41 सड़कों से लेकर 1,729 किलोमीटर तक हर गांव तक पहुंची पक्की डगर
136 गौरव पथ, 50.10 किमी हर गांव में गौरव और सुविधा
कोरबा । छत्तीसगढ़ राज्य अपने स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण कर रजत महोत्सव के ऐतिहासिक अवसर पर विकास की सुनहरी कहानी लिख रहा है। बीते ढाई दशकों में राज्य ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, उद्योग, ऊर्जा और ग्रामीण आधारभूत संरचना के क्षेत्र में अद्वितीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख क्षेत्र है सड़क संपर्क और परिवहन सुविधा का विस्तार, जिसने गांवों को शहरों से, किसानों को बाजारों से और नागरिकों को अवसरों से जोड़ा है। कोरबा जिला, जो राज्य की औद्योगिक राजधानी के रूप में जाना जाता है। आज सड़क विकास के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। यहाँ की पहाड़ी और वनांचल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, राज्य शासन ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना, मुख्यमंत्री ग्राम गौरव पथ योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत दूरस्थ ग्रामों तक पक्की सड़कों का जाल बिछाया है। रजत महोत्सव के अवसर पर जब राज्य के 25 वर्षों की यात्रा पर नजर डाली जाती है, तो कोरबा जिले का यह सड़क विकास अभियान गांव-गांव तक पहुँची प्रगति का प्रतीक बनकर उभरता है। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना : गांवों तक पहुंची पक्की राह
मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना का उद्देश्य राज्य के उन ग्रामीण अंचलों तक सुगम आवागमन उपलब्ध कराना है जहाँ अब तक पक्की सड़कें नहीं पहुँची थीं। कोरबा जिले में इस योजना के तहत वर्ष 2025 तक कुल 41 सड़कों का निर्माण किया गया है। इन सड़कों की कुल लंबाई 108.67 किलोमीटर है। इन सड़कों ने न केवल ग्रामीणों को अपने निकटतम बाजार, अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों से जोड़ा है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में भी नई गति दी है। पहले जहाँ ग्रामीणों को बारिश के मौसम में आवाजाही में कठिनाई होती थी, वहीं अब पक्की सड़कों के निर्माण से आवागमन सुगम हुआ है। सड़कें केवल मिट्टी और डामर का मार्ग नहीं, बल्कि विकास का माध्यम हैं और कोरबा जिले के ग्रामीण अंचलों में यह परिवर्तन प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है। इन मार्गों से किसानों को अपने कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने में आसानी हुई है। छात्र-छात्राओं को स्कूल और कॉलेज तक निर्बाध पहुँच मिली है, वहीं बीमार व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचने में सुविधा बढ़ी है। मुख्यमंत्री ग्राम गौरव पथ योजना : गांवों की पहचान बनी गौरव पथ मुख्यमंत्री ग्राम गौरव पथ योजना का लक्ष्य गांवों के भीतर प्रमुख मार्गों का सौंदर्यीकरण और पक्की सड़कों से ग्राम के गौरव को सुदृढ़ करना है। इस योजना ने ग्रामीण संरचना को एक नई पहचान दी है। कोरबा जिले में इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2025 तक कुल 136 गौरव पथों का निर्माण संपन्न हुआ है। इन गौरव पथों की कुल लंबाई 50.10 किलोमीटर है। इन गौरव पथों ने गांवों की मुख्य गलियों को पक्की सड़कों से जोड़कर स्वच्छता, सुगमता और सौंदर्य को एक साथ जोड़ा है। जहाँ पहले बरसात के मौसम में कीचड़ से भर जाने वाली गलियां थीं, वहाँ अब मजबूत कांक्रीट सड़कों पर बच्चे खेलते हैं, और त्योहारों पर गांव की चौपालों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह गौरव पथ वास्तव में ग्रामीण गौरव के प्रतीक बन गए हैं जिन पर ग्रामवासी गर्व से कहते हैं, “अब हमारा गांव भी शहर जैसा दिखता है।” प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना : दूरस्थ गांवों तक पहुंची नई रोशनी
