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छत्तीसगढ़

दंतेश्वरी मंदिर में अनोखी शिवरात्रि:सात बार पूजा, सात भोग और आधी रात शिव–पार्वती विवाह, बैगा-सिरहा ने कोड़े बरसाए

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दंतेवाड़ा,एजेंसी। दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा में महाशिवरात्रि का पर्व आस्था, परंपरा और जनजातीय संस्कृति के अद्भुत संगम के रूप में मनाया गया। प्राचीन रीति के अनुसार, आधी रात को बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी मंदिर में विशेष अनुष्ठान संपन्न हुआ। मंदिर में सात बार विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई और सात बार मां को भोग अर्पित किया गया।

यह आयोजन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के दिव्य विवाह की परंपरा से जुड़ा है। जिसे सदियों से निभाया जा रहा है। मंदिर के पुजारी विजेंद्र नाथ जिया के मुताबिक, शिवरात्रि पूरे देशभर में मनाई जाती है, लेकिन बस्तर की परंपराएं इसे विशिष्ट बनाती हैं। गर्भगृह में रुद्र के अवतार भैरव स्वरूप शिव स्थापित हैं।

पर्व से पहले सात-आठ दिनों तक रात्रि जागरण हुआ। बैगा और सिरहा साधना के जरिए अपनी आध्यात्मिक शक्तियों का आह्वान किए। शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर पूरी रात पूजा और जप चला।

सात बार आरती, सात भोग की परंपरा

अनुष्ठान की शुरुआत शिवरात्रि से एक दिन पहले शाम को हुई है और सुबह करीब चार बजे तक कार्यक्रम चला। इसके बाद परंपरा अनुसार प्रधान पुजारी को सम्मानपूर्वक पांच पांडव मंदिर ले जाया गया। जहां दूर-दराज से आए देवी-देवताओं का आगमन हुआ।

समलूर, तीरथगढ़ और चित्रकोट सहित आसपास के शिवालयों में भी दर्शन-पूजन किया गया। पूरे आयोजन में 35 गांवों के लोग सक्रिय भागीदारी निभाए।

रस्सी के कोड़े की परंपरा

मंदिर में ‘सन’ पौधे के रेशे से रस्सी का कोड़ा तैयार किया गया। जिसे स्थानीय भाषा में ‘मुंद्रा’ कहा जाता है। पूजा के बाद बैगा और सिरहा इसे प्रसाद स्वरूप स्वीकार करते हैं। यानी खुद पर कोड़े भी बरसाते हैं। शक्तिपीठ होने के कारण शिवरात्रि पर साधना और तंत्र क्रियाएं भी संपन्न होती हैं। यह परंपरा बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का अनोखा हिस्सा मानी जाती है।

आधी रात शिव–पार्वती विवाह

पांच पांडव मंदिर में देवी-देवताओं की उपस्थिति में गीत, नृत्य और उत्सव का माहौल बना। मध्यरात्रि में भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का विवाह संस्कार विधिवत कराया गया। विवाह के बाद अगले दिन महाशिवरात्रि का पर्व पूरे क्षेत्र में उत्साह के साथ मना गया।

नए बैगा-सिराह की परीक्षा

पंडाल या पांच पांडव मंदिर में नए बैगा और सिरहा की परीक्षा भी होती है। परंपरागत कसौटी पर खरे उतरने वालों को जनजातीय व्यवस्था में स्थान दिया जाता है। स्वागत और सम्मान की रस्में शादी-ब्याह की तरह निभाई जाती हैं।

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छत्तीसगढ़

जांजगीर-चांपा : जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव एवं एग्रीटेक कृषि मेला 2026 का भव्य समापन

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आत्मनिर्भरता और तकनीकी समृद्धि की नई राह खोलेगा एग्रीटेक कृषि मेला: गुरु खुशवंत साहेब

आत्मनिर्भरता और तकनीकी समृद्धि की नई राह खोलेगा एग्रीटेक कृषि मेला: श्री गुरु खुशवंत साहेब

जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा जिला में 11 से 13 फरवरी तक शासकीय हाईस्कूल मैदान, जांजगीर एवं कृषि विज्ञान केन्द्र, जर्वे में आयोजित तीन दिवसीय जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव एवं एग्रीटेक कृषि मेला 2026 का समापन कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ।

आत्मनिर्भरता और तकनीकी समृद्धि की नई राह खोलेगा एग्रीटेक कृषि मेला: श्री गुरु खुशवंत साहेब

समापन अवसर पर अतिथियों द्वारा जाज्वल्या 2026 स्मारिका का विमोचन किया गया। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले स्कूली छात्र-छात्राओं एवं स्थानीय कलाकारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पंथी नृत्य एवं मल्लखंभ की आकर्षक प्रस्तुतियां भी दी गईं।

