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कोरबा

कोरबा लोकसभा क्षेत्र के विकास में नहीं होगी राजनीति, 5 साल के अनुभव के बाद उच्च सदन में आवाज करेंगे बुलंद

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दूसरी बार निर्वाचित सांसद ज्योत्सना ने ली प्रेस कॉन्फ्रेंस
कोरबा। कोरबा लोकसभा क्षेत्र से लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर तिलस्म तोडऩे वाली मृदुभाषी श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत विजयश्री हासिल करने के दूसरे दिन कोरबा प्रेस क्लब भवन तिलक भवन पहुंची और पत्रकारों से चर्चा करते हुए कोरबा लोकसभा क्षेत्र के लिए अपनी प्राथमिकताएं गिनायी।
उन्होंने मीडिया से चर्चा के दौरान मंझे हुए जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी बात रखी और कहा कि मुझे राजनीति करना नहीं आती, मैं तो जनता की प्रतिनिधि के रूप में पांच साल काम किया। केन्द्र में भाजपा की सरकार थी, मैंने क्षेत्र की जनता की आवाज बनकर उच्च सदन में मांग उठायी, कई मांगों को पूरी की गई और कई अधूरे रह गए। इस बार उच्च सदन में आवाज और बुलंद की जाएगी, क्योंकि मुझे 5 साल का अनुभव मिला है और पिछले बार से भी इस बार और बेहतर करने के लिए क्षेत्र की जनता ने मुझे आशीर्वाद देकर देश के उच्च सदन तक फिर से पहुंचाया है। उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं बताते हुए कहा कि क्षेत्र के विकास में राजनीति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि जीतने के बाद प्रतिनिधि सभी का हो जाता है। सबको साथ लेकर सामुहिक पहल करेंगे और पूरी इच्छा शक्ति से क्षेत्र के विकास में जुटेंगे। उन्होंने पिछले कार्यकाल की उपलब्धियों को भी बताया और कहा कि विकास के साथ-साथ जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को भी उन्होंने बखूबी निभाया और कहा कि एसईसीएल की एक मासूम बालिका को मशलस डिस्ट्राय की अजीबो गरीब बीमारी थी। उसे ठीक होने के लिए डॉक्टरों ने एक इंजेक्शन की कीमत 15 करोड़ बतायी। इतनी बड़ी राशि एसईसीएल कर्मी के लिए जुटाना असंभव था। बात मेरे तक आयी तो पहल कर एसईसीएल से 15 करोड़ दिलाया और आज वह बच्ची स्वस्थ है। हम उसे दीर्घायु और स्वस्थ जीवन, बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हंै। इसके अलावा कोरबा लोकसभा क्षेत्र के 600 से अधिक गरीब तबके के लोगों के ईलाज का बंदोबस्त कराया। इनमें से 15-20 लोगों को बचाया नहीं जा सका, बाकी सभी स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।
0सरोज की कड़ुवाहट से मुझे और कार्यकर्ताओं को नया जोश आया0
सहज भाव से मुस्कुराती हुई श्रीमती ज्योत्सना महंत ने कहा कि हम सात्विक राजनीति में विश्वास करते हैं। मेरे विपक्ष में खड़ी सरोज पांडेय ने कहा था कि राजनीति में साम,दाम, दंड, भेद सब जायज है, लेकिन छत्तीसगढ़ शांति और भाईचारा के लिए जाना जाता है। चंूकि वह भी एक महिला है, उनकी कड़ुवाहट का मुझे जवाब देना आता है, लेकिन इसका जवाब मेरे कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्र की जनता ने दे दिया। मुझे क्षेत्र से गायब रहने का तमगा देने वाली सरोज पांडेय को क्षेत्र की जनता ने स्वयं यहां से गायब कर दिया, यह बहुत बड़ी बात है। क्षेत्र की जनता सीधी, सरल है, वे ऐसे जनप्रतिनिधि चाहती है, जो उनके बीच सरलता से उपलब्ध हो और उनके बीच जाकर सहज अनुभव कर सके। मुझे किसी के खिलाफ अनर्गल बात करना नहीं आती, इसका जवाब जनता ने दिया है। सरोज की कड़ुवाहट और अनर्गल आरोप जनता समझ गई थी और इसका जवाब कांग्रेस कार्यकर्ताओं और क्षेत्र की देवतुल्य जनता ने अच्छी तरह से दिया है। मैं सबका आभारी हूं और देवतुल्य जनता को प्रणाम करती हूं।
