देश
IPL ऑक्शन के लिए 574 खिलाड़ी तय, 366 भारतीय:BCCI ने फाइनल लिस्ट रिलीज की; पंत-राहुल की बेस प्राइस ₹2 करोड़, आर्चर-ग्रीन का नाम नहीं
नई दिल्ली ,एजेंसी। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) ऑक्शन के लिए BCCI ने शुक्रवार को 574 खिलाड़ियों की फाइनल लिस्ट रिलीज कर दी। इनमें 366 भारतीय और 208 विदेशी खिलाड़ी शामिल हैं। 81 प्लेयर्स की बेस प्राइस 2 करोड़ रुपए है।
ऑक्शन लिस्ट में इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर और ऑस्ट्रेलिया के ऑलराउंडर कैमरून ग्रीन का नाम शामिल नहीं किया गया है। ऑक्शन 24 और 25 नवंबर को सऊदी अरब के जेद्दाह शहर में होगा। 10 टीमों में 204 प्लेयर्स की जगह खाली है, टीमें 70 विदेशी खिलाड़ियों को खरीद सकती हैं।
दोपहर 3 बजे शुरू होगा ऑक्शन IPL मेगा ऑक्शन 24 नवंबर को दोपहर 3 बजे शुरू होगा। ऑक्शन अगले दिन भी 3 बजे ही शुरू होगा। 574 में से 244 खिलाड़ी कैप्ड हैं, वहीं 330 अनकैप्ड हैं। कैप्ड प्लेयर्स में 48 भारतीय, 193 विदेशी और 3 एसोसिएट देशों के खिलाड़ी रहेंगे। वहीं अनकैप्ड खिलाड़ियों में भारत के 318 और विदेश के 12 प्लेयर्स हैं।
आर्चर, ग्रीन को लिस्ट में शामिल नहीं किया गया लिस्ट में इंग्लिश पेसर जोफ्रा आर्चर और ऑस्ट्रेलियन ऑलराउंडर कैमरून ग्रीन का नाम शामिल नहीं किया गया है। दोनों प्लेयर्स ने 2-2 करोड़ की बेस प्राइस पर रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन IPL टीमों ने इन दोनों खिलाडियों में इंटरेस्ट नहीं दिखाया है।
वहीं पहली बार IPL में रजिस्ट्रेशन करने वाले इंग्लैंड के 42 साल के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन को लिस्ट में शामिल किया गया है। उनकी बेस प्राइस 1.25 करोड़ है। 14 साल के वैभव सूर्यवंशी ऑक्शन में शामिल सबसे युवा खिलाड़ी हैं, वह बिहार से घरेलू क्रिकेट खेलते हैं।

खिलाड़ियों की फाइनल लिस्ट में आर्चर का नाम शामिल नहीं किया गया है। आर्चर IPL-2023 में मुंबई इंडियंस का हिस्सा थे।
2 करोड़ की बेस प्राइस में 81 खिलाड़ी अनकैप्ड खिलाड़ियों की बेस प्राइस 30 लाख रुपए रखी गई है, जिनमें 320 प्लेयर्स हैं। इस बार भी ऑक्शन में 2 करोड़ रुपए सबसे बड़ी बेस प्राइस हैं, इसमें 81 खिलाड़ियों के नाम हैं। 1.50 करोड़ की बेस प्राइस में 27 प्लेयर्स, 1.25 करोड़ रुपए की बेस प्राइस में 18 खिलाड़ी और 1 करोड़ रुपए की बेस प्राइस में 23 प्लेयर्स हैं।
पंत और श्रेयस की बेस प्राइस 2 करोड़ रुपए
ऑक्शन में मार्की प्लेयर की 2 लिस्ट रहेंगी। पहली लिस्ट में ऋषभ पंत, कगिसो रबाडा, जोस बटलर, श्रेयस अय्यर, अर्शदीप सिंह और मिचेल स्टार्क का नाम शामिल है। दूसरी लिस्ट में युजवेंद्र चहल, लियम लिविंगस्टन, डेविड मिलर, केएल राहुल, मोहम्मद शमी और मोहम्मद सिराज शामिल हैं।

केएल राहुल की बेस प्राइस 2 करोड़ रुपए हैं।
10 टीमों ने 46 खिलाड़ी रिटेन किए IPL का मेगा ऑक्शन हर 3 साल में एक बार होता है। जिसके लिए इस बार टीमें ज्यादा से ज्यादा 6 खिलाड़ियों को रिटेन कर सकती थीं। 31 अक्टूबर रिटेंशन की आखिरी तारीख थी, इस दिन 10 टीमों ने 46 खिलाड़ियों को रिटेन किया। पंजाब किंग्स ने सबसे कम 2 खिलाड़ी रिटेन किए। वहीं राजस्थान रॉयल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स ने सबसे ज्यादा 6-6 प्लेयर्स को अपने साथ रखा।
पंजाब के पास सबसे ज्यादा पर्स 2 ही खिलाड़ी रिटेन करने के कारण पंजाब के पास ऑक्शन में 110.50 करोड़ रुपए का पर्स बाकी है। उनके बाद बेंगलुरु के पास 83 करोड़ रुपए बाकी हैं। राजस्थान के पास सबसे कम 41 करोड़ रुपए बचे हैं। राजस्थान और बेंगलुरु के पास कोई राइट टु मैच कार्ड भी नहीं है। जबकि पंजाब के पास 4 और बेंगलुरु के पास 3 RTM कार्ड बचे हैं।
राइट टु मैच कार्ड क्या होता है? जिन भी टीमों ने 6 से कम प्लेयर्स रिटेन किए हैं, उन्हें ऑक्शन में राइट टु मैच यानी RTM कार्ड मिलेगा। RTM कार्ड से टीमें स्क्वॉड में शामिल पिछले खिलाड़ी को वापस अपने साथ रख पाएंगी।
RTM को उदाहरण से समझते हैं, मान लीजिए पिछले सीजन RCB का हिस्सा रहे ग्लेन मैक्सवेल को ऑक्शन में MI ने 7 करोड़ रुपए की बोली लगाकर खरीद लिया। अब RCB चाहे तो RTM कार्ड का इस्तेमाल कर मैक्सवेल को अपने साथ रख सकती है।
हालांकि इस बार MI के पास मैक्सवेल के लिए बोली बढ़ाने का ऑप्शन भी रहेगा। RTM का इस्तेमाल करने के बाद MI चाहे तो मैक्सवेल पर 10 करोड़ रुपए की बोली भी लगा सकती है। अब अगर RCB मैक्सवेल को अपने साथ रखना चाहेगी तो उसे 10 करोड़ रुपए देने होंगे। इसी के साथ उसका एक RTM कार्ड इस्तेमाल हो जाएगा। अगर RCB ने मना कर दिया तो मैक्सवेल 10 करोड़ रुपए में MI के हो जाएंगे।
देश
नेपाल सीमा से गिरफ्तार हुए TMC के पूर्व विधायक जहांगीर खान, STF की बड़ी कार्रवाई