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने देशभर में ग्रामीण संपर्क का नया युग प्रारंभ किया, और छत्तीसगढ़ में इस योजना का प्रभाव सबसे अधिक दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में दिखाई देता है। कोरबा जिला, जो पर्वतीय और वनाच्छादित क्षेत्र है, वहाँ इस योजना के माध्यम से ऐसे कई गांवों को मुख्यधारा से जोड़ा गया है, जो पहले मानचित्र पर केवल नाम मात्र के रूप में दर्ज थे। कोरबा जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अब तक 397 नई सड़कों का निर्माण किया गया है। इन सड़कों की कुल लंबाई 1,729.00 किलोमीटर है। इतना ही नहीं, आवागमन को और सुदृढ़ करने के लिए 13 नए पुलों (वृहद पुलों) का भी निर्माण किया गया है, जिससे वर्षा ऋतु के दौरान आने-जाने में होने वाली कठिनाइयाँ अब अतीत की बात बन चुकी हैं। इन पुलों ने न केवल सड़कों को जोड़ा है, बल्कि दिलों को भी करीब लाया है। अब ग्रामीणों को किसी नदी या नाले के कारण दिनभर का रास्ता तय नहीं करना पड़ता। यह सुविधा हर नागरिक के जीवन में सुगमता और सुरक्षा लेकर आई है। विकास की राह पर कोरबा : अब हर गांव विकास से जुड़ा राज्य शासन ने सदैव इस बात पर बल दिया है कि विकास तभी सार्थक है जब वह अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि सड़क जैसी आधारभूत सुविधाओं का लाभ हर ग्राम पंचायत तक पहुंचे। सड़क निर्माण का यह अभियान न केवल भौतिक विकास का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक उन्नति का आधार भी है। जहाँ पहले ग्रामीण अर्थव्यवस्था केवल कृषि और वनोपज तक सीमित थी, वहीं अब सड़क कनेक्टिविटी ने ग्रामीण बाजारों और उद्यमिता को भी गति दी है। महिलाओं के स्व-सहायता समूह अब अपने उत्पादों को शहरों तक पहुँचाने में सक्षम हैं। स्कूली छात्राएं अब सुरक्षित रूप से स्कूल जा पा रही हैं। यह सब सड़क विकास की सीधी देन है। सुगम संपर्क से बढ़ा व्यापार, पर्यटन और रोज़गार
सड़कों के निर्माण से जिले के पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हुई है। हसदेव नदी के तट, पहाड़ी झरने, और ग्रामीण पर्यटन स्थलों तक अब पर्यटक सरलता से पहुंच पा रहे हैं। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। वहीं व्यापारियों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी आर्थिक लाभ हुआ है। कोरबा के औद्योगिक क्षेत्रों बालकोनगर, दीपका, गेवरा और कटघोरा तक बेहतर सड़क संपर्क ने औद्योगिक गतिविधियों को नई ऊर्जा दी है। कोरबा जिला प्रशासन ने सड़क निर्माण में पर्यावरण संतुलन को भी प्राथमिकता दी है। जहाँ संभव हुआ है, वहाँ वृक्षारोपण और जलनिकासी व्यवस्था को सुनिश्चित किया गया है। सड़क किनारों पर पौधरोपण अभियान चलाकर हरित कोरबा का सपना साकार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य अपने रजत महोत्सव वर्ष में केवल अतीत की उपलब्धियों का जश्न नहीं मना रहा, बल्कि भविष्य के सुनहरे लक्ष्य भी तय कर रहा है। आगामी वर्षों में भी मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना, गौरव पथ योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत नई परियोजनाएं स्वीकृत की जा रही हैं। राज्य शासन का उद्देश्य है कि जिले के प्रत्येक ग्राम को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाए ताकि कोई भी बस्ती विकास की मुख्यधारा से अछूती न रहे। जिले की सड़क विकास यात्रा इस बात का उदाहरण है कि जब शासन का उद्देश्य स्पष्ट और जनता का सहयोग सशक्त हो, तो कोई भी भौगोलिक चुनौती बाधा नहीं बन सकती। आज जब छत्तीसगढ़ अपनी रजत जयंती मना रहा है, तब कोरबा का हर नागरिक गर्व से कह सकता है “हमारी सड़कों ने बदल दी हमारी दुनिया।” यह उपलब्धि केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि उस जमीनी बदलाव की गवाही है, जो सड़कों के रूप में हर घर, हर गांव और हर नागरिक तक पहुँची है। यह विकास की वह डगर है, जो आने वाले वर्षों में न केवल कोरबा बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को स्वावलंबन, सुगमता और समृद्धि की दिशा में अग्रसर करेगी। कोरबा की यह सड़क विकास यात्रा हमें यह भी दिखाती है कि कैसे एक क्षेत्र में समर्पित योजना, संसाधनों का उचित उपयोग और सामूहिक प्रयास समाज को बदल सकते हैं। 25 वर्षों की इस अवधि में हर गाँव और नगर में हुए परिवर्तनों ने यह स्पष्ट किया है कि सड़कें केवल भौतिक संरचना नहीं हैं, बल्कि वे जीवन की गति, सामाजिक समृद्धि और सांस्कृतिक धरोहर की संरक्षक भी हैं।
