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भारत पर 50% अमेरिकी टैरिफ आज से लागू:₹5.4 लाख करोड़ का एक्सपोर्ट प्रभावित; ज्वेलरी-कपड़ों की डिमांड 70% घट सकती है, नौकरियों पर भी संकट

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नई दिल्ली,एजेंसी। भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामानों पर आज यानी, 27 अगस्त से 50% टैरिफ लागू हो गया है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नया टैरिफ भारत के लगभग ₹5.4 लाख करोड़ के एक्सपोर्ट को प्रभावित कर सकता है।

50% टैरिफ से अमेरिका में बिकने वाले कपड़े, जेम्स-ज्वेलरी, फर्नीचर, सी फूड जैसे भारतीय प्रोडक्ट्स महंगे हो जाएंगे। इससे इनकी मांग में 70% की कमी आ सकती है।

चीन, वियतनाम और मेक्सिको जैसे कम टैरिफ वाले देश इन सामानों को सस्ते दाम पर बेचेंगे। इससे भारतीय कंपनियों की अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी कम होगी।

1. मशीनरी और कलपुर्जे: ऑटोमोटिव पार्ट्स पर सबसे ज्यादा असर

पहले की स्थिति :

भारत ने 2024 में 19.16 बिलियन डॉलर (करीब 1.68 लाख करोड़ रुपए) के इंजीनियरिंग गुड्स निर्यात किए। इसमें स्टील प्रोडक्ट्स, मशीनरी, ऑटोमोटिव पार्ट्स, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, और अन्य औद्योगिक उपकरण शामिल हैं। अमेरिका कारों, छोटे ट्रकों और उनके पार्ट्स पर 25% शुल्क लगा रहा था, जबकि कॉमर्शियल वाहनों के पुर्जों पर यह शुल्क 10% था।

टैरिफ के बाद:

अमेरिका भारतीय ऑटो पार्ट्स के लिए सबसे बड़ा बाजार है। FY25 में ऑटो पार्ट्स के कुल निर्यात का लगभग 32% हिस्सा अमेरिका को गया।

टैरिफ बढ़ोतरी से 7 बिलियन डॉलर (लगभग ₹61,000 करोड़) के सालाना ऑटो पार्ट्स निर्यात में से ₹30,000 करोड़ का निर्यात प्रभावित हो सकता है।

वहीं इंजीनियरिंग गुड्स छोटे और मध्यम उद्यम सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे जो इंजीनियरिंग गुड्स के 40% निर्यात में योगदान देते हैं। इससे हजारों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।

क्या कर सकता है भारत?

  • यूरोप (जर्मनी, UK) और ASEAN देशों (सिंगापुर, मलेशिया) में इंजीनियरिंग गुड्स की मांग बढ़ रही है। भारत इन बाजारों में हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।
  • इंजीनियरिंग गुड्स के लिए PLI स्कीम का विस्तार करके उत्पादन लागत को कम करना, ताकि कंपनियां अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी रहें।

2. इलेक्ट्रॉनिक्स: स्मार्टफोन पर ज्यादा असर

पहले की स्थिति :

भारत ने 2024 में अमेरिका को 14 बिलियन डॉलर (करीब 1.23 लाख करोड़ रुपए) के इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात किया था। इसमें स्मार्टफोन, खासतौर पर आईफोन का बड़ा हिस्सा है। भारत अमेरिका में आईफोन का सबसे बड़ा सप्लायर है। अप्रैल में जब डोनाल्ड ट्रम्प ने पहली बार टैरिफ का ऐलान किया था, उससे पहले इलेक्ट्रॉनिक्स पर एवरेज 0.41% का टैरिफ लगता था।

अमेरिका में बिकने वाले 44% स्मार्टफोन भारत में बनते हैं।

अमेरिका में बिकने वाले 44% स्मार्टफोन भारत में बनते हैं।

टैरिफ के बाद:

अभी इलेक्ट्रॉनिक्स को छूट है। जब तक सेक्शन 232 टैरिफ की घोषणा नहीं होती तब तक अमेरिका को एपल, सैमसंग जैसे स्मार्टफोन्स के निर्यात पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सेक्शन 232 अमेरिकी व्यापार विस्तार अधिनियम 1962 का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर आयात पर टैरिफ लगाने की अनुमति देता है।

सेक्शन 232 की समीक्षा के बाद टैरिफ पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सेक्शन 232 टैरिफ की घोषणा के बाद अगर 50% का नया टैरिफ लागू होता है तो अमेरिका में भारत से एक्सपोर्ट होने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगे हो जाएंगे। कंपनियां अमेरिका को भेजे जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम को किसी और देश में बनाने पर विचार कर सकती हैं।

क्या कर सकता है भारत?

  • स्मार्टफोन और सेमीकंडक्टर्स को टैरिफ से छूट बनाए रखने के लिए बातचीत करना।
  • घरेलू बाजार को मजबूत करने और नए ब्रांड्स विकसित करने पर जोर देना।

3. फार्मा: 250% टैरिफ लगाने की धमकी

पहले की स्थिति :

भारत ने 2024 में अमेरिका को 10.52 बिलियन डॉलर यानी, करीब 92 हजार करोड़ रुपए की दवाओं का निर्यात किया था। ये अमेरिकी फार्मा एक्सपोर्ट का करीब 40% हिस्सा है। अगर ये लागू होता है तो अमेरिका और भारत दोनों पर असर पड़ेगा।

टैरिफ के बाद:

अभी फार्मा को छूट है, लेकिन ट्रम्प ने 18 महीने में 150% और बाद में 250% टैरिफ की धमकी दी है। 100 डॉलर की दवा की कीमत दोगुनी हो जाएगी। इससे सन फार्मा, डॉ. रेड्डी, सिप्ला, ल्यूपिन जैसी बड़ी भारतीय कंपनियों को नुकसान होगा।

क्या कर सकता है भारत?

  • जेनेरिक दवाओं की कीमतों को कम रखने के लिए अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर जोर देना।
  • यूरोप और लैटिन अमेरिका जैसे वैकल्पिक बाजारों में निर्यात बढ़ाना।

4. जेम्स एंड ज्वेलरी: टैरिफ से पहले एक्सपोर्ट डबल

पहले की स्थिति:

भारत ने 2024 में अमेरिका को 9.94 बिलियन डॉलर (करीब 87 हजार करोड़) के रत्न और आभूषण एक्सपोर्ट किए थे। ये अमेरिकी हीरा आयात का 44.5% है। कुछ आभूषणों पर पहले से ही 25% तक टैरिफ था।

अमेरिका में कीमत बढ़ने से निर्यात में 15-20% की कमी हो सकती है।

अमेरिका में कीमत बढ़ने से निर्यात में 15-20% की कमी हो सकती है।

टैरिफ के बाद:

  • नया टैरिफ बढ़कर 50% हो गया है। कीमत बढ़ने से निर्यात में 15-30% की कमी संभव है। अमेरिकी खरीदार सस्ते विकल्पों की ओर जा सकते हैं, जिससे भारतीय कारीगरों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
  • वहीं भारतीय कंपनियां दुबई और मेक्सिको जैसे देशों में मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं स्थापित करने पर विचार कर सकती हैं जहां टैरिफ कम हैं। दुबई में यह शुल्क सिर्फ 10% और मेक्सिको में 25% है, जबकि भारत को अब 50% का भुगतान करना होगा।

क्या कर सकता है भारत?