जनता के लिए हम करते हैं, लेकिन गाना नहीं गाते
महंत परिवार हमेशा से ही जनता के लिए करता रहा है। हमारे बाबूजी स्व. बिसाहूदास महंत ने हमेशा से किसानों, गरीबों, ग्रामीणों के बीच में रहकर उनके लिए हमेशा चिंतन करते थे, कि किस तरह उनकी समृद्धि हो। बांगों बांध, पृथक छत्तीसगढ़ बाबूजी के ही सपनों का परिणाम है, जिससे आज छत्तीसगढ़वासी समृद्ध हो रहे हैं। परिवारवाद के प्रश्र पर जवाब देते हुए श्रीमती महंत ने बड़े सहज भाव से जवाब दिया कि गृहमंत्री अमीत शाह का पुत्र जयशाह आज बीसीसीआई के अध्यक्ष हैं। मोदी की संतान होती, तो वे भी कुछ न कुछ पद में रहते, सरोज पांडेय की संतान होती तो वे भी उन्हें आगे बढ़ाने के लिए काम करती। बाबूजी के पुत्र महंत जी को जनता ने सरआंखों पर बिठाया और अपना जनप्रतिनिधि चुना। मुझे भी जनता का आशीर्वाद मिलता रहा। सूरज हमारे पुत्र हैं, जनता को तय करना है कि उन्हें कैसा जनप्रतिनिधि चाहिए। ये लोग परिवारवाद चिल्ला-चिल्ला कर ढिढोंरा पीट रहे हैं, लेकिन जनता जानती है, उनके लिए कौन ठीक है।
बाबूजी के नाम से मेडिकल कॉलेज पर उन्हें क्यों ऐतराज?
ज्योत्सना महंत ने एक प्रश्र के जवाब में कहा कि बाबूजी को मेडिकल समय पर न मिलने के कारण उनका निधन हो गया। हालांकि मैंने बाबूजी को देखा नहीं, लेकिन पूरी हकीकत महंत जी ने बतायी, तब से मैं और महंत जी चाहते थे कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा बेहतर हो और हमने प्रयास किया कि कोरबा में मेडिकल कॉलेज हो और हमारे संयुक्त प्रयास से यह सपना साकार हुआ। मेडिकल कॉलेज का नाम बाबूजी के नाम रखा गया। क्योंकि यह मेरे लिए उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है और इससे क्षेत्र की जनता लाभान्वित होगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ और क्षेत्र के लिए काफी कुछ किया और रूपरेखा बनायी। हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि ऐसी विभूति का नाम हमेशा जीवित रहे और लोग उनसे प्रेरणा लें।
ज्योत्सना महंत ने गिनायी प्राथमिकता
रेलवे को सर्वाधिक राजस्व देने वाला कोरबा रेलवे स्टेशन समस्याओं से घिरा हुआ है। इसका उन्नयन मेरी प्राथमिकता में होगी। उन्होंने कुछ ओजस्वी रूप में कहा कि कोयला गाड़ी के लिए रेलवे नहीं रूकता और यात्री गाड़ी के लिए सरकार के पास 100 बहाने हैं। उन्होंने कहा कि यात्री गाड़ी चलाएं, नहीं तो लदान भी बंद करना होगा। उन्होंने कहा कि तात्कालीन सरकार के समय घोषित नवीन कॉलेज, आत्मानंद विद्यालय एवं अन्य घोषणाओं को पूरी करने के लिए प्रयास किया जाएगा, देखना है केन्द्र और प्रदेश की सरकार से इन घोषणाओं को पूरा कराने में मैं कितना सफल हो पाती हूं। केन्द्र से भी जनता के लिए बहुत कुछ लाना है और मेरा प्रयास जारी रहेगा।
कोरबा में राखड़ की समस्या विकराल हो गई है, ट्रैफिक व्यवस्था चरमरायी हुई है, इन्हें सब ठीक करने के लिए प्रयास करूंगी। कोयला खदानों के लिए अपनी जमीन देने वाले भूमि पूत्रों के लिए मैं बढ़चढक़र प्रयास करूंगी और पूरी गंभीरता के साथ पहल भी करूंगी। उन्होंने कहा कि मेरे विपक्ष में चुनाव लडऩे वाली सरोज पांडेय ने जनता को गुमराह करने का भरसक प्रयास किया लेकिन जनता गुमराह नहीं हुई। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बेहतर करने के लिए बड़ा प्रयास किया जाएगा।

