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PM बोले- दिल्ली में आपदा सरकार, ये कट्टर बेईमान लोग:मैं भी शीश महल बनवा सकता था, लेकिन गरीबों के लिए 4 करोड़ घर बनवाए

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नई दिल्ली,एजेंसी। दिल्ली में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार से चुनाव प्रचार की शुरूआत की। पीएम ने अशोक विहार में जनता को संबोधित करते हुए AAP सरकार पर निशाना साधा।

मोदी ने आप सरकार को आपदा सरकार बताया। उन्होंने कहा- सत्ता में खुद को कट्टर बेईमान बताने वाले लोग बैठे हैं। जो खुद शराब घोटाले के आरोपी हैं। ये चोरी भी करते हैं और सीनाजोरी भी।

दिल्ली वालों को इस आपदा सरकार को सत्ता से हटाना है। आज हर गली कहती है आपदा को नहीं सहेंगे, बदलकर रहेंगे। पीएम ने इस चुनाव के लिए नारा दिया कि आपदा को हटाना है, भाजपा को लाना है।

पीएम मोदी ने आज दिल्ली में 4500 करोड़ रुपए की कई परियोजनाओं का इनॉगरेशन और शिलान्यास किया। उन्होंने दिल्ली के अशोक विहार में बने 1,675 फ्लैट्स का भी उद्घाटन किया।

गरीबों के लिए नए घर का इनॉगरेशन करते हुए पीएम मोदी ने कहा- मैं भी शीशमहल बना सकता था। लेकिन मैंने कभी अपना घर नहीं बनाया, 10 सालों में 4 करोड़ गरीब परिवारों को पक्का घर दिया है।

पीएम मोदी के स्पीच की 9 बड़ी बातें,

1. आम आदमी पार्टी पर

बीते 10 साल में दिल्ली एक बड़ी आपदा से घिरी है। अन्ना हजारे जी को सामने करके कुछ कट्टर बेईमान लोगों ने दिल्ली को आपदा में धकेल दिया। शराब ठेकों में घोटाला, बच्चों के स्कूल में घोटाला, गरीबों के इलाज में घोटाला, प्रदूषण से लड़ने के नाम पर घोटाला। दिल्ली वालों ने आपदा के विरुद्ध जंग छेड़ दी है। वोटर आपदा से दिल्ली को मुक्त करने की ठान चुका है। दिल्ली का हर नागरिक कह रहा है, हर बच्चा कह रहा है, हर गली से आवाज आ रही है- आपदा को नहीं सहेंगे, बदलकर रहेंगे।”

2. आपदा वाले आयुष्मान योजना लागू नहीं होने देते

पीएम ने कहा- दिल्ली में 500 जन औषधि केंद्र बनाए गए हैं। 80 फीसदी दवाओं पर डिस्काउंट मिलता है। 100 रुपए की दवा 15 रुपए में मिलती है। मुफ्त इलाज की सुविधा देने वाली आयुष्मान योजना का लाभ देना चाहता हूं, लेकिन आपदा सरकार को दिल्ली वालों से दुश्मनी है। आपदा वाले योजना लागू नहीं होने दे रहे हैं। नुकसान दिल्लीवालों को उठाना पड़ रहा है।

3. यमुना जी के हाल की जिम्मेदार आपदा सरकार

प्रधानमंत्री ने कहा, “दिल्ली राजधानी है, बड़े खर्चों वाले बहुत से काम यहां होते हैं वो केंद्र सरकार के जिम्मे है। सड़कें, मेट्रो, अस्पताल, कॉलेज कैंपस सब केंद्र ही बना रही है। लेकिन यहां की आपदा सरकार के पास ब्रेक लगी हुई है। मैंने लोगों से पूछा छठ पूजा कैसी रही? बोले कि साहब यमुनाजी की ऐसी हालत है कि हमने जैसे तैसे पूजा कर ली मोहल्ले में मां यमुना से क्षमा मांग ली। बेशर्मी देखिए, इन लोगों को लाज शर्म नहीं आती है।

