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दीपका

श्रीराम फाइनेंस कोरबा शाखा ने 856 मेधावी विद्यार्थियों को दी स्कॉलरशिप व प्रमाण। देखे पूरी खबर….

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संवाददाता साबीर अंसारी

कोरबा :– शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रोत्साहित करने और उनके भविष्य को संवारने के उद्देश्य से श्रीराम फाइनेंस कोरबा ब्रांच ने सेवा संकल्प मिशन के तहत एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से असाधारण अंक प्राप्त करने वाले 856 छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप और सम्मान पत्र प्रदान किए गए।

समारोह का संचालन संदीप राय और हरिहर दास ने किया। उन्होंने बच्चों को मेहनत और लगन से आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हुए कहा कि शिक्षा ही जीवन में सफलता की कुंजी है और श्रीराम फाइनेंस सदैव समाज में शिक्षा और प्रतिभा के उत्थान के लिए तत्पर रहेगा।

संस्था के अधिकारियों ने बताया कि यह पहल न सिर्फ बच्चों को आर्थिक सहयोग प्रदान करेगी, बल्कि उन्हें बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर होने का आत्मविश्वास भी देगी। उपस्थित अभिभावकों और अतिथियों ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच का संचार करते हैं।इस अवसर पर विद्यार्थियों के चेहरों पर सम्मान और खुशी की चमक साफ झलक रही थी।

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कोरबा

SECL दीपका एवं गेवरा क्षेत्र के भू-विस्थापितों के शोषण के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी, भारतीय जनता मजदूर संघ ने सौंपी 14 सूत्रीय मांगों की सूची

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कोरबा/दीपका-गेवरा। भारतीय जनता मजदूर संघ छत्तीसगढ़ प्रदेश ने एस.ई.सी.एल. (SECL) दीपका एवं गेवरा कोयला उत्खनन क्षेत्र द्वारा अधिग्रहित ग्राम हरदीबाजार के प्रभावित भू-विस्थापितों के हक न्याय और सम्मानजनक पुनर्वास को लेकर मोर्चा खोल दिया है। संघ के प्रदेश संयुक्त महामंत्री (समाजसेवी) मनीराम भारती ने एस.ई.सी.एल. प्रबंधन जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की तानाशाही पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए महाप्रबंधक दीपका/गेवरा क्षेत्र को कड़ी चेतावनी भरा ज्ञापन सौंपा है ।

संघ ने आरोप लगाया है कि एस.ई.सी.एल. प्रबंधन द्वारा भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास प्रक्रिया में भारी अपारदर्शिता और अनियमितता बरती जा रही है। ड्रोन कैमरा जी.पी.एस. सर्वे और नियम विरुद्ध कट-ऑफ डेट का बहाना बनाकर भू-विस्थापितों के मुआवजे में 40% से 100% तक की भारी कटौती की जा रही है] जो ग्रामीणों के अधिकारों पर सीधा डाका है ।

