छत्तीसगढ़
साय बोले-पटवारियों का ट्रांसफर होते रहना चाहिए:रायपुर में सीएम ने कहा- राजस्व विभाग की छवि सुधारने की जरूरत, फिर सुनाया अपना किस्सा
रायपुर ,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में राजस्व विभाग के कामकाज से सरकार नाखुश है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में राजस्व विभाग के तमाम बड़े अफसर और मंत्री टंकराम की मौजूदगी में एक बैठक हुई। मीटिंग में जो बातें मुख्यमंत्री की ओर से कहीं गईं, उससे साफ है कि राजस्व विभाग के काम-काज में मुख्यमंत्री बदलाव चाहते हैं।
सीएम ने लंबे समय से एक ही जगह पर जमे हुए पटवारियों को हटाने के निर्देश भी दिए हैं। राजस्व विभाग के अफसरों को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने वह किस्सा भी सुनाया, जब पहली बार वह विधायक बने और राजस्व विभाग का एक मामला उनके सामने आया था।
मीटिंग में अधिकारियों से मुख्यमंत्री ने दो टूक कह दिया कि राजस्व विभाग की छवि सुधारने की जरूरत है। दिनभर चली इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने खेल विभाग की भी समीक्षा बैठक की।
पटवारियों का ट्रांसफर होते रहना चाहिए-सीएम
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पटवारियों का ट्रांसफर होते रहना चाहिए। ये न हो कि कोई लंबे समय से एक ही जगह पर है। अधिकारियों से मुख्यमंत्री ने कहा है कि एक ऐसी व्यवस्था तैयार करें जिसमें नियत समय के बाद पटवारी का अनिवार्य रूप से उस हल्के और तहसील क्षेत्र से स्थानांतरण हो जाए। उन्होंने कहा कि लोगों को रोज के सरकारी कामकाज में पटवारी के सहयोग की जरूरत पड़ती है।
CM ने अधिकारियों से कहा कि पटवारी अपने मुख्यालय में रहकर कार्य करें, यह सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के विभिन्न शासकीय कार्यालयों की भूमि का शासन के पक्ष में नामांतरण का काम अभियान चलाकर पूर्ण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नगरीय क्षेत्रों में शहरी पट्टों के वितरण के लिए कार्यवाही जल्द पूरी कर ली जाए।
जब CM ने सुनाया किस्सा
बैठक ये बात भी उठी कि राजस्व के जमीन से जुड़े मामलों में कई बार सालों-साल लोग दफ्तरों के चक्कर काटते हैं। CM एक किस्सा सुनाते हुए कहा- मैं साल 1990 में नया-नया विधायक बना, तब साधु की तरह दिखने वाले लंबी कद काठी का एक व्यक्ति मेरे पास आवेदन लेकर आया। वे मेरे जन्म यानी साल 1964 से राजस्व के एक मामले को लेकर राजस्व कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे। उन्हें अपने मामले की सारी जानकारियां याद थी और कागज पलटने तक की जरूरत नहीं पड़ती थी। मैं उन्हें अपनी गाड़ी से एसडीएम कार्यालय लेकर गया और मामले का निराकरण कराया।
ये किस्सा सुनाने के बाद अधिकारियों से मुख्यमंत्री बोले कि हमें राजस्व अमले की पूरी व्यवस्था को दुरुस्त करना है। राजस्व विभाग सीधे आम आदमी से जुड़ा है और हमें इसकी छवि सुधारने के लिए काम करना है। जब ये बात मुख्यमंत्री कह रहे थे तब बैठक में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा भी मौजूद थे।
टाइम लिमिट में काम पूरे करिए
मुख्यमंत्री ने कहा कि फौती नामांतरण, बंटवारा, अविवादित नामांतरण सहित राजस्व मामलों के निराकरण में तेजी लाई जाए और इसे समय सीमा में ही पूरा करें। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग नागरिक सुविधाओं को बढ़ाने के लिए डिजिटल नवाचारों पर भी तेजी के साथ काम करें।
राजस्व विभाग के सचिव अविनाश चंपावत ने CM के निर्देशों पर एक्शन का भरोसा दिलाया। बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद और राहुल भगत भी मौजूद थे।
खिलाड़ियों के रहने-खाने-पढ़ने का होगा बंदोबस्त
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने खेल और युवा कल्याण विभाग के कामों की समीक्षा बैठक भी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कहा कि प्रदेश में प्रचलित 8-10 महत्वपूर्ण खेलों को चिन्हांकित कर खिलाड़ियों को आवासीय प्रशिक्षण, पढ़ाई और अच्छे पोषण के साथ विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं उपलब्ध कराएं। हमारे खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में मेडल जीते, हम इसी लक्ष्य के साथ खेल सुविधाओं के विस्तार पर काम कर रहें हैं। हमें अपनी खेल प्रतिभाओं को विश्व पटल पर लेकर जाना है।