  • भारत-अमेरिका बाइलैटरल ट्रेड एग्रीमेंट को तेजी से पूरा करने पर जोर दे सकता है।
  • यूरोपीय बाजारों में डायमंड निर्यात बढ़ाना।

5. टेक्सटाइल: कपड़ों की मांग पर ब्रेक

पहले की स्थिति :

भारत ने 2024 में अमेरिका को 10 बिलियन डॉलर, यानी करीब 87 हजार करोड़ के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट किए थे। इसमें रेडीमेड गार्मेंट से लेकर कॉटन यार्न और कारपेट शामिल है।

इस साल की पहली तिमाही में भारत का कुल निर्यात 10% बढ़कर 4 बिलियन डॉलर हो गया, जिसमें अमेरिका को निर्यात 14% बढ़ा।

अमेरिका में भारतीय कपड़ों की कीमत बढ़ने से मांग घट सकती है।

अमेरिका में भारतीय कपड़ों की कीमत बढ़ने से मांग घट सकती है।

टैरिफ के बाद:

नए टैरिफ से 50% भारतीय कपड़ों के कीमत बढ़ सकती है। कंपड़ों की मांग में 20-25% की कमी संभव है। अमेरिका में भारत के कपड़ा निर्यात का हिस्सा पिछले साल के 33% से घटकर इस साल 20-25% रह जाएगा।

क्या कर सकता है भारत?

  • अब भारतीय कपड़ा कंपनियों को यूरोपीय संघ (EU), यूनाइटेड किंगडम (UK) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे अन्य बड़े निर्यात बाजारों पर ध्यान देना होगा, जो भारत के कुल निर्यात का 45% हैं।
  • भारत के कपड़ा उद्योग ने सरकार से कच्चे कपास पर 11% का आयात शुल्क हटाने का सुझाव दिया है। इस कदम से अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में एक मजबूत सौदेबाजी का मौका मिल सकता है।

6. सी फूड सेक्टर: ₹24,000 करोड़ का कारोबार खतरे में

टैरिफ से पहले: भारत अभी अमेरिका को सालाना ₹60,000 करोड़ का समुद्री खाद्य निर्यात करता है। भारत के कुल सी फूड एक्सपोर्ट में अमेरिका को जाने वाला हिस्सा लगभग 40% है। इस सेक्टर से करीब 2 करोड़ भारतीयों को रोजगार मिलता है।

टैरिफ के बाद:

50% शुल्क से ₹24,000 करोड़ का कारोबार खतरे में पड़ सकता है। भारत के कॉम्पिटिटर, जैसे इक्वाडोर (10%), इंडोनेशिया (19%), और वियतनाम (20%) बहुत कम टैरिफ का भुगतान करते हैं। भारतीय सी फूड महंगा होने से इन देशों के फूड प्रोडक्ट्स ज्यादा बिकेंगे। इससे भारतीय कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी घट सकती है।

क्या कर सकता है भारत?

भारत को चीन और यूरोपीय देशों में अपने समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने की जरूरत होगी।

टैरिफ से ‘आम आदमी से इकोनॉमी तक’ किस पर क्या असर होगा, यहां समझिए…

1. आम आदमी पर असर

नौकरियां जाने का खतरा: CNBC की रिपोर्ट के मुताबिक भारत से अमेरिका को सबसे ज्यादा ज्वेलरी, कपड़े, मशीनरी और केमिकल एक्सपोर्ट किए जाते हैं। 50% टैरिफ से अमेरिका में ये चीजें महंगी हो जाएंगी और वहां से ऑर्डर मिलने कम हो जाएंगे।

ऑर्डर कम होने से कंपनियों को अपना प्रोडक्शन घटाना पड़ेगा, जिससे छंटनी हो सकती है। यानी इन सेक्टर्स में नौकरियां जाने का खतरा है। हालांकि किस सेक्टर से कितनी नौकरियां जाएंगी, इसका अंदाजा लगाना अभी मुश्किल है।

