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कोरबा

कोरबा में ट्रक की टक्कर से युवक की मौत:अस्पताल के सामने शव रखकर परिजनों ने किया चक्काजाम; मुआवजे और पत्नी को नौकरी की मांग

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सड़क हादसे में युवक की मौत

कोरबा । कोरबा में मंगलवार की शाम लगभग 5:00 बजे एक तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से बाइक सवार की मौत हो गई। हादसे के बाद शव को जिला मेडिकल कॉलेज में रखवाया गया। मृतक के परिजनों को सूचना दी गई।

बुधवार की सुबह पोस्टमार्टम होने के बाद परिजन और ग्रामीणों ने शव को जिला मेडिकल कॉलेज परिसर के गेट के सामने रखकर चक्काजाम कर दिया। सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई।

कुछ समय के लिए जिला मेडिकल कॉलेज में मरीज और उनके परिजनों को भी आने-जाने के लिए रोका गया। देखते ही देखते सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। इस जाम में स्कूल बस और कई चारपहिया और दोपहिया वाहन फंस गए, लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

शव सड़क पर रखकर किया चक्काजाम

इस घटना के बाद मृतक के परिजन और ग्रामीण सड़क पर शव रखकर जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करना शुरू कर दिए। मृतक के बड़े भाई लक्ष्मण प्रसाद पटेल ने बताया कि मृतक की शादी को महज 3 साल हुए हैं और उसके एक बच्ची भी है।

ऐसे में ट्रक मालिक की ओर से मृतक के परिजन को 10 लाख मुआवजा राशि, आयुष्मान विभाग में उसकी पत्नी को नौकरी और मुख्य मार्ग शहरी क्षेत्र में भारी वाहनों पर प्रतिबंध इसके अलावा ब्रेकर की मांग कर रहे हैं।

जिला स्वास्थ्य विभाग में काम करता था युवक

कोरबा सीएसपी भूषण एक्का ने बताया कि कल हादसे के बाद पोस्टमॉर्टम कराया गया। इसके बाद परिजनों ने चक्काजाम कर दिया। आगे मामले की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि मृतक 26 वर्षीय काशीराम पटेल जिला स्वास्थ्य विभाग में काम करता था। मंगलवार की शाम काम करके घर वापस लौट रहा था तभी एक ट्रक ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। युवक की घटना स्थल पर मौत हो गई।

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कोरबा

खरीफ वर्ष 2026 के लिए कोरबा जिले में खाद एवं बीज का पर्याप्त भंडारण

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कोरबा। भारत सरकार एवं राज्य शासन के निर्देशानुसार कृषकों को गुणवत्तायुक्त एवं पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। कृषि विभाग के उप संचालक डी.पी.एस. कंवर ने बताया कि जिले में खाद एवं बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं तथा किसी प्रकार की कमी नहीं है।

उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों द्वारा सतत कृषि विकास हेतु एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन की अनुशंसा के अनुसार रासायनिक उर्वरकों के उपयोग के साथ-साथ जैव उर्वरक, जैविक खाद एवं हरी खाद जैसे वैकल्पिक उपायों को भी सम्मिलित किया गया है। इसके लिए कृषकों को संतुलित एवं समानुपातिक मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

संतुलित उर्वरक उपयोग को प्रोत्साहित करने, कृषि लागत में कमी लाने, भूमि की उर्वरता शक्ति को सुरक्षित रखने, रासायनिक उर्वरकों के साथ अन्य वैकल्पिक उपायों को बढ़ावा देने, उर्वरकों के कृषि के अतिरिक्त अन्य कार्यों में उपयोग को रोकने तथा कृषकों को गुणवत्तायुक्त उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिले की सहकारी समितियों में गत वर्ष की पूर्ति के आधार पर 80 प्रतिशत यूरिया एवं 60 प्रतिशत डीएपी का भंडारण कराया जा रहा है।

यूरिया की शेष 20 प्रतिशत मात्रा अन्य वैकल्पिक उर्वरकों अथवा नैनो यूरिया के रूप में प्रदाय की जाएगी। इसी प्रकार डीएपी की शेष 40 प्रतिशत मात्रा अन्य वैकल्पिक एनपीके उर्वरकों अथवा नैनो डीएपी के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। किसी भी परिस्थिति में कृषकों को नैनो उर्वरक लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। यह पूर्णतः वैकल्पिक रहेगा।

