देश
10g सोना ₹1,904 गिरकर ₹1.58 लाख का हुआ:1kg चांदी ₹7,813 सस्ती होकर ₹2.60 लाख पर आई, ईरान जंग का असर
नई दिल्ली,एजेंसी। अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग की वजह से चांदी-सोने में आज 13 मार्च को गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,904 रुपए गिरकर 1.58 लाख रुपए पर आ गया है। इससे पहले 12 मार्च को सोना 1,60 लाख रुपए प्रति 10g था।
वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 7,813 रुपए घटकर 2.60 लाख रुपए पर आ गई है। इससे पहले गुरुवार को इसकी कीमत 2.68 लाख रुपए किलो थी।
- ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: सोना एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में ईंधन और भारी सुरक्षा का खर्च आता है। आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय दाम बढ़ जाते हैं।
- खरीदारी की मात्रा : दक्षिण भारत जैसे इलाकों में खपत ज्यादा (करीब 40%) होने के कारण ज्वेलर्स भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं। इससे मिलने वाली छूट का फायदा ग्राहकों को कम दाम के रूप में मिलता है।
- लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: हर राज्य और शहर के अपने ज्वेलरी एसोसिएशन (जैसे तमिलनाडु में मद्रास ज्वेलर्स एसोसिएशन) होते हैं। ये संगठन स्थानीय मांग और सप्लाई के आधार पर अपने इलाके के लिए सोने का रेट तय करते हैं।
- पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स ने अपना स्टॉक किस रेट पर खरीदा है, यह भी मायने रखता है। जिन ज्वेलर्स के पास पुराने और सस्ते रेट पर खरीदा हुआ स्टॉक होता है, वे ग्राहकों से कम कीमत वसूल सकते हैं।
ऑल टाइम हाई से 1.25 लाख रुपए गिरी चांदी
इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2026 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 17,722 रुपए सस्ता हो चुका है।
वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक 44 दिन में चांदी 1,25,445 लाख रुपए सस्ती हो गई है।
कीमतें गिरने की 3 बड़ी वजहें
- ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम: अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व की ओर ब्याज दरों में जल्द कटौती की संभावना कम कर दी है। माना जा रहा है कि मार्च की मीटिंग में दरें नहीं घटेंगी।
- कैश पर बढ़ा भरोसा: अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग से मार्केट में अनिश्चितता बढ़ गई है और निवेशक सोने के बजाय नकद हाथ में रखना पसंद कर रहे हैं। इससे सोने की मांग पर असर पड़ा है।
- महंगा तेल और शेयर बाजार की गिरावट: मिडिल ईस्ट जंग की वजह से तेल की कीमतें भी बढ़ रही हैं, जिससे दुनियाभर के शेयर बाजारों में बिकवाली हो रही है। इसका असर कमोडिटी मार्केट पर भी हो रहा है।
एक्सपर्ट व्यू- अभी सोने-चांदी में निवेश से बचें
कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक लोग शेयर बाजार में हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए सोने-चांदी में मुनाफा वसूली कर रहे हैं। इससे सोने-चांदी के दामों में गिरावट है।
अजय केडिया अनुसार आगे भी ये गिरावट जारी रह सकती है। इसके चलते सोना 1.50 लाख और चांदी 2.50 लाख रुपए तक आ सकती है। ऐसे में निवेशकों को अभी सोने-चांदी में निवेश से बचना चाहिए।
ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान
1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।
2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है।
असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके
मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है।
आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ बहुत तेजी से पिघलेगी।
स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आ सकती है।
क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है।
देश
Exit Poll 2026: असम में NDA 100 सीटों के पार, केरल में दिखी कांटे की टक्कर, जानें क्या कहते हैं नए आंकड़े?
नई दिल्ली, एजेंसी। देश के 5 बड़े राज्यों में मतदान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।अब सबकी निगाहें नतीजों पर टिकी हुई हैं। हाल ही में Today’s Chanakya ने अपने एग्जिट पोल के आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, असम में NDA भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करता दिख रहा है, जबकि केरल में मुकाबला बेहद दिलचस्प और बराबरी का बना हुआ है।

1. असम में NDA की जीत का अनुमान
असम की 126 सीटों वाली विधानसभा के लिए चाणक्य के आंकड़े एकतरफा जीत की ओर इशारा कर रहे हैं।
- NDA को102 सीटें मिलने का अनुमान (± 9 सीटों के मार्जिन के साथ)। यानी यह आंकड़ा 93 से 111 सीटों के बीच रह सकता है।
- कांग्रेस गठबंधन पिछड़ता हुआ दिख रहा है, जिसे केवल 14 से 32 सीटें मिलने का अनुमान है।
- AIUDF+ और अन्य: अन्य दलों का अकाउंट खुलना मुश्किल दिख रहा है, उन्हें 0 से 2 सीटें मिल सकती हैं।
2. केरल में UDF और LDF के बीच मुकाबला
केरल में सत्ता किसके हाथ जाएगी, फिलहाल यह कहना मुश्किल है क्योंकि दोनों बड़े गठबंधनों के बीच अंतर बहुत कम है:
- UDF (कांग्रेस गठबंधन): 40% वोट शेयर के साथ 69 ± 9 सीटें मिलने की उम्मीद है, जिससे उसे मामूली बढ़त मिलती दिख रही है।
- LDF (वामपंथी गठबंधन): 38% वोट शेयर के साथ 64 ± 9 सीटें मिलने का अनुमान है।
- भाजपा+: केरल में भाजपा अपनी पैठ बढ़ाती दिख रही है, जिसे 20% वोट शेयर के साथ 7 ± 4 सीटें मिल सकती हैं।
इस दिन आएंगे नतीजे
असल परिणाम क्या फिलहाल यह देखना बाकी है। एग्जिट पोल के नतीजों को असल नहीं माना जा सकता। जानकारी के लिए बता दें कि 5 राज्यों-पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी के चुनाव परिणाम 4 मई, 2026 (सोमवार) को घोषित किए जाएंगे।
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एग्जिट पोल के अनुमान TMC कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने के लिए है, ममता बनर्जी का बड़ा दावा
कोलकाता, एजेंसी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने के लिए “भाजपा के निर्देश पर” एग्जिट पोल के पूर्वानुमान प्रसारित किए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सत्तारूढ़ पार्टी राज्य चुनावों में 294 विधानसभा सीटों में से 226 से अधिक सीटें जीतेगी।