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कोरबा

कोरबा प्रेस क्लब का प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव: नौशाद खान अध्यक्ष एवं दिनेश सचिव, ऐतिहासिक मतों से जीते

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उपाध्यक्ष बने राजकुमार शाह, दुर्गेश श्रीवास्तव कोषाध्यक्ष, हरीश तिवारी उपसचिव, कार्यकारिणी में नवाब, राजेश मिश्रा (मि_ू) एवं आकाश शर्मा विजयी

कोरबा। रविवार 14 जून को कोरबा प्रेस क्लब का महत्वपूर्ण चुनाव सम्पन्न हुआ, जिसमें अध्यक्ष पद के प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में नौशाद खान को एक तरफा विजयश्री मिली। उन्होंने प्रतिद्वंदी सीटिंग अध्यक्ष राजेन्द्र जायसवाल को भारी मतों से हराया।

कोरबा प्रेस क्लब के सत्र 2026-28 के लिए संपन्न चुनाव के परिणाम घोषित किया गया। चुनाव में विभिन्न पदों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जिसमें विजयी प्रत्याशियों ने अपने समर्थकों के बीच जीत का जश्न मनाया।
संरक्षक पद में कमलेश यादव ने सर्वाधिक 107 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, तो सनत दास दीवान को 58 वोट ही मिले। इसी तरह अध्यक्ष पद पर नौशाद खान ने 103 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी राजेंद्र जायसवाल को 60 वोट मिले। इसी तरह कोरबा प्रेसक्लब में एक दिनेश राज ने दूसरी बाद अपना परचम लहराया है उन्हें 100 वोट मिले हैं, जबकि उनके प्रतिद्वंदी रंजन प्रसाद को 61 वोट मिले।

उपाध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में राजकुमार शाह ने 59 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की है, वहीं उनके प्रतिद्वंदी रामेश्वर ठाकुर को 39 वोट, कृष्ण कुमार राठौर को 38 वोट एवं पुरुषोत्तम दुबे को 25 वोट मिले। इसी तरह उप सचिव पद के लिए हरीश तिवारी ने 72 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की। अन्य प्रत्याशियों में नीलम दास पड़वार को 46 वोट और रमेश वर्मा को 45 वोट मिले। कोषाध्यक्ष पद पर दुर्गेश श्रीवास्तव काबिज हुए। उन्होंने 71 वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की, वहीं उनके प्रतिद्वंदी वैभव शर्मा को 55 वोट और संदीप शर्मा को 37 वोट मिले। कार्यकारिणी में नवाब हुसैन, राजेश मिश्रा और आकाश शर्मा निर्वाचित हुए हैं।

निर्वाचन अधिकारी वरिष्ठ पत्रकार छेदीलाल अग्रवाल ने अपनी टीम के साथ निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण चुनाव सम्पन्न कराया। सहायक निर्वाचन अधिकारी के रूप में सादिक शेख, बीता चक्रवर्ती, रेणु जायसवाल, मधु डिडवानिया, सहायक कन्हैय्या ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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कोरबा

विश्व पर्यावरण दिवस पर कोरबा वन मंडल के सभी छह परिक्षेत्रों में विविध कार्यक्रमों का सफल आयोजन

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कोरबा। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत वन मंडल कोरबा में दिनांक 05 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस’ के विशेष अवसर पर आवश्यक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, कोरबा वनमण्डलाधिकारी प्रेमलता यादव के निर्देशानुसार उपवनमंडलाधिकारी दक्षिण कोरबा सूर्यकांत सोनी एवं उपवनमंडलाधिकारी उत्तर कोरबा रामसिंह राठिया के मार्गदर्शन में मंडल के सभी परिक्षेत्रों—लेमरू, बालको, कोरबा, करतला, पसरखेत एवं कुदमुरा में परिक्षेत्र स्तरीय व्यापक गतिविधियों का संपादन किया गया।

इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के लिए निर्धारित मुख्य थीम “जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई के लिए एक वैश्विक आह्वान” को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से, स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और वन सुरक्षा दलों , होम गार्ड,NGO के सहयोग से कई महत्वपूर्ण एवं अनिवार्य गतिविधियां सुनिश्चित की गईं।

सभी छह परिक्षेत्रों में संपादित की गई और सभी के सहयोग से बड़े रूप में पौधा लगाया गया साथ ही पर्यावरण के संरक्षण के लिए सपत भी दिलाई गई,इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी परिक्षेत्र अधिकारियों, वन रक्षकों, वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों और प्रबुद्ध नागरिकों का सराहनीय योगदान रहा।

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कोरबा

15 जून को छोटे खातेदारों को रोजगार ,पुनर्वास एवं भू विस्थापितों की समस्याओं को लेकर जन आक्रोश रैली के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव करेगी किसान सभा,

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भू विस्थापितों की रैली में शामिल होंगे लोकसभा सांसद अमराराम