जिले को सहकारी क्षेत्र में प्राप्त 12,700 मीट्रिक टन के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक सहकारी समितियों में 7,132.58 मीट्रिक टन (56.16 प्रतिशत) उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है। सहकारी समितियों से अब तक 1,129.94 मीट्रिक टन उर्वरकों का उठाव किया जा चुका है तथा 6,002.64 मीट्रिक टन उर्वरक शेष उपलब्ध हैं।

नैनो उर्वरकों के रूप में नैनो यूरिया 6,842 लीटर एवं नैनो डीएपी 5,044 लीटर, इस प्रकार कुल 11,886 लीटर का भंडारण सहकारी समितियों में किया गया है। इसके विरुद्ध 483.50 लीटर नैनो तरल उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है तथा 11,402.50 लीटर उपलब्ध है।

जिले के प्रत्येक कृषक को उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु उनके रकबे के आधार पर वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। यूरिया एवं डीएपी के अतिरिक्त एसएसपी तथा एनपीके जैसे वैकल्पिक उर्वरकों के माध्यम से भी कृषक आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति कर रहे हैं।

इसके अतिरिक्त इच्छुक एवं चयनित कृषकों को हरी खाद के रूप में ढैंचा बीज 8 किलोग्राम प्रति एकड़ तथा मूंग बीज 4 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से वितरित किया जा रहा है। साथ ही जैव उर्वरक के रूप में नील हरित काई का उत्पादन कृषि विज्ञान केंद्र लखनपुर, कृषि महाविद्यालय कटघोरा, शासकीय उद्यान रोपणी पत्ताड़ी (कोरबा) एवं चिन्हांकित किसानों के खेतों में कराया जा रहा है।

नील हरित काई एवं हरी खाद वायुमंडलीय नत्रजन का स्थिरीकरण कर पौधों को नाइट्रोजन पोषक तत्व उपलब्ध कराती हैं तथा मिट्टी की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणवत्ता को बनाए रखते हुए उसकी उर्वरता शक्ति में वृद्धि करती हैं।

किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं उचित मूल्य पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु उर्वरक निरीक्षकों द्वारा जिले में संचालित उर्वरक विक्रय केंद्रों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। खरीफ वर्ष 2026 में 1 अप्रैल 2026 से अब तक 115 उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण किया गया है। अनियमितता पाए जाने पर 28 विक्रय केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, 8 विक्रय केंद्रों के विक्रय पर प्रतिबंध लगाया गया है तथा एक विक्रय केंद्र से 58 बोरी यूरिया जब्त करने की कार्रवाई की गई है।

उन्होंने बताया कि कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर कृषकों को निर्धारित दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निरीक्षण लगातार जारी रहेगा। इस संबंध में बैठक लेकर कलेक्टर ने उर्वरकों के भंडारण एवं वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत कठोर प्रशासनिक, कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिये हैं।

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कोरबा

तेज आंधी-तूफान के दौरान पेड़ की डाल गिरने से तीन युवकों की मृत्यु, कलेक्टर ने राहत सहायता हेतु दिए निर्देश

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कोरबा। जिले के पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चोरका दांड में शनिवार शाम तेज आंधी-तूफान एवं बारिश के दौरान एक दुखद दुर्घटना में तीन युवकों की मृत्यु हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मौसम खराब होने और तेज बारिश से बचने के लिए तीनों युवक एक बड़े पेड़ के नीचे रुके थे। इसी दौरान पेड़ की भारी डाल टूटकर उन पर गिर गई, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।

