा। साथ ही, छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अग्रणी सांस्कृतिक पर्यटन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी
राष्ट्रीय मंच पर मिला यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि, पर्यटन संभावनाओं और दूरदर्शी पर्यटन नीति की बड़ी स्वीकृति है। यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में राज्य को भारत के अग्रणी सांस्कृतिक पर्यटन गंतव्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
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