कृषि एवं तकनीक के संगम से समृद्धि की ओर
समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि एग्रीटेक कृषि मेला 2026 किसानों और युवाओं के लिए नवाचार का महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ है। उन्होंने कहा कि जांजगीर-चांपा कृषि की समृद्ध धरती है, जहां परंपरा और आधुनिक तकनीक का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक, आधुनिक कृषि उपकरणों एवं नवीन तकनीकों के उपयोग से किसानों की आय में वृद्धि होगी तथा युवाओं को एग्री-उद्यमी बनने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिले के कृषक तकनीकी नवाचार अपनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर होंगे।

सामाजिक न्याय और कौशल विकास पर जोर
मंत्री श्री साहेब ने कहा कि समाज का कोई भी वर्ग मुख्यधारा से पीछे न रहे, यह सरकार का संकल्प है। कौशल विकास एवं आर्थिक अवसरों के माध्यम से सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने आधुनिक तकनीक, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से एआई एवं नई तकनीकों में दक्ष बनने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में किसानों के लिए निरंतर प्रयास
मंत्री श्री साहेब ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों की समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। धान के समर्थन मूल्य से लेकर नई कृषि नीतियों तक अनेक योजनाएं किसानों के हित में संचालित की जा रही हैं। साथ ही छत्तीसगढ़ी लोक कला एवं संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए भी सतत प्रयास किए जा रहे हैं।

जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
समापन समारोह में जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप, पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, अध्यक्ष खनिज विकास निगम सौरभ सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष इंजी. सत्यलता आनंद मिरी, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रेखा देवागढ़वाल, पूर्व सांसद श्रीमती कमला देवी पाटले, पूर्व सांसद गुहाराम अजगल्ले सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त कलेक्टर जन्मेजय महोबे, पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय, जिला पंचायत सीईओ गोकुल रावटे, अपर कलेक्टर ज्ञानेन्द्र सिंह ठाकुर सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, किसान एवं आमजन कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव एवं एग्रीटेक कृषि मेला 2026 के सफल आयोजन के लिए आयोजकों एवं प्रतिभागियों को बधाई देते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प दोहराया। यह आयोजन प्रदेश में कृषि, तकनीक और लोक संस्कृति के समन्वित विकास का प्रतीक बनकर उभरा है।

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खेल

सरगुजा : सरगुजा ओलंपिक के जिला स्तरीय आयोजनों में 10,577 खिलाड़ियों ने की भागीदारी

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जूनियर और सीनियर वर्ग में 12 खेलों में दिखाया कौशल, विजेता खिलाड़ी संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में बिखेरेंगे चमक

सरगुजा ओलंपिक के जिला स्तरीय आयोजनों में 10,577 खिलाड़ियों ने की भागीदारी

सरगुजा। छत्तीसगढ़ में पहली बार हो रहे सरगुजा ओलंपिक के जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में संभाग के सभी 6 जिलों के कुल 10 हजार 577 खिलाड़ियों ने अपने दमखम और खेल कौशल का प्रदर्शन किया। सरगुजा ओलंपिक के अंतर्गत विकासखंड स्तर पर आयोजित स्पर्धाओं के विजेता खिलाड़ियों ने अपने-अपने जिला मुख्यालयों में आयोजित जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में पूरे उत्साह, जोश और जज्बे के साथ हिस्सेदारी की। सरगुजा संभाग के सभी जिला मुख्यालयों में 5 फरवरी से 13 फरवरी के बीच अलग-अलग तिथियों में इनका आयोजन किया गया था। 

सरगुजा ओलंपिक के जिला स्तरीय आयोजनों में 10,577 खिलाड़ियों ने की भागीदारी

सरगुजा ओलंपिक के जिला स्तरीय आयोजनों में 12 खेलों में 10 हजार 577 खिलाड़ियों ने अपने खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इनमें कोरिया जिले के 510, जशपुर के 3126, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के 706, सरगुजा के 1797, बलरामपुर-रामानुजगंज के 2424 तथा सूरजपुर जिले के 2014 खिलाड़ी शामिल थे। जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं के विजेता अब संभाग स्तरीय आयोजन में अपनी चमक बिखेरेंगे। सरगुजा ओलंपिक के संभाग स्तरीय विजेताओं को खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा राज्य में संचालित खेल अकादिमों में सीधे प्रवेश दिया जाएगा। साथ ही उन्हें यूथ आइकॉन भी घोषित किया जाएगा। ये यूथ आइकॉन बच्चों व युवाओं को खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित करेंगे।

सरगुजा ओलंपिक के जिला स्तरीय आयोजनों में 10,577 खिलाड़ियों ने की भागीदारी

सरगुजा ओलंपिक के जिला स्तरीय आयोजनों में खिलाड़ियों ने 5 व्यक्तिगत और 7 दलीय खेलों में हिस्सेदारी की। व्यक्तिगत स्पर्धाओं में एथलेटिक्स (100, 200, 400 मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद, शॉटपुट, डिस्कस थ्रो, जैवलिन थ्रो, 400 मीटर रिले), तीरंदाजी (इंडियन राउंड), बैडमिंटन, कुश्ती और कराटे शामिल रहे। वहीं दलीय खेलों में फुटबॉल, हॉकी, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, रस्साकसी और बास्केटबॉल शामिल हैं। सभी प्रतियोगिताएं जूनियर वर्ग (14 से 17 वर्ष, बालक/बालिका) तथा सीनियर वर्ग (18 वर्ष से अधिक, महिला/पुरुष) में आयोजित की गईं।

