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19 राज्यों में भाजपा गठबंधन की सरकार:मोदी के तीसरे टर्म में 8 राज्यों में चुनाव हुए, NDA 6 में जीती; दिल्ली में 27 साल बाद वापसी

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नई दिल्ली ,एजेंसी। दिल्ली विधानसभा चुनाव का रिजल्ट लगभग साफ हो गया है। भाजपा 27 साल बाद सत्ता में वापसी कर रही है। फिलहाल 70 सीटों में से भाजपा 48 और AAP 22 सीटों पर आगे चल रही है। भाजपा प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर चुनाव में उतरी थी।

2024 लोकसभा चुनाव में बतौर प्रधानमंत्री मोदी रिकॉर्ड तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। उनके नेतृत्व में भाजपा ने इस साल 8 राज्यों- आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव लड़ा।

इसमें 5 राज्यों- आंध्र, अरुणाचल, ओडिशा, हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा गठबंधन की सरकार बनी। सिक्किम में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और SKM के बीच गठबंधन टूट गया, हालांकि, केंद्र में दोनों साथ हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और झारखंड में JMM के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार है।

2025 यानी इस साल अभी दिल्ली के चुनाव हुए हैं। यहां भाजपा की जीत के बाद 19 राज्यों में भाजपा गठबंधन की सरकार हो जाएगी। दिल्ली का रिजल्ट अभी आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं हुआ है। इसका थोड़ा इंतजार है।

2018 में भाजपा गठबंधन ने इंदिरा के रिकॉर्ड की बराबरी की

देश के सबसे ज्यादा राज्यों में सरकार बनाने का रिकॉर्ड 2018 में BJP गठबंधन के पास था। मार्च 2018 में त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड में सरकार बनाकर NDA 21 राज्यों में पहुंच गई थी। इसी के साथ NDA ने इंदिरा के शासनकाल में कांग्रेस के रिकॉर्ड की बराबरी की। आजाद भारत में जब राज्यों के चुनाव हुए तो केंद्र के साथ-साथ 21 राज्यों में कांग्रेस पार्टी का शासन था।

हिमाचल-झारखंड में सरकार होती तो NDA पुराने रिकॉर्ड तक पहुंचती

भाजपा गठबंधन अगर हिमाचल प्रदेश और झारखंड में चुनाव जीत जाती तो रिकॉर्ड 21 राज्यों में उसकी सरकार होती। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड होता। 2024 में झारखंड विधानसभा की 81 सीटों में JMM गठबंधन को 56 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा 21 सीटों पर सिमट गई। वहीं 2022 में हिमाचल प्रदेश में 68 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस ने 40 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी।

अब राज्यवार जानिए कहां-कहां भाजपा सरकार….

उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल, UP, उत्तराखंड)

उत्तर भारत में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, UP और उत्तराखंड में BJP की सरकार है। वहीं हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस और पंजाब में AAP सरकार है।

दिल्ली: फाइनल रिजल्ट नहीं आया है।

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार है। योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं। वे 2017 में पहली बार और 2022 में दूसरी बार यूपी के सीएम बने थे। तब भाजपा ने 403 सीटों में से 222 पर जीत दर्ज की थी। यूपी में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होगा।

उत्तराखंड: उत्तराखंड में बीजेपी सरकार है। 2022 में हुए विधानसभा चुनावों में 70 सीटों में से भाजपा को 47 सीटों पर जीत मिली थी। पुष्कर सिंह धामी मौजूदा मुख्यमंत्री हैं। राज्य में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होगा।

हरियाणा: 2024 लोकसभा चुनाव के साथ हरियाणा में विधानसभा चुनाव हुए थे। 90 सीटों में से भाजपा ने 48 सीटों पर दर्ज की थी। हरियाणा में भाजपा की लगातार तीसरी बार सरकार है। 2024 में जीत से पहले भाजपा यहां 2014 और 2019 का चुनाव लगातार जीती। नायब सिंह सैनी हरियाणा के 19वें मुख्यमंत्री हैं।

