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स्टार्टअप कंपनियों की बजट में कर छूट समयसीमा बढ़ाने, पूंजीगत लाभ कर में राहत की मांग

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मुंबई, एजेंसी। भारतीय स्टार्टअप कंपनियों ने आगामी बजट में कर छूट समयसीमा बढ़ाने और पूंजीगत लाभ कर में राहत की मांग की है। उनका कहना है कि इससे निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और कर बचत से मिली राशि का उपयोग कारोबार विस्तार एवं प्रौद्योगिकी निवेश में किया जा सकेगा। उद्योग जगत का कहना है कि वित्त वर्ष 2025-26 से सभी निवेशकों के लिए ‘एंजेल टैक्स’ को पूरी तरह खत्म किए जाने की घोषणा से निवेश माहौल में सुधार हुआ है। हालांकि अब स्टार्टअप और निवेशकों को खासकर विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए पूंजीगत लाभ कर में भी राहत की जरूरत है। 

एंजेल टैक्स वह कर है, जो स्टार्टअप को उसके शेयर के उचित बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर निवेश मिलने की स्थिति में उस अतिरिक्त राशि पर लगाया जाता है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप ‘एआसोक’ के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) प्रवीण सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत किए गए सुधारों ने मजबूत आधार तैयार किया है और आगामी बजट इन सुधारों को जमीनी स्तर पर लागू करने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि एंजेल टैक्स हटने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और अब विदेशी निवेशकों के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) को तर्कसंगत बनाने की जरूरत है, जिस पर वर्तमान में करीब 12.5 प्रतिशत कर लगता है। सिंह ने कहा कि इससे शिक्षा जैसे उच्च प्रभाव वाले क्षेत्रों में वैश्विक निवेश को बढ़ावा मिलेगा। 

स्टार्टअप में निवेश से होने वाले लाभ पर पूंजीगत लाभ कर लगता है, जो अल्पकालिक और दीर्घकालिक होता है। यदि शेयर 24 महीने से कम समय में बेचे जाते हैं, तो अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कर (एसटीसीजी) लगता है, जबकि 24 महीने से अधिक समय पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर लागू होता है। इसके अलावा, उद्योग जगत आयकर कानून की धारा 80-आईएसी के तहत डीपीआईआईटी से मान्यता-प्राप्त स्टार्टअप को होने वाले लाभ पर 100 प्रतिशत आयकर छूट की समय-सीमा को बढ़ाने की भी मांग कर रहा है। यह छूट कंपनी के शुरुआती 10 वर्षों में किसी भी लगातार तीन वर्षों के लिए उपलब्ध होती है लेकिन वर्तमान में इसकी पात्रता एक अप्रैल 2030 तक सीमित है। स्टार्टअप चाहते हैं कि इसे 2032 या 2035 तक बढ़ाया जाए। 

निर्माण क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप ‘पावरप्ले’ के सह-संस्थापक एवं सीईओ ईश दीक्षित ने कहा कि एंजेल टैक्स का हटना शुरुआती चरण के स्टार्टअप के लिए अहम कदम है, लेकिन विदेशी निवेश से जुड़े पूंजीगत लाभ कर को लेकर अभी भी स्पष्टता और राहत जरूरी है। सेवा क्षेत्र के स्टार्टअप ‘यूक्लीन’ के संस्थापक एवं सीईओ अरुणाभ सिन्हा ने कहा कि सेवा आधारित और परिसंपत्ति-प्रधान स्टार्टअप फर्मों के लिए किफायती ऋण तक बेहतर पहुंच जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि ब्याज सब्सिडी योजनाएं या प्राथमिकता क्षेत्र ऋण का दर्जा विस्तार में मदद कर सकता है। स्टार्टअप और निजी कंपनियों के आंकड़े जुटाने वाली कंपनी ‘ट्रैक्सन’ के मुताबिक, भारतीय प्रौद्योगिकी स्टार्टअप ने 2025 में 10.5 अरब डॉलर का वित्त जुटाया, जो 2024 के 12.7 अरब डॉलर से 17 प्रतिशत और 2023 के 11 अरब डॉलर से चार प्रतिशत कम है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। 

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Citroen Cars Discount : कार खरीदने का शानदार मौका! Citroen ने इन गाड़ियों पर किया डिस्काउंट का ऐलान

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मुंबई, एजेंसी। Citroen ने अपने ग्राहकों के लिए चुनिंगा गाड़ियों पर डिस्काउंट का ऐलान किया है। ये डिस्काउंट मॉडल के आधार पर दिए जाएंगे और ग्राहक इसका फायदा 30 जून तक उठा सकते हैं। डिटेल में जानते हैं इन डिस्काउंट के बारे में-