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों से प्रदेश में मौजूद स्पोर्ट्स इंस्फ्राट्रक्चर के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरगुजा से लेकर बस्तर तक युवाओं में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है, हमें उसे निखारने की आवश्यकता है। साय ने अधिकारियों से केन्द्रीय स्तर पर स्वीकृति के लिए भेजे प्रस्ताव की जानकारी सूचीबद्ध कर उपलब्ध कराने को कहा ताकि अपने दिल्ली प्रवास के दौरान इन पर चर्चा की जा सके।
प्रतिभा दिखाने का मिलेगा अवसर
सीएम साय ने NTPC के सहयोग से जशपुर जिले के सन्ना में तैयार होने वाले नेशनल आर्चरी अकादमी का जिक्र करते हुए कहा कि इस पहल से इस दूरस्थ इलाके का विकास होगा, साथ ही इस इलाके में रहने वाले पहाड़ी कोरवा, जो स्वाभाविक रूप से तीरंदाजी में माहिर होते हैं, उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी मिलेगा।
मुख्यमंत्री साय ने नियद नेल्ला नार योजना के तहत नक्सल प्रभावित इलाकों में खेल सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से लिए निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता ने मुख्यमंत्री को जशपुर, रायगढ़ में इंटीग्रेटेड स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स के निर्माण से जुड़ी जानकारियां दी।
कोरबा
मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार कृष्ण दास पहुंचे कोरबा, बदलते दौर में पत्रकारिता पर दिया व्याख्यान
कोरबा। बदलते दौर में मीडिया की जिम्मेदारी, पत्रकारिता की विश्वसनीयता और समाज में संवाद की भूमिका को लेकर कोरबा प्रेस क्लब ने कार्यक्रम का आयोजन किया। टीपी नगर स्थित कोरबा प्रेस क्लब के तिलक भवन में विशेष विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में पत्रकारिता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गंभीर चर्चा हुई, जिसमें लोकतंत्र में मीडिया की अहम भूमिका को रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता छत्तीसगढ़ शासन में कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त सलाहकार एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सलाहकार आर कृष्ण दास रहे। कार्यक्रम में सर्वप्रथम दीप प्रज्जवलित कर श्री दास ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया जिसके उपरांत उन्होंने छत्तीसगढ़ में मीडिया की भूमिका विषय पर अपना संबोधन देते हुए कहा कि मीडिया केवल खबरों का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक और जिम्मेदार बनाने की ताकत भी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती में पत्रकारों की बड़ी भूमिका होती है और निष्पक्ष, तथ्यपरक व जिम्मेदार पत्रकारिता आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। न्होंने पत्रकारों से सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता देने और सकारात्मक संवाद को आगे बढ़ाने की अपील की। कार्यक्रम में कोरबा प्रेस क्लब के पदाधिकारी, जिले के वरिष्ठ पत्रकार, युवा मीडिया कर्मी और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद रहे। इस दौरान मीडिया के बदलते स्वरूप, डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़ती चुनौती और पत्रकारिता की विश्वसनीयता जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम के अंत में कोरबा प्रेस क्लब के वरिष्ठ पत्रकार व कोरबा प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने शाल व श्रीफल से श्री दास का सम्मान किया।

छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ BJP कार्यसमिति की बैठक शुरू:सत्ता-संगठन दोनों में बदलाव की चर्चा, 2028 की रणनीति को लेकर दो दिन चलेगी बैठकें
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में मंगलवार 12 मई को शाम 6 बजे प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय सहित कई प्रदेश महामंत्री और अन्य पदाधिकारी मौजूद हैं।
दरअसल, छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के भीतर इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा किसी चुनाव या विपक्ष को लेकर नहीं, बल्कि खुद पार्टी के अंदर संभावित बड़े फेरबदल को लेकर है। सत्ता और संगठन दोनों स्तर पर बदलाव की अटकलें तेज हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा लगातार चल रही है कि पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा अपने राष्ट्रीय संगठन और राज्यों की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव कर सकती है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ को भी सबसे अहम राज्यों में गिना जा रहा है।