पूर्वी भारत (बिहार, बंगाल, झारखंड, ओडिशा) बिहार में भाजपा गठबंधन की सरकार है, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, झारखंड में JMM की सरकार और ओडिशा में BJP की सरकार है। यहां कुल 722 विधायकों में से 152 BJP के हैं, यानी 21%।

बिहार: 243 सीटों वाले बिहार में NDA सरकार है। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं। वह लगातार 2015 से बिहार के मुख्यमंत्री हैं। हालांकि नीतीश पहले INDIA गठबंधन के साथ थे। बाद में वह एनडीए के साथ आ गए।

ओडिशा: 2024 में ओडिशा की 147 विधानसभा सीटों पर चुनाव हुए थे। भाजपा ने 78 सीटों पर जीत दर्ज की। ओडिशा के वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी हैं जिन्होंने 12 जून 2024 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

ओडिशा के वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी हैं जिन्होंने 12 जून 2024 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

ओडिशा के वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी हैं जिन्होंने 12 जून 2024 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

पश्चिम भारत (महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, गोवा) महाराष्ट्र में शिंदे की शिवसेना के साथ BJP सरकार है। गुजरात में BJP की पूर्ण बहुमत सरकार है और राजस्थान में भी भाजपा सरकार है। इन तीनों प्रदेशों के 710 विधायकों में से 429 BJP के हैं, यानी 60%।

राजस्थान: राजस्थान में 2023 में विधानसभा चुनाव हुए थे। भाजपा ने 200 सीटों में से 115 सीटों पर जीत दर्ज की थी। भजनलाल शर्मा राजस्थान के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। इन्होंने 15 दिसंबर 2023 को राजस्थान के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। आजादी के बाद से अबतक भारतीय जनता पार्टी के राजस्थान में छह बार मुख्यमंत्री रहे हैं।

गुजरात: गुजरात में पिछला विधानसभा चुनाव 2022 में हुआ था। 182 सीटों में से 156 पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। भूपेंद्र पटेल मौजूदा मुख्यमंत्री हैं। 1998 से गुजरात में लगातार बीजेपी की सरकार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद यहां लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में NDA सरकार है। 2024 में 288 सीटों पर हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा को 132 सीटों पर जीत मिली थी। एकनाथ शिंदे की अगुआई वाली शिवसेना को 57 सीटें मिलीं थीं। देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री हैं। शिंदे और अजित पवार को डिप्टी सीएम बनाया गया है।

गोवा: 40 विधानसभा सीटों वाले गोवा में प्रमोद सावंत NDA के मुख्यमंत्री हैं। 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को 26 सीटों पर जीत मिली थी। भाजपा के पास यहां एक-एक लोकसभा और राज्यसभा की सीटें हैं। प्रमोद सांवत लगातार दूसरी बार गोवा के मुख्मंत्री बने हैं।

यह तस्वीर 2024 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रचार की है। पीएम मोदी के साथ फडणवीस और एकनाथ शिंदे भी मौजूद हैं।

यह तस्वीर 2024 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रचार की है। पीएम मोदी के साथ फडणवीस और एकनाथ शिंदे भी मौजूद हैं।

मध्य भारत (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़) मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों में BJP सरकार है। यहां कुल 420 विधायक चुने जाते हैं, जिनमें 217 BJP के हैं, यानी 51%।

मध्य प्रदेश: मोहन यादव मध्य प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 13 दिसंबर 2023 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। 2023 विधानसभा चुनाव में भाजपा को 230 में से 163 सीटों पर जीत मिली थी।

छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के मौजूदा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हैं। उन्होंने 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 90 विधानसभा सीटों में 54 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस सिर्फ 35 सीट ही जीत पाई थी।