2. इकोनॉमी पर असर

सरकार की कमाई और GDP घटेगी: 50% टैरिफ लगने से अमेरिका को होने वाला निर्यात कम हो जाएगा। इससे सरकार को निर्यात से होने वाली कमाई में कमी आएगी। वहीं एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि भारत की GDP ग्रोथ 0.2% से 0.6% तक कम हो सकती है। इसके अलावा सरकार को अपनी व्यापार नीति में बदलाव करना पड़ सकता है।

3. अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर

50 देशों के लिए नई निर्यात रणनीति: सरकार को अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए यूरोप, रूस या अन्य देशों में व्यापार बढ़ाना होगा। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प के टैरिफ लगाने के बाद भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने लगभग 50 देशों के लिए नई निर्यात रणनीति बनाई है। इसके तहत भारत अब चीन, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के बाजारों पर फोकस करेगा।

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स की कोशिश: आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के साथ भारत ट्रेड डील कर चुका है। ये 1 अक्टूबर से लागू होगी। ब्रिटेन के साथ डील अगले साल अप्रैल से लागू हो सकती है। ओमान, चिली, पेरू, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ से बातचीत जारी है।

इंडस्ट्री बेस्ड मार्केट की तलाश: रिपोर्ट के मुताबिक भारत सीफूड के लिए रूस, यूके, यूरोपीय यूनियन, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड और दक्षिण कोरिया पर फोकस कर रहा है। वहीं हीरे और आभूषण के लिए वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया और अफ्रीका जैसे बाजारों की ओर रुख कर रहा है।

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CJI की नोएडा मजिस्ट्रेट को फटकार, बोले- हिम्मत कैसे हुई:CJP प्रदर्शन से जुड़ी FIR रद्द करने का आदेश दे चुके, फिर भी नोटिस क्यों

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नोएडा, एजेंसी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नोएडा के मजिस्ट्रेट को फटकार लगाई। बुधवार को CJI सूर्यकांत ने कहा, ‘जब सुप्रीम कोर्ट ने छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी FIR रद्द कर दी हैं। विरोध प्रदर्शनों को लेकर किसी भी छात्र के खिलाफ भविष्य में जबरदस्ती की कार्रवाई पर रोक लगाई है। ऐसे में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने छात्र को नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की? कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।’

दरअसल, 4 सितंबर को नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट आर के सिसोदिया ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) प्रदर्शन में शामिल छात्र अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ नोटिस जारी किया था। इसमें 5 लाख रुपए का बॉन्ड और इतनी ही रकम के दो जमानतदार पेश करने को कहा गया था। इसके बाद छात्र ने मंगलवार को वीडियो जारी कर कहा था- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद मुझे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए धमकाया जा रहा है।

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट विश्वजीत भट्टाचार्य ने मौखिक रूप से CJI की अध्यक्षता वाली बेंच को यह बात बताई। उन्होंने बताया कि एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने एक छात्र को नोटिस जारी कर पूछा कि शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपए का पर्सनल बॉन्ड क्यों न भरवाया जाए। बाद में नोटिस वापस ले लिया गया।

यह वह नोटिस है, जिसे नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यालय ने छात्र को जारी किया था।

यह वह नोटिस है, जिसे नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यालय ने छात्र को जारी किया था।

सुप्रीम कोर्ट बोला- जिला मजिस्ट्रेट से जवाब मांगेंगे

वकील भट्टाचार्य ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- यह भारत के छात्रों के साथ एक प्रयोग किया जा रहा है। इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा। पहले अवमानना की गई और फिर उसे वापस लिया गया। इस अवमानना को इस तरह सुधारा नहीं जा सकता।

यह कोर्ट की गरिमा की अवमानना है। नोएडा और यूपी के अधिकारी छात्रों के मन में डर का माहौल नहीं बना सकते हैं। इस पर CJI सूर्यकांत ने भरोसा दिलाते हुए कहा- हम जिला मजिस्ट्रेट से इस पर जवाब मांगेंगे।