मृतकों में शिवराम टेकाम (14 वर्ष), कमलेश बड़ा (18 वर्ष) एवं दिनेश तिर्की (17 वर्ष) शामिल हैं। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन द्वारा तत्काल आवश्यक कार्यवाही प्रारंभ की गई।
घटना की जानकारी प्राप्त होने पर कलेक्टर कुणाल दुदावत ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करते हुए मृतकों के परिजनों को राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) 6-4 के तहत आर्थिक सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर के निर्देशानुसार तहसीलदार भूषण मंडावी, नायब तहसीलदार सुजीत पाटले एवं राजस्व विभाग की टीम ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी तथा आवश्यक सहायता का आश्वासन प्रदान किया। उनकी उपस्थिति में चिकित्सकीय टीम द्वारा आज मृतकों का पोस्टमार्टम कराया गया और शव परिजनों को सौंप दिया गया है।

राजस्व अधिकारियों ने बताया कि आरबीसी 6-4 के अंतर्गत राहत सहायता प्रदान करने हेतु प्रकरण तैयार किया जा रहा है तथा आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण होते ही निर्धारित राहत राशि मृतकों के परिजनों को प्रदान की जाएगी।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि खराब मौसम, तेज आंधी-तूफान एवं बारिश के दौरान पेड़ों तथा असुरक्षित स्थानों के नीचे खड़े होने से बचें तथा सुरक्षा संबंधी सावधानियों का पालन करें।

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कोरबा

हृदय रोगियों के लिए वरदान बनी एनकेएच की कैथलैब सुविधा

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कोरबा में पहली बार 3 मरीजों में सफल एआईसीडी प्रत्यारोपण
अब स्थानीय स्तर पर हो रहा उन्नत हृदय उपचार

कोरबा। शहर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल एनकेएच में कैथलैब सुविधा शुरू होने के बाद हृदय रोगियों को बड़े शहरों जैसी अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होने लगी हैं। इससे गंभीर मरीजों को रायपुर या अन्य महानगरों में उपचार के लिए भटकना नहीं पड़ रहा और समय पर इलाज मिलने से जीवन रक्षा आसान हो रही है।

भीषण गर्मी, अनियमित खान-पान और बदलती जीवनशैली के कारण इन दिनों हृदय संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। कई लोग सीने में जलन, गैस, अपच और बेचैनी को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कई मामलों में ये हार्ट अटैक के शुरुआती संकेत साबित हो रहे हैं। पिछले सप्ताह एनकेएच में 15 से अधिक हृदय रोगी पहुंचे, जिनका विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में तत्काल उपचार किया गया।
रायपुर से आने वाले कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. सतीश सूर्यवंशी एवं डॉ. एस.एस. मोहंती की टीम द्वारा मरीजों की जांच के बाद 5 मरीजों की एंजियोप्लास्टी और 5 मरीजों की एंजियोग्राफी की गई। इसके अलावा एक मरीज में सफलतापूर्वक पेसमेकर प्रत्यारोपित किया गया। विशेष उपलब्धि के रूप में कोरबा में पहली बार अब तक 3 मरीजों में एआईसीडी (ऑटोमेटिक इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर) प्रत्यारोपण भी सफलतापूर्वक किया जा चुका है।
क्या है एआईसीडी?
एआईसीडी एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसे छाती में प्रत्यारोपित किया जाता है। यह हृदय की धड़कनों पर लगातार नजर रखता है और खतरनाक अनियमित धड़कन या अचानक हृदय गति रुकने की स्थिति में विद्युत झटका देकर दिल की सामान्य लय बहाल करता है। यह उपकरण कई मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होता है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार मई माह में कैथलैब में 17 मरीजों की एंजियोग्राफी, 12 मरीजों की एंजियोप्लास्टी तथा एक मरीज का पेसमेकर प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया गया। कैथलैब सुविधा शुरू होने के बाद से अब तक एनकेएच में 400 से अधिक एंजियोग्राफी और 200 से ज्यादा एंजियोप्लास्टी की जा चुकी हैं।
एनकेएच ग्रुप के डायरेक्टर डॉ. एस. चंदानी ने बताया कि जिले की पहली कैथलैब सुविधा शुरू होने से अब कोरबा में ही हृदय रोगों का समग्र और उन्नत उपचार संभव हो गया है। इससे मरीजों का समय, धन और अनावश्यक परेशानी बच रही है, वहीं गंभीर परिस्थितियों में तत्काल उपचार मिलने से बेहतर परिणाम भी सामने आ रहे हैं।

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