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कोरबा

वेदांता बालको के योगदान से छत्तीसगढ़ में ग्रामीण आय के स्रोतों में हो रही बढ़ोत्तरी

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बालकोनगर। छत्तीसगढ़ को ‘भारत का धान का कटोरा’ कहा जाता है। धान यहां की मुख्य फसल है। टाटा-कॉर्नेल इंस्टीट्यूट के रिसर्च से पता चलता है कि खरीफ के मौसम में लगभग 85% कृषि भूमि का उपयोग धान उगाने के लिए किया जाता है। अधिकांश किसान बारिश पर निर्भर रहते हैं। यहां सिंचाई की सुविधाएँ बहुत कम हैं इस वजह से ग्रामीण आय केवल एक ही फसल चक्र पर निर्भर करती है। इससे किसान मौसम में होने वाले बदलावों, बढ़ती लागत और अन्य फसलें उगाने के सीमित विकल्पों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं। कई छोटे और सीमांत किसानों के लिए पूरे साल लगातार आय सुनिश्चित करने के लिए केवल खेती करना ही पर्याप्त नहीं है। इसलिए ध्यान केवल फसल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि खेती के साथ-साथ आय के कई अन्य स्रोत निर्मित करने पर है।

यह वह बदलाव है जो वेदांता बालको के कामकाज वाले क्षेत्रों में हो रहा है। कोरबा, कवर्धा, रायगढ़, रायपुर और सरगुजा ज़िले के 123 गाँवों में बालको के योगदान से अब तक 2 लाख से ज़्यादा लोगों को फ़ायदा पहुँचा है। इसमें जो बात सबसे ज़्यादा ध्यान खींचती है, वह सिर्फ़ इन प्रयासों का स्तर ही नहीं, बल्कि उनके काम करने का तरीका भी है। यहां खेती-बाड़ी, कौशल विकास, महिलाओं द्वारा चलाए जाने वाले उद्यम और सामाजिक बुनियादी ढाँचा आदि ये सभी मिलकर ग्रामीण इलाकों में लोगों की आजीविका को और ज़्यादा स्थिर बनाने का काम कर रहे हैं।

पारिवारिक आय की स्थिरता के वाहक के रूप में महिलाओं की भूमिका

इस बदलाव के केंद्र में वे महिलाएँ हैं जो अब अपने परिवारों में सहायक कमाने वाली की भूमिका से मुख्य कमाने वाली की भूमिका की ओर बढ़ रही हैं। ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के तहत 561 से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाया गया है, जिनमें 6,000 से ज्यादा महिलाएँ शामिल हैं। इसके कारण इस क्षेत्र में समुदाय द्वारा संचालित सबसे मज़बूत स्वयं सहायता समूहों के नेटवर्कों का निर्माण हुआ है।

‘पंचसूत्र’ सिद्धांतों पर आधारित और वित्तीय साक्षरता, सही बचत और ऋण प्रणालियों जैसे प्रशिक्षणों से समर्थित ये स्वयं सहायता समूह साधारण बचत समूहों से विकसित होकर आजीविका के सशक्त नेटवर्क बन गए हैं। आज 600 से ज्यादा महिलाएँ छोटे व्यवसायों के माध्यम से कमाई कर रही हैं और छत्तीसगढ़ के 45 से ज्यादा गाँवों में 2,200 से ज्यादा महिलाएँ नैनो-बिजनेस, स्वयं सहायता समूह ऋण और आजीविका के अन्य कार्यों जैसी आय-सृजन गतिविधियों में शामिल हैं। ये सभी मिलकर घरेलू आय को ज्यादा स्थिर बनाने, समुदायों को ज्यादा सशक्त बनाने तथा स्थानीय आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण वाहक बनने में सहायता कर रही हैं।

यह बदलाव क्लीनला जैसे छोटे व्यवसायों में देखा जा सकता है जहाँ आठ महिलाओं का एक समूह घर की सफ़ाई के उत्पाद बनाता है। सही ट्रेनिंग, उत्पादन में मदद और अपने उत्पादों को बेचने में सहायता मिलने से अब हर महिला हर महीने लगभग रू.6,000 कमाती है। इससे पता चलता है कि मिलकर काम करने से आय का एक स्थिर ज़रिया बनाने में कैसे मदद मिल सकती है।

