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श्रीजगन्नाथ की 60 हजार एकड़ जमीन, इसपर कब्जे की भरमार:ओडिशा सरकार कब्जाधारियों को जमीन बेचकर ₹10000 करोड़ जुटाएगी, मुख्य पुजारी की आपत्ति
भुवनेश्वर ,एजेंसी। चार धामों में से एक, ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की जमीन संकट में है। यहां भगवान की जमीन पर कब्जा और अवैध खरीद-फरोख्त का मामला पिछले कुछ महीने से सुर्खियों में है। राज्य में भगवान जगन्नाथ की कुल 60 हजार 426 एकड़ जमीन है। इसके एक बड़े हिस्से पर सालों से अवैध कब्जा बना हुआ है।
खुद राज्य सरकार ने विधानसभा में माना है कि भगवान की जमीन पर अवैध कब्जे के 974 मामले दर्ज हैं। अब सरकार इन कब्जाधारियों को जमीन बेचकर 8 से 10 हजार करोड़ रुपए फंड जुटाने की तैयारी कर रही है। हालांकि जगन्नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी इसका विरोध कर रहे हैं।
ताजा विवाद तब शुरू हुआ जब मंदिर प्रशासन ने कब्जाधारियों पर मंदिर से दो किलोमीटर दूर भगवान की 64 एकड़ जमीन बेचने का आरोप लगाया। यानी, सरकार से पहले कब्जाधारी ही भगवान की जमीन बेचकर पैसा कमाने में जुट गए।
इस मामले में पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह भगवान की जमीन पर कब्जा और उसे बेचने के मामले में गिरफ्तारी का पहला मामला है। मीडिया ने मौके पर जाकर पूरा मामला समझने की कोशिश की।
512 करोड़ की कीमत वाली 64 एकड़ जमीन बेचने का आरोप
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने 16 नवंबर को पुरी के बसेलिसाही पुलिस स्टेशन में महावीर जन सेवा संघ नाम के संगठन के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। संगठन से जुड़े लोगों पर माटीतोटा इलाके में 64 एकड़ में फैले 109 प्लॉट की अवैध खरीद-फरोख्त का आरोप है। इन प्लॉट्स की मौजूदा मार्केट वैल्यू करीब 512 करोड़ है।
पुलिस ने 20 दिसंबर को संगठन के अध्यक्ष और इससे जुड़े 6 लोगों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान सिसुला बेहरा, सानिया बेहरा, जसोबंता बेहरा, मोहन बेहरा, रत्नाकर बेहरा और बाबू बेहरा के तौर पर की गई।
पुलिस ने दावा किया कि आरोपियों ने कुल खाता नंबर-38 के 109 प्लॉट में से केवल प्लॉट नंबर-143 की अवैध बिक्री की थी। इसके लिए 28 लाख रुपए का लेन-देन भी हुआ था। आरोपियों के पास से 4.5 लाख रुपए कैश भी जब्त हुए।’
मीडिया की पड़ताल में एक और प्लॉट बेचने का खुलासा
हालांकि मीडिया की पड़ताल में खाता नंबर-38 का प्लॉट नंबर-118 बेचने का भी पता चला। इस प्लॉट का एक डॉक्यूमेंट भी हाथ लगा, जिसके मुताबिक महावीर जन सेवा संघ ने 23 अक्टूबर, 2023 को खाता नंबर-38 के प्लॉट नंबर-118 की 30 डिसमिल जमीन निखिल उत्कल विश्वकर्मा समिति नाम के एक दूसरे संगठन को 3 लाख रुपए में दी थी।
डॉक्यूमेंट पर महावीर जन सेवा संघ का रजिस्ट्रेशन नंबर 5902/119/2002 और निखिल उत्कल विश्वकर्मा समिति का रजिस्ट्रेशन नंबर 224/19/1985 भी दर्ज है। ओडिशा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर खाता नंबर-38 का प्लॉट नंबर-118 भगवान जगन्नाथ के नाम पर दर्ज है।

