नई दिल्ली,एजेंसी। भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामानों पर आज यानी, 27 अगस्त से 50% टैरिफ लागू हो गया है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नया टैरिफ भारत के लगभग ₹5.4 लाख करोड़ के एक्सपोर्ट को प्रभावित कर सकता है।
50% टैरिफ से अमेरिका में बिकने वाले कपड़े, जेम्स-ज्वेलरी, फर्नीचर, सी फूड जैसे भारतीय प्रोडक्ट्स महंगे हो जाएंगे। इससे इनकी मांग में 70% की कमी आ सकती है।
चीन, वियतनाम और मेक्सिको जैसे कम टैरिफ वाले देश इन सामानों को सस्ते दाम पर बेचेंगे। इससे भारतीय कंपनियों की अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी कम होगी।
1. मशीनरी और कलपुर्जे: ऑटोमोटिव पार्ट्स पर सबसे ज्यादा असर
पहले की स्थिति :
भारत ने 2024 में 19.16 बिलियन डॉलर (करीब 1.68 लाख करोड़ रुपए) के इंजीनियरिंग गुड्स निर्यात किए। इसमें स्टील प्रोडक्ट्स, मशीनरी, ऑटोमोटिव पार्ट्स, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, और अन्य औद्योगिक उपकरण शामिल हैं। अमेरिका कारों, छोटे ट्रकों और उनके पार्ट्स पर 25% शुल्क लगा रहा था, जबकि कॉमर्शियल वाहनों के पुर्जों पर यह शुल्क 10% था।
टैरिफ के बाद:
अमेरिका भारतीय ऑटो पार्ट्स के लिए सबसे बड़ा बाजार है। FY25 में ऑटो पार्ट्स के कुल निर्यात का लगभग 32% हिस्सा अमेरिका को गया।
टैरिफ बढ़ोतरी से 7 बिलियन डॉलर (लगभग ₹61,000 करोड़) के सालाना ऑटो पार्ट्स निर्यात में से ₹30,000 करोड़ का निर्यात प्रभावित हो सकता है।
वहीं इंजीनियरिंग गुड्स छोटे और मध्यम उद्यम सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे जो इंजीनियरिंग गुड्स के 40% निर्यात में योगदान देते हैं। इससे हजारों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
क्या कर सकता है भारत?
यूरोप (जर्मनी, UK) और ASEAN देशों (सिंगापुर, मलेशिया) में इंजीनियरिंग गुड्स की मांग बढ़ रही है। भारत इन बाजारों में हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।
इंजीनियरिंग गुड्स के लिए PLI स्कीम का विस्तार करके उत्पादन लागत को कम करना, ताकि कंपनियां अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी रहें।
2. इलेक्ट्रॉनिक्स: स्मार्टफोन पर ज्यादा असर
पहले की स्थिति :
भारत ने 2024 में अमेरिका को 14 बिलियन डॉलर (करीब 1.23 लाख करोड़ रुपए) के इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात किया था। इसमें स्मार्टफोन, खासतौर पर आईफोन का बड़ा हिस्सा है। भारत अमेरिका में आईफोन का सबसे बड़ा सप्लायर है। अप्रैल में जब डोनाल्ड ट्रम्प ने पहली बार टैरिफ का ऐलान किया था, उससे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स पर एवरेज 0.41% का टैरिफ लगता था।
अमेरिका में बिकने वाले 44% स्मार्टफोन भारत में बनते हैं।
टैरिफ के बाद:
अभी इलेक्ट्रॉनिक्स को छूट है। जब तक सेक्शन 232 टैरिफ की घोषणा नहीं होती तब तक अमेरिका को एपल, सैमसंग जैसे स्मार्टफोन्स के निर्यात पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सेक्शन 232 अमेरिकी व्यापार विस्तार अधिनियम 1962 का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर आयात पर टैरिफ लगाने की अनुमति देता है।
सेक्शन 232 की समीक्षा के बाद टैरिफ पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सेक्शन 232 टैरिफ की घोषणा के बाद अगर 50% का नया टैरिफ लागू होता है तो अमेरिका में भारत से एक्सपोर्ट होने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे हो जाएंगे। कंपनियां अमेरिका को भेजे जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम को किसी और देश में बनाने पर विचार कर सकती हैं।
क्या कर सकता है भारत?
