नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को NEET-UG पेपर लीक मामले पर कहा कि जवाबदेही तय होने तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। कोर्ट में मौजूद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से सवाल किया कि UPSC तो आपसे बड़े पैमाने पर परीक्षा करवाता है, वहां कभी पेपर लीक नहीं हुआ। NTA को उनसे सीखने की जरूरत है।
सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद NEET पेपरलीक की जांच पर नजर रख रहे हैं ताकि कोई चूक न हो।
केस की सुनवाई कर रहे जस्टिस नरसिम्हा ने शिक्षा मंत्रालय से NEET-UG परीक्षाओं की जांच प्रक्रिया का ब्योरा मांगा। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि पेपर लीक के बाद बड़े लेवल पर सुधार किए हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हम युवाओं को लेकर गंभीर हैं। NEET-UG री-टेस्ट के लिए नए तरीके अपनाए गए हैं।
देशभर में 3 मई को NEET-UG परीक्षा हुई थी। 7 मई की शाम पेपर लीक की खबर सामने आई थी। 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। 21 जून को री-एग्जाम होगा।
SC का सवाल- सुधार के बावजूद नाकामी क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने NTA को भंग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। इस दौरान 2024 में NEET पेपर लीक के बाद बनाई गई हाई-पावर मॉनिटरिंग कमेटी के प्रमुख और पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के राधाकृष्णन से पूछा कि सिफारिशों और सुधारों के बावजूद इस बार नाकामी क्यों हुई।
राधाकृष्णन ने बताया कि समिति की अधिकांश सिफारिशें लागू की जा चुकी हैं। NEET-PG 2025 सफल रहा और इस साल सामने आई कमजोरियों को आगामी री-टेस्ट से पहले दूर किया जा रहा है।
कोर्ट ने कहा- NTA अभी स्थायी और मजबूत संस्था की तरह काम नहीं कर रही है। केंद्र सरकार NTA को मजबूत बनाने के लिए क्या करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि NTA को IIT और दूसरे बड़े संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए, ताकि भविष्य में परीक्षाएं सुरक्षित तरीके से हो सकें।
कोर्ट रूम LIVE
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस नरसिम्हा, सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और कमेटी की ओर से राधाकृष्णन सुनवाई में शामिल हुए।
जस्टिस नरसिम्हा: हाई पावर्ड कमेटी के बावजूद पेपर लीक जैसी घटना कैसे हुई? गड़बड़ी सिफारिशों में थी या इम्प्लीमेंटेशन में।
राधाकृष्णन: कमेटी ने 35 लॉन्ग टर्म और 60 शॉर्ट टर्म सुझाव दिए थे, ज्यादातर लागू हो चुके हैं।
जस्टिस नरसिम्हा: अगर तैयारी थी तो NEET-UG में फिर समस्या क्यों हुई।
राधाकृष्णन: पेपर से छेड़छाड़ बड़ी चुनौती थी, लेकिन अगले महीने होने वाले री-एग्जाम में सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
जस्टिस नरसिम्हा: असली जवाबदेही तय किए बिना ऐसी घटनाएं नहीं रुकेंगी।
जस्टिस नरसिम्हा: UPSC में ऐसी स्थिति नहीं बनती, NTA को उससे सीखने की जरूरत है।
सॉलिसिटर जनरल: 21 जून के एग्जाम के लिए नया सुरक्षा मैकेनिज्म बनाया गया है, जिसकी हाई लेवल मॉनिटरिंग हो रही है।
राधाकृष्णन: NTA में एक्सपर्ट्स की कमी थी, इसलिए अलग-अलग सिस्टम और विशेषज्ञों को जोड़ा गया है।
जस्टिस नरसिम्हा: संस्थाएं एड-हॉक तरीके से नहीं चल सकतीं, मजबूत इंस्टीट्यूशनल सिस्टम बनाना जरूरी है।
जस्टिस नरसिम्हा: बड़ी यूनिवर्सिटीज और IITs के साथ मिलकर फुल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया जाए।
जस्टिस नरसिम्हा: छात्रों की मेहनत और भावनाओं को देखते हुए उन्हें इस तरह के ट्रॉमा से बचाना जरूरी है।
25 मई को सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था- क्या सबक लिया
इससे पहले 25 मई को सुनवाई हुई थी। तब कोर्ट ने NTA को फटकार लगाई थी। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने NTA को फटकारते हुए कहा था कि यह दुखद की बात है कि आपने (NTA) ने पहले हुए पेपर लीक मामले से कोई सबक नहीं लिया।