आरोपियों ने इस प्लॉट को नोटरी के जरिए निखिल उत्कल विश्वकर्मा समिति को बेच दिया। अब यहां बाउंड्री भी कर दी गई है। जमीन के लेन-देन को वैध दिखाने के लिए इसे अतिक्रमण हस्तांतरण प्रक्रिया (एनक्रोचमेंट ट्रांसफर प्रोसेस) का नाम दे दिया गया।
जमीन माफिया यह दिखाना चाहते थे कि उनका इस जमीन पर सालों से कब्जा है और उन्होंने 3 लाख रुपए लेकर खरीदार को उस जमीन का कब्जा ट्रांसफर कर दिया। जमीन बेचने वालों में शामिल सुशांत बेहरा और भिखारी बेहरा, महावीर जन सेवा संघ का पूर्व अध्यक्ष और पूर्व उपाध्यक्ष रह चुका है। दोनों अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। गिरफ्तार हुए 6 लोगों में सुशांत बेहरा का बेटा भी शामिल है।

प्लॉट नंबर- 118 को बाउंड्री से घेरकर लोहे का गेट लगा दिया गया है।
मंदिर की देखरेख के लिए बनाया गया था महावीर जन सेवा संघ
जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने माटितोटा में जिन 109 प्लॉट्स को बेचने का आरोप लगाया है, उन पर अभी करीब 200 परिवारों का अतिक्रमण है। यहां एक हनुमान मंदिर भी है, जो श्रीजगन्नाथ की जमीन पर ही बना है। साल 2002 में इस मंदिर की देखरेख के लिए महावीर जन सेवा संघ क्लब बनाया गया था।
इस क्लब में करीब 30 लोग शामिल हैं, जिनमें ज्यादातर दिहाड़ी मजदूर या मछुआरे हैं। इन्होंने हनुमान मंदिर और उसके आसपास की कई जमीन को हड़प कर अपने परिवार के सदस्यों, क्लब मेंबर्स और बाहरी लोगों को बेच दिया।

माटितोटा का हनुमान मंदिर, जिसकी देखरेख महावीर जन सेवा संघ करता है।
खुर्दा में श्रीजगन्नाथ की सबसे ज्यादा जमीन, पुरी दूसरे नंबर पर
भगवान की जमीन बेचने का मामला सामने आया तो राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने घोषणा कर दी कि सरकार कब्जाधारियों को जमीन बेच देगी। कानून मंत्री ने कहा, ‘पुरी सहित राज्य के अन्य जिलों में लोगों का लंबे समय से जमीन पर कब्जा रहा है। हम उन्हें किफायती दरों पर जमीन बेचने की योजना बना रहे हैं। इससे 8 से 10 हजार करोड़ रुपए तक का फंड जोड़ा जा सकता है।’
पूर्व बीजद सरकार ने 2023 में विधानसभा में बताया था कि ओडिशा के 30 जिलों में से 24 जिलों में भगवान जगन्नाथ की 60 हजार 426 एकड़ जमीन है। राज्य के बाहर महाप्रभु की 395 एकड़ जमीन है। ओडिशा के खुर्दा जिले में भगवान की सबसे ज्यादा 26 हजार 816 एकड़ जमीन है। दूसरे नंबर पर पुरी है, जहां 16 हजार 712 एकड़ जमीन है।
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बुनियादी उद्योगों का उत्पादन मार्च में 0.4% घटा, पांच माह की पहली गिरावट
नई दिल्ली,एजेंसी। कोयला, कच्चे तेल, उर्वरक और बिजली के उत्पादन में गिरावट के कारण मार्च में आठ बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। पांच माह में बुनियादी उद्योगों का उत्पादन पहली बार घटा है। फरवरी, 2026 में, आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 2.8 प्रतिशत बढ़ा था।
वित्त वर्ष 2025-26 में बुनियादी उद्योगों की उत्पादन वृद्धि दर घटकर 2.6 प्रतिशत रह गई। वित्त वर्ष 2024-25 में बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 4.5 प्रतिशत बढ़ा था।

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बिंदी-तिलक विवाद में Lenskart को झटका, डूबे 4500 करोड़!
मुंबई, एजेंसी। देश की बड़ी आईवियर कंपनी में से एक Lenskart को बिंदी, तिलक से जुड़ा विवाद काफी महंगा पड़ गया। सोमवार को कंपनी के शेयर में बड़ी गिरावट आई है, जिससे इसकी मार्केट वैल्यूएशन में करीब 4,500 करोड़ रुपए की कमी आ गई।
विवाद की वजह कंपनी की एक पुरानी इंटरनल ग्रूमिंग पॉलिसी बनी, जो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इस पॉलिसी में कथित तौर पर कर्मचारियों को बिंदी, तिलक जैसे कुछ धार्मिक प्रतीकों को पहनने से रोकने की बात कही गई थी। इसके बाद ऑनलाइन विरोध तेज हो गया और कंपनी के बहिष्कार की मांग भी उठने लगी।