यह बैठक रायपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में दो दिन यानी 12 और 13 मई को होगी। पार्टी कोर कमेटी, प्रदेश पदाधिकारियों और प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी भले इसे नियमित संगठनात्मक बैठक बता रही हो, लेकिन अंदरखाने इसे आने वाले बदलावों की भूमिका बैठक के तौर पर देखा जा रहा है।

बैठक में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव सहित प्रदेश पदाधिकारी शामिल
क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही 12-13 मई की बैठक
भाजपा प्रदेश महामंत्री डॉ. नवीन मार्कण्डेय के मुताबिक 12 मई को शाम 6 बजे कोर कमेटी की बैठक शुरू हो गई है। इसके बाद 7:30 बजे प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक आयोजित की जाएगी। वहीं 13 मई को सुबह 10 बजे प्रदेश कार्यसमिति की बैठक होगी।
औपचारिक तौर पर बैठक का एजेंडा आगामी कार्ययोजना, संगठन की समीक्षा और भविष्य के कार्यक्रम तय करना बताया गया है। लेकिन भाजपा के अंदर चल रही चर्चाओं को देखें तो यह बैठक सिर्फ संगठन समीक्षा तक सीमित नहीं मानी जा रही।
माना जा रहा है कि बंगाल चुनाव परिणाम के बाद भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक पुनर्गठन की दिशा में आगे बढ़ेगी और उसी रणनीति का असर छत्तीसगढ़ में भी दिखाई दे सकता है।

बैठक में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव
सत्ता और संगठन दोनों में बदलाव की चर्चा क्यों?
दरअसल, छत्तीसगढ़ भाजपा इस समय दो समानांतर परिस्थितियों से गुजर रही है। पहली सरकार को ढाई साल पूरे होने की ओर बढ़ रही है और दूसरी संगठन में कई बड़े पदाधिकारियों का कार्यकाल समाप्ति की स्थिति में है।
प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल के कार्यकाल को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा तेज है। संगठन में नए चेहरों को जिम्मेदारी देने और कई नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर एडजस्ट करने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि पार्टी नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ में सत्ता और संगठन को लेकर फीडबैक और सर्वे कराया है। उसी आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जा रही है। यही वजह है कि अब चर्चा सिर्फ छोटे बदलाव की नहीं, बल्कि व्यापक पुनर्संतुलन की हो रही है।

डिप्टी सीएम विजय शर्मा को बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है।
डिप्टी सीएम को मिलेगी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी?
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि राज्य के एक उप मुख्यमंत्री को संगठन में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी दी जा सकती है। राजनीतिक हलकों में डिप्टी सीएम विजय शर्मा का नाम सबसे ज्यादा लिया जा रहा है। हालांकि कुछ जगहों में अरूण साव का नाम भी सामने आ रहा है।
कहा जा रहा है कि भाजपा अपने राष्ट्रीय संगठन में ऐसे चेहरों को आगे लाना चाहती है जो चुनावी मैनेजमेंट, आक्रामक राजनीति और संगठन विस्तार में प्रभावी रहे हों। बंगाल चुनाव में जिन नेताओं को जिम्मेदारी दी गई थी, उनके कामकाज का मूल्यांकन भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
यह भी चर्चा है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन अपनी नई टीम तैयार कर सकते हैं। क्योंकि वे लंबे समय तक छत्तीसगढ़ प्रभारी रहे हैं, इसलिए यहां के नेताओं की कार्यशैली और क्षमता से अच्छी तरह परिचित हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ के कुछ नेताओं को राष्ट्रीय टीम में जगह मिल सकती है या दूसरे राज्यों की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
महिला डिप्टी सीएम का फार्मूला क्यों चर्चा में?
यदि डिप्टी सीएम स्तर पर बदलाव होता है, तो भाजपा एक महिला चेहरे को आगे कर सकती है। राजनीतिक गलियारों में लता उसेंड़ी और रेणुका सिंह जैसे नाम चर्चा में हैं।
इसके पीछे भाजपा की बहुस्तरीय रणनीति देखी जा रही है। पार्टी यदि किसी महिला आदिवासी या ओबीसी चेहरे को डिप्टी सीएम बनाती है तो वह एक साथ कई सामाजिक समीकरण साध सकती है।
- महिला प्रतिनिधित्व का संदेश
- आदिवासी वोट बैंक को मजबूत करना
- सरगुजा-बस्तर क्षेत्र में राजनीतिक संतुलन
- और भविष्य के चुनावों के लिए नया नेतृत्व तैयार करना
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब सिर्फ सरकार चलाने के मोड में नहीं, बल्कि 2028 विधानसभा चुनाव की सामाजिक और क्षेत्रीय रणनीति पर काम कर रही है।
मंत्रिमंडल में किन चेहरों पर चर्चा?