आंदोलन को सफल बनाने के लिए पोस्टर के साथ गांव-गांव माइक प्रचार ,बैठक के साथ घर-घर पर्चे वितरण कर भू विस्थापितों को किया जा रहा एकजुट

आंदोलन में कोरबा के चारों परियोजना के साथ रायगढ़ और सरगुजा संभाग के भी भू विस्थापित होंगे शामिल

कोरबा। छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेतृत्व में छोटे खातेदारों को रोजगार देने,भूविस्थापितों के लंबित रोजगार प्रकरणों के निराकरण,पूर्व में अधिग्रहित जमीन की वापसी,पट्टा,आंशिक अधिग्रहण पर रोक लगाने,पेयजल की व्यवस्था करने,बसावट एवं खनन प्रभावित गांवों की अन्य समस्याओं को लेकर 15 जून को जन आक्रोश रैली निकालकर कलेक्ट्रेट घेराव की घोषणा की है किसान सभा द्वारा शुरू किया गया आंदोलन भू विस्थापितों का जन सैलाब बनकर कोरबा की सड़कों पर दिखने वाला है कई भू विस्थापित संगठन इस घेराव में शामिल हो रहे है। जिला प्रशासन से भी कई बार हस्तक्षेप कर समस्याओं के समाधान की मांग की गई लेकिन प्रशासन ने समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया इस लिए विस्थापितों ने किसान सभा के नेतृत्व में अब आर पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। आंदोलन को सफल बनाने के लिए गांव गांव में बैठक कर पर्चे वितरण के साथ भू विस्थापितों को एकजुट भी किया जा रहा है और किसान सभा ने आंदोलन को सफल बनाने के लिए पोस्टर,पर्चे के साथ गांव गांव माइक प्रचार कर भू विस्थापितों को संगठित करने का काम कर रही है। कलेक्ट्रेट घेराव और जन आक्रोश रैली को लेकर भू विस्थापित संगठनों के साथ आम जनता का व्यापक जन समर्थन मिल रहा है।

जन आक्रोश रैली और कलेक्ट्रेट घेराव से पहले घंटाघर में सभा आयोजित होगी जिसे प्रमुख रूप से माकपा के लोकसभा सांसद और किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कामरेड अमराराम,किसान सभा के राष्ट्रीय नेता अवधेश कुमार, आदिवासी एकता महासभा के प्रदेश अध्यक्ष और सचिव सुरेंद्र लाल सिंह एवं बाल सिंह सहित किसान सभा के प्रदेश के नेता और भू विस्थापित संगठनों के नेता संबोधित करेंगे।

जनआक्रोश रैली और कोरबा कलेक्टर घेराव लोकसभा के सांसद अमराराम के नेतृत्व में होगा

कलेक्ट्रेट घेराव को सफल बनाने के लिए गांव गांव में नुक्कड़ सभा,घर घर पर्चे वितरण एवं भू विस्थापितों को एकजुट करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है आंदोलन में कोरबा जिले के कोरबा,दीपका,गेवरा,कुसमुंडा के साथ रायगढ़ और सरगुजा संभाग के भी प्रभावित शामिल होंगे।

किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि एसईसीएल के कुसमुंडा,गेवरा,दीपका,कोरबा सभी क्षेत्रों में छोटे खातेदारों को रोजगार देने,भू विस्थापितों के लंबित रोजगार,जमीन वापसी,पट्टा,बसावट एवं प्रभावित गांव की मूलभुत समस्याओं के निराकार के लिए जिला प्रशासन और एसईसीएल के अधिकारियों द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है जिससे भू विस्थापितों के सब्र का बांध टूट चुका है। 15 जून को कोरबा की सड़को पर भू विस्थापितों। का आक्रोश जन सैलाब के रूप में दिखने वाला है। प्रबंधन और प्रशासन पहले एकजुट था अब सभी क्षेत्रों के भू विस्थापित अपने अधिकार को लेने के लिए एकजुट हो रहे है। किसानों की जमीन का अधिग्रहण जिला प्रशासन द्वारा किया जाता है और उद्योगों को जमीन नियमों के पालन के तहत सौंपा जाता है लेकिन उद्योग जमीन तो ले लेती है लेकिन विस्थापित जमीन अधिग्रहण के बाद रोजगार और पुनर्वास के लिए भटकते हैं जिला प्रशासन को जमीन अधिग्रण के साथ विस्थापित किसानों के अधिकार को दिलाने के लिए भी सामने आना होगा।