चार मई को होने वाली मतगणना से पहले ‘एक्स’ पर पोस्ट एक वीडियो संदेश में, बनर्जी ने दावा किया कि टेलीविजन चैनल ”भाजपा कार्यालय से प्रसारित” चुनावी परिणामों के अनुमानों को प्रसारित कर रहे। उन्होंने आरोप लगाया, ”टेलीविजन पर जो दिखाया जा रहा है, उसे दोपहर एक बजकर आठ मिनट पर भाजपा कार्यालय से प्रसारित किया गया था। इसे प्रसारित करवाने के लिए पैसे दिए गए थे। मेरे पास इसकी पुख्ता जानकारी है।”
अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताते हुए बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस 294 सदस्यीय विधानसभा में आराम से दो-तिहाई का आंकड़ा पार कर लेगी। उन्होंने कहा, “हम 226 सीटों का आंकड़ा पार कर लेंगे। हम शायद 230 सीटें भी पार कर लें। मुझे भारी जनादेश पर पूरा भरोसा है।”
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पूरी मतदान प्रक्रिया के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बल ”भाजपा के एजेंट” के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने दावा किया, “अमित शाह के सीधे निर्देशों पर, चुनाव प्रक्रिया में केंद्रीय बल पश्चिम बंगाल में भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं।”
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जंग के बीच रुपए पर दबाव: फिर भी RBI की रणनीति से बची 14,000 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा
मुंबई, एजेंसी। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिख रहा है। रुपए की कीमत में गिरावट आई है और डॉलर के मुकाबले यह 95 के पार पहुंच गया। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (आर.बी.आई.) के हस्तक्षेप से स्थिति और बिगड़ने से बच गई।
आर.बी.आई. की 2022 में शुरू की गई एक दीर्घकालिक रणनीति अब असर दिखाने लगी है। इसके तहत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में रुपए के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया। इसी का नतीजा है कि फरवरी 2026 में भारत ने 14,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के आयात का भुगतान रुपए में किया।

फरवरी में 1.5 अरब डॉलर की बचत
रुपए में व्यापार से फरवरी महीने में ही करीब 1.5 अरब डॉलर (करीब 14,057 करोड़ रुपए) की विदेशी मुद्रा बची। ऐसे समय में जब विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे हैं, यह राहत बेहद अहम मानी जा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 के पहले 11 महीनों में 1.39 लाख करोड़ रुपए के आयात रुपए में किए गए, जो पिछले साल के मुकाबले 45 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि, कुल आयात में इसकी हिस्सेदारी अभी भी सिर्फ 2.35 प्रतिशत ही है, यानी इस दिशा में अभी काफी काम बाकी है।
30 देशों से जुड़ा भारत का नैटवर्क
दिलचस्प बात यह है कि निर्यात का भुगतान भी तेजी से रुपए में हो रहा है। पहले जहां आयात और निर्यात के बीच बड़ा अंतर था, अब यह अंतर काफी कम हो गया है, जिससे रुपए की स्थिति मजबूत हो रही है। भारत ने जर्मनी, रूस, यू.के., सिंगापुर समेत 30 देशों के बैंकों को भारतीय बैंकों में खाते खोलने की अनुमति दी है। इसके अलावा यू.ए.ई., इंडोनेशिया और मालदीव के साथ स्थानीय मुद्रा में व्यापार के लिए समझौते भी किए गए हैं।
ट्रेड डैफिसिट पर पड़ेगा असर
भारत एक बड़ा आयातक देश है और 2025-26 में उसका व्यापार घाटा 119 अरब डॉलर रहा। ऐसे में अगर आयात रुपए में होता है तो डॉलर की मांग घटेगी और इससे चालू खाते के घाटे पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
दुनिया के कई देश अब डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे ‘डी-डॉलराइजेशन’ कहा जा रहा है। चीन इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि भारत का फोकस सिर्फ जोखिम कम करने पर है, न कि रुपए को वैश्विक रिजर्व करंसी बनाने पर।
क्या है आगे की राह
विशेषज्ञों के मुताबिक रुपए में व्यापार भारत के लिए एक मजबूत रणनीति साबित हो सकता है लेकिन इसे बड़े स्तर पर लागू करने के लिए और देशों को इस सिस्टम से जोड़ना होगा। रुपए में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अभी शुरूआती दौर में है लेकिन इससे मिलने वाले फायदे साफ दिखने लगे हैं। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह रणनीति भारत को आर्थिक स्थिरता देने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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