कोरबा
फसल की गारंटी नहीं होती पर खाते में एक हजार आएगा इसका भरोसा रहता है
पहाड़ी क्षेत्र की रामबाई के लिए महतारी वंदन योजना की राशि किसी संजीवनी से कम नहीं
कोरबा । अपने घर की परछी में मक्के का बीज निकालती रामबाई खुश है कि इस बार दशहरा-दीपावली के त्यौहार के समय बहुत ज्यादा आर्थिक समस्याओं से नहीं जूझना पड़ेगा। शहर से लगभग सौ किलोमीटर दूर जंगल और पहाड़ी इलाकों में रहने वाली रामबाई के लिए जीवनयापन किसी जद्दोजहद से कम नहीं है। वह बताती है कि पहाड़ी इलाको में वैसे भी बारिश का कोई भरोसा नहीं रहता इसलिए इन इलाकों में फसल बोने और उसे सही सलामत काट लेने की कोई गारण्टी नहीं होती पर जबसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महतारी वंदन योजना शुरू की है तब से उन्हें अपने खाते में हर माह एक हजार रुपए आने की गारण्टी मिल गई है। उनका कहना है कि एक हजार रुपए मिलने की गारण्टी ने उन्हें इस बार यह भी गारण्टी दिला दी है कि वह आने वाले दशहरा-दीपावली को बीते बरसो की तुलना में बहुत बेहतर तरीके से मना सकती है।
कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक में दूरस्थ क्षेत्र ग्राम जजगी में रहने वाली रामबाई आयाम बताती है कि इस बार बरसात ठीक-ठाक हुई है लेकिन पहाड़ी इलाकों में पानी का ठहराव कुछ देर तक नहीं रहता। इन इलाकों में मक्के की फसल लेनी होती है। उन्होंने अपनी बाड़ी में मक्के की फसल ली थी, अब मौसम के साथ ही मक्के को तोड़कर बीज अलग कर रही है। रामबाई ने बताया कि उनके क्षेत्र में धान का फसल लेना बहुत बड़ी चुनौती है। कई बार मौसम दगा दे जाता है। बारिश नहीं होने पर भी खेत में ही फसल सूख जाते हैं। ऐसे में ज्यादातर ग्रामीण मक्के सहित कम पानी में पैदा होने वाले फसलों पर ध्यान देते हैं और जीविकोपार्जन के लिए बकरी सहित अन्य पशुओं का पालन करते हैं। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में मौसम की बेरुखी अक्सर किसानों को रुला देती है इसलिए कोई शत-प्रतिशत फसल उत्पादन का भरोसा नहीं करता। रामबाई ने बताया कि उनके गाँव में अधिकांश गरीब परिवार निवास करते हैं। गाँव की ज्यादातर महिलाएं जीवकोपार्जन के लिए बहुत जद्दोजहद करती हुई घर चलाती है, उन्हें दिन भर कुछ न कुछ परिश्रम करना पड़ता है। ऐसे में जब महतारी वंदन योजना की शुरूआत हुई तो कुछ महिलाओं को भरोसा नहीं था कि हर माह उनके खाते में एक हजार आएगा। अब जबकि 7 महीने हो गए हैं और एक हजार रुपये निरंतर खाते में आ रहा है तो उनका भरोसा और विश्वास छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति बढ़ता ही जा रहा है। रामबाई ने बताया कि आने वाले समय में दशहरा-दीपावली है। इस दौरान माह में मिलने वाली एक हजार की राशि उनके जैसी अनेक जरूरतमंद महिलाओं के लिए खुशियों के साथ त्यौहार मनाने में मददगार साबित होगी। इस राशि से वे कुछ कपड़े, मिठाई सहित अन्य जरूरी सामग्री अवश्य खरीद पाएंगी।।
कोरबा
श्रद्धा महिला मंडल, एसईसीएल बिलासपुर द्वारा वृद्धाश्रम में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन
बिलासपुर/कोरबा। श्रद्धा महिला मंडल, एसईसीएल बिलासपुर द्वारा दिनांक 08 जून 2026 को माता रानी की कुटिया वृद्धाश्रम में निवासरत वृद्ध महिलाओं के लिए एक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम श्रद्धा महिला मंडल की अध्यक्षा एवं एसईसीएल परिवार की प्रथम महिला श्रीमती शशि दुहन के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।
इस अवसर पर मंडल की आदरणीय उपाध्यक्षगण भी उपस्थित रहीं। सभी ने वृद्धाश्रम में रह रही वृद्धजनों से आत्मीय संवाद कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा उनका उत्साहवर्धन किया।