व्यक्तिगत स्तर पर भी इसका असर साफ़ दिखता है। कोरबा ज़िले की विजय लक्ष्मी सारथी ने निजी और आर्थिक मुश्किलों का सामना करने के बाद अपना खुद का बिज़नेस शुरू किया। ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के तहत मिली ट्रेनिंग और मदद से उन्होंने घर से ही खाने का बिज़नेस शुरू किया और अब हर महीने रू.12,000 से रू.15,000 कमाती हैं। उनकी कहानी एक बड़े बदलाव को दिखाती है जहाँ महिलाएँ न सिर्फ़ परिवार की आमदनी में हाथ बँटा रही हैं बल्कि खुद भी कमाने वाली बन रही हैं और अपने परिवारों और समुदायों को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने में मदद कर रही हैं।

कृषि के अलावा आय के दूसरे स्रोतों का सृजन

हालांकि खेती अभी भी बुनियादी आय का आधार बनी हुई है लेकिन आय के स्रोतों में विविधता लाने का सबसे बड़ा बदलाव खेती से बाहर के क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। वर्ष 2010 में शुरू किए गए वेदांता स्किल स्कूल के ज़रिए तीन केंद्रों में अब तक कुल 15,000 से ज़्यादा युवाओं को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इनमें से हर साल 1,000 से ज़्यादा युवाओं को इंडस्ट्री की मांग के हिसाब से अलग-अलग ट्रेड में कुशल बनाया जाता है। यह प्रोग्राम ट्रेनिंग को सीधे रोज़गार से जोड़ता है और 11 राज्यों में फैली 70 से ज़्यादा संस्थाओं में प्लेसमेंट के अवसर उपलब्ध कराता है जहाँ सालाना सैलरी 3 लाख रुपये तक होती है।

कई परिवारों के लिए यह एक ढांचागत बदलाव को दर्शाता है जहाँ आय अब केवल ज़मीन या मौसमी चक्रों पर निर्भर नहीं रहती। इसके बजाय इसे औपचारिक रोज़गार से होने वाली स्थिर और साल भर की कमाई का सहारा मिलता है।

कोरबा के पोड़ीबहार के रहने वाले आर्यन दास महंत के लिए यह बदलाव उनकी ज़िंदगी बदलने वाला साबित हुआ है। रोज़ाना मज़दूरी करने वाले परिवार से आने के बाद उन्होंने वेदांता स्किल स्कूल में ‘फ़ूड एंड बेवरेज सर्विस स्टीवर्ड’ कोर्स में दाखिला लिया। बातचीत करने और मेहमानों को संभालने के हुनर सीखने के बाद उन्हें हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में नौकरी मिल गई। अब वे ‘होटल श्री महाराजा’ में ‘ट्रेनी कैप्टन’ के तौर पर काम कर रहे हैं और सालाना लगभग रू.2 लाख कमा रहे हैं। उनकी कहानी यह दिखाती है कि स्किल ट्रेनिंग न सिर्फ़ लोगों को नौकरी दिलाने में मदद करती है बल्कि उनके करियर को लंबे समय तक आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाती है।

इस प्रगति को उन शिक्षा कार्यक्रमों से भी समर्थन मिल रहा है जो ज़्यादा अवसर पैदा करते हैं। कोरबा और कवर्धा में दो कोचिंग सेंटर हर साल 300 से ज़्यादा छात्रों को सरकारी परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षित करते हैं और अब तक 84 छात्रों का चयन भी हो चुका है। इसके साथ ही वेदांता लिमिटेड द्वारा अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की साझेदारी में शुरू किए गए 110 ‘नंद घर’ प्री-स्कूल शिक्षा को बेहतर बनाने में मदद कर रहे हैं। ये केंद्र बाला पेंटिंग्स और डिजिटल उपकरणों जैसे इंटरैक्टिव सीखने के तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। ये केंद्र 7,000 से ज़्यादा माताओं और बच्चों तक पहुँच रहे हैं, जिससे शुरुआती शिक्षा और पोषण में सुधार हो रहा है। वहीं स्कूल सहायता कार्यक्रमों ने अब तक 4,000 से ज़्यादा छात्रों की मदद की है।

ये प्रयास शिक्षा से रोज़गार तक का एक स्पष्ट जरिया बनाते हैं जिससे लोगों को एक मज़बूत व्यवस्था के सहयोग से समय के साथ अलग-अलग तरीकों से कमाई करने में मदद मिलती है।