शेयर में गिरावट
BSE पर कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर करीब 5% तक गिरकर 508.70 रुपए के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी आई और यह 533.70 रुपए के आसपास बंद हुआ।
गिरावट के दौरान कंपनी की वैल्यूएशन घटकर लगभग 88,331 करोड़ रुपए रह गई, जो पहले करीब 92,872 करोड़ रुपए थी यानी एक ही सत्र में करीब 4,540 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। बाद में आंशिक सुधार के साथ वैल्यूएशन में कुछ बढ़त भी दर्ज की गई।
कंपनि ने दी थी सफाई
इस विवाद पर कंपनी के फाउंडर Peyush Bansal ने सफाई देते हुए कहा कि वायरल डॉक्यूमेंट पुराना है और मौजूदा पॉलिसी को नहीं दर्शाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी में किसी भी धार्मिक पहनावे या प्रतीकों पर कोई प्रतिबंध नहीं है और इस गलतफहमी के लिए माफी भी मांगी।
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बंगाल की पहचान बचाने की लड़ाई है यह विधानसभा चुनाव, PM मोदी का बड़ा दावा
झाड़ग्राम, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को राज्य की पहचान बचाने की लड़ाई बताते हुए राज्य की ममता बनर्जी सरकार पर मूल निवासियों के बजाय ‘घुसपैठियों’ के पक्ष में राजनीति करने का आरोप रविवार को लगाया। मोदी ने आदिवासी बहुल झाड़ग्राम जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ”घुसपैठियों के लिए घुसपैठियों की सरकार’ बनाना चाहती है और मतदाताओं से इसे सत्ता से हटाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, ”यह चुनाव इस भूमि की समृद्ध विरासत को बचाने के लिए है। यह बंगाल की पहचान को बचाने के लिए है। आज बंगाल को अपनी पहचान खोने का डर है।” उन्होंने आरोप लगाया, “तृणमूल जिस रास्ते पर चल रही है वह बहुत खतरनाक है। तृणमूल कांग्रेस ‘घुसपैठियों के लिए घुसपैठियों की और सरकार बनाना चाहती है। एक ऐसी सरकार जो बंगाल की जनता के धर्म, भाषा और रीति-रिवाजों की रक्षा करने के बजाय केवल घुसपैठियों के धर्म, भाषा और रीति-रिवाजों की रक्षा करेगी।”
मोदी ने दावा किया कि ऐसी सरकार के लिए सबसे बड़ी बाधा पश्चिम बंगाल के आम लोग होंगे। उन्होंने कहा, ”तृणमूल कांग्रेस की घुसपैठियों वाली सरकार के लिए, अगर कोई शत्रु है, तो वे यहीं बैठे भाई-बहन होंगे, जो घुसपैठियों के शत्रु होंगे।” प्रधानमंत्री ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ असंतोष राज्य के सभी समुदायों और क्षेत्रों में फैल गया है। उन्होंने कहा, “इसलिए, बंगाल के हर समुदाय, हर वर्ग, हर क्षेत्र ने इस बार ठान लिया है और तृणमूल कांग्रेस सरकार को सत्ता से हटाने का संकल्प लिया है।”
मोदी ने तृणमूल कांग्रेस पर जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करने और भ्रष्टाचार व जबरन वसूली की व्यवस्था चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया, “अगर किसी को घर बनाना है, तो उसे तृणमूल कांग्रेस के सिंडिकेट पर निर्भर रहना पड़ता है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद और विधायक आपकी समस्याओं की परवाह नहीं करते। वे अपनी जेबें भरने में व्यस्त हैं।”
प्रधानमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस नेता राज्य के कई हिस्सों में आदिवासियों की जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया, “आदिवासियों की हजारों एकड़ जमीन पर तृणमूल कांग्रेस के गुंडों ने कब्जा कर लिया है।” पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होगा। झाड़ग्राम में 23 अप्रैल को मतदान होगा।
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