कोरबा। जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतरेगा पिकनिक स्पॉट के रिसॉर्ट में सुबह उस वक्त पर्यटनों एवं कर्मचारियों में हड़कंप मच गया, जब विद्युत मीटर बोर्ड के पीछे करीब 8 फीट लंबा किंग कोबरा छिपकर बैठा मिला। किंग कोबरा की जानकारी मिलते ही रेस्ट हाउस के मैनेजर इस्तीखार खान ने तत्काल वन विभाग एवं नोवा नेचर संस्था के सदस्य जितेंद्र सारथी को सूचना दिया, जिसके बाद सारथी ने अपने अजगर बहार के स्थानीय टीम के सदस्य कमलेश, देवेंद्र, राम, गौतम, दिल ,नरेश, देव मरावी को तत्काल सतरेगा के लिए रवाना कर साथ ही इसकी जानकारी कोरबा वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय दिया एवं उनके निर्देशानुसार उपवनमण्डलाधिकारी रामसिंह राठिया उत्तर के मार्गदर्शन एवं बालकों रेंजर जयंत सरकार के नेतृत्व में जितेंद्र सारथी एवं सिद्धांत जैन कोरबा से रेस्क्यू के लिए मौके पर पहुंच कर सर्वप्रथम विद्युत विभाग को सूचना देकर बिजली को बंद करवाया गया, फिर पूरी सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, किंग कोबरा सर्किट बोर्ड के पीछे बेहद संकरी जगह में छिपा हुआ था, जिसके कारण उसे बाहर निकालना टीम के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत और सावधानी के बाद टीम ने करीब 8 फीट लंबे किंग कोबरा को सफलतापूर्वक सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
रेस्क्यू के दौरान किंग कोबरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटकों की भीड़ लग गई, इतने फुर्तीले और लंबे सांप को देख कर लोग जिज्ञासा वश फोन से वीडियो बनाने से नहीं चुके, साथ ही मौजूद लोगों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया, सफल रेस्क्यू के बाद पंचनामा के पश्चात किंग कोबरा को उसके उपयुक्त प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया।
कोरबा जिले के लेमरू, बालको , पसरखेत , करतला, कुदमुरा एवं आसपास के वन क्षेत्रों से पिछले कुछ समय से छोटे आकार के किंग कोबरा लगातार सामने आ रहे हैं, छोटे किंग कोबरा का बार-बार मिलना इस क्षेत्र में इनके प्राकृतिक प्रजनन और अनुकूल आवास की उपलब्धता का सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, साथ ही यह बात भी सिद्ध करता हैं कि एक ही सांप बार बार रेस्क्यु नहीं हो रहे बल्कि सभी किंग कोबरा दूसरे से भिन्न हैं। हालांकि, क्षेत्र में इनकी वास्तविक संख्या और आबादी की स्थिति निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब स्थानीय लोगों में भी किंग कोबरा और अन्य वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ रही है। आज किसी क्षेत्र में किंग कोबरा दिखाई देने पर लोग उसे मारने या नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत वन विभाग अथवा प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना देते हैं। सूचना का समय पर मिलना और सांप का सुरक्षित रेस्क्यू होकर पुनः प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाना वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है।
वन विभाग एवं नोवा नेचर ने आम लोगों से अपील की है कि किंग कोबरा या किसी भी सांप के दिखाई देने पर उससे दूरी बनाए रखें और स्वयं पकड़ने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें, तत्काल प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दें।
जर्जर सड़कों की शीघ्र मरम्मत और सड़क सुरक्षा के लिए गति अवरोधक व संकेतक लगाने के निर्देश
कोरबा। जिला पंचायत कोरबा के सभाकक्ष में बुधवार को जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार सिंह ने की। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रतीक जैन उपस्थित रहे। बैठक में जिले में संचालित विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान कृषि विभाग, लोक निर्माण विभाग एवं जल संसाधन विभाग द्वारा संचालित कार्यों की जानकारी ली गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