चर्चा है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व पर केंद्रीय नेतृत्व पूरी तरह भरोसे में है और फिलहाल मुख्यमंत्री बदलने जैसी कोई स्थिति नहीं है। बल्कि पार्टी आगामी चुनाव भी उनके चेहरे पर लड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
लेकिन मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार की चर्चा काफी तेज है। कहा जा रहा है कि 2-4 मंत्री पदों में चेहरे बदल सकते है और उनकी जगह नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। खास बात यह है कि इस बार पुराने और वरिष्ठ विधायकों की तुलना में नए चेहरों को प्राथमिकता मिलने की संभावना ज्यादा बताई जा रही है।
संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल में एक और महिला चेहरे को शामिल किया जा सकता है। पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम हो रहा है।
राजनीतिक चर्चाओं में जिन नामों की चर्चा हो रही है, उनमें:
- भावना बोहरा
- पुरंदर मिश्रा
- सुशांत शुक्ला
और सरगुजा क्षेत्र की किसी आदिवासी महिला विधायक का नाम प्रमुख है।

लंबे समय के बाद बीजेपी में प्रदेश कार्यसमिति और कोर कमेटी की बैठक होने जा रही है।
आखिर भाजपा इतनी जल्दी बदलाव क्यों चाहती है?
भाजपा की राजनीति में अब चुनाव से ठीक पहले बदलाव के बजाय समय रहते परफॉर्मेंस ट्यूनिंग का मॉडल ज्यादा दिख रहा है। छत्तीसगढ़ में पार्टी सत्ता में आने के बाद अब दूसरे चरण की रणनीति पर काम कर रही है।
इस रणनीति के तीन बड़े कारण
1. 2028 की तैयारी अभी से
भाजपा अगले विधानसभा चुनाव को सिर्फ सरकार बचाने का नहीं, बल्कि संगठन विस्तार के अवसर के रूप में देख रही है। इसलिए युवा, आक्रामक और सामाजिक रूप से संतुलित टीम तैयार करने पर जोर है।
2. सत्ता-संगठन तालमेल
पार्टी के भीतर यह फीडबैक लगातार सामने आता रहा है कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है। ऐसे में दोनों स्तरों पर रीसेट की कोशिश हो सकती है।
3. राष्ट्रीय राजनीति में CG नेताओं की एंट्री
छत्तीसगढ़ भाजपा के कई नेताओं ने पिछले डेढ़ साल में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। बंगाल चुनाव और दूसरे राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाने वाले नेताओं का कद बढ़ा है। भाजपा इन्हें बड़े रोल में उपयोग कर सकती है।
क्या बैठक में ही होगा कोई बड़ा फैसला?
संभावना कम है कि 12-13 मई की बैठक में कोई बड़ा राजनीतिक ऐलान हो। भाजपा आमतौर पर ऐसे फैसले केंद्रीय नेतृत्व स्तर पर अंतिम रूप देने के बाद ही सार्वजनिक करती है। लेकिन राजनीतिक संकेत जरूर मिल सकते हैं।
बैठक में नेताओं की बॉडी लैंग्वेज, मंच पर बैठने का क्रम, किन चेहरों को ज्यादा महत्व मिलता है, किन नेताओं की सक्रियता बढ़ती है इन सभी बातों पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।
फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ भाजपा अब सिर्फ नियमित संगठनात्मक गतिविधियों के दौर में नहीं है। पार्टी अगले चुनावी चक्र की तैयारी में प्रवेश कर चुकी है। ऐसे में सत्ता और संगठन दोनों में बड़े बदलाव की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता।
छत्तीसगढ़
बैज बोले-‘कम उपयोग’ की सलाह जख्म पर नमक छिड़कने जैसा:पीएम की अपील पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बोला हमला,कहा-सरकार जिम्मेदारी से बच रही है
रायपुर, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकार वार्ता में कहा कि देश पहले से महंगाई, पेट्रोल-डीजल संकट और बेरोजगारी से जूझ रहा है, ऐसे समय में प्रधानमंत्री लोगों को कम इस्तेमाल की सलाह देकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं।
बैज ने कहा कि प्रधानमंत्री ने किसानों से उर्वरक कम इस्तेमाल करने, महिलाओं से तेल और गैस बचाने, कर्मचारियों से ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने, लोगों से सोना और विदेश यात्रा कम करने की अपील की है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार संकट का समाधान निकालने के बजाय जनता को “कम खर्च करो” का संदेश दे रही है।

“खाद नहीं, सलाह मिल रही”
कांग्रेस ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन के लिए करीब 15 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की जरूरत है, लेकिन अभी तक सिर्फ 51 हजार मीट्रिक टन खाद ही समितियों तक पहुंच पाई है। बैज ने कहा कि किसान पहले से खाद संकट और बढ़ती लागत से परेशान हैं, ऐसे में उर्वरक कम इस्तेमाल करने की सलाह उनकी उत्पादन क्षमता पर असर डालेगी।
उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा करने वाली सरकार अब उत्पादन घटाने जैसी बातें कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है।
“वर्क फ्रॉम होम की सलाह मैदान में काम करने वालों को कैसे लागू होगी?”