4. केजरीवाल के घर पर

पीएम ने कहा, “बच्चों से मिला, लाभार्थियों से मिला। उनके सपने स्वाभिमान अपार्टमेंट से भी ऊंचे थे। ये सभी मेरे परिवार के सदस्य हैं। देश जानता है कि मोदी ने कभी अपने लिए घर ,नहीं बनाया। लेकिन बीते वर्षों में 4 करोड़ से ज्यादा गरीबों के घरों का सपना पूरा किया है। मैं भी कोई शीश महल बना सकता था। मेरे देशवासियों को पक्का घर मिले, मेरा यह सपना था। आप जब भी लोगों के बीच जाएं, उनसे मिलें और अभी भी जो लोग झुग्गी में रहते हैं, मेरी तरफ से उन्हें वादा करके आना। मेरे लिए आप ही मोदी हैं। आज नहीं तो कल उनके लिए पक्का घर बनेगा मिलेगा।”

5. झुग्गी की जगह फ्लैट पर

PM बोले, “आज जिन परियोजना का लोकार्पण हुआ, उनके गरीबों के लिए घर, स्कूल-कॉलेज के प्रोजेक्ट हैं। उन साथियों को, उन माताओं-बहनों को बधाई देता हूं, जिनकी अब नई जिंदगी एक तरह से शुरू हो रही है। झुग्गी की जगह पक्का घर, किराए के घर की जगह अपना घर मिल रहा है। ये नई शुरुआत ही तो है।

6. इमरजेंसी में अशोक विहार मेरा ठिकाना था

प्रधानमंत्री ने कहा, “पुरानी यादें यहां पर ताजा हो रही हैं। जब आपातकाल का समय था, इंदिरागांधी की तानाशाही के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे, उस समय मेरे जैसे बहुत साथी अंडरग्राउंड मोमेंट का हिस्सा थे। उस वक्त अशोक विहार मेरे रहने का स्थान हुआ करता था। साथियों आज पूरा देश विकसित भारत के निर्माण में जुटा है।”

7. स्वाभिमान अपार्टमेंट पर

पीएम बोले, “इस भारत में देश के हर नागरिक के पास पक्की छत हो, अच्छे घर हों, ये संकल्प लेकर हम काम कर रहे हैं। इस संकल्प की सिद्धि में दिल्ली का बड़ा रोल है। भाजपा की केंद्र सरकार ने झुग्गियों की जगह पक्का घर बनाने का अभियान शुरू किया है। 2 साल पहले भी मुझे कालका जी एक्सटेंशन में झुग्गियों में रहने वाले लोगों के लिए 3 हजार से ज्यादा घरों के शुभारंभ का अवसर मिला था। वो परिवार, जिनकी पीढ़ियां सिर्फ झुग्गियों में ही रहीं। जिनके सामने उम्मीद नहीं थीं, वे पहली बार पक्के घरों में पहुंच रहे हैं। तब मैंने कहा था, ये अभी शुरुआत है। आज यहां और डेढ़ हजार घरों की चाभी लोगों की दी गई है। ये स्वाभिमान अपार्टमेंट गरीबों के स्वाभिमान को उनकी गरिमा को बढ़ाने वाले हैं।

8. नए साल पर

प्रधानमंत्री ने कहा, “साल 2025 भारत के विकास के लिए अनेक नई संभावना लेकर आ रहा है। दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक ताकत बनने की तरफ हमारी आशा इस वर्ष और तेज होने वाली है। आज भारत दुनिया में राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता का प्रतीक बना है। साल 2025 में भारत की यह भूमिका और सशक्त होगी। यह वर्ष विश्व में भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को और सशक्त करने का वर्ष होगा। ये वर्ष भारत को दुनिया का बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का वर्ष होगा।