कोलकाता, एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को ‘जबरन वसूली’ के आरोप में सोमवार को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खान को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम सुरक्षा 26 मई को वापस ले ली थी। खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा थाने में सात प्राथमिकी दर्ज हैं।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ”खान को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।” हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। खान 21 मई को फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में चौथे स्थान पर रहे थे। हालांकि, उन्होंने चुनाव से कुछ दिन पहले अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन नाम वापस लेने की अवधि समाप्त हो चुकी थी इसीलिए उनका नाम ईवीएम में दर्ज रहा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान को मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ली
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान के खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामलों में पुलिस की किसी भी सख्त कार्रवाई से उन्हें मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी। कोर्ट ने 18 मई को खान को सख्त कार्रवाई से राहत दी थी, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। जजों ने कहा कि राज्य में राजनीतिक स्थिति में बदलाव और याचिकाकर्ता द्वारा राजनीतिक बदले की भावना के दावों के कारण ऐसी सुरक्षा जारी रखना उचित नहीं होगा।
खान के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि ये मामले राजनीतिक बदले की भावना का नतीजा थे और कहा कि सुरक्षा न केवल चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी थी, बल्कि खान को कथित उत्पीड़न से बचाने के लिए भी थी। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले दी गई सुरक्षा केवल खान को 21 मई को फाल्टा में हुए दोबारा मतदान (रीपोल) में भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए थी, जिसके नतीजे 24 मई को घोषित किए गए थे।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा विधानसभा उपचुनाव (रीपोल) के बीच एक बड़ी राजनीतिक घटनाक्रम में, जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका था। उन्होंने कहा कि दौड़ से हटने का फैसला फाल्टा के लोगों की भलाई के लिए लिया गया था। खान ने कहा, “मैं फाल्टा का बेटा हूं और चाहता हूं कि फाल्टा शांतिपूर्ण रहे और तरक्की करे। हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसलिए मैंने निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है।”
देश
भाजपा की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी, क्रॉस वोटिंग की आशंका पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला
भोपाल, एजेंसी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामाकंन दाखिल किया। उनका मुकाबले में भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारा है। ऐसे में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। वहीं कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। हालांकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की गलतफहमी बताया है।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का कहना है, “बीजेपी को गलतफहमी है कि वे पार्टी में फूट डाल सकते हैं। कांग्रेस पूरी तरह से संगठित और एकजुट है; सभी कांग्रेस विधायक पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को मजबूती से अपना पूरा समर्थन देंगे और बीजेपी की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी। मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उम्मीदवार हैं और हम कांग्रेस में एकजुट हैं।”
बता दें कि 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रभावी वोट संख्या 228 है। इनमें से BJP के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। बीना की विधायक निर्मला सप्रे के वोट की स्थिति साफ न होने (जो BJP की तरफ झुकती दिख रही है) और विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा के वोटिंग पर रोक के कारण, कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर 62 रह गई है।
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए हर उम्मीदवार को 58 वोटों की ज़रूरत होती है। इस तरह, BJP को दो सीटें जीतने के लिए 116 वोटों की ज़रूरत है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कुल 164 वोटों में से 116 वोट डालने के बाद BJP के पास 48 वोट बचेंगे, जबकि तीसरी सीट पक्की करने के लिए उसे 10 और वोटों की ज़रूरत होगी। कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए ज़रूरी संख्या तो है, लेकिन BJP द्वारा तीसरे उम्मीदवार के ऐलान ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और नटराजन के चुनाव जीतने की राह मुश्किल कर दी है।