स्मार्टफोन और सेमीकंडक्टर्स को टैरिफ से छूट बनाए रखने के लिए बातचीत करना।
घरेलू बाजार को मजबूत करने और नए ब्रांड्स विकसित करने पर जोर देना।
3. फार्मा: 250% टैरिफ लगाने की धमकी
पहले की स्थिति :
भारत ने 2024 में अमेरिका को 10.52 बिलियन डॉलर यानी, करीब 92 हजार करोड़ रुपए की दवाओं का निर्यात किया था। ये अमेरिकी फार्मा एक्सपोर्ट का करीब 40% हिस्सा है। अगर ये लागू होता है तो अमेरिका और भारत दोनों पर असर पड़ेगा।
टैरिफ के बाद:
अभी फार्मा को छूट है, लेकिन ट्रम्प ने 18 महीने में 150% और बाद में 250% टैरिफ की धमकी दी है। 100 डॉलर की दवा की कीमत दोगुनी हो जाएगी। इससे सन फार्मा, डॉ. रेड्डी, सिप्ला, ल्यूपिन जैसी बड़ी भारतीय कंपनियों को नुकसान होगा।
क्या कर सकता है भारत?
जेनेरिक दवाओं की कीमतों को कम रखने के लिए अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर जोर देना।
यूरोप और लैटिन अमेरिका जैसे वैकल्पिक बाजारों में निर्यात बढ़ाना।
4. जेम्स एंड ज्वेलरी: टैरिफ से पहले एक्सपोर्ट डबल
पहले की स्थिति:
भारत ने 2024 में अमेरिका को 9.94 बिलियन डॉलर (करीब 87 हजार करोड़) के रत्न और आभूषण एक्सपोर्ट किए थे। ये अमेरिकी हीरा आयात का 44.5% है। कुछ आभूषणों पर पहले से ही 25% तक टैरिफ था।
अमेरिका में कीमत बढ़ने से निर्यात में 15-20% की कमी हो सकती है।
टैरिफ के बाद:
नया टैरिफ बढ़कर 50% हो गया है। कीमत बढ़ने से निर्यात में 15-30% की कमी संभव है। अमेरिकी खरीदार सस्ते विकल्पों की ओर जा सकते हैं, जिससे भारतीय कारीगरों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
वहीं भारतीय कंपनियां दुबई और मेक्सिको जैसे देशों में मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं स्थापित करने पर विचार कर सकती हैं जहां टैरिफ कम हैं। दुबई में यह शुल्क सिर्फ 10% और मेक्सिको में 25% है, जबकि भारत को अब 50% का भुगतान करना होगा।
क्या कर सकता है भारत?
भारत-अमेरिका बाइलैटरल ट्रेड एग्रीमेंट को तेजी से पूरा करने पर जोर दे सकता है।
यूरोपीय बाजारों में डायमंड निर्यात बढ़ाना।
5. टेक्सटाइल: कपड़ों की मांग पर ब्रेक
पहले की स्थिति :
भारत ने 2024 में अमेरिका को 10 बिलियन डॉलर, यानी करीब 87 हजार करोड़ के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट किए थे। इसमें रेडीमेड गार्मेंट से लेकर कॉटन यार्न और कारपेट शामिल है।
इस साल की पहली तिमाही में भारत का कुल निर्यात 10% बढ़कर 4 बिलियन डॉलर हो गया, जिसमें अमेरिका को निर्यात 14% बढ़ा।
अमेरिका में भारतीय कपड़ों की कीमत बढ़ने से मांग घट सकती है।
टैरिफ के बाद:
नए टैरिफ से 50% भारतीय कपड़ों के कीमत बढ़ सकती है। कंपड़ों की मांग में 20-25% की कमी संभव है। अमेरिका में भारत के कपड़ा निर्यात का हिस्सा पिछले साल के 33% से घटकर इस साल 20-25% रह जाएगा।
क्या कर सकता है भारत?