9. नई शिक्षा नीति में गरीब बच्चों का लाभ

मोदी ने कहा, “हमें सिर्फ बच्चों को पढ़ाना नहीं है। बल्कि वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के लिए नई पीढ़ी को तैयार भी करना है। नई नेशनल एजुकेशनल पॉलिसी में इसका ध्यान रखा गया है। गरीब का बच्चा हो, मध्यम परिवार की संतान हो, उनको नए अवसर देने वाली नीति पर हम चल रहे हैं। गरीब परिवारों के बच्चों के सपने डॉक्टर और वकील बनाने का होता है। अंग्रेजी स्कूल में पढ़ा पाना इन परिवारों के लिए आसान नहीं। मध्यम-गरीब वर्ग परिवार के बच्चे अंग्रेजी के अभाव में डॉक्टर-इंजीनियर न बन पाएं। आपके सेवक ने काम किया है, ये बच्चे अपनी मातृभाषा में पढ़कर डॉक्टर और इंजीनियर भी बन सकता है। बड़ी से बड़ी अदालत में मुकदमा लड़ सकता है।”

सावरकर विवाद पर कांग्रेस स्टूडेंट विंग ने PM मोदी को लेटर लिखा

कांग्रेस ने कॉलेज का नाम सावरकर होने पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस की स्टूडेंट विंग ने कहा- ये बहुत अच्छी बात है कि 2025 में एक नया कॉलेज कैंपस बनने जा रहा है। लेकिन मेरी प्रधानमंत्री जी से अपील है कि इस कॉलेज का नाम सावरकर की जगह डॉ. मनमोहन सिंह जी के नाम पर रखना चाहिए।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति योगेश सिंह ने कहा, ‘यह प्रोजेक्ट 2021 में शुरू हुआ था। किसी को भी समय के बारे में सवाल नहीं उठाना चाहिए। सावरकर देश के युवाओं, लोगों और संस्कृति के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।’

दिल्ली यूनिवर्सिटी में वीर सावरकर के नाम पर कॉलेज बनने जा रहा है। कांग्रेस ने कॉलेज का नाम सावरकर होने पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने डीयू के फैसले की आलोचना की और इसे भाजपा द्वारा ब्रिटिश राज का समर्थन करने वाले नेताओं को बढ़ावा देने का प्रयास बताया।

सावरकर का दिल्ली और आसपास के इलाकों से कोई लेना-देना नहीं था। भाजपा दिल्ली चुनाव के मद्देनजर ध्रुवीकरण के बारे में सोच रही है। उन्हें कॉलेज का नाम डॉ. मनमोहन सिंह के नाम पर रखना चाहिए था।

प्रमोद तिवारी, कांग्रेस सांसद

राहुल गांधी अक्सर सावरकर जी के बारे में जहर उगलते रहते हैं। जो खुद धोखाधड़ी और गबन के आरोपों के साथ नेशनल हेराल्ड मामले में जमानत पर बाहर हैं, वे कुछ न कहें।

सीआर केसवन, भाजपा नेता

PM ने 4 प्रोजेक्ट का इनॉगरेशन और शिलान्यास किया…

1. दिल्ली यूनिवर्सिटी में 3 परियोजनाओं की आधारशिला

प्रधानमंत्री दिल्ली यूनिवर्सिटी में 600 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली 3 नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी।

  • सूरजमल विहार के पूर्वी परिसर में एक अकादमिक ब्लॉक बनाया जाएगा।
  • द्वारका के पश्चिमी परिसर में एक अकादमिक ब्लॉक का निर्माण किया जाएगा।
  • नजफगढ़ के रोशनपुरा में वीर सावरकर कॉलेज का भवन बनाया जाएगा।

2. स्वाभिमान फ्लैट प्रोजेक्ट, PM मोदी ने लाभार्थियों को चाबी दी

दिल्ली के अशोक विहार में पीएम मोदी ने स्वाभिमान फ्लैट प्रोजेक्ट के तहत 1,675 फ्लैट्स की चाबियां झुग्गी-झोपड़ी (जेजे क्लस्टर) में रहने वाले लाभार्थियों को सौंपी। इस प्रोजेक्ट के तहत प्रत्येक फ्लैट पर करीब 25 लाख रुपये खर्च हुए हैं। लाभार्थियों को केवल 1.42 लाख रुपये देने हैं और पांच साल के रखरखाव के लिए 30,000 रुपये अतिरिक्त देना होगा।