किसान सभा नेता जवाहर सिंह कंवर, दीपक साहू,जय कौशिक,पवन यादव यादव,अमरजीत कंवर आदि ने भू-विस्थापितों की समस्याओं के लिए जिला प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन दोनों को ही जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि कुसमुंडा में जमीन के बदले रोजगार की मांग को लेकर 1685 दिनों से धरना प्रदर्शन चल रहा है और समस्याओं की ओर कई बार प्रशासन और प्रबंधन का ध्यान आकर्षित किया गया है, लेकिन भू-विस्थापितों की समस्याओं के निराकरण के प्रति कोई भी गंभीर नहीं है।

भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के अध्यक्ष रेशम यादव, सचिव दामोदर श्याम ने कहा कि जिनकी जमीन एसईसीएल ने ली है, उन्हें बिना किसी शर्त के रोजगार दिया जाये क्योंकि जमीन ही उनके जीने का एकमात्र सहारा थी जबरन नए नए नियम बनाना बंद किया जाए । छोटे बड़े खातेदार के नाम पर किसानों को बांटने का काम बंद किया जाए। 15 जून को चारों क्षेत्र से पूरे परिवार सहित हजारों भू-विस्थापित कलेक्ट्रेट घेराव में शामिल होंगे।
कलेक्ट्रेट घेराव में कई भू विस्थापित संगठन शामिल होंगे।


प्रमुख मांगे´

1) छोटे खातेदार के नाम पर भू विस्थापितों के रोके गए रोजगार में तत्काल रोजगार दो ।एसईसीएल में जिन किसानों की जमीन अधिग्रहण की गई है और की जा रही है हर खाते में स्थायी रोजगार प्रदान किया जाये।

2) बांगों बांध के जलाशय के ठेका प्रणाली समाप्त किया जाए।और विस्थापित आदिवासी एवं स्थानीय मछुवारा समितियों को मछली पकड़ने का अधिकार दिया जाए।

3) वन टाइम सेटलमेंट कर रोजगार के पुराने लंबित मामलो का जल्द से जल्द निराकरण किया जाये | अर्जन के बाद जन्म वाले प्रकरण और एक खाता एक रोजगार नियम के विरुद्ध अलग अलग खाता का सयोंजन के कारण रोजगार से वंचितों को रोजगार प्रदान किया जाये |

4) बसावट के नाम पर 3 लाख और 15 लाख रुपए के नाम से भेदभाव बंद किया जाए और सभी क्षेत्रों के भू विस्थापितों को एक समान बसावट की 15 लाख राशि दी जाए।

5) शासन की योजनाओं से प्राप्त पट्टों एवं शासकीय और वन भूमि पर बने मकानों का मुआवजा एवं सौ प्रतिशत सोलिशियम और बसाहट की पात्रता का लाभ दिया जाये ।

6) पुराने अर्जित भूमि को मूल खातेदारों को वापस करायी जाये | अधिग्रहण के बाद जिन जमीनों पर 40 सालों में भी कोल इंडिया ने भौतिक कब्जा नहीं किया है और जिन जमीनों पर किसान ही पीढ़ियों से काबिज हैं उन्हें किसानों के नाम वापस किया जाए।

7)अर्जित गाँव से विस्थापन से पूर्व उनके पुनर्वास स्थल की सर्वसुविधायुक्त व्यवस्था किया जाये |

8) एसईसीएल में आऊट सोर्सिंग से होने वाले कार्यों में भू विस्थापितों एवं प्रभावित गांव के बेरोजगारों को 100% रोजगार में रखा जाये।

9) प्रभावित एवं पुनर्वास गांव की महिलाओं को स्वरोजगार योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाये।

10) पुनर्वास गांव में कबीज भू विस्थापित परिवार को पूर्ण काबिज भूमि का पट्टा दिया जाये।

11) डिप्लेयरिंग प्रभावित गांव सुराकछार बस्ती में किसानों को हुये नुकसान का क्षतिपूर्ति मुआवजा प्रदान किया जाये।

12) पूर्व में विस्थापित ग्रामों के भू विस्थापित जिन्हें बसावट नहीं दिया गया है उन्हें बसावट प्रदान किया जाए।

13) डंपिंग की मिट्टी को वापस खोदे गए खदान में भरा जाए इस डंपिंग के मिट्टी का प्रयोग दूसरे कार्यों में ना किया जाए।

14) एसईसीएल कुसमुंडा द्वारा गेवरा का अधिग्रहण 2018 में हो चुका है लेकिन अभी तक वहां पर किसानों को मुआवजा,रोजगार आदि की सुविधा नहीं दी गई है उन्हें तत्काल रोजगार मुआवजा दिया जाए नहीं तो पूर्व में जारी अधिग्रहण रद्द किया जाए।

15) खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था किया जाए।
16) आंशिक अधिग्रहण पर रोक लगाई जाए।

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