अब भारतीय कपड़ा कंपनियों को यूरोपीय संघ (EU), यूनाइटेड किंगडम (UK) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे अन्य बड़े निर्यात बाजारों पर ध्यान देना होगा, जो भारत के कुल निर्यात का 45% हैं।
भारत के कपड़ा उद्योग ने सरकार से कच्चे कपास पर 11% का आयात शुल्क हटाने का सुझाव दिया है। इस कदम से अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में एक मजबूत सौदेबाजी का मौका मिल सकता है।
6. सी फूड सेक्टर: ₹24,000 करोड़ का कारोबार खतरे में
टैरिफ से पहले: भारत अभी अमेरिका को सालाना ₹60,000 करोड़ का समुद्री खाद्य निर्यात करता है। भारत के कुल सी फूड एक्सपोर्ट में अमेरिका को जाने वाला हिस्सा लगभग 40% है। इस सेक्टर से करीब 2 करोड़ भारतीयों को रोजगार मिलता है।
टैरिफ के बाद:
50% शुल्क से ₹24,000 करोड़ का कारोबार खतरे में पड़ सकता है। भारत के कॉम्पिटिटर, जैसे इक्वाडोर (10%), इंडोनेशिया (19%), और वियतनाम (20%) बहुत कम टैरिफ का भुगतान करते हैं। भारतीय सी फूड महंगा होने से इन देशों के फूड प्रोडक्ट्स ज्यादा बिकेंगे। इससे भारतीय कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी घट सकती है।
क्या कर सकता है भारत?
भारत को चीन और यूरोपीय देशों में अपने समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने की जरूरत होगी।
टैरिफ से ‘आम आदमी से इकोनॉमी तक’ किस पर क्या असर होगा, यहां समझिए…
1. आम आदमी पर असर
नौकरियां जाने का खतरा: CNBC की रिपोर्ट के मुताबिक भारत से अमेरिका को सबसे ज्यादा ज्वेलरी, कपड़े, मशीनरी और केमिकल एक्सपोर्ट किए जाते हैं। 50% टैरिफ से अमेरिका में ये चीजें महंगी हो जाएंगी और वहां से ऑर्डर मिलने कम हो जाएंगे।
ऑर्डर कम होने से कंपनियों को अपना प्रोडक्शन घटाना पड़ेगा, जिससे छंटनी हो सकती है। यानी इन सेक्टर्स में नौकरियां जाने का खतरा है। हालांकि किस सेक्टर से कितनी नौकरियां जाएंगी, इसका अंदाजा लगाना अभी मुश्किल है।
2. इकोनॉमी पर असर
सरकार की कमाई और GDP घटेगी: 50% टैरिफ लगने से अमेरिका को होने वाला निर्यात कम हो जाएगा। इससे सरकार को निर्यात से होने वाली कमाई में कमी आएगी। वहीं एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि भारत की GDP ग्रोथ 0.2% से 0.6% तक कम हो सकती है। इसके अलावा सरकार को अपनी व्यापार नीति में बदलाव करना पड़ सकता है।
3. अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर
50 देशों के लिए नई निर्यात रणनीति: सरकार को अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए यूरोप, रूस या अन्य देशों में व्यापार बढ़ाना होगा। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प के टैरिफ लगाने के बाद भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने लगभग 50 देशों के लिए नई निर्यात रणनीति बनाई है। इसके तहत भारत अब चीन, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के बाजारों पर फोकस करेगा।
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स की कोशिश: आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के साथ भारत ट्रेड डील कर चुका है। ये 1 अक्टूबर से लागू होगी। ब्रिटेन के साथ डील अगले साल अप्रैल से लागू हो सकती है। ओमान, चिली, पेरू, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ से बातचीत जारी है।
इंडस्ट्री बेस्ड मार्केट की तलाश: रिपोर्ट के मुताबिक भारत सीफूड के लिए रूस, यूके, यूरोपीय यूनियन, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और दक्षिण कोरिया पर फोकस कर रहा है। वहीं हीरे और आभूषण के लिए वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया और अफ्रीका जैसे बाजारों की ओर रुख कर रहा है।