दक्षिण भारत (आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना) दक्षिण भारत में सिर्फ आंध्र प्रदेश में भाजपा गठबंधन सरकार है। वहीं तमिलनाडु में स्टालिन सरकार है। कर्नाटक और तेलंगाना में कांग्रेस सरकार है। वहीं केरल में CPI(M) की सरकार है।

आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश में NDA की सरकार है। चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 12 जून 2024 को चौथी बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। पिछले विधानसभा चुनाव में 175 सीटों पर टीडीपी ने 135 में जीत दर्ज की थी।

चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 12 जून 2024 को चौथी बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 12 जून 2024 को चौथी बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

पूर्वोत्तर राज्यों में BJP+ सरकार असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और त्रिपुरा में भाजपा की सरकार है। वहीं मेघालय, सिक्किम (राज्य में अलग और केंद्र में गठबंधन) और नगालैंड में एनडीए गठबंधन की सरकारें हैं।

अब अगली परीक्षा बिहार विधानसभा चुनाव

बिहार विधानसभा का कार्यकाल नवंबर 2025 तक है। उससे पहले वहां चुनाव होंगे। विधानसभा की 243 सीटों में आरजेडी के 79, बीजेपी के 78, जेडीयू के 45, कांग्रेस के 19, माले के 12, हम पार्टी के 4, सीपीआई के 2, सीपीएम के दो, एआईएमआईएम के एक और दो निर्दलीय विधायक हैं।

फ्लोर टेस्ट के समय कई विधायक इधर से उधर हुए हैं, लेकिन अभी तक सिर्फ जदयू की बीमा भारती की ही सदस्यता गई है। वह पूर्णिया से राजद के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने गई थीं, लेकिन निर्दलीय पप्पू यादव से हार गई हैं। इस लिहाज से जदयू विधायकों की संख्या 44 हो गई है। कांग्रेस के 2 विधायक मुरारी गौतम और सिद्धार्थ सौरव भाजपा खेमे में चले गए। राजद के 5 में से 2 विधायक भाजपा में और 3 जदयू खेमे में गए हैं।

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राज्यसभा चुनाव से पहले 26 नेता निर्विरोध निर्वाचित:इनमें शरद पवार, रामदास आठवले, विनोद तावड़े, अभिषेक मनु सिंघवी शामिल, 11 सीटों पर मुकाबला

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नई दिल्ली,एजेंसी। 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए हो रहे राज्यसभा चुनाव में 7 राज्यों के 26 उम्मीदवार बिना मुकाबले (निर्विरोध) के ही निर्वाचित हो गए हैं। इनमें एनसीपी (शरद) प्रमुख शरद पवार, कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

कई राज्यों में विपक्षी दलों ने उम्मीदवार नहीं उतारे, जिसके कारण ये नेता बिना मतदान के ही राज्यसभा पहुंच गए। हालांकि बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर मुकाबला होना तय है। इन राज्यों में अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में होने के कारण चुनाव कराया जाएगा।

  • शरद पवार (NCP-शरद)
  • रामदास आठवले (आरपीआई-आठवले)
  • विनोद तावड़े (बीजेपी)
  • रामराव वडुकुटे (बीजेपी)
  • माया इवनाते (बीजेपी)
  • ज्योति वाघमारे (शिवसेना -शिंदे)
  • पार्थ पवार (एनसीपी)

तमिलनाडु (6)

  • तिरुची शिवा (DMK)
  • जे कॉन्स्टेंटाइन रविंद्रन (DMK)
  • एम क्रिस्टोफर तिलक (कांग्रेस)
  • एल के सुदीश (DMDK)
  • एम थंबीदुरई (AIADMK)
  • अंबुमणि रामदास (PMK)

पश्चिम बंगाल (5)

  • राहुल सिन्हा (BJP)
  • बाबुल सुप्रियो (TMC)
  • पूर्व डीजीपी राजीव कुमार (TMC)
  • सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी (TMC)
  • कोएल मलिक (TMC)

असम (3)

