Connect with us

देश

सेंसेक्स 1470 अंक गिरकर 74,564 पर बंद:निफ्टी में 488 अंकों की गिरावट; मेटल, ऑटो और बैंकिंग शेयर्स सबसे ज्यादा टूटे

Published

on

मुंबई,एजेंसी। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के बीच शेयर बाजार में आज यानी शुक्रवार 13 मार्च को लगातार तीसरे दिन गिरावट रही। सेंसेक्स 1470 अंक (1.93%) की गिरावट के साथ 74,564 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी में भी 488 अंक (2.06%) की गिरावट रही, ये 23,151 पर आ गया है। आज मेटल, ऑटो और बैंकिंग शेयर्स में सबसे ज्यादा गिरावट रही।

सेंसेक्सस के 30 शेयरों में से 28 में गिरावट और केवल 2 में तेजी रही।

सेंसेक्सस के 30 शेयरों में से 28 में गिरावट और केवल 2 में तेजी रही।

बाजार गिरने की 3 मुख्य वजहें

  1. अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध से सप्लाई चेन बिगड़ गई है।
  2. कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल और महंगाई बढ़ेगी।
  3. अमेरिका और एशियाई बाजारों में गिरावट का असर भारत पर।

एशियाई बाजार अपडेट

  • साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 1.72% गिरकर 5,487 पर बंद हुआ।
  • जापान का निक्केई इंडेक्स 1.16% गिरकर 53,819 पर बंद हुआ।
  • हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.98% की गिरावट के साथ 25,465 पर बंद हुआ।
  • चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.82% नीचे 4,095 के स्तर पर बंद हुआ।

अमेरिकी बाजार में 12 मार्च को गिरावट रही

  • डाउ जोन्स 739 अंक (1.56%) गिरकर 46,677 के स्तर पर बंद हुआ।
  • टेक बेस्ड इंडेक्स नैस्डैक कंपोजिट 1.78% गिरकर 22,311 पर बंद हुआ।
  • S&P 500 इंडेक्स 103 अंक (1.52%) गिरकर 6,672 पर बंद हुआ।

कच्चा तेल 100 डॉलर के पार ट्रेड कर रहा

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आज तेजी है। ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है। इससे पहले 9 मार्च को ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर पर पहुंच गया था।

कल सेंसेक्स 829 अंक गिरकर बंद हुआ था

शेयर बाजार में में यानी 12 मार्च को लगातार दूसरे गिरावट रही थी। सेंसेक्स 829 अंक की गिरावट के साथ 76,034 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी में भी 228 अंक की गिरावट रही।

Continue Reading

देश

सरकार का बड़ा फैसला: 10% तक चीनी हिस्सेदारी वाली कंपनियों के लिए FDI आसान

Published

on

नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार चीनी कंपनियों में 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी रखने वाली विदेशी कंपनियों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों में ढील से जुड़े फैसले को जल्द अधिसूचित करेगी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा कि यह अधिसूचना विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत जारी की जाएगी, जिसके बाद संशोधित प्रावधान लागू हो जाएंगे। मार्च में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2020 में जारी प्रेस नोट-3 को संशोधित करने की मंजूरी दी थी। इस संशोधन के तहत 10 प्रतिशत तक चीनी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियां को विभिन्न क्षेत्रों में स्वचालित मार्ग के तहत भारत में निवेश की अनुमति होगी। 

हालांकि यह राहत उन संस्थाओं पर लागू नहीं होगी जो चीन/हांगकांग या भारत से भूमि सीमा साझा करने वाले अन्य देशों में पंजीकृत हैं। सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक घटकों, पॉलिसिलिकॉन और इंगट-वाफर जैसे विनिर्माण क्षेत्रों में आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रस्तावों का निपटान 60 दिनों के भीतर किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, मंत्रिमंडलीय सचिव की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा जिन अन्य क्षेत्रों या गतिविधियों को जोड़ा जाएगा, वे भी इस दायरे में आएंगे। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने इन बदलावों को अधिसूचित कर दिया है लेकिन आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) ने अभी तक फेमा कानून के तहत अधिसूचना जारी नहीं की है। 