प्रमुख मांगें एवं उठाये गए ज्वलंत मुद्दे

  1. 100% सोलेशियम एवं पारदर्शी सर्वे:- मकानों की नापी एवं सर्वे में नया-पुराना का ढोंग बंद किया जाए। सर्वे के समय मौजूद सभी संरचनाओं को वैध मानते हुए, बिना किसी कटौती के 100% सोलेशियम क्षतिपूर्ति के साथ मुआवजा दिया जाए ।
  2. 4 गुना बढ़ा हुआ मुआवजा व लंबित ब्याज:- 2013 के कानून के तहत वर्तमान बाजार दर से 4 गुना मुआवजा दिया जाए, साथ ही वर्ष 2004 2010 और 2025 में अधिग्रहित भूमियों पर पिछले 15 से 22 वर्षों का 12% से 18% की दर से लंबित बैंक ब्याज का भुगतान तुरंत किया जाए ।
  3. संशोधित मुआवजा दरें (रायपुर मार्गदर्शिका 2025):-
    टीन शेड:- रू.2,800/- प्रति
    वर्गफीट बिल्डिंग:- रू.4,600/- प्रति वर्गफीट
    गोदाम: रू.6,200/- प्रति वर्गफीट
    दुकान/स्कूल भवन:- रू.7,200/- प्रति वर्गफीट
    भूमि का मुआवजा:- रू.32 लाख प्रति एकड़ की दर से 4 गुना भुगतान किया जाए ।
  4. कोयला उत्पादन का 5% लाभांश:- खदानों से जितना भी कोयला उत्पादन होगा, उसका 5 प्रतिशत प्रतिवर्ष विस्थापित परिवारों को रॉयल्टी/लाभांश के रूप में प्रदान किया जाए ।
  5. सम्मानजनक पुनर्वास एवं रोजगार:-
    0.01 डिसमिल भूमि पर म.प्र. पुनर्वास नीति 1991 के तहत स्थायी नौकरी दी जाए ।
    जो परिवार बसाहट में नहीं जाना चाहते उन्हें रू.15 लाख एकमुश्त एवं रू.3 लाख मलबा धुलाई भत्ता दिया जाए ।
    भूमिहीन विस्थापित परिवारों को ठेका कंपनियों में अनिवार्य रूप से रोजगार मिले ।
  6. गुंडागर्दी एवं भय के माहौल पर रोक:- पुलिस बल सी.आर.पी.एफ. और प्राइवेट कलिंगा कंपनी के बाउंसरों/गुंडों के दम पर ग्रामीणों को डराना-धमकाना तुरंत बंद किया जाए ।
  7. संवैधानिक संस्थाओं के पत्रों का सम्मान:- महामहिम राष्ट्रपति सचिवालय (15.06.2026), महामहिम राज्यपाल (10.04.2026) एवं बिलासपुर आयुक्त (30.04.2026) द्वारा कोरबा कलेक्टर व प्रबंधन से जवाब मांगा गया था, जिसे दबाया जा रहा है, शासन-प्रशासन इस पर अविलंब स्थिति स्पष्ट करे ।

आंदोलन व खदान बंदी की चेतावनी

भारतीय जनता मजदूर संघ ने प्रबंधन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि भू-विस्थापितों की समस्याओं का सम्मानपूर्वक निराकरण नहीं किया गया, तो संघ प्रभावित ग्रामीणों के साथ मिलकर एस.ई.सी.एल. दीपका एवं गेवरा खदानों का चक्काजाम कर अनिश्चितकालीन खदान बंदी आंदोलन करेगा। इस दौरान होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति या आर्थिक नुकसान की सम्पूर्ण जिम्मेदारी एस.ई.सी.एल. प्रबंधन दीपका/गेवरा क्षेत्र की होगी।

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दीपका

रायपुर राजकुमार कॉलेज से हटाई गई शिक्षिका होगी बहाल:हाईकोर्ट बोला- 18 साल बाद नौकरी से निकालना अवैधानिक, ब्याज सहित पूरी सैलरी देने का आदेश

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राजकुमार कॉलेज के शिक्षक को 18 साल बाद नौकरी से निकालने के फैसले को अवैध बताया है।

कोर्ट ने सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराते हुए शिक्षक को दोबारा नौकरी पर रखने और बकाया वेतन 9% ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है। साथ ही हाईकोर्ट ने रायपुर के राजकुमार कॉलेज प्रबंधन की अपील खारिज कर दी।

हाईकोर्ट ने रायपुर के राजकुमार कॉलेज प्रबंधन की अपील खारिज कर दी है।

हाईकोर्ट ने रायपुर के राजकुमार कॉलेज प्रबंधन की अपील खारिज कर दी है।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, रायपुर के राजकुमार कॉलेज में सविता मोहंती को 21 जून 1990 को ओडिया भाषा पढ़ाने के लिए सहायक शिक्षिका के पद पर नियुक्त किया गया था। 1994 में उनकी नौकरी पक्की कर दी गई और उन्हें हर साल वेतन बढ़ोतरी भी मिलती रही।

करीब 18 साल तक नौकरी करने के बाद 19 जून 2008 को कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें अचानक नौकरी से निकाल दिया। प्रबंधन ने कहा कि स्कूल में ओडिया पढ़ने वाले छात्रों की संख्या कम हो गई है। साथ ही सविता के पास बीएड की डिग्री नहीं है, इसलिए उन्हें दूसरे विषय की शिक्षिका के तौर पर भी नहीं रखा जा सकता।