आजीविका को सहारा देने वाले इकोसिस्टम की मज़बूती

आय में स्थिर रूप से वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए लोगों को समय के साथ मज़बूत प्रणालियों के माध्यम से सहयोग देना महत्वपूर्ण है। वेदांता बालको इसी दृष्टिकोण का पालन करता है। यह न केवल रोज़गार उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित करता है बल्कि उन परिस्थितियों को भी बेहतर बनाने पर ज़ोर देता है जो लोगों को अपने रोज़गार को बनाए रखने में मदद करती हैं। बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बीमारियों की जल्दी पहचान और नियमित रूप से लोगों तक पहुँचने के प्रयास लोगों को अचानक उत्पन्न होने वाली वित्तीय समस्याओं से बचने में मदद करते हैं। इसके साथ ही बेहतर स्वच्छता और बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता लोगों के लिए काम करना आसान बनाती है और उनकी कार्य-क्षमता में भी सुधार लाती है।

सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और स्थानीय सुविधाओं जैसे सामुदायिक बुनियादी ढांचे में हो रहे सुधारों से लोगों के लिए यात्रा करना और बाज़ारों, प्रशिक्षण तथा रोज़गार से जुड़ना आसान हो रहा है। ये कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं हैं बल्कि ऐसे महत्वपूर्ण फैक्टर हैं जो लोगों को अधिक स्थिर और भरोसेमंद आजीविका बनाने में मदद करते हैं।

इस इकोसिस्टम में शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण अवसरों को आय से जोड़ने में मदद करते हैं। वेदांता बालको प्रारंभिक शिक्षा, कोचिंग और व्यावसायिक प्रशिक्षण को एक साथ लाकर रोज़गार के स्पष्ट मार्ग तैयार करता है। कोचिंग कार्यक्रम इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दो केंद्रों के माध्यम से 300 से ज्यादा छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और 206 अन्य छात्रों को सहायता प्रदान की जा रही है जिससे ज्यादा लोगों को सरकारी नौकरियों को पाने में मदद मिल रही है।

निर्भरता से विविधता तक

यह बदलाव अब इन क्षेत्रों में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है। ग्रामीण परिवार अब केवल आय के एक ही स्रोत पर निर्भर नहीं हैं। वे खेती के साथ अन्य काम और व्यवसाय भी कर रहे हैं।

वेदांता बालको इसी बदलते दृष्टिकोण का पालन करता है। कौशल प्रशिक्षण, महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसाय और शिक्षा कार्यक्रम मिलकर काम करते हैं ताकि ज्यादा स्थिर और नियमित आय के अवसर पैदा किए जा सकें। इसका उद्देश्य खेती की जगह लेना नहीं है बल्कि खेती के साथ आय के और अतिरिक्त स्रोत तैयार करना है। इससे ज्यादा संतुलित ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनाने में मदद मिलती है जहाँ आय ज्यादा स्थिर होती है, अचानक आने वाली समस्याओं का बेहतर ढंग से सामना कर पाते हैं, और वे ज्यादा आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य की योजना बना सकते हैं।

यह बदलाव जमीनी स्तर पर भी दिखाई देता है। यह बदलाव सिर्फ़ ज़्यादा आमदनी का नहीं बल्कि ऐसी आजीविका पैदा करने की बात है जो ज़्यादा सुरक्षित, लचीली और भविष्य के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो।

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कोरबा

रंजना में मातृत्व और सेवाभाव का सम्मान, 9 माताओं को मिला ‘माता यशोदा सम्मान’

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विश्व स्तनपान दिवस पर ‘मातृ दुग्ध दान, ममता सर्वोच्च सम्मान’ का दिया संदेश

कोरबा/कटघोरा। विश्व स्तनपान दिवस के अवसर पर विकासखंड कटघोरा के ग्राम आदर्श पंचायत रंजना में स्वस्थ्य मितानिन कार्यक्रम के तत्वावधान में ‘माता यशोदा सम्मान समारोह—मातृ दुग्ध दान, ममता सर्वोच्च सम्मान’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मातृ दुग्ध के महत्व, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण एवं सुरक्षित मातृत्व के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य शिशु को जन्म के बाद छह माह तक केवल स्तनपान कराने के लिए माताओं को प्रेरित करना, गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं को स्वास्थ्य एवं पोषण के प्रति जागरूक करना तथा समाज और स्वास्थ्य के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को सम्मानित करना रहा।

जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह अपरिहार्य कारणों से कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला तथा सभी माताओं एवं कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं दीं।

