विदेश
ईरान पर हमले के लिए अमेरिका ने बनाया बंकर-बस्टर बम:15 साल में तैयार; चट्टान के 200 फीट नीचे ईरान का एटमी प्रोग्राम तबाह किया
तेहरान,एजेंसी। अमेरिका ने पिछले हफ्ते 21 जून को ईरान की फोर्डो परमाणु साइट पर हमला किया था। इस हमले में अमेरिका ने पहली बार 30,000 पाउंड वजनी GBU-57 सीरीज के ‘बंकर बस्टर’ बमों का इस्तेमाल किया था। ये बम खास तौर पर गहरे बंकरों और जमीन के नीचे बनी साइट्स को नष्ट करने के लिए बनाए गए हैं।
अमेरिकी सेना के चेयरमैन लेफ्टिनेंट जनरल डैन केन ने गुरुवार को बताया कि इन बमों को बनाने में 15 साल लगे। 2009 में जब अमेरिका को ईरान की फोर्डो साइट के बारे में पता चला, तब उनके पास इसे तबाह करने के लिए कोई सही हथियार नहीं था। इसके बाद अमेरिका ने इन शक्तिशाली बमों को डेवलप किया।
अमेरिका ने ईरान के 3 परमाणु ठिकानों पर 7 B-2 बॉम्बर से हमला किया था। B-2 बॉम्बर ने फोर्डो और नतांज साइट पर एक दर्जन से ज्यादा GBU-57 बंकर बस्टर बम गिराए।
1000 फीट प्रति सेकेंड की रफ्तार से हमला किया
ईरान पर अमेरिकी हमले का नाम ऑपरेशन मिडनाइट हैमर था। इस हमले में फोर्डो साइट के दो मुख्य वेंटिलेशन शाफ्ट्स को निशाना बनाया गया। ईरान ने इन शाफ्ट्स को कंक्रीट से बंद करने की कोशिश की थी, लेकिन अमेरिकी सेना ने पहले से इसकी तैयारी कर ली थी।
पहला बम कंक्रीट को तोड़ने के लिए इस्तेमाल हुआ, जिससे शाफ्ट खुल गया। फिर चार बमों को मेन शाफ्ट पर गिराया गया, जो 1,000 फीट प्रति सेकेंड की रफ्तार से साइट के अंदर गिरे और जोरदार विस्फोट किया।
जनरल केन ने बताया कि इस ऑपरेशन में 15 साल की मेहनत शामिल थी। पायलटों, हथियार बनाने वाली टीम और लोड क्रू ने मिलकर इस हमले को सफल बनाया।
GBU-57 बंकर बम – दुनिया का सबसे शक्तिशाली हथियार
GBU-57 को मासिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (MOP) भी कहते हैं, एक ऐसा बम है जो जमीन के 60 मीटर (200 फीट) नीचे तक घुसकर विस्फोट कर सकता है। यह बम खास तौर पर गहरे बंकरों और सुरक्षित ठिकानों को तबाह करने के लिए बनाया गया है।

वॉशिंगटन के सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के मासाओ डाहलग्रेन ने बताया कि इस बम में मोटी स्टील की परत होती है, जो चट्टानों और कंक्रीट को तोड़कर अंदर घुस सकती है। इसमें एक खास फ्यूज भी है, जो भारी दबाव और झटके सहने के बाद भी सही समय पर विस्फोट करता है।
B-2 विमानों से ही गिराया जा सकता है GBU-57 बम
यह बम केवल B-2 स्पिरिट स्टेल्थ बॉम्बर विमान से ही गिराया जा सकता है। B-2 एक ऐसा विमान है जो दुश्मन की मजबूत डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकता है और 9,600 किलोमीटर तक बिना रुके उड़ सकता है।
21 जून को ईरान की परमाणु साइट्स पर हमले में अमेरिका ने 7 B-2 विमानों का इस्तेमाल किया। यह अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा B-2 हमला था और दूसरा सबसे लंबा B-2 मिशन।
जनरल डैन केन ने बताया कि कुछ B-2 विमानों को प्रशांत महासागर की ओर भेजा गया ताकि दुश्मन का ध्यान भटकाया जाए, जबकि असली हमला करने वाले विमान दूसरी दिशा में गए। यह एक सीक्रेट प्लानिंग थी, जिसके बारे में सिर्फ कुछ चुनिंदा लोग जानते थे।
विदेश
जेलेंस्की का बड़ा ऐलान: भारत देगा यूक्रेन का साथ, डिफेंस डील फाइनल स्टेज में!