समीक्षा के दौरान वर्षा ऋतु के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर एवं क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की स्थिति पर चर्चा की गई। जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों की आवागमन सुविधा को ध्यान में रखते हुए ऐसी सड़कों की शीघ्र मरम्मत एवं सुधार कराने की आवश्यकता बताई। इस पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करते हुए सड़कों की मरम्मत एवं सुधार कार्य प्राथमिकता से कराने के निर्देश दिए गए। बैठक में सड़क सुरक्षा के विषय पर भी चर्चा करते हुए दुर्घटनाओं की संभावना को कम करने के लिए आवश्यक स्थानों पर गति अवरोधक एवं सड़क संकेतक लगाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में जिले के पेयजल अभावग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने को लेकर भी चर्चा हुई। जनप्रतिनिधियों ने आवश्यकता वाले क्षेत्रों में बांगो डेम से पेयजल उपलब्ध कराने की बात रखी। इस संबंध में संबंधित विभागों को क्षेत्र की आवश्यकता, तकनीकी संभावनाओं एवं व्यवहारिक पहलुओं का परीक्षण करते हुए आवश्यक कार्रवाई करने पर जोर दिया गया।
इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा अपने-अपने विभागों के अंतर्गत संचालित योजनाओं, उपलब्धियों, कार्यों की प्रगति तथा हितग्राहियों को दिए जा रहे लाभों की जानकारी प्रस्तुत की गई। जनप्रतिनिधियों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित आवश्यकताओं एवं ग्रामीणों की समस्याओं को बैठक में रखा गया, जिस पर अधिकारियों को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती निकिता मुकेश जायसवाल, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रेणुका राठिया, श्रीमती शांति मरावी, श्रीमती सुष्मिता अनंत कमलेश, श्रीमती सावित्री अजय कंवर, श्रीमती सुषमा रवि रजक, विनोद कुमार यादव, श्रीमती माया रूपेश कंवर, कौशल नेटी एवं विद्वान सिंह मरकाम, उपसंचालक पंचायत मिथलेश किसान सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कोरबा, 10 सितम्बर 2026। जिले में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ के सफल एवं समयबद्ध क्रियान्वयन, कार्ययोजना तैयार करने तथा प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति का गठन किया गया है। कलेक्टर कुणाल दुदावत समिति के अध्यक्ष होंगे, जबकि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कोरबा को नोडल अधिकारी बनाया गया है। जिला स्तरीय समिति में पुलिस अधीक्षक, वन मंडलाधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, खाद्य अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग, कार्यपालन अभियंता जल संसाधन विभाग, कार्यपालन अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जिला परिवहन अधिकारी, सहायक संचालक जनसंपर्क तथा मुख्य नगर पालिका अधिकारी नगर पालिका परिषद कोरबा को सदस्य बनाया गया है। अभियान के अंतर्गत जिले में विभिन्न जनभागीदारी एवं सेवा गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अभियान के दौरान ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘जनसेवक महाकुंभ-पंचायत से पार्लियामेंट’, ‘नमो सेवा गाथा’ नुक्कड़ नाटक, ‘सेवा ज्योति यात्रा’ और ‘जल जन सेवा संकल्प’ जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों के सफल संचालन के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर शासकीय अमले एवं उपलब्ध संसाधनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। अभियान के दौरान आयोजित होने वाली प्रत्येक गतिविधि का फोटो एवं वीडियो अभिलेखीकरण करते हुए जिलेवार प्रगति प्रतिवेदन नियमित रूप से राज्य स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा। प्रचार-प्रसार एवं सोशल मीडिया गतिविधियों में शासन द्वारा निर्धारित हैशटैग, फ्रेम एवं लोगो का ही उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सभी आयोजनों में वित्तीय मितव्ययिता बरतते हुए उपलब्ध शासकीय संसाधनों एवं अधोसंरचना का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति अभियान की गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागों के बीच समन्वय तथा निर्धारित कार्यक्रमों की सतत मॉनिटरिंग करेगी। अभियान का उद्देश्य जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए जनभागीदारी के माध्यम से सेवा एवं विकास गतिविधियों को प्रभावी रूप से जन-जन तक पहुंचाना है।