शिविर में* डॉ पारुली साहू एवं उनकी टीम द्वारा 25 वृद्धजनों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक परामर्श एवं मार्गदर्शन प्रदान किया* गया। शिविर में रक्तचाप (BP), नाड़ी (Pulse), CBC, RBS, HbA1c, लिवर प्रोफाइल, किडनी प्रोफाइल एवं लिपिड प्रोफाइल सहित विभिन्न जांचें निःशुल्क की गईं। स्वास्थ्य परीक्षण के उपरांत जरूरतमंद महिलाओं को निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया।
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती शशि दुहन ने वृद्धाश्रम की महिलाओं को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया तथा उनके स्वास्थ्य की नियमित देखभाल हेतु प्रतिमाह स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित करने की घोषणा की।
शिविर के उपरांत वृद्धाश्रम में निवासरत 25 बुजुर्गों को पौष्टिक नाश्ता एवं फल की टोकरियाँ वितरित की गईं, जिससे उनके प्रति स्नेह, सम्मान एवं अपनत्व का भाव व्यक्त किया जा सके।
इस सेवा कार्य में समिति की सदस्याओं ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।
यह स्वास्थ्य शिविर श्रद्धा महिला मंडल की सामाजिक सेवा, करुणा एवं जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का एक सराहनीय प्रयास रहा, जिससे वृद्धाश्रम की महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्राप्त हुआ तथा उनमें सुरक्षा एवं अपनत्व की भावना का संचार हुआ।
कोरबा
क्षतिग्रस्त और अधूरी पुलिया-एप्रोच रोड से बारिश में आवाजाही होगी बाधित, ग्रामीणों को घूमकर जाना पड़ेगा
कोरबा। क्षतिग्रस्त व अधूरी पुलिया-एप्रोच रोड से बारिश में फिर से आवाजाही बाधित होगी। इससे उपनगर बांकीमोंगरा, हरदीबाजार, चैतमा के ग्रामीणों को वैकल्पिक सड़क से घूमकर जाना पड़ेगा। बारिश में संपर्क टूटने पर स्कूली छात्रों, कामकाजी लोगों को सबसे अधिक परेशानी होगी, जो सड़क मार्ग से रोज आवाजाही करनी पड़ती है। हरदीबाजार से नेवसा, उतरदा, सिल्ली, बोईदा, निरतु की ओर आवाजाही के लिए लीलागर नदी पर बनी पुरानी पुलिया की ऊंचाई कम है। 24 घंटे से भी कम बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ने पर पुलिया के ऊपर से पानी बहता है। इससे गांवों को संपर्क टूटने पर सबसे अधिक परेशानी नेवसा समेत आसपास गांवों के स्कूली छात्रों को होती है, जो हरदीबाजार व दीपका के स्कूलों में पढ़ाई करते हैं। यह सड़क हरदीबाजार को बलौदा सीपत व मस्तूरी से भी जोड़ती है, इस कारण यात्री बसें भी मार्ग से गुजरती है।

हरदीबाजार से नेवसा की दूरी लीलागर नदी का पुलिया पारकर 2 किलोमीटर है। वहीं रतिजा की ओर से बायपास सड़क से आवाजाही पर 5 किलोमीटर दूरी पड़ेगी। पुलिया की कम ऊंचाई के मद्देनजर नया पुल का निर्माण कराया है, जो बनकर तैयार हो गया है, लेकिन पुल के दोनों ओर की एप्रोच रोड अब तक नहीं बनाया है। सड़क पर मिट्टी पड़ी है। नौतपा की विदाई से मानसून भी अब करीब है। आने वाले दिनों प्री-मानसून बारिश की संभावना है। एप्रोच रोड को पुल के लेवल के हिसाब से निर्माण नहीं कराने पर वाहनों से आवाजाही मुश्किल होगी। पिछले साल बारिश में पश्चिम क्षेत्र बांकीमोंगरा के + लीलागर नदी पर निर्मित पुल का अधूरा एप्रोच रोड।
कोरबा
लो वोल्टेज और कटौती पर ग्रामीणों का हल्लाबोल
कोरबा/पाली। 5 ग्राम पंचायतों में बिजली आपूर्ति की लचर व्यवस्था पर ग्रामीणों ने पाली सब स्टेशन कार्यालय में जमकर नारेबाजी की। लगभग 2 घंटे धरना देने के बाद पुलिस शासन की मौजूदगी में सब स्टेशन के बिजली अफसरों के साथ परिसर में ही वार्ता हुई। इसके बाद ग्रामीणों का आंदोलन समाप्त हुआ। सब स्टेशन कार्यालय के निकट से ग्रामीणों ने रैली की शक्ल में बिजली दफ्तर पहुंचे। इस दौरान गांवों में बिजली कटौती व लो वोल्टेज का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने कहा कि अनाफ-शनाफ बिजली बिल भेजा रहा है। खराब पड़े ट्रांसफार्मर को बदलने में ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

सिल्ली, परसदा, शिवपुर, निरधी, पोलमी पंचायत के गांवों के हजारों उपभोक्ता लो वोल्टेज व बिजली कटौती से परेशान हैं। कई बार मौखिक व लिखित शिकायत के बाद भी अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। दफ्तर परिसर में ग्रामीणों के साथ बिजली अधिकारियों की वार्ता हुई। उनकी बिजली संबंधी समस्याओं के निराकरण का भरोसा दिलाया। इसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन स्थगित कर दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर यदि 10 दिनों के भीतर समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो चक्काजाम आंदोलन करने मजबूर होंगे।
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