  • जोगेन मोहन (BJP)
  • तेरोस गोवाला (BJP)
  • प्रमोद बोरो (UPPL)

तेलंगाना (2)

  • अभिषेक मनु सिंघवी (कांग्रेस)
  • वेम नरेंद्र रेड्डी (कांग्रेस)

छत्तीसगढ़ (2)

  • लक्ष्मी वर्मा (BJP)
  • फूलो देवी नेताम (कांग्रेस)

हिमाचल प्रदेश (1)

  • अनुराग शर्मा (कांग्रेस)

अब 11 सीटों के लिए 14 उम्मीदवार मैदान में

नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि के बाद बिहार की 5, ओडिशा की 4 और हरियाणा की 2 सीटों पर चुनाव 16 मार्च को होंगे।

इन चुनावों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

कुल 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए 40 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। अब 11 सीटों के लिए 14 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसके कारण बिहार, ओडिशा और हरियाणा में एक-एक सीट पर मुकाबला होगा।

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सुप्रीम कोर्ट बोला- UCC लागू करने का समय आ गया:संसद फैसला करे, शरियत कानून में सुधार की जल्दबाजी न करें, इससे नुकसान की संभावना

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नई दिल्ली,एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का समय आ गया है। इस पर फैसला करना कोर्ट के बजाय संसद का काम है।

कोर्ट शरियत कानून 1937 की कुछ धाराओं को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इन धाराओं से मुस्लिम महिलाओं के साथ भेदभाव का आरोप था।

CJI सूर्यकांत,जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा- शरियत कानून की धाराएं रद्द कर दी गईं तो मुस्लिम समुदाय में संपत्ति के बंटवारे को लेकर कोई स्पष्ट कानून नहीं बचेगा। इससे कानूनी खालीपन पैदा हो सकता है।

कोर्टरूम LIVE:

  • CJI: सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई बार सरकार से समान नागरिक संहिता लागू करने को कह चुका है। अलग-अलग समुदायों के लिए अलग नियम हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम सीधे किसी कानून को असंवैधानिक घोषित कर दें।
  • याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण: कोर्ट यह घोषित कर सकती है कि मुस्लिम महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर संपत्ति में अधिकार मिलना चाहिए। अगर शरियत कानून की कुछ धाराएं रद्द होती हैं, तो ऐसे मामलों में भारतीय उत्तराधिकार कानून लागू किया जा सकता है।
  • बेंच: इस मुद्दे का स्थायी समाधान समान नागरिक संहिता ही है। लेकिन इसे लागू करने का फैसला संसद को लेना होगा। यह नीतिगत मामला है, और कानून बनाना संसद का अधिकार है।

मुसलमानों के परिवारिक मामलों में लागू होता है शरियत कानून 1937

शरियत कानून 1937, जिसे मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) एप्लीकेशन एक्ट कहा जाता है, ब्रिटिश शासन के समय बनाया गया एक कानून है। इसका उद्देश्य यह तय करना था कि भारत में मुसलमानों के निजी और पारिवारिक मामलों में इस्लामी कानून यानी शरियत लागू होगा।

इससे पहले अलग-अलग क्षेत्रों में अलग परंपराएं चलती थीं, जिससे फैसलों में एकरूपता नहीं थी। इस कानून के लागू होने के बाद शादी (निकाह), तलाक, गुजारा भत्ता, विरासत यानी संपत्ति का बंटवारा, वक्फ और परिवार से जुड़े अन्य मामलों में शरियत के नियम मान्य माने गए।

इसका मतलब यह है कि अगर किसी मुस्लिम परिवार में संपत्ति या शादी से जुड़ा विवाद होता है, तो अदालत शरियत के आधार पर फैसला कर सकती है। हालांकि, यह कानून केवल निजी मामलों पर लागू होता है।

चोरी, हत्या या अन्य आपराधिक मामलों में देश का सामान्य कानून ही लागू होता है। समय-समय पर इस कानून को लेकर बहस होती रही है, खासकर महिलाओं के अधिकारों को लेकर, क्योंकि कुछ मामलों में महिलाओं को पुरुषों के बराबर हिस्सा नहीं मिलता।