मां का दूध शिशु के स्वस्थ भविष्य की पहली नींव : रुक्मणी यादव

ब्लॉक समन्वयक श्रीमती रुक्मणी यादव ने माता यशोदा के वात्सल्य का उदाहरण देते हुए कहा कि मां और बच्चे के बीच प्रेम, ममता एवं भावनात्मक जुड़ाव स्वस्थ समाज की मजबूत नींव है। मातृत्व त्याग, ममता और जिम्मेदारी का प्रतीक है तथा माताओं का सम्मान वास्तव में मातृत्व का सम्मान है।

छह माह तक केवल स्तनपान जरूरी : वंदना गुप्ता

जिला समन्वयक मितानिन सुश्री वंदना गुप्ता ने कहा कि शिशु को जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध दिया जाना चाहिए। इसके बाद पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखना बच्चे के बेहतर विकास के लिए लाभकारी है। उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मितानिनों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

स्तनपान को लेकर भ्रांतियां दूर करने पंचायत स्तर पर हो जागरूकता : राजेश यादव

भाजपा झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक राजेश यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्तनपान को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने के लिए पंचायत स्तर पर निरंतर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। मातृ दुग्ध केवल शिशु का पोषण नहीं, बल्कि उसके स्वस्थ भविष्य की पहली नींव है। स्वस्थ मां और स्वस्थ बच्चा ही स्वस्थ परिवार और मजबूत समाज का आधार है।

मां का दूध प्रकृति का सर्वोत्तम आहार : रवि रजक

जिला पंचायत प्रतिनिधि रवि रजक ने कहा कि मां का दूध बच्चे के लिए प्रकृति का सर्वोत्तम आहार है। यह शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रत्येक मां को स्तनपान के महत्व की सही जानकारी और आवश्यक सहयोग मिलना जरूरी है।

माताओं को नियमित मार्गदर्शन लेने की अपील : ममता मरकाम

सरपंच श्रीमती ममता मरकाम ने माताओं से मितानिन एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से नियमित मार्गदर्शन लेने तथा स्तनपान को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रांति से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मां और स्वस्थ बच्चा ही स्वस्थ पंचायत की आधारशिला हैं।

9 माताओं को ‘माता यशोदा सम्मान’

समारोह में मातृत्व, ममता एवं शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के प्रति समर्पण के लिए 9 हितग्राही माताओं को ‘माता यशोदा सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मानित माताओं को प्रमाण पत्र, श्रीफल, फूलमाला एवं सम्मान सामग्री भेंट कर उनके मातृत्व और ममता को नमन किया गया।

सामाजिक एवं स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ‘माता शबरी सम्मान’

समाज सेवा, विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली अन्य माताओं एवं महिलाओं को ‘माता शबरी सम्मान’ से सम्मानित किया गया। उनके सेवाभाव, सामाजिक योगदान और जनहित में किए जा रहे कार्यों के लिए प्रमाण पत्र, श्रीफल एवं फूलमाला भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस प्रकार ‘माता यशोदा सम्मान’ मातृत्व, वात्सल्य एवं शिशु के प्रति समर्पण को समर्पित रहा, जबकि ‘माता शबरी सम्मान’ समाज, स्वास्थ्य एवं विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के सेवाभाव और योगदान के सम्मान का प्रतीक बना।

सम्मानित महिलाओं में दुर्गा बाई, सुखवारी, सुकदई, गोहनदई, सावित्री बाई, रंगीना, हरनबाई, उमा बाई, सरकहा, रुमालिया, रमशिला, श्यामबाई, सावित्री, किशोरी बाई, जागृति, केशो बाई, कल्याणी जगत, धुराजा यादव, अनीता केंवट, पदमनी, जमकुमारी, शिवकुमारी, उमा, रामकुंवर एवं आशा सहित अन्य महिलाएं शामिल रहीं।

मितानिनों के सेवाभाव का भी सम्मान

ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं की देखभाल, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण एवं स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने वाली मितानिन बहनों को भी सम्मानित किया गया। उनके जमीनी स्तर पर किए जा रहे कार्यों और सेवाभाव के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने मातृ दुग्ध के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने, शिशु को जन्म से छह माह तक केवल स्तनपान कराने तथा स्तनपान को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर श्रीमती रुक्मणी यादव, सुश्री वंदना गुप्ता, राजेश यादव, रवि रजक एवं श्रीमती ममता मरकाम सहित बड़ी संख्या में माताएं, गर्भवती एवं शिशुवती महिलाएं, मितानिनें एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

‘मातृ दुग्ध दान, ममता सर्वोच्च सम्मान’ के संदेश के साथ आयोजित यह समारोह मातृत्व, महिला सम्मान तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का प्रेरणादायक प्रयास रहा।

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SECL CVO Shri Himanshu Jain Addresses Interactive Session on Public Procurement and Vigilance at DFCCIL, Kolkata

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Session facilitates exchange of best practices and mutual learning between SECL and DFCCIL

Bilaspur/korba. Shri Himanshu Jain, Chief Vigilance Officer (CVO), SECL, addressed a training-cum-interactive session on “Public Procurement” and “Vigilance in the Current Context” organised by Dedicated Freight Corridor Corporation of India Limited (DFCCIL), Kolkata, as part of the Three-Month Campaign on Preventive Vigilance.