वेलिंगटन, एजेंसी। बारिश से प्रभावित दूसरे वनडे में भारत ने न्यूजीलैंड को डकवर्थ-लुईस (DLS) नियम से 4 रन से हरा दिया। इस जीत के साथ टीम इंडिया ने 5 मैचों की सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली है।
वेलिंगटन में बारिश के कारण मुकाबला 47 ओवर का कर दिया गया था। टॉस जीतकर भारत ने पहले गेंदबाजी चुनी। न्यूजीलैंड की टीम 41 ओवर में 134 रन पर सिमट गई। डेरिल मिचेल ने सबसे ज्यादा 55 रन बनाए। भारत के लिए गुरनूर बरार ने 30 रन देकर 4 विकेट लिए और प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए।
135 रन का पीछा करते हुए भारत ने 26 ओवर में 7 विकेट पर 113 रन बनाए थे, तभी बारिश के कारण खेल रोकना पड़ा। इस समय DLS के तहत भारत का पार स्कोर 109 रन था। टीम इससे 4 रन आगे थी और इसी आधार पर जीत मिली। श्रेयस अय्यर ने 30, केएल राहुल ने नाबाद 26 और रोहित शर्मा ने 23 रन बनाए।
भारत ने 4 रन से जीता मुकाबला
वेलिंगटन में बारिश के कारण भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुकाबला रद्द हो गया। भारत ने DLS मेथड से 4 रन से जीत दर्ज की। न्यूजीलैंड की टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए 134 रन पर ऑलआउट हो गई थी। बारिश के कारण मैच दोबारा शुरू नहीं हो सका और भारत ने मुकाबला अपने नाम कर लिया।
बारिश की वजह से भारत ने 26 ओवर की बल्लेबाजी की और मैच जीत लिया।
नई दिल्ली, एजेंसी। पेट्रोल में तय सीमा से ज्यादा एथेनॉल मिलने के आरोप पर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने X पर लिखा- ‘E20 अब 420 बन गया है, जनता की गाड़ी से पेट्रोल चोरी हो रहा है।’
राहुल के मुताबिक, कर्नाटक सरकार ने 7 जिलों से पेट्रोल के 14 सैंपल लेकर मान्यता प्राप्त लैब में जांच कराई। इनमें 11 सैंपल में एथेनॉल की मात्रा 20% से ज्यादा मिली। इंडियन ऑयल के एक सैंपल में यह 31.2% और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के सैंपल में 30.5% थी।
हालांकि, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने जांच के नतीजों पर सवाल उठाए हैं। कंपनियों का कहना है कि सैंपल की जांच तय कानूनी और तकनीकी मानकों के मुताबिक नहीं हुई।
राहुल बोले- कस्टमर के पास कोई विकल्प नहीं
ज्यादा एथेनॉल वाला पेट्रोल इस्तेमाल करने से गाड़ियों का माइलेज घट सकता है और मरम्मत का खर्च बढ़ सकता है। आम लोग महंगे पेट्रोल के पैसे दे रहे हैं, लेकिन उनकी गाड़ियां इतनी ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल के लिए नहीं बनी हैं। इससे गाड़ियों को नुकसान हो सकता है और बार-बार मैकेनिक के पास जाना पड़ सकता है।
ग्राहकों को यह नहीं बताया जा रहा कि उनकी गाड़ी में कितना एथेनॉल मिला पेट्रोल डाला जा रहा है। ऐसे में उनके पास कोई विकल्प भी नहीं है।
देशभर में बिक रहे पेट्रोल में वास्तव में कितनी मात्रा में एथेनॉल मिलाया जा रहा है। उन्होंने तय सीमा से ज्यादा एथेनॉल मिलाने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
तीन तेल कंपनियों ने जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल
कर्नाटक सरकार के विभाग ने दावा किया था कि राज्य के कुछ पेट्रोल पंपों पर बिक रहे पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 26% से 31% के बीच थी।
इस पर इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने कहा कि कर्नाटक समेत देशभर में सप्लाई किया जा रहा E20 पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के तय मानक आईएस 17021 के मुताबिक है। यह मानक एथेनॉल मिले पेट्रोल के लिए तय किया गया है।
कंपनियों ने अक्टूबर में लिए गए सैंपल की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2005 के सरकारी आदेश और 2024 की मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस में सैंपल लेने, उन्हें सुरक्षित रखने, जांच कराने और रिपोर्ट देने के नियम तय हैं।
किस कंपनी के पेट्रोल में कितना एथेनॉल मिला?