तस्वीर छात्र अक्षत त्रिपाठी की है। मंगलवार को उन्होंने वीडियो जारी करके कहा था- मैं छात्र हूं। ऐसे में इतनी बड़ी राशि की शर्त मेरे लिए कैसे व्यावहारिक है

तस्वीर छात्र अक्षत त्रिपाठी की है। मंगलवार को उन्होंने वीडियो जारी करके कहा था- मैं छात्र हूं। ऐसे में इतनी बड़ी राशि की शर्त मेरे लिए कैसे व्यावहारिक है

4 सितंबर को नोटिस दिया, अगले दिन रद्द कर दिया

छात्र अक्षत त्रिपाठी प्रयागराज के झूंसी के रहने वाले हैं। वह गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) से BA-LLB कर रहे हैं। अक्षत त्रिपाठी स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ( SFI) की उत्तर प्रदेश स्टेट कमेटी के सदस्य भी हैं। 4 सितंबर 2026 को उनके खिलाफ नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया।

कोर्ट ने नोटिस में कहा गया था- यह मानने के पर्याप्त आधार हैं कि त्रिपाठी विश्वविद्यालय के छात्रों को CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। वह छात्रों के बीच सरकार विरोधी और भ्रामक सूचनाएं फैला रहे थे। ऐसी गतिविधियों से तनाव पैदा हो सकता है। सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

अक्षत त्रिपाठी से पूछा गया था कि क्यों न उन्हें 6 महीने तक शांति बनाए रखने के लिए पाबंद किया जाए। इसके लिए उनसे 5 लाख रुपए का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने को कहा जाए। मामले में सुनवाई के लिए 5 सितंबर की तारीख तय की गई थी।

ACP रवि शंकर ने बताया-

जांच के दौरान अक्षत त्रिपाठी का नाम सामने आया था। पता चला था कि वह जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट में शामिल होने गया था। पुलिस ने वॉट्सऐप के जरिए छात्र को नोटिस भेजा था। 5 सितंबर को नोटिस कैंसिल कर दिया गया। छानबीन में पता चला कि छात्र उस दौरान वहां मौजूद नहीं था।

ACP ने बताया कि इससे पहले नवंबर में छात्र ने आत्महत्या करने की बात कहते हुए वीडियो बनाया था, जो वायरल हो गया था। वीडियो वायरल होने के बाद वह गायब हो गया था, जिसके बाद पुलिस ने उसे तलाशा था।

छात्र ने वीडियो जारी करके कहा- क्या सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलना जुर्म

  • छात्र ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया। इसमें कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद CJP प्रदर्शन में शामिल होने के लिए धमकाया जा रहा है। क्या लोकतंत्र में सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलना या पेपर लीक जैसे मुद्दों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना अपराध है? इसी मामले में ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट की तरफ से मुझे नोटिस मिला है। इसमें 5 लाख रुपए का निजी बॉन्ड देने को कहा गया है। मैं छात्र हूं और मेरी कोई व्यक्तिगत आय नहीं है। ऐसे में इतनी बड़ी राशि की शर्त मेरे लिए कैसे व्यावहारिक है?
  • नोटिस में आरोप है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन में शामिल होकर मैंने विश्वविद्यालय के छात्रों को सरकार के खिलाफ भड़काया। सवाल है कि सरकार की नीति की आलोचना करना, सरकार से सवाल पूछना या पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाना भड़काना कैसे हो गया? मुझ पर लगाए गए आरोपों का आधार और प्रमाण क्या है?
  • मैं 3 महीने से विश्वविद्यालय गया ही नहीं हूं। 20 जुलाई के प्रदर्शन से करीब डेढ़ महीने पहले ही अपने घर इलाहाबाद आ चुका था। ऐसे में मैंने विश्वविद्यालय के छात्रों को भड़काया कैसे? मैं इस कार्रवाई की निंदा करता हूं और निष्पक्ष जांच की मांग करता हूं।