The session focused on strengthening understanding of public procurement processes, identifying vigilance-related risks at different stages, and sharing organisational experiences and best practices. It also provided an opportunity for officers of SECL and DFCCIL to learn from each other’s experiences and approaches in procurement and preventive vigilance.

During the session, Shri Jain discussed the importance of transparency, fairness, accountability and probity in public procurement. Drawing upon practical examples and case studies, he highlighted how vigilance principles can be integrated into procurement processes to facilitate informed and objective decision-making.

The discussion covered key stages of the procurement cycle, including need assessment, preparation of Detailed Project Reports (DPRs), tendering, bid evaluation, award of contracts, execution and payment. Potential risks at different stages and measures for their mitigation were also discussed.

Emphasising the role of preventive vigilance, Shri Jain observed that its purpose extends beyond identifying or preventing irregularities. A well-designed preventive vigilance framework can help organisations improve processes, reduce risks and support better governance and decision-making.

A key feature of the programme was the interactive exchange between participants from DFCCIL and SECL. Officers discussed practical issues encountered in procurement, approaches adopted by their respective organisations and relevant best practices. The interaction enabled both organisations to benefit from each other’s experience and explore ways to further strengthen procurement systems.

Officials and employees of DFCCIL participated in the programme, while officers from various tender-related departments of SECL, including young executives from SECL Headquarters and MDI, Bilaspur, joined through video conferencing.

The programme formed part of the ongoing efforts towards capacity building and preventive vigilance, with particular emphasis on sharing best practices, strengthening procurement processes and promoting transparency and accountability across organisations.

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इंडियन पब्लिक स्कूल पाली में हर्षोल्लास से मनाया गया श्री कृष्ण जन्माष्टमी समारोह

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कोरबा/पाली। इंडियन पब्लिक स्कूल, पाली में आज 03 सितंबर 2026 को श्री कृष्ण जन्माष्टमी समारोह हर्षोल्लास एवं भक्तिमय वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन डायरेक्टर राकेश मिश्रा के मार्गदर्शन में किया गया।

समारोह में विद्यार्थियों के लिए कक्षावार विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया। नर्सरी से क्लास टू तक के विद्यार्थियों के लिए फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता एवं रंग भरने की गतिविधि आयोजित की गई, जिसमें नन्हे-मुन्ने विद्यार्थी श्री कृष्ण एवं राधा के आकर्षक वेश में नजर आए।

विद्यालय के एडमिनिस्ट्रेटर कुणाल महापात्र ने विद्यार्थियों की रचनात्मक गतिविधियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में अपनी संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति रुचि और संस्कार विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कक्षा- थर्ड से फिफ्थ के विद्यार्थियों के लिए पोस्टर बनाने की प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता एवं कला के माध्यम से श्री कृष्ण के जीवन और जन्माष्टमी पर्व को आकर्षक पोस्टरों में प्रस्तुत किया।

वहीं कक्षा- सिक्स से टेंथ की छात्राओं के लिए मटकी सजाने की प्रतियोगिता तथा छात्रों के लिए मटकी फोड़ने की प्रतियोगिता आयोजित की गई। मटकी फोड़ने की प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ भाग लिया, जिससे विद्यालय परिसर में उत्सव का माहौल बन गया।

विद्यालय के प्रिंसिपल संतोष देवनाथ ने विद्यार्थियों को श्री कृष्ण के जीवन से प्रेम, सद्भाव, सत्य, अनुशासन एवं कर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि भारतीय त्योहार हमारी समृद्ध संस्कृति और संस्कारों से विद्यार्थियों को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार ने सभी विद्यार्थियों की सहभागिता एवं उत्साह की सराहना की। श्री कृष्ण जन्माष्टमी का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए आनंद, रचनात्मकता और सांस्कृतिक सीख से भरपूर रहा।

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