भारत में केवल उत्तराखंड में UCC लागू

भारत में अभी केवल उत्तराखंड में UCC लागू है। वहां 28 जनवरी 2025 को UCC लागू किया गया। मुख्यमंत्री आवास में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इसका ऐलान किया था। यूसीसी लागू होने से राजय में 5 नियम सख्ती से लागू हुए-

  1. शादी चाहे किसी भी धर्म के रीति-रिवाज से हो, लेकिन उसका रजिस्ट्रेशन जरूरी है। 60 दिन में रजिस्ट्रेशन न होने पर 20 हजार रुपए तक जुर्माना लग सकता है।
  2. शादी के लिए लड़कों की उम्र 21 साल और लड़कियों के लिए 18 साल जरूरी है।
  3. शादी और तलाक के नियम सभी समुदायों पर एक जैसे लागू होंगे। यानी अलग-अलग धर्मों में अलग कानून नहीं रहेगा।
  4. लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है। इसमें पहचान छिपाने या धोखाधड़ी करके लिव-इन में रहने पर जेल भी हो सकती है।
  5. परिवार की संपत्ति पर बेटा-बेटी को समान अधिकार मिलेगा।
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सुप्रीम कोर्ट बोला-सरकार कोविड वैक्सीन से नुकसान का मुआवजा दे:एरर-फ्री पॉलिसी बनाए, साइड इफेक्ट्स की जांच के लिए एक्सपर्ट पैनल की जरूरत नहीं

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नई दिल्ली,एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को कोविड वैक्सीनेशन से जुड़ी याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकार वैक्सीनेशन के साइड इफेक्ट्स का मुआवजा दे। इसके लिए वह नो-फॉल्ट कंपनसेशन पॉलिसी बनाए।

नो-फॉल्ट कम्पनसेशन पॉलिसी का मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति को दवा या वैक्सीन से नुकसान हो जाए, तो उसे मुआवजा मिल सकता है, भले ही इसमें किसी की गलती साबित न हुई हो।

जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने यह भी कहा कि वैक्सीनेशन के साइड इफेक्ट्स की मॉनिटरिंग के लिए मौजूदा सिस्टम जारी रहेगा। इसके लिए अलग से एक्सपर्ट पैनल बनाने की जरूरत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने रचना गंगू और वेणुगोपालन गोविंदन की 2021 में दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनकी बेटियों की मौत कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के कारण हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 3 बड़ी बातें…

मुआवजा नीति का यह मतलब नहीं होगा कि सरकार या किसी दूसरी अथॉरिटी ने अपनी गलती मान ली है।

वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स से जुड़े आंकड़े समय-समय पर पब्लिक डोमेन में रखा जाएगा।

इस फैसले का मतलब यह नहीं होगा कि व्यक्ति दूसरे कानूनी उपायों का सहारा नहीं ले सकता।

नंवबर 2025 में फैसला सुरक्षित रखा था

पिछले साल 13 नवंबर को इन याचिकाओं पर लंबी बहस हुई थी। इसके बाद जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा था कि कोर्ट के साथ-साथ दूसरे मुद्दों पर भी फैसला करेगा। जस्टिस नाथ ने आदेश सुरक्षित रखते हुए कहा था-“हम तय करेंगे कि समिति का गठन किया जाना है या नहीं, क्या निर्देश जारी किए जाने हैं। हम हर चीज की बारीकी से जांच करेंगे।”

इससे पहले सरकार ने केरल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के खिलाफ याचिका लगाई थी, जिसमें सईदा के.ए.की याचिका पर मुआवजे की नीति तैयार करने का आदेश दिया गया था।