लैब जांच में सामने आया कि सभी बड़ी तेल कंपनियों के पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20% की लिमिट से काफी ज्यादा थी। बेंगलुरु अर्बन सहित 7 जिलों के सैंपलों में IOCL के पेट्रोल में सबसे ज्यादा 31.2% तक एथेनॉल मिला। इसके अन्य सैंपल में 20.8% एथेनॉल पाया गया।
वहीं, HPCL के पावर पेट्रोल में 30.5% और नॉर्मल पेट्रोल में 27% एथेनॉल पाया गया। BPCL के स्पीड पेट्रोल में 26.5% और अन्य सैंपल में 24.2% और 22.6% एथेनॉल मिला।
इसके अलावा, नायरा के पेट्रोल में 26.1%, शेल के पेट्रोल में 25.5% और MRPL के पेट्रोल में 19.2% तक एथेनॉल दर्ज किया गया।
गाड़ी मालिकों को रू.1 लाख करोड़ का नुकसान
कर्नाटक के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अरशद ने कहा कि केंद्र सरकार को देश की जनता के सामने साफ करना चाहिए कि उन्हें असल में कितना एथेनॉल वाला ईंधन दिया जा रहा है। कर्नाटक सरकार के आंकड़ों के मुताबिक…
माइलेज गिरने से नुकसान: अगर पेट्रोल में ज्यादा एथेनॉल की वजह से माइलेज में 10% की गिरावट आती है, तो देशभर के गाड़ी मालिकों को सालाना रू.62,000 करोड़ का नुकसान होगा।
मेंटेनेंस का अतिरिक्त खर्च: गाड़ियों के इंजन खराब होने और सर्विसिंग बार-बार कराने की वजह से रू.39,000 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
तेल कंपनियों ने सैंपल दोबारा जांच के लिए देने की मांग की
तेल कंपनियों के मुताबिक, नियमों के तहत पेट्रोल के 1-1 लीटर के 6 सैंपल लिए जाते हैं। इनमें से 2 सैंपल पेट्रोल पंप संचालक को रसीद देकर दिए जाते हैं, 2 तेल कंपनी या संबंधित विभाग के पास रखे जाते हैं और बाकी 2 जांच के लिए तय लैब में भेजे जाते हैं।
कंपनियों ने कहा कि सैंपल के लेबल पर संबंधित पक्षों के हस्ताक्षर होने चाहिए। जांच रिपोर्ट तय समय में पेट्रोल पंप संचालक और तेल कंपनी को दी जानी चाहिए।
तीनों कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से सैंपल लेने की प्रक्रिया के दस्तावेज, हर पेट्रोल पंप की जांच रिपोर्ट और जांच के तरीके की जानकारी मांगी है।
कंपनियों ने कर्नाटक सरकार से सैंपल दोबारा जांच के लिए देने को कहा है। उन्होंने मांग की है कि जांच अधिकृत लैब में हो और इसमें राज्य सरकार व तेल कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहें। कंपनियों का कहना है कि उनके यहां से सप्लाई होने वाला E20 पेट्रोल बीआईएस के मानकों के मुताबिक है।
शामली, एजेंसी। हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की हत्या के दो आरोपियों ने फर्जी एनकाउंटर की आशंका जताते हुए दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से सुरक्षा मांगी है। आरोपियों ने कोर्ट से कहा कि उन्हें यूपी के शामली ले जाते समय हथकड़ी, बेड़ियां और बुलेटप्रूफ जैकेट पहनाई जाए, क्योंकि यूपी पुलिस उनका फर्जी एनकाउंटर कर सकती है।
इस पर कोर्ट ने जेल प्रशासन को दोनों की पेशी के दौरान पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए साथ ही कहा कि रास्ते में कोई अनहोनी न हो।
दोनों आरोपी फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। दोनों को 12 नवंबर, 2026 को शामली कोर्ट में पेश किया जाना है। शामली में 26 अगस्त को हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की जिम के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
26 अगस्त को शामली में वारदात के बाद लोगों ने अंकित का शव सड़क पर रखकर जाम लगा दिया था।
अंकित को 5 गोलियां लगी थीं। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी।
अंकित की स्कॉर्पियो के अगले शीशे पर 3 गोलियां लगी थीं। सड़क पर कई कारतूस पड़े थे।
नवंबर 2026 में हत्याकांड की साजिश में शामिल योगेश उर्फ टुंडा और दीपक उर्फ तीतर को गिरफ्तार करके कैराना कोर्ट में पेश किया था।
26 अगस्त को यूपी के शामली में एक जिम के बाहर हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
31 अगस्त 2026 को यूपी पुलिस और एसटीएफ ने कैराना में मुठभेड़ में शूटर मुहित और सुमित को मार गिराया था।
अक्टूबर 2026 फरार चल रहे आरोपी आर्यन सिंधु और सत्यम उपाध्याय की संपत्ति कुर्क की गई थी।
6 साल पहले शादी, पत्नी सरकारी टीचर
अंकित बालियान शामली के बंतीखेड़ा गांव के रहने वाले थे। वह हरियाणा के सोनीपत में रहते थे। हालांकि, पिछले कई महीनों से वह परिवार के साथ अपने गांव में रह रहे थे। उसके पिता सतबीर रिटायर्ड फौजी हैं, जबकि मां अमरेश गृहिणी हैं।
अंकित 4 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। अंकित की शादी 6 साल पहले सीमा के साथ हुई थी। सीमा दिल्ली में सरकारी टीचर हैं। दोनों के बच्चे नहीं थे।