बेंच ने कहा था कि साल 2024 में भी पेपर लीक का मामला कोर्ट तक पहुंचा था। तब एक कमेटी बनाई गई थी, जिसने कई सिफारिशें दीं, जिन्हें स्वीकार भी किया गया था। NTA 28 मई तक हलफनामा दाखिल करे और बताए कि 2024 में दिए गए निर्देशों और मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों पर क्या कदम उठाए गए। कोर्ट ने मौजूदा मामले में केंद्र सरकार और CBI से भी जवाब मांगा था।
NEET पेपर लीक में अब तक 13 गिरफ्तार, 21 जून को परीक्षा
NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित हुई थी। इसमें करीब 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। NTA के अनुसार 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिली थी। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया।
12 मई को परीक्षा रद्द की गई और री-एग्जाम का फैसला लिया गया। 15 मई को शिक्षा मंत्रालय और NTA ने NEET री-एग्जाम की तारीख 21 मई को होने का ऐलान किया। इस मामले की जांच CBI कर रही है। अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
NEET से 1 लाख से ज्यादा मेडिकल कॉलेज में एडमिशन
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) भारत में मेडिकल और डेंटल कोर्सेज में दाखिले के लिए होने वाली राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा है। इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी।
इस परीक्षा के माध्यम से देश के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, आयुष (BAMS, BHMS) और नर्सिंग जैसे कोर्सेज में दाखिला मिलता है, जिसमें AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। भी देश में लगभग 1 लाख से अधिक MBBS और 27000 से अधिक BDS सीटें हैं।
लखनऊ, एजेंसी। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) जयप्रकाश चतुर्वेदी का देर रात निधन हो गया। उन्होंने लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन भाजपा के वरिष्ट नेता कलराज मिश्र ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कहा कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, कुशल संगठनकर्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक, पूर्व संगठन मंत्री एवं पूर्व विधान परिषद सदस्य आदरणीय जयप्रकाश चतुर्वेदी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उनका निधन मेरे लिए एक अपूरणीय व्यक्तिगत क्षति है।
चतुर्वेदी का संगठन के प्रति समर्पण, कार्यकर्ताओं के प्रति आत्मीयता और राष्ट्रसेवा का उनका संपूर्ण जीवन सदैव स्मरणीय एवं प्रेरणादायी रहेगा। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों एवं उनके असंख्य शुभचिंतकों को इस गहन दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। इसी कड़ी उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त कर विनम्र श्रद्धांजलि दी।
आप को बता दें कि जयप्रकाश चतुर्वेदी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के कोन क्षेत्र के ग्राम चांची, पोस्ट चाची कलां के निवासी थे। वे राजवंशी देवी इंटर कॉलेज के प्रबंधक भी थे। लंबे समय तक उन्होंने सामाजिक, शैक्षिक और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई और क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके निधन पर भाजपा नेताओं के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। जयप्रकाश चतुर्वेदी के निधन को क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक जीवन की बड़ी क्षति माना जा रहा है।
कीव, एजेंसी। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच काला सागर क्षेत्र एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गया है। यूक्रेन के प्रमुख ओडेसा बंदरगाह पर एक व्यापारिक जहाज पर हुए हमले में चार भारतीय नागरिक भी सवार थे। यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि दो भारतीय सुरक्षित हैं, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है। दूतावास संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और बचाव अभियान पर नजर बनाए हुए है। एमवी एजीएन रैग्नर (MV AGN Ragnar) ओडेसा बंदरगाह पर हमले की चपेट में आ गया। ओडेसा काला सागर क्षेत्र में यूक्रेन का सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह है और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से यह कई बार हमलों का निशाना बन चुका है।