2022 में सरकार ने जवाबी हलफनामे में तर्क दिया था कि वह मुआवजे के लिए उत्तरदायी नहीं है क्योंकि वैक्सीन अपनी मर्जी से लगवाई जाती है। यह लोगों का जोखिम जानने के बावजूद लिया गया फैसला होता है।

मई 2024 में वैक्सीन से मौत के दो दावे सामने आए

परिवार का दावा- कोवीशील्ड लगवाने के 7 दिन बाद बेटी की मौत

करुण्या की जुलाई 2021 में मौत हो गई थी।

करुण्या की जुलाई 2021 में मौत हो गई थी।

वेणुगोपाल गोविंदन का कहना था कि उनकी बेटी करुण्या की जुलाई 2021 में कोवीशील्ड वैक्सीन लेने के महीने भर बाद मौत हो गई थी। सीरम इंस्टीट्यूट ने ब्रिटेन की फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका के बनाए फॉर्मूले पर कोवीशील्ड बनाई है और एस्ट्राजेनेका ने ब्रिटिश हाईकोर्ट में स्वीकार किया कि उनकी कोविड-19 वैक्सीन से खतरनाक साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। करुण्या की मौत मामले में परिवार की शिकायत पर सरकार ने राष्ट्रीय समिति का गठन किया था। बाद में समिति ने निष्कर्ष निकाला था कि करुण्या की मौत का कारण वैक्सीन है इसके पर्याप्त सबूत नहीं मिले थे।

दूसरा परिवार बोला- बेटी को कोविड डोज के बाद TTS हुआ, फिर मौत

8 साल की श्री ओमत्री की मई 2021 में मौत हो गई थी। परिवार के मुताबिक, रितिका ने मई में कोवीशील्ड की पहली डोज लगवाई थी। इसके 7 दिनों के अंदर रितिका को तेज बुखार और वॉमिट की शिकायत हुई। MRI में सामने आया कि रितिका को ब्रेन में ब्लड क्लोटिंग हुई और उसे ब्रेन हेमरेज हो गया था। दो हफ्ते बाद ही बेटी की मौत हो गई थी।

परिवार ने आगे बताया था कि हमें बेटी की मौत का सही कारण जानने के लिए दिसंबर 2021 में RTI के जरिए पता चला कि बेटी को थ्रोम्बोसिस विथ थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम हुआ था। जो भी वैक्सीन के सामना करना पड़ा था और ‘वैक्सीन उत्पाद संबंधी प्रतिक्रिया’ के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी।

PM ने कोवैक्सिन के 2 डोज लगवाए थे

पीएम ने 8 अप्रैल 2021 को कोवैक्सिन का दूसरा डोज लिया था।

पीएम ने 8 अप्रैल 2021 को कोवैक्सिन का दूसरा डोज लिया था।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 1 मार्च 2021 को कोवैक्सिन का पहला डोज लिया था।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 1 मार्च 2021 को कोवैक्सिन का पहला डोज लिया था।

जुलाई 2025: कोविड के बाद अचानक मौतों पर स्टडी: ICMR का दावा- वैक्सीन से इसका संबंध नहीं

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने अपनी स्टडी में बताया कि देश में हार्ट अटैक से होने वाली अचानक मौतों का कोविड वैक्सीन से कोई सीधा संबंध नहीं है।

यह स्टडी 18 से 45 साल के लोगों की अचानक मौत पर आधारित है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्टडी में कहा गया है कि भारत की कोविड वैक्सीन सेफ और इफेक्टिव है। इससे होने वाले गंभीर साइडइफेक्ट के मामले रेयर हैं।

स्टडी में बताया गया है कि अचानक हुई मौतों की अन्य वजहें हो सकती हैं। इनमें जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल, पहले से मौजूद बीमारी और कोविड के बाद के कॉम्प्लिकेशन शामिल हैं।

भारत में दो कोविड वैक्सीन विकसित हुई थीं। भारत बायोटेक ने ICMR के सहयोग से कोवैक्सिन का निर्माण किया था। वहीं, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूले से कोवीशील्ड बनाई थी।

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