9 दिन पहले SC जंतर-मंतर प्रोटेस्ट की सभी FIR रद्द की थीं

सुप्रीम कोर्ट ने 9 दिन पहले कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से जुड़ी सभी FIR को रद्द कर दिया। यह आदेश देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज मामलों पर लागू होगा। कोर्ट ने साफ किया था कि जिन प्रदर्शनकारियों का आपराधिक रिकॉर्ड है, उन पर केस चलता रहेगा। ये FIR 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों के बाद दर्ज की गई थीं।

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देश

राहुल गांधी ने मोबाइल पर मंत्री को टूटी सड़कें दिखाईं:रायबरेली में अफसरों से पूछा- सरकार पैसे दे रही तो काम क्यों नहीं हो रहा?

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रायबरेली, एजेंसी। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रायबरेली में बुधवार को बैठक में कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय को अपने मोबाइल पर टूटी सड़कें दिखाईं। राहुल ने डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट कोऑर्डिनेटिंग कमेटी (दिशा) की मीटिंग में जर्जर सड़कों और गड्‌ढों की तस्वीरें दिखाकर PWD अधिकारियों और डीएम से पूछा कि सड़कों की हालत ऐसी क्यों है?

राहुल ने कहा कि जब सरकार फंड दे रही है तो काम क्यों नहीं हो रहा है? आप लोग क्या कर रहे हैं? इस मीटिंग में ऊंचाहार से BJP विधायक मनोज पांडेय, एमएलसी और राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह भी मौजूद थे।

कलेक्ट्रेट में करीब ढाई घंटे बैठक से पहले राहुल ने सुबह जनता दरबार लगाया, जहां महिला कांग्रेस नेता ने उन्हें राखी बांधी। राहुल ने यहां सपा नेताओं ने भी मुलाकात की।

कार्यक्रमों के बाद राहुल लखनऊ रवाना हो गए, जहां से वे दिल्ली जाएंगे। 2024 में सांसद बनने के बाद राहुल का यह 8वां रायबरेली दौरा था। इससे पहले वे 19-20 मई को दो दिवसीय दौरे पर आए थे।

राहुल मंगलवार दोपहर दिल्ली से एयर इंडिया की फ्लाइट से लखनऊ पहुंचे थे। पहली बार में विमान लैंड नहीं कर पाया था। 25 मिनट हवा में चक्कर लगाने के बाद दूसरे प्रयास में विमान ने लैंडिंग की थी।

रायबरेली में सर्राफा कारोबारी के घर बैठक के दौरान राहुल ने बच्ची से हाथ मिलाया। महिलाओं ने उन्हें बुके दिया।

रायबरेली में सर्राफा कारोबारी के घर बैठक के दौरान राहुल ने बच्ची से हाथ मिलाया। महिलाओं ने उन्हें बुके दिया।

रायबरेली में राहुल गांधी के जनता दरबार के दौरान भुएमऊ गेस्ट हाउस पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।

रायबरेली में राहुल गांधी के जनता दरबार के दौरान भुएमऊ गेस्ट हाउस पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।

रायबरेली में राहुल गांधी ने 3 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें बारात घर, ट्रांसफॉर्मर और सड़कें शामिल हैं।

रायबरेली में राहुल गांधी ने 3 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें बारात घर, ट्रांसफॉर्मर और सड़कें शामिल हैं।

सपा विधायकों ने प्रदर्शन किया, पोस्टर लहराए

रायबरेली में सपा विधायक राहुल लोधी, श्याम सुंदर भारती ने दिशा की मीटिंग के दौरान हॉल के बाहर प्रदर्शन किया। हालांकि, राहुल के पहुंचने से पहले पुलिस ने उनसे पोस्टर और बैनर छीन लिए।

पोस्टर पर लिखा था- स्कूल बंद, फर्जी मुकदमे लिखे जा रहे, जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं। जिले में आम लोगों की समस्याएं जस की तस हैं, तो ऐसे में दिशा की बैठक का क्या औचित्य है?