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि देश में बड़ी आबादी फील्ड जॉब, छोटे कारोबार, ठेला-फेरी और दैनिक कामकाज पर निर्भर है। ऐसे लोगों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ जैसी सलाह व्यवहारिक नहीं है।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जिक्र करते हुए कहा कि पहले “आराम हराम है” का संदेश दिया जाता था, जबकि अब लोगों को घर बैठने की सलाह दी जा रही है।
रसोई से लेकर पेट्रोल तक महंगा
कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में 2013 और 2026 के दामों की तुलना करते हुए दावा किया कि आटा, दाल, तेल, दूध, गैस सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल के दाम कई गुना बढ़ चुके हैं। बैज ने कहा कि रसोई का बजट पहले ही बिगड़ चुका है और महिलाएं हर जरूरी चीज में कटौती करने को मजबूर हैं।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स बढ़ाकर केंद्र सरकार ने जनता से लाखों करोड़ रुपए वसूले हैं, लेकिन राहत देने के बजाय बचत की अपील की जा रही है।
आवश्यक सामाग्री के दाम मनमोहन सरकार की तुलना में मोदी राज में बेतहाशा बढ़ी
| आवश्यक सामग्री | 2013 कीमत | 2026 कीमत |
|---|---|---|
| आटा (10 किलो) | 210 रुपए | 530 रुपए |
| चावल | 30-36 रुपए किलो | 50-65 रुपए किलो |
| फुल क्रीम दूध | 39 रुपए | 66 रुपए |
| देसी घी | 300 रुपए | 1080 रुपए |
| सरसों तेल | 52 रुपए | 260 रुपए |
| अरहर दाल | 70-80 रुपए | 160-170 रुपए |
| रसोई गैस | 410 रुपए | 1000 रुपए |
| पेट्रोल | 66 रुपए | 100 रुपए |
| डीजल | 52 रुपए | 95 रुपए |
| रिफाइंड तेल | 86 रुपए | 175 रुपए |
| फल्ली दाना | 60 रुपए | 135 रुपए |
| उड़द दाल | 64 रुपए | 120 रुपए |
| मूंग दाल | 62 रुपए | 130 रुपए |
| मसूर दाल | 47 रुपए | 90 रुपए |
| चना दाल | 40 रुपए | 90 रुपए |
| जीरा | 220 रुपए | 1450 रुपए |
| गेहूं | 22 रुपए | 36-40 रुपए |
सोना मत खरीदो, लेकिन खुद विदेश यात्राओं पर खर्च-दीपक बैज
बैज ने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार ने विदेश दौरों और विशेष विमान पर भारी खर्च किया है, जबकि आम लोगों को खर्च कम करने की सलाह दी जा रही है।
कांग्रेस ने कहा कि अगर डीजल-पेट्रोल बचाने की जरूरत है तो इसकी शुरुआत मंत्रियों और नेताओं के बड़े काफिलों से होनी चाहिए।
“मोदी सरकार संकट संभालने में विफल”
कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार महंगाई, बेरोजगारी और ईंधन संकट से निपटने में असफल रही है। पार्टी ने यह भी कहा कि पिछले 12 वर्षों में तेल भंडारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया, जिसका असर अब संकट के समय दिखाई दे रहा है।
प्रेस वार्ता में धनेन्द्र साहू, सत्यनारायण शर्मा, शिवकुमार डहरिया और सुशील आनंद शुक्ला समेत कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे।
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