सरगुजा ओलंपिक के पहले चरण में विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने सरगुजा संभाग के सभी 32 विकासखंडों के कुल 3 लाख 49 हजार 370 खिलाड़ियों ने अपना पंजीयन कराया था। इनमें एक लाख 59 हजार 712 पुरुष और एक लाख 89 हजार 658 महिला खिलाड़ी शामिल थीं।

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छत्तीसगढ़

मैनपाट : लोकसंगीत और बॉलीवुड सुरों से सजा मैनपाट महोत्सव का दूसरा दिन

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अलका चंद्राकर और वैशाली रायकवार की प्रस्तुतियों ने देर रात तक दर्शको को बांधे रखा

मेला, बोटिंग और दंगल के रोमांच के साथ उमड़ा जनसैलाब

लोकसंगीत और बॉलीवुड सुरों से सजा मैनपाट महोत्सव का दूसरा दिन

मैनपाट। छत्तीसगढ़ के ‘शिमला’ के नाम से विख्यात मैनपाट में आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव का दूसरा दिन सांस्कृतिक वैभव, उत्साह और जनसैलाब के नाम रहा। सुरों की मधुर गूंज, रंगारंग नृत्य प्रस्तुतियां और मेले की चहल-पहल ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। मशहूर छत्तीसगढ़ी लोकगायिका अलका चंद्राकर और इंडियन आइडल फेम वैशाली रायकवार की शानदार प्रस्तुतियों ने देर रात तक दर्शकों को बांधे रखा।

लोकसंगीत और बॉलीवुड सुरों से सजा मैनपाट महोत्सव का दूसरा दिन

लोकसंगीत की मधुर सरिता में डूबा मैनपाट
कार्यक्रम की शुरुआत अलका चंद्राकर की भक्तिमय जसगीत प्रस्तुति से हुई, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। इसके बाद ददरिया, सुवा गीत और पारंपरिक छत्तीसगढ़ी लोकधुनों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनकी सुमधुर आवाज और मंच पर सहज प्रस्तुति ने लोकसंस्कृति की छटा बिखेर दी।

लोकसंगीत और बॉलीवुड सुरों से सजा मैनपाट महोत्सव का दूसरा दिन

बॉलीवुड धुनों पर थिरके कदम
वैशाली रायकवार ने अपने दमदार स्वर और लोकप्रिय बॉलीवुड गीतों की श्रृंखला से महफिल में जोश भर दिया। एक के बाद एक प्रस्तुत गीतों पर दर्शक झूमते रहे और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गूंज उठा। युवा दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिला।

मेला, बोटिंग और दंगल के रोमांच के साथ उमड़ा जनसैलाब

विविधता और प्रतिभा का मंच
जांजगीर-चांपा से आए शांति प्रतिमा डांस ग्रुप के ट्रांसजेंडर कलाकारों ने ‘नौ दुर्गा’ स्वरूप में भावपूर्ण नृत्य-नाटिका प्रस्तुत कर सभी का दिल जीत लिया। उनकी ऊर्जा, अभिव्यक्ति और समर्पण ने कार्यक्रम को विशेष आयाम दिया।
स्थानीय कलाकारों—आँचल मदलियार, मनप्रीत, दिलबाग सिंह, माही जायसवाल और हर्ष पूरी—ने भी अपनी सशक्त प्रस्तुतियों से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।

शास्त्रीय और बाल प्रतिभाओं की झलक
नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय, अंबिकापुर की छात्राओं ने कत्थक नृत्य की सुंदर प्रस्तुति देकर शास्त्रीय कला की गरिमा को मंच पर जीवंत किया। वहीं स्कूली बच्चों ने गीत और नृत्य के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन कर सबका मन मोह लिया।

मेले की रौनक, बोटिंग और दंगल का रोमांच
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ महोत्सव स्थल पर सजे भव्य मेले में देर शाम तक भारी भीड़ उमड़ती रही। झूले, खानपान और विभिन्न स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने रहे। पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने बोटिंग का भरपूर आनंद लिया। दंगल प्रतियोगिता में पहलवानों के बीच हुए रोमांचक और दमदार मुकाबलों को देखने के लिए दर्शकों में विशेष उत्साह देखा गया। हर दांव-पेच पर तालियों और उत्साहवर्धन की आवाजें गूंजती रहीं।

गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में कलेक्टर अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल, जिला पंचायत सीईओ विनय कुमार अग्रवाल, अपर कलेक्टर सुनील नायक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोलक सिंह ढिल्लो, जनपद उपाध्यक्ष अनिल सिंह, रजनीश पाण्डेय, राम यादव सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

मैनपाट महोत्सव का दूसरा दिन सांस्कृतिक एकता, लोकपरंपरा और आधुनिक मनोरंजन का जीवंत उदाहरण बना। संगीत, नृत्य और रोमांच से सजी यह शाम लंबे समय तक लोगों की यादों में बनी रहेगी।

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