रायबरेली में हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी और बछरावां से सपा विधायक श्याम सुंदर भारती ने पोस्टर-बैनर लेकर दिशा बैठक हॉल के बाहर प्रदर्शन किया।

रायबरेली में हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी और बछरावां से सपा विधायक श्याम सुंदर भारती ने पोस्टर-बैनर लेकर दिशा बैठक हॉल के बाहर प्रदर्शन किया।

सांसद-जनप्रतिनिधि अफसरों से सरकारी योजनाओं को लेकर सवाल करते हैं। जनता को योजनाओं का फायदा मिल रहा है या नहीं, काम में देरी को लेकर जवाब मांगते हैं।

‘दिशा’ (DISHA) बैठक की अध्यक्षता क्षेत्र के सांसद करते हैं। इसमें जिले के सभी विधायक, डीएम, एसपी और सभी सरकारी विभागों के बड़े अफसर एक साथ बैठते हैं।

राहुल ने मंत्री के सामने दिखाए खराब सड़कों के वीडियो

दिशा बैठक के दौरान अपने मोबाइल में राहुल गांधी ने रायबरेली की सड़कों के गड्ढे दिखाए। इस दौरान कैबिनेट मंत्री मनोज पांडे भी वीडियो देखते रहे। राहुल गांधी ने PWD विभाग के अधिकारियों और डीएम से इन सड़कों की बदहाली को लेकर सवाल पूछा। राहुल ने पूछा कि जिले की सड़कें इतनी खराब क्यों हैं? जब सरकार फंड दे रही है तो सड़कों पर काम क्यों नहीं हो रहा है। पूरे जिले के मुख्स मार्ग और ग्रामीण लिंक रोड बहुत खराब हैं। इसे लेकर क्या कर रहे हैं?

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खेल

एशियन गेम्स से 10 दिन पहले जापान में बाढ़:400 खिलाड़ी-स्टाफ को सुरक्षित जगह शिफ्ट किया गया, मेयर बोले- इवेंट पर असर नहीं पड़ेगा

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नागोया/नई दिल्ली, एजेंसी। एशियन गेम्स की शुरुआत से 10 दिन पहले जापान के नागोया में बाढ़ आ गई। स्थिति यह बनी की एशियन गेम्स में भाग लेने आए 400 खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया।

बाढ़ में नागोया शहर की सड़कें और घर डूब गए। मेयर इचिरो हिरोसावा ने दावा किया कि एशियन गेम्स के लिए कोई चिंता की बात नहीं है। टूर्नामेंट का आयोजन तय समय पर होगा।

नागोया में 19 सितंबर को एशियन गेम्स की ओपनिंग सेरेमनी होनी है।

नागोया बाढ़ की तस्वीरें…

बाढ़ के पानी में सड़कें डूब गई हैं।

बाढ़ के पानी में सड़कें डूब गई हैं।

बाढ़ में फंसी गाड़ी को धक्का मारते लोग।

बाढ़ में फंसी गाड़ी को धक्का मारते लोग।

नागोया में बाढ़ के पानी में गाडियों के टायर डूब गए।

नागोया में बाढ़ के पानी में गाडियों के टायर डूब गए।

3500 लोगों ने इमरजेंसी शेल्टर में शरण ली

बस और मेट्रो सेवाएं कुछ समय के लिए प्रभावित रहीं। करीब 3,500 लोगों ने इमरजेंसी शेल्टर में शरण ली। नागोया और इची में एशियन गेम्स 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने हैं।

रिपोर्ट- वेन्यू में कुछ जगह छतों से पानी टपक रहा

जापानी मीडिया में शहर की सड़कों और मेट्रो स्टेशनों में भरे पानी की तस्वीरें दिखाई गईं। न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, वेन्यू की कुछ जगहों पर छतों से पानी टपकने की घटनाएं भी हुईं। हालांकि मेयर हिरोसावा ने कहा कि एशियन गेम्स के दर्जनों वेन्यू को गंभीर नुकसान नहीं हुआ है।