Citroen Basalt 

Basalt कूप-SUV पर इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट मिल रहा है। इसमें 82hp, 115Nm वाला 1.2-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड (NA) पेट्रोल इंजन या 110hp, 190Nm वाला 1.2-लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन मिलता है। NA इंजन के साथ 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन मिलता है, जबकि टर्बो-पेट्रोल इंजन 6-स्पीड मैनुअल या 6-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ आता है। ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ, टर्बो-पेट्रोल इंजन 205Nm का ज़्यादा टॉर्क देता है। मार्केट में इसकी कीमत 8.55 लाख रुपये से 13.75 लाख रुपये की के बीच है।

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Citroen Aircross 

Citroen Aircross पर कंपनी इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट दे रही है। अपने सेगमेंट में यह एकमात्र 7 सीटर एसयूवी है। इसकी कीमत 8.89 लाख रुपये से 13.99 लाख रुपये तक जाती है।

 Citroen C3 

Citroen C3 की खरीदी करने पर आप 1.1 लाख रुपए तक की बचत कर सकते हैं। इसकी कीमत 4.99 लाख रुपये से 9.60 लाख रुपये के बीच की है।

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Tata के iPhone प्लांट पर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का आरोप, बंद हो सकती है फैक्ट्री

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मुंबई, एजेंसी। भारत में iPhone निर्माण से जुड़े एक प्रमुख संयंत्र को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। तमिलनाडु के होसुर स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के प्लांट पर आसपास की कृषि भूमि और भूजल को प्रदूषित करने के आरोप लगे हैं। मामले की जांच के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी से जवाब मांगा है और संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर फैक्ट्री बंद करने तक की चेतावनी दी है। 

यह प्लांट Apple के iPhone के लिए बैक पैनल और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण करता है। पिछले कई महीनों से प्लांट के आसपास के किसानों ने शिकायत की थी कि फैक्ट्री से निकलने वाला अपशिष्ट जल के कारण उनकी खेती और जल स्रोत को प्रभावित कर रहा है। किसानों की शिकायत के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच शुरू की और अब मामला गंभीर रूप ले चुका है।

जांच के दौरान बोर्ड ने नोटिस में कहा कि फैक्ट्री परिसर के एक तालाब से निकला पानी आसपास के कृषि क्षेत्रों तक पहुंचा, जिससे भूजल प्रदूषण की आशंका पैदा हुई। बोर्ड ने यह भी आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 में जारी निर्देशों के बावजूद कंपनी ने जरूरी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए। इसी वजह से मई में जारी नोटिस में पूछा गया कि आखिर क्यों न यूनिट की बिजली आपूर्ति काट दी जाए और संचालन बंद कर दिया जाए। यह चेतावनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।

टाटा ने आरोपों को किया खारिज 

वहीं, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसने एक मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रयोगशाला द्वारा कराई गई जांच में संयंत्र को सभी पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप पाया गया है। कंपनी ने दावा किया है कि वह पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों को अपना जवाब सौंप चुकी है।

पर्यावरण और उद्योग के बीच संतुलन की चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एक तरफ भारत वैश्विक कंपनियों के लिए उत्पादन केंद्र बनने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय समुदायों और किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब सभी की नजर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच होने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी है।

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स्मार्टफोन की बिक्री में 35% की बड़ी गिरावट, कीमत बढ़ने से मांग पर दबाव

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नई दिल्ली, एजेंसी। देश में स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों का असर अब बिक्री पर साफ दिखाई देने लगा है। रिटेलरों का कहना है कि मई में मोबाइल की बिक्री में सालाना आधार पर रिकॉर्ड 30-35 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसकी वजह यह है कि मेमरी चिप की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए कंपनियां नवंबर 2025 से लगातार कीमतों में बढ़ोतरी कर रही हैं। अभी कुल बिक्री में से 60 प्रतिशत हिस्सा ऑफलाइन का है, जबकि 40 प्रतिशत बिक्री ऑफलाइन के जरिए होती है। कुल मिलाकर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की बिक्री में भारी गिरावट आएगी।

काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार मई में शिपमेंट में सालाना आधार पर 15-20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जून में भी इसी तरह की कमजोरी बने रहने की संभावना जताई गई है। साल 2026 की पहली तिमाही में मोबाइल शिपमेंट में गिरावट 3 प्रतिशत रही थी लेकिन दूसरी तिमाही में यह गिरावट 15 प्रतिशत से ज्यादा रहने का अनुमान है। 

रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी और मई के बीच स्मार्टफोन की औसत कीमत में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी पिछले साल हुई कीमतों में वृद्धि के अलावा है। रिटेलरों का कहना है कि कीमतें बढ़ने के बाद से कुछ मामलों में कुल असर 40-45 प्रतिशत तक रहा है।

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