यूक्रेन में भारतीय दूतावास के अनुसार, घटना के समय जहाज पर चार भारतीय नागरिक मौजूद थे। अब तक मिली जानकारी के अनुसार दो भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। दो अन्य भारतीयों के बारे में अभी कोई पुष्टि नहीं हुई है। उनकी तलाश के लिए सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारतीय दूतावास ने जारी बयान में कहा कि वह इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए है। दूतावास संबंधित यूक्रेनी अधिकारियों के संपर्क में है ताकि लापता भारतीयों का जल्द पता लगाया जा सके और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा सके। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि जहाज पर हमला किसने किया और किन परिस्थितियों में यह घटना हुई। जहाज पर कुल कितने चालक दल के सदस्य थे, इसकी भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
अधिकारियों ने अभी तक चारों भारतीयों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। साथ ही जहाज पर उनकी जिम्मेदारियों और पदों के बारे में भी कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते काला सागर क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही लगातार जोखिम भरी बनी हुई है। हाल के महीनों में कई व्यापारी जहाज मिसाइल और ड्रोन हमलों की चपेट में आए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
चंडीगढ़, एजेंसी। रू. 657 करोड़ के चर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला मामले में गिरफ्तार हरियाणा के पूर्व आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल ने सीबीआई की विशेष अदालत में दायर अपनी नियमित जमानत याचिका में सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने अदालत के समक्ष कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में न कभी किसी से रिश्वत मांगी और न ही कोई रिश्वत स्वीकार की। उनकी भूमिका केवल अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों को प्रशासनिक स्वीकृति देने तक सीमित थी।
पंकज अग्रवाल को सीबीआई ने 22 जून को गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ दर्ज रू. 657 करोड़ के बैंक घोटाले के मामले में नियमित जमानत याचिका पर पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत 30 जुलाई को सुनवाई करेगी।
जमानत याचिका में अग्रवाल ने कहा है कि जांच एजेंसी अब तक ऐसा कोई प्रत्यक्ष या ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी है, जिससे यह साबित हो कि उनका कथित बैंक धोखाधड़ी या किसी आपराधिक षड्यंत्र से कोई संबंध था। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद का आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खाता खोलने संबंधी प्रस्ताव विभागीय अधिकारियों की संस्तुति पर स्वीकृत किया गया था और संबंधित खाता खोलने के प्रपत्रों पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं हैं।
सीबीआई ने अपनी जांच में आरोप लगाया था कि पंकज अग्रवाल ने हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के बैंक खाते आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खुलवाने में सहायता की तथा उन्हें लगभग रू. 60.54 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी थी।
हालांकि, अग्रवाल ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि बैंक खाते खोलने के समय उन्हें किसी प्रकार की अनियमितता या बाद में खातों से कथित धोखाधड़ी के जरिए धन निकासी की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रारंभिक स्तर पर तय की गई रू. 50 करोड़ की सीमा बाद में हटा दी गई थी, जिससे यह आरोप भी कमजोर पड़ जाता है कि प्रशासनिक निर्णय स्वयं अवैध था।
जमानत अर्जी में यह भी तर्क दिया गया है कि सीबीआई ने एक सामान्य प्रशासनिक निर्णय को आपराधिक षड्यंत्र का रूप देने का प्रयास किया है। याचिका में कहा गया है कि केवल इस आधार पर किसी अधिकारी को आपराधिक साजिश का आरोपी नहीं ठहराया जा सकता कि उसके प्रशासनिक निर्णय का बाद में किसी तीसरे पक्ष ने कथित रूप से अनुचित लाभ उठा लिया।
अब इस मामले में सभी की निगाहें 30 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत पंकज अग्रवाल की नियमित जमानत याचिका पर फैसला सुनाएगी।