भारत गेम्स में 768 सदस्यीय दल भेज रहा

खेल मंत्रालय ने जापान के आइची और नागोया में होने वाले 20वें एशियन गेम्स के लिए 503 खिलाड़ी और 255 सपोर्ट स्टाफ भेजने की जानकारी दी है। सपोर्ट स्टाफ में कोच, मैनेजर, फिजियो और मेडिकल टीम आदि शामिल है।

  • 36 खेलों में उतरेगा भारत: पहले 35 खेलों के 492 एथलीटों को मंजूरी दी गई थी, लेकिन 4 सर्फर्स सहित नए नाम जुड़ने से अब भारत 36 खेलों में हिस्सा लेगा।
  • एथलेटिक्स दल में सबसे बड़ी बढ़ोतरी: एथलेटिक्स टीम के खिलाड़ियों की संख्या 73 से बढ़ाकर 79 कर दी गई है। एथलेटिक्स और क्रिकेट को सबसे ज्यादा सपोर्ट स्टाफ दिया गया है।
  • दल के प्रमुख अधिकारी: दल प्रमुख के रूप में सहदेव यादव और मुख्य मेडिकल अधिकारी के रूप में डॉ. दिनशॉ पार्डीवाला भारतीय दल का नेतृत्व करेंगे।

भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम 19 सितंबर को रवाना होगी

डिफेंडिंग चैंपियन भारत एशियन गेम्स के लिए टीम घोषित कर चुका है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली टीम में युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी भी शामिल हैं। भारतीय टीम 19 सितंबर को सानो के लिए रवाना होगी। इसगे अगले दिन टीम प्रैक्टिस सेशन में हिस्सा लेगी।

महिला क्रिकेट टीम पहले पहुंचेगी

हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम दुबई में एशिया कप खेलने के बाद 13 सितंबर को भारत लौटेगी और 14 सितंबर को नागोया के लिए रवाना होगी।

महिला टीम एशियन गेम्स में सीधे क्वार्टर फाइनल से अभियान शुरू करेगी। उसका पहला मुकाबला 18 सितंबर को होगा। महिलाओं का यह टूर्नामेंट 22 सितंबर तक चलेगा।

गेम्स में ठहरने की व्यवस्थाओं पर भी विवाद था

इससे पहले खबर आई थी कि BCCI और PCB गेम्स के आयोजकों से नाराज है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि खिलाड़ियों को स्टेडियम से 20 किमी दूर छोटे होटल कमरों में ठहराया गया है, जहां बैग खोलने तक की जगह नहीं है। वहीं ड्रेसिंग रूम पक्के मकान की जगह टेंट में बने हैं और वॉशरूम 500 मीटर दूर है।

इसपर JCA के CEO नाओकी एलेक्स मियाजी ने कहा था- ‘हमने क्रिकेट टीम को होटल का विकल्प दिया है। जबकि कई अन्य खेलों के खिलाड़ियों के लिए क्रूज शिप या कंटेनर होटल जैसी सीमित सुविधाएं हैं।’

  • प्लेयर एरिया में टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध रहेगी। मैदान पर बने ड्रेसिंग रूम भले ही अस्थाई हों, लेकिन इन्हें इस तरह तैयार किया गया है कि खिलाड़ियों और अधिकारियों को पूरा आराम मिले।
  • पिच और आउटफील्ड कम समय में सीमित संसाधनों के बीच तैयार की गई है। यह एशियन गेम्स के इतिहास में क्रिकेट की सबसे बेहतरीन प्लेइंग सरफेस होगी। श्रीलंकाई क्यूरेटर्स की मदद से यहां टर्फ और हाइब्रिड पिच तैयार की जा रही है।

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