शिक्षिका ने फैसले के खिलाफ अपील की

प्रबंधन के नौकरी से निकालने के फैसले के खिलाफ शिक्षिका ने अपील की। 8 मई 2012 को संबंधित अधिकारी ने शिक्षिका के पक्ष में फैसला सुनाया। उन्हें दोबारा नौकरी पर रखने और पिछला पूरा वेतन 9% चक्रवृद्धि ब्याज के साथ देने का आदेश दिया गया।

सिंगल बेंच ने खारिज की थी याचिका, डिवीजन बेंच में दी चुनौती

अपीलीय अधिकारी के इस आदेश के खिलाफ कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। सिंगल बेंच ने 17 मार्च 2026 को प्रबंधन की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद प्रबंधन ने डिवीजन बेंच में अपील की।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने कहा कि 1990 के नियुक्ति पत्र में बीएड की डिग्री जरूरी नहीं थी। 1994 में शिक्षिका की नौकरी पक्की करते समय भी प्रबंधन ने बीएड को लेकर कोई आपत्ति नहीं की थी।

कोर्ट ने कहा कि शिक्षिका को नौकरी से निकालते समय भी मुख्य वजह छात्रों की कम संख्या बताई गई थी। ऐसे में 18 साल बाद बीएड की डिग्री नहीं होने को आधार बनाकर नौकरी से निकालना सही नहीं है।

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कोरबा

एसीबी समूह की कोलवाशरियों एवं पावर प्लांटों की जांच की मांग को लेकर 6 घंटे तक धरना प्रदर्शन

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राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के नाम तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन:सीबीआई, एसआईटी जांच की मांग

11 सितंबर को SECL मुख्यालय बिलासपुर का महाघेराव करने और 2 अक्टूबर को इंसानियत सभा आयोजित करने की चेतावनी

कोरबा/दीपका। भारतीय जनाधिकार पार्टी छत्तीसगढ़ द्वारा ACB समूह की कोयला वाशरियों संबद्ध ताप विद्युत परियोजनाओं कोयला परिवहन एवं अन्य औद्योगिक गतिविधियों में वर्ष 1999 से वर्तमान तक हुए गंभीर तकनीकी पर्यावरणीय वित्तीय एवं नियामकीय अनियमतताओं की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर आज दीपका में एक दिवसीय विशाल एवं शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया गया ।

सुबह 11:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक बारिश के बावजूद सैकड़ों कार्यकर्ताओं और प्रभावित ग्रामीणों ने छाता लेकर 6 घंटे तक अनुशासित आंदोलन किया प्रदर्शन के उपरांत कार्यपालन दंडाधिकारी एवं तहसीलदार दीपका अभिजीत राज भानु के माध्यम से राष्ट्रपति प्रधानमंत्री केंद्रीय गृहमंत्री केंद्रीय कैबिनेट सचिव केंद्रीय कोयला मंत्री केंद्रीय ऊर्जामंत्री तथा केंद्र व राज्य सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा गया ।

ज्ञापन में की गई मुख्य मांगें एवं जांच के बिंदु

1999 से CBI एवं SIT जांच

मामला केवल किसी एक इकाई का नहीं बल्कि पूरी कोयला-ईंधन-पर्यावरण व्यवस्था की जांच का है पार्टी ने मांग की है कि CBI के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) और राज्य सरकार की बहु-विभागीय टीम द्वारा दीपका गेवरा कुसमुंडा चकाबुड़ा रतीजा रेंकी बिंझरी एवं अन्य संबद्ध कोल वाशरियों व पावर प्लांट्स की व्यापक जांच कराई जाए ।

1 करोड़ टन से अधिक कोयला परिवहन की जांच

खदान से वाशरी सड़क/रेलवे साइडिंग और ताप विद्युत संयंत्रों तक परिवहन किए गए एक-एक टन कच्चे एवं रिजेक्ट कोयले का स्वतंत्र वैज्ञानिक मिलान किया जाए ।