3. पीएम मोदी द्वारका में CBSE ऑफिस का उद्घाटन करेंगे

प्रधानमंत्री दिल्ली के द्वारका में सीबीएसई की बिल्डिंग का भी उद्घाटन किया, जिस पर करीब 300 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इसमें ऑफिस, ऑडिटोरियम, डेटा सेंटर, वॉटर मैनेजमेंट सिस्टम शामिल हैं। इस बिल्डिंग को पर्यावरण के अनुकूल और भारतीय हरित भवन परिषद (IGBC) की प्लेटिनम रेटिंग के तहत बनाया गया है।

4. 2 शहरी पुनर्विकास परियोजनाओं का उद्घाटन

प्रधानमंत्री ने 2 शहरी पुनर्विकास परियोजनाओं-नौरोजी नगर में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (WTC) और सरोजिनी नगर में जनरल पूल आवासीय आवास (GPRA) टाइप-II क्वार्टर का भी उद्घाटन किया। GPRA टाइप-II क्वार्टर में 28 टावर शामिल हैं, जिनमें 2500 से ज्यादा आवासीय इकाइयां हैं।

दिल्ली में चुनाव की तारीखों का जल्द ऐलान होगा

दिल्ली विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 23 फरवरी 2025 को खत्म हो रहा है। चुनाव आयोग जनवरी के दूसरे हफ्ते में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। पिछला विधानसभा चुनाव फरवरी 2020 में हुआ था, जिसमें आम आदमी पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल किया था और 70 में से 62 सीटें जीती थीं।

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नेपाल सीमा से गिरफ्तार हुए TMC के पूर्व विधायक जहांगीर खान, STF की बड़ी कार्रवाई

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कोलकाता, एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को ‘जबरन वसूली’ के आरोप में सोमवार को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खान को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम सुरक्षा 26 मई को वापस ले ली थी। खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा थाने में सात प्राथमिकी दर्ज हैं।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ”खान को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।” हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। खान 21 मई को फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में चौथे स्थान पर रहे थे। हालांकि, उन्होंने चुनाव से कुछ दिन पहले अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन नाम वापस लेने की अवधि समाप्त हो चुकी थी इसीलिए उनका नाम ईवीएम में दर्ज रहा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान को मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ली
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान के खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामलों में पुलिस की किसी भी सख्त कार्रवाई से उन्हें मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी। कोर्ट ने 18 मई को खान को सख्त कार्रवाई से राहत दी थी, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। जजों ने कहा कि राज्य में राजनीतिक स्थिति में बदलाव और याचिकाकर्ता द्वारा राजनीतिक बदले की भावना के दावों के कारण ऐसी सुरक्षा जारी रखना उचित नहीं होगा।

खान के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि ये मामले राजनीतिक बदले की भावना का नतीजा थे और कहा कि सुरक्षा न केवल चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी थी, बल्कि खान को कथित उत्पीड़न से बचाने के लिए भी थी। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले दी गई सुरक्षा केवल खान को 21 मई को फाल्टा में हुए दोबारा मतदान (रीपोल) में भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए थी, जिसके नतीजे 24 मई को घोषित किए गए थे।

 पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा विधानसभा उपचुनाव (रीपोल) के बीच एक बड़ी राजनीतिक घटनाक्रम में, जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका था। उन्होंने कहा कि दौड़ से हटने का फैसला फाल्टा के लोगों की भलाई के लिए लिया गया था। खान ने कहा, “मैं फाल्टा का बेटा हूं और चाहता हूं कि फाल्टा शांतिपूर्ण रहे और तरक्की करे। हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसलिए मैंने निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है।”

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भाजपा की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी, क्रॉस वोटिंग की आशंका पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला

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भोपाल, एजेंसी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामाकंन दाखिल किया। उनका मुकाबले में भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारा है। ऐसे में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। वहीं कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। हालांकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की गलतफहमी बताया है।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का कहना है, “बीजेपी को गलतफहमी है कि वे पार्टी में फूट डाल सकते हैं। कांग्रेस पूरी तरह से संगठित और एकजुट है; सभी कांग्रेस विधायक पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को मजबूती से अपना पूरा समर्थन देंगे और बीजेपी की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी। मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उम्मीदवार हैं और हम कांग्रेस में एकजुट हैं।”