डीपीआईआईटी में संयुक्त सचिव जय प्रकाश शिवहरे ने कहा कि यह अधिसूचना जल्द जारी होगी और इस पर तकनीकी स्तर पर काम जारी है। उन्होंने बताया कि विभाग उन उप-क्षेत्रों की पहचान कर रहा है जिनके प्रस्ताव 60 दिनों में निपटाए जाएंगे। इसके साथ ही शिवहरे ने कहा कि इस बीच कुल एफडीआई वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल से फरवरी अवधि के दौरान बढ़कर 88.29 अरब डॉलर हो गया जो 2024-25 में इसी समय 80.61 अरब डॉलर था। देश में शुद्ध एफडीआई भी बढ़कर 6.26 अरब डॉलर हो गया जो 2024-25 में 95.9 करोड़ डॉलर था। 

डीपीआईआईटी के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने कहा कि समूचे वित्त वर्ष 2025-26 में इसके 90 अरब डॉलर के पार पहुंच जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सुधारात्मक उपाय, मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और तेजी से बढ़ती आर्थिक वृद्धि देश को अच्छा निवेश आकर्षित करने में मदद कर रही है। सरकार ने साथ ही बताया कि इन्वेस्ट इंडिया ने 2025-26 के दौरान 6.1 अरब डॉलर से अधिक के 60 परियोजनाओं को जमीन पर उतारने में सहायता की जिससे 31,000 से अधिक संभावित रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इन निवेशों में लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा यूरोपीय देशों से आया है जबकि अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों की भागीदारी भी बनी हुई है। 

ब्राजील, न्यूजीलैंड और कनाडा जैसे उभरते स्रोत देशों से निवेश आने से देश के निवेश आधार में विविधता दिखाई दे रही है। ‘इन्वेस्ट इंडिया’ की प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) निवृत्ति राय ने कहा कि रसायन, दवा, जैव प्रौद्योगिकी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में लगभग 65 प्रतिशत निवेश हुआ जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स, वैमानिकी एवं रक्षा तथा मोटर वाहन/ इलेक्ट्रिक वाहन जैसे उभरते क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय गतिविधि देखी गई है। उन्होंने कहा कि एजेंसी अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए 11 देशों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। 

Continue Reading

देश

1000 से 7500 रुपए हो सकती है पेंशन, ATM से मिलेगा PF का पैसा, बड़े बदलाव की तैयारी में EPFO

Published

on

मुंबई, एजेंसी। अगर आप प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं और आपकी सैलरी से PF कटता है, तो आने वाले समय में आपको बड़ी राहत मिल सकती है। Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) अपने करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए कई अहम बदलावों पर काम कर रहा है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अभी अंतिम मुहर लगनी बाकी है।

पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी की चर्चा

Employees’ Pension Scheme (EPS-95) के तहत न्यूनतम पेंशन को 1,000 रुपए से बढ़ाकर 7,500 रुपए करने पर विचार किया जा रहा है। श्रमिक संगठनों की लंबे समय से यह मांग रही है और संसदीय समिति भी इसकी सिफारिश कर चुकी है। अगर यह लागू होता है, तो पेंशन में करीब 7.5 गुना बढ़ोतरी हो सकती है।

ATM और UPI से निकासी संभव

EPFO अपने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘EPFO 3.0’ को लॉन्च करने की तैयारी में है। इसके लागू होने के बाद PF खाता बैंक खाते की तरह काम कर सकता है। संभावना है कि सब्सक्राइबर्स ATM के जरिए सीधे PF से पैसे निकाल सकेंगे।

साथ ही, UAN को UPI से लिंक करने की सुविधा भी मिल सकती है, जिससे जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसे ट्रांसफर किए जा सकेंगे।

निकासी पर सीमा तय होगी

नई व्यवस्था में पूरी राशि निकालने की अनुमति नहीं होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, सदस्य अपने कुल PF बैलेंस का लगभग 75% हिस्सा एडवांस के तौर पर निकाल सकेंगे, जबकि 25% राशि भविष्य के लिए खाते में बनी रहेगी।