देश
क्या शिवसेना की तहर दो गुटों में बंट जाएगी TMC?, सांसद के इस्तीफे से बंगल में गरमाई सियासत
कोलकाता, एजेंसी। बंगाल चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत की पूरे देश में चर्चा है तो वहीं तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के बीच अंदरूनी कलह भी सामने आने लगी है इसे लेकर अब पार्टी के भविष्य की रणनीति पर लोग चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या तृणमूल कांग्रेस में भी Shiv Sena की तरह अंदरूनी खींचतान बढ़ेगी या पार्टी नेतृत्व समय रहते हालात संभाल लेगा। विपक्ष लगातार TMC में असंतोष और गुटबाजी के आरोप लगा रहा है, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम बता रहा है।

अगल गुट बनाने को लेकर चर्चा तेज इस्तीफा
दरअसल, अंदरूनी कलह के बीच पार्टी के सांसदों के एक समूह ने भविष्य की रणनीति और पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बनाने की संभावना पर चर्चा करने के लिए सोमवार को यहां बैठक की। बैठक में हिस्सा लेने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर राय भी शामिल थे, जिन्होंने सोमवार को ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। उनके अलावा तृणमूल के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपद सरन खेरवाल और अरूप चक्रवर्ती भी बैठक में मौजूद थे।
ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप पर भेजा
मीडिया से बातचीत में राय ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राय ने कहा, ”मैंने पार्टी से इस्तीफा देने के अपने फैसले से ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिये अवगत करा दिया है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 60 विधायकों द्वारा एक अलग गुट बनाने के बाद सामने आया है, जहां रिताब्रता बनर्जी ने ममता बनर्जी के नामित उम्मीदवार के बजाय नेता प्रतिपक्ष का कार्यभार संभाल लिया है।
इस्तीफे को लेकर दिया ये बयान
राय ने कहा, “विधानसभा में जो कुछ भी हुआ, क्या कोई यह बता सकता है कि राज्यसभा या लोकसभा में वैसी ही स्थिति पैदा नहीं होगी?” हालांकि, राय ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा और पार्टी से उनका इस्तीफा राज्य विधानसभा में हुए घटनाक्रम से अलग है, क्योंकि वहां के विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा, ”उनके कदम और मेरे कदम के बीच कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह से अलग है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दिया है, उन्होंने नहीं। राज्यसभा में मेरा कार्यकाल 2029 में समाप्त होना था, लेकिन मैंने सैद्धांतिक तौर पर इस्तीफा दे दिया, क्योंकि मेरे लिए (पार्टी में) बने रहना मुश्किल हो गया था।”
‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में शामिल हुए अभिषेक बनर्जी
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे एवं पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक में गठबंधन के भीतर एकजुटता पर जोर दिया गया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा जनता की आजीविका से जुड़े मुद्दों को उठाने की आवश्यकता बताई गई।
तृणमूल के इन दोनों नेताओं के अलावा बैठक में कांग्रेस की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ वामपंथी नेता भी मौजूद थे। हालांकि ममता से नाराज विधायकों ने अभी तक अलग पार्टी बनाए जाने को लेकर कोई भी अधिकारिक ऐलान नहीं किया।
-
Uncategorized8 months agoसुमेधा पुल पर लुट कांड सहित तीन अलग अलग जगह पर लुटकांड करने वाले आरोपी पुलिस के गिरफ्त में,,,दो आरोपी नाबालिक,,,देखे पूरी खबर
-
कोरबा3 years agoकटघोरा विधायक पुरूषोत्तम कंवर के गुर्गों द्वारा दिव्य आकाश कर्मियों पर हमला की कोशिश
-
कोरबा2 years agoग्राम पंचायत पोड़ी के पूर्व सरपंच सचिव पर गबन के आधार पर अधिरोपित राशि 3341972/- रुपये शीघ्र वसूल हो- कय्युम बेग
-
कोरबा2 years agoकुसमुंडा खदान में डंपर पलट कर लगी आग, सरकारी गाड़ी में कोयला और डीजल चोर सवार थे, जलने से दोनों गंभीर
-
कोरबा2 years agoश्रीमती स्वाति दुबे का निधन
-
छत्तीसगढ़2 years agoबिलासपुर में अपोलो अस्पताल के 4 सीनियर डॉक्टर अरेस्ट
-
कोरबा3 years agoकटघोरा जनपद की 25 करोड़ की जमीन उनके करीबी कांग्रेसियों की 25 लाख में कैसे हो गई?
-
कोरबा3 years agoदर्री में 1320 मेगावाट विद्युत परियोजना के लिए नई सरकार गठन के बाद होगी पर्यावरणीय जनसुनवाई