बता दें कि 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रभावी वोट संख्या 228 है। इनमें से BJP के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। बीना की विधायक निर्मला सप्रे के वोट की स्थिति साफ न होने (जो BJP की तरफ झुकती दिख रही है) और विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा ​​के वोटिंग पर रोक के कारण, कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर 62 रह गई है।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए हर उम्मीदवार को 58 वोटों की ज़रूरत होती है। इस तरह, BJP को दो सीटें जीतने के लिए 116 वोटों की ज़रूरत है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कुल 164 वोटों में से 116 वोट डालने के बाद BJP के पास 48 वोट बचेंगे, जबकि तीसरी सीट पक्की करने के लिए उसे 10 और वोटों की ज़रूरत होगी। कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए ज़रूरी संख्या तो है, लेकिन BJP द्वारा तीसरे उम्मीदवार के ऐलान ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और नटराजन के चुनाव जीतने की राह मुश्किल कर दी है।

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क्या शिवसेना की तहर दो गुटों में बंट जाएगी TMC?, सांसद के इस्तीफे से बंगल में गरमाई सियासत

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कोलकाता, एजेंसी। बंगाल चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत की पूरे देश में चर्चा है तो वहीं तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के बीच अंदरूनी कलह भी सामने आने लगी है इसे लेकर अब पार्टी के भविष्य की रणनीति पर लोग चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या तृणमूल कांग्रेस में भी Shiv Sena की तरह अंदरूनी खींचतान बढ़ेगी या पार्टी नेतृत्व समय रहते हालात संभाल लेगा। विपक्ष लगातार TMC में असंतोष और गुटबाजी के आरोप लगा रहा है, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम बता रहा है।

अगल गुट बनाने को लेकर चर्चा तेज इस्तीफा 
दरअसल, अंदरूनी कलह के बीच पार्टी के सांसदों के एक समूह ने भविष्य की रणनीति और पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बनाने की संभावना पर चर्चा करने के लिए सोमवार को यहां बैठक की। बैठक में हिस्सा लेने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर राय भी शामिल थे, जिन्होंने सोमवार को ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। उनके अलावा तृणमूल के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपद सरन खेरवाल और अरूप चक्रवर्ती भी बैठक में मौजूद थे। 

ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप पर भेजा 
मीडिया से बातचीत में राय ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राय ने कहा, ”मैंने पार्टी से इस्तीफा देने के अपने फैसले से ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिये अवगत करा दिया है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 60 विधायकों द्वारा एक अलग गुट बनाने के बाद सामने आया है, जहां रिताब्रता बनर्जी ने ममता बनर्जी के नामित उम्मीदवार के बजाय नेता प्रतिपक्ष का कार्यभार संभाल लिया है।

इस्तीफे को लेकर दिया ये बयान 
राय ने कहा, “विधानसभा में जो कुछ भी हुआ, क्या कोई यह बता सकता है कि राज्यसभा या लोकसभा में वैसी ही स्थिति पैदा नहीं होगी?” हालांकि, राय ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा और पार्टी से उनका इस्तीफा राज्य विधानसभा में हुए घटनाक्रम से अलग है, क्योंकि वहां के विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा, ”उनके कदम और मेरे कदम के बीच कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह से अलग है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दिया है, उन्होंने नहीं। राज्यसभा में मेरा कार्यकाल 2029 में समाप्त होना था, लेकिन मैंने सैद्धांतिक तौर पर इस्तीफा दे दिया, क्योंकि मेरे लिए (पार्टी में) बने रहना मुश्किल हो गया था।”

‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में शामिल हुए अभिषेक बनर्जी
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे एवं पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक में गठबंधन के भीतर एकजुटता पर जोर दिया गया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा जनता की आजीविका से जुड़े मुद्दों को उठाने की आवश्यकता बताई गई।

तृणमूल के इन दोनों नेताओं के अलावा बैठक में कांग्रेस की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ वामपंथी नेता भी मौजूद थे। हालांकि ममता से नाराज विधायकों ने अभी तक अलग पार्टी बनाए जाने को लेकर कोई भी अधिकारिक ऐलान नहीं किया। 

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