रिजेक्ट कोयले के नाम पर विचलन की आशंका

रिजेक्ट कोयले की आड़ में मूल्यवान और व्यावसायिक गुणवत्ता वाले कोयले का अन्यत्र विचलन या हेरफेर तो नहीं हुआ इसकी स्वतंत्र फोरेंसिक जांच हो ।

डिजिटल साक्ष्य और तौल कांटा की फोरेंसिक जांच

फर्जी वाहन प्रविष्टि काल्पनिक यात्रा और गलत तौल की संभावना को खत्म करने के लिए तौल कांटा सर्वर जीपीएस (GPS) फास्टैग आरएफआईडी (RFID) एएनपीआर और सीसीटीवी रिकॉर्ड्स को तत्काल सील कर डिजिटल फोरेंसिक परीक्षण कराया जाए ।

पर्यावरणीय उल्लंघन व स्वास्थ्य सर्वेक्षण

स्वीकृत क्षमता CTO/CTE, जल दोहन नदी-नालों के प्रदूषण और प्रभावित 10 किलोमीटर के दायरे में वायु जल कृषि एवं जनस्वास्थ्य पर पड़े प्रभावों का स्वतंत्र वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाए ।

डिजेल-बायोडीजल व टैक्स लाभ की पड़ताल

वर्ष 2015 से प्रयुक्त औद्योगिक डीजल/बायोडीजल की खरीद-बिक्री ई-वे बिल और कंपनियों द्वारा ली गई टैक्स छूट व सरकारी सुविधाओं का वर्षवार मिलान हो ।

JSW Energy-MCCPL रू.1,410 करोड़ डील की फोरेंसिक जांच

ACB समूह से संबंधित कंपनी MCCPL के JSW Energy द्वारा किए गए लगभग रू.1,410 करोड़ के अधिग्रहण परिसंपत्तियों कोयला लिंकेज और वित्तीय दायित्वों के Due Diligence की उच्चस्तरीय फोरेंसिक जांच कराकर जवाबदेही तय की जाए ।

नियामक संस्थाओं की समीक्षा

SECL पर्यावरण खनन राजस्व वन और श्रम विभागों की निगरानी प्रक्रिया की समीक्षा की जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय हो ।

पार्टी नेतृत्व का वक्तव्य एवं आगामी रणनीति

धरना प्रदर्शन के दौरान भारतीय जनाधिकार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक दुबे ने सख्त लहजे में कहा यह राष्ट्रीय स्तर का महाघोटाला है यदि हमारी न्यायोचित मांगों और सीबीआई जांच की मांग को केंद्र व राज्य सरकार द्वारा अनदेखा किया गया तो हम चुप नहीं बैठेंगे जनता के स्वास्थ्य पर्यावरण और राष्ट्रीय संपदा की लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी ।

आगामी आंदोलन की रूपरेखा

11 सितंबर 2026:- SECL मुख्यालय बिलासपुर (CMD कार्यालय) का महाघेराव एवं विशाल धरना-प्रदर्शन ।
2 अक्टूबर 2026:- दीपका-गेवरा क्षेत्र में इंसानियत सभा का आयोजन ।

प्रमुख उपस्थिति

आंदोलन में भारतीय जनाधिकार पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी कमल किशोर साव, कृष्ण टंडन, हेमंत पैगवार, संजय रत्नाकर, संतोष अनंत, अमर खांडे, बजरंग रत्नाकर, शिव चौरसिया, जय सेवायक, शैलेन्द्र, गोपाल, राकेश कुर्रे, करण लहरे, देव प्रसाद, प्रमोद यादव, राजेंद्र, अनिल कश्यप, तरुण कश्यप, किशन, शुक्रिता कुर्रे, लाल चौहान, लकी दिवाकर, आशीष तिवारी, नीरज, रामचंद्र कवर, गणेश कश्यप, नकुल सूर्यवंशी, यशवंत सूर्यवंशी, शिवचरण, योगेश सहित सैकड़ों कार्यकर्ता एवं प्रभावित गांवों के ग्रामीण उपस्थित रहे ।

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