कीव,एजेंसी। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि भारत (India) के साथ सुरक्षा सहयोग को लेकर एक समझौता तय हो चुका है। इस समझौते से जुड़े जरूरी दस्तावेज अभी तैयार किए जा रहे हैं। जेलेंस्की के अनुसार, यूक्रेन अपनी सुरक्षा को मजबूत करने पर लगातार ध्यान दे रहा है। उन्होंने कहा कि एयर डिफेंस, सेना को समर्थन और देश की रक्षा क्षमता बढ़ाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है, और इसी दिशा में भारत के साथ यह सहयोग अहम माना जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि यूक्रेन के रक्षा मंत्री Rustem Umierov अन्य देशों के साथ भी ऐसे ही सुरक्षा समझौतों पर काम कर रहे हैं, ताकि यूक्रेन को ज्यादा सैन्य और रणनीतिक मदद मिल सके। साथ ही, यूक्रेन अपने यूरोपीय सहयोगियों के साथ भी बातचीत कर रहा है, ताकि पहले से स्वीकृत सहायता पैकेज को जल्द लागू किया जा सके, जो अभी तक पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया है। कुल मिलाकर, भारत और यूक्रेन के बीच यह समझौता दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करेगा और यूक्रेन की सुरक्षा क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है।
विदेश
मिडल ईस्ट जंग में ट्रंप को सबसे बड़ा झटका, UAE ने दिखा दिया ठेंगा ! बोला-‘हमें अमेरिका की जरूरत नहीं’
दुबई,एजेंसी। मिडिल ईस्ट जंग के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और संयुक्त राज्य अमेरिका(USA) के बीच संबंधों को दरार बहुत गहरी हो गई है। यह खुलासा तब प्रमुख एमिराती विश्लेषक अब्दुल खालिक अब्दुल्ला के बयान से हुआ है। उन्होंने कहा कि UAE को अब अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार, देश में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने अब सुरक्षा के बजाय एक “बोझ” बन सकते हैं।

हालांकि यह उनका व्यक्तिगत मत है और UAE सरकार की आधिकारिक नीति नहीं मानी जा रही है। विश्लेषक का तर्क है कि हाल के हमलों और खतरों के बीच UAE ने अपनी रक्षा क्षमता मजबूत की है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की ओर से आए ड्रोन और मिसाइल खतरों को रोककर UAE ने दिखाया है कि वह अपनी सुरक्षा खुद संभाल सकता है। इसी कारण कुछ लोग अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पर पुनर्विचार की बात कर रहे हैं। आर्थिक मोर्चे पर भी एक बड़ा मुद्दा सामने आया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर युद्ध या संकट की वजह से डॉलर की उपलब्धता प्रभावित होती है, तो UAE तेल व्यापार के लिए अन्य विकल्पों पर विचार कर सकता है। इसमें चीन की मुद्रा युआन का नाम सामने आया है। दशकों से खाड़ी देशों और अमेरिका के बीच एक समझ बनी हुई थी, जिसमें अमेरिका सुरक्षा देता था और बदले में तेल का व्यापार डॉलर में होता था। अब अगर इस व्यवस्था में बदलाव आता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति दोनों पर पड़ सकता है। इस पूरे घटनाक्रम में चीन का नाम भी सामने आ रहा है। अगर भविष्य में युआन में तेल व्यापार बढ़ता है, तो इससे चीन की वैश्विक भूमिका और मजबूत हो सकती है।
विदेश
होर्मुज में फायरिंग पर भड़के ट्रंपः बोले- “No More Mr Nice Guy, अब ईरान ने बात न मानी तो…”
वाशिंगठन, एजेंसी। जलमार्ग होर्मुज में हुई कथित गोलीबारी ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान (Iran) ने इस क्षेत्र में फायरिंग की, जिसमें एक फ्रांसीसी जहाज और एक ब्रिटेन का मालवाहक जहाज निशाने पर आए। इस घटना को युद्धविराम समझौते का उल्लंघन माना जा रहा है।इस मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अमेरिका का प्रस्तावित समझौता नहीं माना, तो अमेरिका उसके पावर प्लांट और पुलों को निशाना बना सकता है। ट्रंप ने साफ कहा कि अब अमेरिका सख्ती से कार्रवाई करेगा और पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने ईरान को “आखिरी मौका” देते हुए कहा है कि वह समझौता स्वीकार करे, वरना कड़ी कार्रवाई होगी। अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर पाकिस्तान जाकर वार्ता करेंगे।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर यहां तनाव बढ़ता है या रास्ता बंद होता है, तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। ईरान को भी इससे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी बीच अमेरिका ने अपनी टीम को Islamabad भेजने का फैसला किया है, जहां अगले दौर की बातचीत होगी। ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका के विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner सोमवार को Islamabad पहुंचेंगे। वहां वे ईरान के साथ युद्धविराम (ceasefire) को लेकर अहम बातचीत करेंगे। ट्रंप के अनुसार, यह कूटनीति का “आखिरी प्रयास” है।उन्होंने कहा कि इस डील के अधिकांश बिंदु पहले ही तय हो चुके हैं और ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने होंगे। अब केवल औपचारिक सहमति बाकी है।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलना होगा, जो वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पिछले हफ्ते भी J. D. Vance के नेतृत्व में इस्लामाबाद में बातचीत हुई थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। अब एक बार फिर से कोशिश की जा रही है कि 22 अप्रैल को खत्म हो रहे सीज़फायर से पहले कोई समझौता हो जाए। हालांकि, अभी तक ईरान की ओर से इन नई वार्ताओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। अगर यह बातचीत भी असफल रही, तो अमेरिका और ईरान के बीच बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
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