बंद खातों के लिए E-PRAAPTI पोर्टल

निष्क्रिय PF खातों को सक्रिय करने के लिए EPFO ने नया ‘E-PRAAPTI’ पोर्टल पेश किया है। यह प्लेटफॉर्म आधार आधारित होगा, जिससे यूजर्स अपने पुराने खातों को आसानी से खोजकर मौजूदा UAN से लिंक कर सकेंगे।

क्लेम सेटलमेंट में रिकॉर्ड तेजी

वित्त वर्ष 2025–26 में EPFO ने 8.31 करोड़ क्लेम सेटल किए, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है। करीब 71% एडवांस क्लेम 3 दिन के भीतर निपटाए गए, जिससे प्रोसेस पहले से ज्यादा तेज और आसान हो गया है।

Continue Reading

देश

शेयर बाजार में FPI की बिकवाली तेज, 2026 में विदेशी निवेशकों ने निकाले ₹1.08 लाख करोड़ से ज्यादा

Published

on

मुंबई, एजेंसी। भारतीय शेयर बाजार के लिए 2026 चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अब तक 1.08 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी कर ली है, जो पूरे 2025 की कुल निकासी से भी अधिक है। यह आंकड़ा निवेशकों के घटते भरोसे को साफ दर्शाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक रुपए की कमजोरी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस (AI) सैक्टर में सीमित निवेश अवसरों ने विदेशी निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इन कारकों के चलते उन्होंने जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई है। एशियाई और उभरते बाजारों में भारत से निकासी का स्तर काफी ऊंचा रहा है। दक्षिण कोरिया के बाद भारत दूसरा सबसे ज्यादा बिकवाली वाला बाजार बना हुआ है। यह 2026 के पहले चार महीनों में अब तक की सबसे बड़ी निकासी मानी जा रही है।

2024 से जारी है गिरावट का ट्रैंड

विदेशी निवेशकों की यह दूरी नई नहीं है। सितंबर 2024 से ही FPI का रुख कमजोर पड़ने लगा था। कंपनियों की कमाई की तुलना में शेयर बाजार के ऊंचे वैल्यूएशन ने निवेशकों को चिंतित किया। 2025 में भी 1.6 लाख करोड़ रुपए की रिकॉर्ड निकासी दर्ज की गई थी। मार्च 2026 में यह बिकवाली सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही। AI से जुड़े वैश्विक बाजार जैसे ताइवान और दक्षिण कोरिया में भी निवेशकों ने पैसा निकाला। 

ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार दक्षिण कोरिया में 35.3 अरब डॉलर, भारत में 19.75 अरब डॉलर और ताइवान में 8.5 अरब डॉलर की निकासी हुई।

कहां जा रहा है पैसा

जहां भारत और एशियाई बाजारों से पैसा निकल रहा है, वहीं रूस और ब्राजील जैसे बाजारों में विदेशी निवेश बढ़ा है। इन देशों में क्रमशः 20.6 अरब डॉलर और 11.8 अरब डॉलर का निवेश आया है। हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (डी.आई.आई.) ने बाजार को सहारा दिया है। 

29 अप्रैल को जहां एफ.पी.आई. ने करीब 2,468करोड़ रुपए के शेयर बेचे, वहीं डी.आई.आई. ने लगभग 2,262 करोड़ रुपए की खरीदारी की।

निवेशकों के लिए क्या है रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि इस उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए। खासकर वे कंपनियां जो चौथी तिमाही (क्यू-4) में उम्मीद से बेहतर नतीजे दे रही हैं और आगे के लिए सकारात्मक संकेत दे रही हैं, उनमें निवेश के मौके बन सकते हैं। 

विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी भारतीय बाजार के लिए चिंता का संकेत है, लेकिन घरेलू निवेशकों का समर्थन और मजबूत कंपनियों के प्रदर्शन से बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे में समझदारी से निवेश करना ही सबसे बड़ा हथियार साबित होगा।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677